प्यार, सेक्स और धोखा

2-2-1.jpeg

मनोज कौशिक

जयपुर: जमाना बहुत खराब है जरा संभल कर रहे नहीं तो जो आपने वर्षों से इज्जत बनाई है मिट्टी में मिलते देर नहीं लगेगी।

राजस्थान के चुरू जिले में बसा छोटा-सा कस्बा बीदासर। यहाँ की गलियाँ शांत हैं, लोग सीधे-सादे। मुख्य बाजार में एक पुरानी मोबाइल की दुकान थी, जिसके मालिक थे 55 साल के रामस्वरूप जी। उम्र ढल चुकी थी, बाल सफेद हो चले थे, लेकिन दुकान का काम अभी भी ईमानदारी से चलाते थे। बीवी-बच्चे घर पर, दिन भर दुकान, शाम को घर। जिंदगी सरल थी, बिना किसी उलझन के।

एक दोपहर दुकान पर एक 22 साल की लड़की आई। नाम था रेशमा। चेहरा गोरा, आँखें बड़ी-बड़ी, बातें मीठी। बोली, “अंकल, नया फोन देखना है।” रामस्वरूप ने कई फोन दिखाए। लड़की हर फोन उठाती, मुस्कुराती, नजरें मिलातीं। बातों-बातों में हँसी-मजाक होने लगा। जाने से पहले रेशमा ने अपना नंबर लिख कर दे दिया और बोली, “अंकल, कोई अच्छा ऑफर हो तो बता देना।”

रामस्वरूप को लगा, शायद सच में फोन खरीदना चाहती होगी। शाम को उन्होंने मैसेज किया। जवाब आया। फिर कॉल हुई। बातें धीरे-धीरे प्यार भरी होने लगीं। रेशमा कहती, “आप बहुत अच्छे लगते हो… कोई मेरी इतनी केयर नहीं करता।” रामस्वरूप, जो सालों से अकेलापन महसूस कर रहे थे, बहक गए। दो दिन में ही दिल हार बैठे।
तीसरे दिन रेशमा का मैसेज आया, “मिलोगे ना? बहुत याद आ रही है।” जगह बताई एक छोटे से होटल की। रामस्वरूप ने सोचा भी नहीं। दुकान बंद की, ऑटो लिया और पहुँच गए। कमरे में रेशमा पहले से मौजूद थी। गले लगी,  और फिर जो हुआ, वो रामस्वरूप की जिंदगी का सबसे बड़ा भूल था।

शाम को जब दुकान लौटे तो फोन पर व्हाट्सएप खोला। एक वीडियो आया। पूरा होटल वाला दृश्य। उसमें वो खुद थे। साथ में रेशमा का मैसेज था:
“5 लाख रुपये। सुबह तक। नहीं तो ये वीडियो पूरे बीदासर में वायरल। और फर्जी रेप का केस भी ठोंक दूँगी। पुलिस तेरे घर आएगी।”

रामस्वरूप के पैरों तले जमीन खिसक गई। हाथ काँपने लगे। रात भर नींद नहीं आई। सुबह होते-होते थाने पहुँच गए। बीदासर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह के सामने सारी बात रोते हुए बता दी। वीडियो दिखाया। इंस्पेक्टर ने शांत स्वर में कहा, “चिंता मत करो बाबूजी। अब हमारा नंबर है।”

पुलिस ने जाल बिछाया। रामस्वरूप को कहा गया कि लड़की को मैसेज करो, “पैसे तैयार हैं, 2 लाख अभी दे रहा हूँ, बाकी बाद में।” जगह तय हुई। सुबह 6 बजे। एक सुनसान जगह पर।

रेशमा अपने बाप के साथ आई। जैसे ही 2 लाख का लिफाफा हाथ में लिया, पुलिस ने घेर लिया। दोनों रंगे हाथ पकड़े गए। रेशमा चिल्लाई, “ये तो झूठ है!” लेकिन मोबाइल में चैट, वीडियो, सब कुछ था। उसका बाप भी साथ में था। प्लान दोनों का था।

