गाजियाबाद में संघ शिक्षा वर्ग का भव्य ‘प्रकट समारोह’ संपन्न

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15 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का सांगठनिक शौर्य, योग और ओजस्वी घोष वादन के साथ हुआ भव्य समापन।

• शारीरिक व मानसिक विकास के साथ शिक्षार्थियों ने आत्मसात किया ‘राष्ट्र प्रथम’ का भाव और भारत की गौरव गाथाएं।

• जाति-भेद भूलकर समरस समाज का निर्माण और राष्ट्रीय स्वाभिमान ही समर्थ भारत का आधार : क्षेत्र प्रचारक श्रीमान महेन्द्र जी।

• अनुशासित नागरिक ही देश की संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा की असली रीढ़ : एयर वाइस मार्शल अनिल तिवारी जी।

गाजियाबाद: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मेरठ प्रांत के तत्वावधान में स्थानीय दुर्गावती हेमराज सरस्वती विद्या मन्दिर में आयोजित 15 दिवसीय आवासीय संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) का आज वीवीआईपी नेहरू स्टेडियम, नेहरू नगर, गाजियाबाद में भव्य एवं ऐतिहासिक प्रकट समारोह के साथ सफलतापूर्वक समापन हो गया। गत 6 जून 2026 (ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी) से प्रारंभ हुए इस गहन प्रशिक्षण शिविर में मेरठ प्रांत के 28 संगठनात्मक क्षेत्रों से आए 518 शिक्षार्थियों ने 15 दिनों तक साधनारत रहकर कड़े अनुशासन, समयबद्धता और देश सेवा का मूलमंत्र सीखा। आज के इस प्रकट समारोह में हजारों की संख्या में पहुंचे आम नागरिकों, प्रबुद्ध जनों और मातृशक्ति के गगनभेदी जयकारों से पूरा स्टेडियम राष्ट्रभक्ति के अनूठे रंग में सराबोर हो उठा।

*संस्कार की पाठशाला : सर्वांगीण विकास का केंद्र*

वर्ग के अधिकारियों ने बताया कि यह 15 दिवसीय वर्ग वास्तव में ‘संस्कार की पाठशाला’ है, जहाँ शिक्षार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस शिविर में ‘स्व’ (स्वयं) से प्रारंभ होकर अनुशासन, कड़े शारीरिक अभ्यास, प्राणायाम और मानसिक दृढ़ता का पाठ पढ़ाया गया। वर्ग का मूल उद्देश्य केवल शारीरिक रूप से सुदृढ़ करना नहीं, बल्कि बौद्धिक सत्रों के माध्यम से स्वयंसेवकों के अंतर्मन में राष्ट्र प्रथम के भाव को स्थायी रूप से जाग्रत करना है। यहाँ देश के अलग-अलग कोनों से आए शिक्षार्थियों ने जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्र के भेद को भुलाकर सामाजिक समरसता और एकात्मता के सूत्र को आत्मसात किया।

*सांस्कृतिक व ऐतिहासिक गौरव गाथाओं से हुआ वैचारिक पोषण*

इस प्रशिक्षण वर्ग की एक मुख्य विशेषता स्वयंसेवकों का बौद्धिक और वैचारिक पोषण रही। 15 दिनों के दौरान शिक्षार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और ऐतिहासिक गौरव गाथाओं से अवगत कराया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह और महान स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन संघर्षों के माध्यम से स्वयंसेवकों को देश के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराया गया, ताकि वे वर्तमान की चुनौतियों का सामना करते हुए राष्ट्र के पुनरुत्थान में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।

शारीरिक कौशल और ओजस्वी घोष का अद्भुत सार्वजनिक प्रदर्शन*

समापन समारोह के अवसर पर मैदान में उतरे सैकड़ों स्वयंसेवकों ने जब कदम-से-कदम मिलाकर पूर्ण समता (मार्च पास्ट) का प्रदर्शन किया, तो दर्शकों ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया। शिक्षार्थियों ने सामूहिक योग, प्राणायाम, निहत्थे आत्मरक्षा की प्राचीन भारतीय पद्धति नियुद्ध और दण्ड (लाठी) संचालन के विभिन्न कौशलों तथा विस्मयकारी व्यूह रचनाओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 107 शिक्षार्थियों के प्रांत घोष वर्ग (बैण्ड) का सामूहिक वादन रहा, जिसकी देशप्रेम की ओजस्वी सुर-लहरियों ने पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति की ऊर्जा का संचार कर दिया।