अब रेशमा और उसके पिता ब्लैकमेलिंग के केस में जेल की हवा खा रहे हैं। रामस्वरूप की इज्जत बच गई, लेकिन दिल पर एक गहरा घाव लग गया।

कहते हैं ना,”जो दिखता है, वो हमेशा सच नहीं होता।” और प्रेम कभी भी अंधा नहीं होता, बस कभी-कभी हम खुद आँखें बंद कर लेते हैं।

बीदासर की वो दुकान आज भी खुली है।
 
लेकिन अब रामस्वरूप किसी अनजान नंबर पर कॉल करने से पहले सौ बार सोचते हैं। उम्र कोई सुरक्षा-कवच नहीं है। 55 साल का आदमी भी 22 साल की लड़की के जाल में फँस सकता है। अकेलापन और भावनात्मक खालीपन सबसे बड़ा कमजोर कड़ी होता है।

प्रेम और वासना में फर्क समझना जरूरी है । सच का प्रेम कभी इतनी जल्दी, इतनी सस्ती जगह और इतने गंदे तरीके से नहीं होता। जो दो दिन में बिस्तर तक पहुँच जाए, वो प्रेम नहीं, जाल ही होता है।
अनजान व्यक्ति से शारीरिक संबंध बनाने से पहले सौ बार सोचें। आज के जमाने में होटल के कमरे में छिपा कैमरा, मोबाइल की रिकॉर्डिंग और ब्लैकमेल आम हो गया है। एक पल का सुख जिंदगी भर का कलंक बन जाता है।

गलती हो जाए तो तुरंत पुलिस के पास जाएँ। शर्म और डर के कारण चुप रहने से ठग और मजबूत हो जाते हैं। रामस्वरूप ने हिम्मत दिखाई, इसलिए उनकी इज्जत और आजादी दोनों बच गईं।
 
ये कोई कहानी नही सत्य घटना है ,घटनाक्रम के मुख्य पात्रों के नाम बदले गये हैं।

स्वयंसेवक निष्काम भाव से समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देते रहे हैं – दत्तात्रेय होसबाले जी

2-3.jpeg

जम्मू। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में “प्रमुख जन गोष्ठी” का आयोजन कन्वेंशन हॉल, कैनाल रोड, जम्मू में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय था “संघ की 100 वर्ष की यात्रा और भविष्य की दिशा”, जिसमें संघ की अब तक की यात्रा, समाज में उसकी भूमिका और आने वाले समय की दिशा पर विस्तार से विचार रखा गया।

कार्यक्रम में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्तन जी मुख्य अतिथि रहे। मंच पर प्रांत संघचालक डॉ. गौतम मैंगी जी तथा विभाग संघचालक सुरिंदर मोहन जी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्वयंसेवक, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोग तथा समाज के विविध वर्गों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत आमंत्रित अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों ने भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
मंचासीन अतिथियों का औपचारिक परिचय एवं स्वागत किया गया। आयोजकों ने संक्षेप में बताया कि आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रमुखजन गोष्ठी संघ की सामाजिक व राष्ट्रीय यात्रा को समझने और भविष्य की दिशा पर विमर्श करने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।

अपने उद्बोधन ने ताशी रबस्तन जी ने समाज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रचनात्मक भूमिका पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने “संघ की 100 वर्ष की यात्रा और भविष्य की दिशा” पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने डॉ. के.बी. हेडगेवार जी द्वारा संघ की स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए, संघ की क्रमिक विकास यात्रा का वर्णन किया।

सरकार्यवाह जी ने कहा कि गत सौ वर्षों में संघ ने दैनिक शाखाओं, सेवा कार्यों, शैक्षणिक एवं सामाजिक पहल के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचने का प्रयास किया है। संघ की मूल दृष्टि हमेशा से एक मजबूत, आत्मविश्वासी, सांस्कृतिक रूप से जागरूक और संगठित भारत के निर्माण की रही है। स्वयंसेवक प्रायः मौन और निष्काम भाव से समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देते रहे हैं। भविष्य की दिशा पर उन्होंने अधिक से अधिक युवा वर्ग को सकारात्मक सामाजिक कार्यों से जोड़ने, सामाजिक समरसता तथा सभी प्रकार के भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को एकसूत्र में पिरोने, पर्यावरण संरक्षण, परिवार संस्था की मजबूती और समुदाय आधारित जीवन मूल्यों, तथा प्रत्येक नागरिक के राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष कोई अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक लंबे सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसके बाद समाज और राष्ट्र के लिए और अधिक समर्पण के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