*मुख्य वक्ता का पाथेय (मार्गदर्शन)*

समारोह के मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक श्रीमान महेन्द्र जी ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा :

“संघ अपने शताब्दी वर्ष की यात्रा पूर्ण कर देश को परम वैभव पर ले जाने की साधना में निरंतर संलग्न है। संघ शिक्षा वर्ग का मूल उद्देश्य समाज के भीतर सोई हुई शक्ति को जगाकर राष्ट्र निर्माण के लिए चरित्रवान कार्यकर्ता तैयार करना है। जब समाज जाति, भाषा और संकीर्ण बंधनों से मुक्त होकर संगठित होगा, तभी भारत दुनिया का नेतृत्व कर सकेगा। यहाँ सीखे गए अनुशासन, सांस्कृतिक गौरव और ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव को प्रत्येक स्वयंसेवक अपने दैनिक जीवन में उतारे और समाज परिवर्तन का माध्यम बने।”
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म और संस्कृति चिर पुरातन नित्य नूतन है। उच्चतम न्यायालय, भारतीय संसद, ओर सभी सेनाओं के ध्येय वाक्य संस्कृत में ही है और कुछ लोग हिंदू धर्म की बात करने पर सांप्रदायिकता की बात उठाने लगते हैं जो सर्वथा अनुचित है। संघ भी 100 वर्ष पूर्ण करने के बाद भी नित्य नूतन बना हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि जब भी विश्व को योग, शांति और सुशासन के मार्ग की आवश्यकता होती है उसे भागवत गीता की ओर देखना पड़ता है। छुआछूत, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण, स्व व नागरिक कर्तव्यों की बात करते हुए शताब्दी वर्ष में संघ द्वारा चलाये जा रहे पंच परिवर्तन अभियान को समाज से अपनाने का भी उन्होंने आग्रह किया।

*मुख्य अतिथि (अध्यक्ष) का उद्बोधन*

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल अनिल तिवारी जी (विशिष्ट सेवा मेडल, वायु सेवा मेडल) ने स्वयंसेवकों के अद्भुत अनुशासन की भूरि-भूरि सराहना की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा:

“एक सैनिक के रूप में मैंने सीमाओं पर कड़ा अनुशासन देखा है, लेकिन आज आम नागरिकों के बीच युवाओं के इस सांगठनिक अनुशासन और दृढ़ संकल्प को देखकर मेरा विश्वास और सुदृढ़ हो गया है। किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सेना के बल पर नहीं, बल्कि देश के भीतर रहने वाले नागरिकों के अनुशासित चरित्र और सजगता पर निर्भर करती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिस प्रकार युवाओं को संस्कारवान, मानसिक रूप से सुदृढ़ और देशप्रेमी बना रहा है, वह सराहनीय है और देश की वास्तविक सुरक्षा की रीढ़ है।”

*28 संगठनात्मक क्षेत्रों का अनूठा प्रतिनिधित्व और सांख्यिकीय झलक*

इस ऐतिहासिक वर्ग में मेरठ पूर्व, मेरठ पश्चिम, हापुड़, सरधना, मवाना, लक्ष्मीनगर, शामली, बागपत, सहारनपुर, बेहट, देवबंद, बिजनौर, धामपुर, रामपुर, मुरादाबाद, ठाकुरद्वारा, संभल, अमरोहा, बबराला, बुलंदशहर, खुर्जा, अनूपशहर, गौतमबुद्धनगर, नोएडा, गाजियाबाद महानगर, वैशाली, हरनंदी तथा गाजियाबाद जिला सहित कुल 28 सांगठनिक क्षेत्रों के 518 संघ शिक्षा वर्ग शिक्षार्थियों ने सहभागिता की। इस विशाल शिविर के सुचारू संचालन, आवास और भोजन व्यवस्था में 200 से अधिक कार्यकर्ता दिन-रात जुटे रहे।

कार्यक्रम के अंत में वर्ग के अधिकारियों ने शिविर को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सहयोग देने वाले सभी स्थानीय नागरिकों, व्यवस्था कार्यकर्ताओं और विद्यालय प्रबंधन का हृदय से आभार व्यक्त किया। संपूर्ण स्टेडियम में स्वयंसेवकों और समाज से आये लगभग 5000 के जनसैलाब द्वारा एक साथ गाए गए ‘संघ की प्रार्ना’ के साथ इस ऐतिहासिक प्रकट समारोह का विधिवत समापन हुआ।

अभिषेक (प्रबंधन प्रमुख, संघ शिक्षा वर्ग) ने शिविर को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सहयोग देने वाले सभी स्थानीय नागरिकों, व्यवस्था कार्यकर्ताओं और वीवीएस प्रबंधन का हृदय से आभार व्यक्त किया। इस गौरवमयी अवसर पर मुख्य रूप से नरेंद्र तनेजा जी (सह प्रांत संघचालक, पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र), धुरेंद्र जी (संघचालक, गाजियाबाद महानगर), तपन जी (सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख), अनिल जी (प्रांत प्रचारक, मेरठ प्रान्त), कृष्ण कुमार जी (प्रांत बौद्धिक प्रमुख), विनय कुमार जी (सहव्यवस्था), विजय गोयल जी (प्रांत संपर्क प्रमुख), सुरेन्द्र जी (प्रांत प्रचार प्रमुख), देवेन्द्र प्रताप (गाजियाबाद विभाग कार्यवाह) तथा अतुल प्रकाश जी (गाजियाबाद विभाग प्रचारक) सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आई मातृशक्ति और दर्शक दीर्घा में मौजूद लगभग 5000 बंधु-भगनियों ने स्वयंसेवकों का मनोबल बढ़ाया। अंत में, संपूर्ण स्टेडियम में गूंजती स्वयंसेवकों और विशाल जनसैलाब की सामूहिक ‘संघ प्रार्थना’ के साथ इस ऐतिहासिक प्रकट समारोह का विधिवत समापन हुआ।

सच्ची घटना: नया चैनल खोलने वाले व्यापारियों को वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार पाठक की सलाह

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दिल्ली/ नोएडा: पिछले कुछ सालों में बहुत से ऐसे लोगों से मुलाकात हुई, जो अपना चैनल खोलना चाहते हैं। सही कहूं तो एक से एक जमूरे मिले, चिटफंडिए मिले और कुछ व्यापारी लोग भी मिले।