अंत में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के साथ प्रमुखजन गोष्ठी का समापन हुआ।

यह प्रमुखजन गोष्ठी प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने संघ की सौ वर्षीय यात्रा को समझते हुए, समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के प्रति नवीन संकल्प व्यक्त किया।

विधान सभा चुनाव में बिहार को कृत्रिम बुद्धिमता से समझने की हुई भारी भूल

Bihar-700x525.png.webp

विश्व गौरव

नोएडा। बिहार चुनाव के करीब 3 महीने पहले देश के एक बड़े मीडिया संस्थान में ‘बिहार हेड’ के लिए इंटरव्यू चल रहा था। फाइनल राउंड से पहले संस्थान के समूह संपादक, डिजिटल हेड और उस अखबार के संपादक के साथ बातचीत होनी थी। HR ने कहा कि बिहार के बारे में ठीक से पढ़ लीजिएगा। मैंने कहा कि बिहार में कभी काम नहीं किया है लेकिन फील्ड में रहते हुए, UP-दिल्ली-पश्चिम बंगाल में चुनावों को कवर करने के साथ कोविड की ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान बहुत से बिहारियों से मिलना हुआ, उनसे बातचीत के आधार पर कह सकता हूं कि बिहार को पढ़कर नहीं समझा जा सकता। बिहारियों के लिए बिहार एक इमोशन है, उसे उनके स्तर पर जाकर ही महसूस किया जा सकता है, इसलिए जितना महसूस किया है, उसी आधार पर बात करूंगा।

खैर, इंटरव्यू हुआ। इंटरव्यू में मुझसे पूछा गया कि बिहार में अलग तरह का चुनाव होता है, वहां बाकी राज्यों की तरह चुनाव नहीं होता, आपने बिहार में कभी काम नहीं किया, मैनेज कर पाएंगे? क्या सोचते हैं बिहार के बारे में?
मैंने कहा- बिहार का चुनाव अब तक कैसा भी हुआ हो, लेकिन इस बार बिहार में ऐतिहासिक चुनाव होगा। लोग जाति से पहले भी काफी कुछ सोचेंगे।

संपादक महोदय ने बड़े हिकारत भरे भाव के साथ कहा- बिहार में जाति चलती है।
मैंने कहा- जाति बिहार में एक फैक्टर हो सकता है, लेकिन वह आगामी चुनाव में एकमात्र फैक्टर नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा- आप प्रशांत किशोर की भाषा बोल रहे हैं, आपको बिहार की बिलकुल समझ नहीं है। आपको लगता है कि PK सरकार बना लेंगे?

मैंने कहा- PK अपनी अनार्जित वैल्यू खत्म कर रहे हैं। सोशल मीडिया मैनेजमेंट से सरकारें नहीं बनतीं, खासकर सोशल मीडिया के दौर में। अरविंद केजरीवाल को लोग देख चुके हैं, असल में बिहार वाले दिल्ली में रहकर अरविंद को झेल चुके हैं। अब इतनी जल्दी दूसरा कोई वादों के भरोसे नहीं जीत सकता। अरविंद ने लोगों के, युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ किया था, उससे पूरे देश में युवा अब नए वादों पर कम से कम 50 साल भरोसा नहीं करेंगे। रही बात जातियों की तो वह इसलिए अब कोई बड़ा फैक्टर नहीं दिख रहा है, क्योंकि बिहार के लोग जब दूसरे राज्यों में जाकर नौकरी करते हैं तो उन्हें अपनी जाति विशेष का कोई लाभ नहीं मिलता। गांव में रहने वाले उनके बूढ़े माता-पिता और छोटे बच्चों को लाभ मिलता है सरकारी योजनाओं का। सोशल मीडिया के इस युग में अगर प्रदेश सरकार या केन्द्र सरकार उनके बुरे वक्त में कुछ भी सहयोग कर रही है तो वह सहयोग उनके लिए संजीवनी का काम करता है। कोई माने या ना माने, लेकिन छोटे स्तर का सरकारी काम लोगों की सोच बदल सकता है और बदल रहा है।

ये सारी बातें मैंने बिहार के लोगों से बातचीत के आधार पर मिले अनुभव को लेकर कही थीं। कोविड में पैदल सड़क के रास्ते घर जाते बिहारियों ने जब UP में प्रवेश किया तो जिस तरह से पुलिस से लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं ने संयोजित तरीके से उनकी मदद की, उसने NDA या फिर यूं कहें कि BJP सरकार की छवि में काफी सुधार किया। इसका श्रेय सीएम योगी के भाषणों से अधिक उनके काम को दिया जाना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच मूल बात यह है कि मठाधीशी कमरों में बैठकर हो सकती है, लेकिन चुनाव के वक्त जनता का ‘मूड’ उनके लिए किए गए काम से बनता है।

जिस संस्थान में नौकरी के लिए इंटरव्यू हो रहा था, उसके ‘बड़े’ ऑफर को ठुकराकर ‘कुछ और’ करने का निर्णय दो महीने पहले ले लिया था। 14 सालों में डिजिटल वाली लाइन में विशुद्ध पत्रकारिता करने का प्रयास किया। उस वक्त में जब डिजिटल की शुरुआत थी, तब भी ‘बड़े’ वालों को समझाया कि डिजिटल दुनिया पूरा सच नहीं है, आपको समझना पड़ेगा कि लोगों का मन आप ‘क्लिक्स’ और ‘व्यूज’ से नहीं समझ सकते। और आज भी कह रहा हूं, मन तो मन ही है और उसे ‘कृत्रिम बौद्धिकता’ से मापने की कोशिश करोगे तो मात खाओगे।

मीडिया स्कैन के इस पहल में बन सकते हैं आप भी भागीदार

2-1-1.jpeg

#Improve_The_Environment

दिल्ली-एनसीआर इस समय गंभीर वायु प्रदूषण के संकट से जूझ रहा है। सांस लेना मुश्किल हो रहा है, बच्चे-बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। क्या हम, एक साधारण नागरिक के रूप में, इस हवा को थोड़ा साफ करने में अपनी छोटी-सी भूमिका निभा सकते हैं? जवाब है—हाँ, बिल्कुल!हम एक खुला नागरिक विमर्श आयोजित कर रहे हैं, जिसमें हम सब मिलकर समझेंगे कि व्यक्तिगत, सामुदायिक और नीतिगत स्तर पर क्या-क्या कदम तुरंत उठाए जा सकते हैं।

संभावित विषय:

01) पराली जलाने का स्थानीय समाधान और किसानों के साथ सहयोग
02) वाहन प्रदूषण कम करने के व्यावहारिक उपाय (कार पूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहन, पुरानी गाड़ियों का फेज-आउट)
03) निर्माण धूल और उद्योगों पर नियंत्रण के लिए नागरिक निगरानी
04) हरियाली बढ़ाने के लिए मोहल्ला-स्तरीय वृक्षारोपण और ग्रीन कवर
05) बच्चों के लिए स्कूलों में “क्लीन एयर एजुकेशन” और मॉनिटरिंग
06) ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) को और प्रभावी बनाने के सुझाव

हम इस विमर्श में विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, एनजीओ और सबसे बढ़कर—आप जैसे जागरूक नागरिकों को आमंत्रित करना चाहते हैं।

यदि आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और हवा को साफ करने के इस संकल्प में शामिल होना चाहते हैं—चाहे चर्चा में भाग लेकर, सुझाव देकर, आयोजन में मदद करके या किसी भी रूप में—तो कृपया इस नंबर (WhatsApp) पर संपर्क करें:

+91-7011939224

आइए, मिलकर सांस लेने लायक दिल्ली बनाएं।
आपकी एक छोटी भागीदारी भी बड़ा बदलाव ला सकती है।

#campaign

scroll to top