हाल ही में ऐसे ही एक व्यक्ति से मुलाकात हुई जो उत्तर प्रदेश/ उत्तराखंड के लिए आज तक से बड़ा चैनल खोलना चाहते थे ( हंसिए मत) । मिलने की इच्छा नहीं थी लेकिन एक पुराने सीनियर ने बार-बार कहा, जिन्हें मैं टाल नहीं सकता था तो मिलने चला गया। पेश है उस व्यापारी के साथ बातचीत का थोड़ा सा हिस्सा..
व्यापारी – नमस्कार पाठक जी
मैं – नमस्कार, कैसे हैं आप ( दुआ सलाम और कुछ औपचारिक बातचीत के बाद काम की बात पर आए)
व्यापारी – पाठक जी, पैसों की कोई कमी नहीं है अपने पास। मेरी इच्छा बस आज तक से भी बड़ा चैनल खोलने की है।
मैं -जी, अच्छा
व्यापारी : आप बताइए, आपके पास क्या प्लान है?
मैं – देखिए, जितनी चीनी डालेंगे ..चाय तो उतनी ही मीठी होगी..इसलिए फंड..
व्यापारी – बात काटते हुए बीच में ही बोला, पाठक जी, फंड की चिंता मत कीजिए। बहुत है अपने पास..
मैं – तो फिर किसी और धंधे में लगाइए, चैनल क्यों खोलना चाहते हैं। यह तो घाटे का सौदा बन गया है।
व्यापारी : इस देश ने मुझे बहुत कुछ दिया है, अब समाज को लौटाना चाहता हूं।
मैं – हम्म्म्म
व्यापारी – आप बताइए, आपके पास क्या प्लान है?
मैं – चैनल का लाइसेंस..
व्यापारी – ( फिर बात काटते हुए) वो बात हो गई है। अभी तो रेंट पर ले रहे हैं , बाद में उसी को खरीद लेंगे। आप बताइए , आपके पास क्या प्लान है?
मैं – आज तक जैसा चैनल खोलना चाहते हैं तो फिर..
व्यापारी : ( फिर बात को बीच में काटते हुए) आज तक जैसा नहीं, आज तक से भी बड़ा..
मैं – ( मुस्कुराते हुए) ये तो बहुत अच्छी बात है..लेकिन चैनल का फोकस एरिया क्या होगा?
व्यापारी – अब तो चुनाव का समय आने वाला है। हम एक साल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पर फोकस करेंगे। सुना है आपकी बहुत पकड़ है यूपी/उत्तराखंड पर..आपके पास तो लखनऊ, देहरादून और हर जिले में रिपोर्टर्स की फौज है..
मैं -जी
व्यापारी : मैंने जितने लोगों से आपका फीडबैक लिया, सब आपकी तारीफ करते हैं।
मैं – जी, ये तो उन लोगों का बड़प्पन है।
व्यापारी : अरे नहीं पाठक जी, सच कह रहा हूं। अभी परसो ही दिल्ली में भाईसाहब ( जिनका नाम लिया, उसे लिखना ठीक नहीं है) से मुलाकात हुई। मैंने आपके नाम का जिक्र किया तो उन्होंने तुरंत कहा कि हां पाठक जी, बहुत अच्छे आदमी हैं। राष्ट्रवादी हैं और उन्हें फिर से राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ना है।
मैं – ( यह जानते हुए भी कि वह बन्दा झूठ बोल रहा है, मैं मुस्कुराया ) हम्म्म्म
व्यापारी : तो बताइए , कैसे करेंगे आप?
मैं : मैंने तो बता ही दिया आपको, प्लानिंग फंड के हिसाब से ही होती है..
व्यापारी – उसकी चिंता मत कीजिए..
मैं -लेकिन चैनल के लिए कुछ तो रखा होगा।
व्यापारी – एक अमाउंट का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें तो एक साल का काम चल जाएगा। फिर यूपी/उत्तराखंड का चुनाव भी तो है.. बाकी आप चिंता मत कीजिए.. अपने पास 5 साल का फंड है..
मैं – एक साल नहीं , सिर्फ कुछ महीने ही बाकी है। जिस दिन आप डील फाइनल करेंगे, उस दिन से अगर हम 24 घंटे सातों दिन काम करेंगे तो भी चैनल ऑन एयर जाने में ढाई से 3 महीने लगेंगे।
व्यापारी : अरे नहीं, 15-20 दिन में चैनल शुरू हो जाएगा। 2 बड़े फीमेल एंकर का नाम लेते हुए कहा कि आप उनसे बात कर लीजिए.. और भी कुछ बड़े नामों को जोड़िए। बाकी आपका क्या प्लान है? चुनाव में कितना तक आ जाएगा?
मैं – लेकिन आपका प्लान तो 5 साल का है न ?आज तक से भी बड़ा चैनल चलाने का..
व्यापारी – बिल्कुल
मैं – एक रिक्वेस्ट है लेकिन
व्यापारी -कहिए
मैं- 3-4 मिनट मुझे बिना किसी रुकावट के बोलने दीजिए..
व्यापारी- ( झेंपते हुए) अरे, अरे बिल्कुल बोलिए पाठक जी..
मैं – पिछले कुछ सालों में दिल्ली के इसी तरह के होटलों में और कुछ के साथ नोएडा के होटलों में भी मुलाकात हुई। शायद 13-14 लोगों के साथ। शुरुआत में तो मैं लंबी-चौड़ी तैयारी करके जाता था। फिर छोड़ दिया।
आपने जितना फंड बताया है, उसमें 5 साल तो छोड़िए , 3 महीने भी नहीं चल पाएगा ( अगर आज तक से मुकाबला करना है ) लेकिन यह बात सही है कि समाचार प्लस के बंद होने के बाद यूपी/उत्तराखंड में उस जैसे चैनल की जगह खाली है..जो हम चैनल शुरू होने के 6 महीने के अंदर हासिल कर सकते हैं लेकिन उसके लिए भी इससे तीन गुना फंड की जरूरत पड़ेगी.. लेकिन मेरी कुछ शर्तें हैं..
व्यापारी – ( चेहरे का रंग अब थोड़ा सा बदलने लगा)
बिल्कुल पाठक जी।
मैं – अगर मुझे चैनल चलाना है तो फिर सिर्फ मैं ही चलाऊंगा और वो भी प्रोफेशनल तरीके से। हर डिपार्टमेंट में काबिल और प्रोफेशनल लोग रखेंगे Including Sales & Marketing
व्यापारी – Sales वालों की क्या जरूरत है , वो तो..
मैं – बात को बीच में ही काटते हुए बोला.. चैनल को प्रोफेशनल तरीके से चलाने के लिए हर डिपार्टमेंट जरूरी है। बाकी और भी बहुत सारी चीजें हैं..
व्यापारी – लखनऊ और देहरादून में किसको रखेंगे?
मैं – बाकी सारा फंड अलग रखिए.. जिसका खर्च आप या आपके द्वारा appoint किया गया कोई व्यक्ति अपनी निगरानी में करें। Purchase में मेरा कोई दखल नहीं होगा लेकिन सामान हमें quality वाला मिलना चाहिए।
व्यापारी : जी
मैं – स्टॉफ की सैलरी का एक फंड अलग से बनाइए , जिसमें डेढ़ साल की सैलरी का फंड होना चाहिए ( लगभग इतना तो..)
व्यापारी – चौंकते हुए डेढ़ साल
मैं – जी ( इस पर दोनों के बीच लगभग 10 मिनट तक वाद-विवाद हुआ)
व्यापारी – ये तो ज्यादा है, लेकिन कुछ प्लान तो होगा आपके पास
मैं – अगर आप मुझे जोड़ना चाहते हैं तो पहले 6 महीने की सैलरी मुझे एडवांस देनी पड़ेगी।
व्यापारी -( चौंकते हुए ) 6 महीने
मैं – जी, यह मेरी सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
उनका चेहरा बता रहा था कि वो कुछ और ही सोच कर आए थे।
मैं-  और अगर आप सिर्फ प्लान सुनना चाहते हैं तो उसका चार्ज मैंने एक लाख रुपया रखा है। उसे मेरे अकाउंट में तुरंत ट्रांसफर कीजिए। उसके बाद सारा प्लान बता देता हूं।
लखनऊ और देहरादून की लिस्ट मेरे पास तैयार हैं। हर जिले में भी रिपोर्टर की लिस्ट तैयार हैं। भगवान ने इतना तो गुडविल बना ही दिया है कि अगर मैं आपके साथ जुड़ा तो मेरे फोन करने पर इनमें से 70-80 फीसदी लोग तो जॉइन कर ही लेंगे और जो नहीं कर पाएंगे वो कहीं से भी ढूंढकर हमें अच्छा बंदा दे देंगे।
व्यापारी -लेकिन शुरू में ही एक लाख? हम तो साथ में जुड़ ही रहे हैं।
मैं – अरे आप तो इतने बड़े आदमी हैं महाराज। आपके लिए तो एक लाख , एक रुपए के बराबर ही है। बाकी अगर साथ में जुड़ेंगे तो जो 6 महीने का एडवांस आपसे कहा है, उसमें से काट लीजिएगा।
बैठक में थोड़ी देर खामोशी छा गई। फिर मैंने उठते हुए कहा
मैं – चैनल खोलना और चलाना मज़ाक नहीं है, महाराज। अच्छे से सोचिए ठीक लगे तो कॉल कीजिएगा। बाकी इस इंडस्ट्री में नए चैनल खुलवाने वाले बहुत से लोग हैं जो फ्री में भी आ जाएंगे और purchase में जमकर दलाली कूटेंगे और भाग जाएंगे। और आपके हाथ में..
यह 35-40 मिनट की मीटिंग का एक सार है।

आंख खोलने वाली है हरेंद्र जी की ‘सेकुलरवाद और बदलती जनगणना के आंकड़े’ पुस्तक

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प्रभात मिश्रा

पटना। हरेंद्रजी प्रताप  से रिश्ते कितने पुराने हैं, उन्हें वर्षों में नहीं बल्कि घनिष्ठता से माध्यम से समझा जा सकता है। घोषित रूप से पहली बार 1985 में दिल्ली में आयोजित विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला था। तब वह एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री थे और मैं इंटर का छात्र। इस सम्मेलन में मैं पलामू जिला के नियंत्रक के रूप में भाग ले रहा था। इसकी वजह से कई मौकों पर उनसे मिलने का अवसर मिला। यहीं से निकटता बढ़ी। उनके बोलने का अंदाज, किसी भी विषय पर तर्क के साथ रखने की उनकी शक्ति ने मुझ जैसे किशोर को काफी प्रभावित किया। संभव है उन्हें भी मेरे अंदर कुछ खास दिखा होगा तभी तो उन्होंने मुझे छोटे भाई के रूप में स्वीकार किया और बड़े भाई की तरह स्नेह दिया।

अभी हाल में हरेंद्र जी की पुस्तक ‘सेकुलरवाद और बदलती जनगणना के आंकड़े’ प्रकाशित हुई है। बिहार, झारखंड, असम और बंगाल में जिस तरह से जनसंख्या के आंकड़ों में बदलाव आया है, उन परिस्थितियों पर यह पुस्तक आंख खोलने वाली है। किस तरह से हिंदुओं की संख्या कम हो रही है और मुस्लिमों व ईसाइयों की संख्या बढ़ रही है वह चौंकाने वाली तो हैं ही चिंताजनक भी हैं। हरेंद्र जी ने जिस तरह शोध और तर्क के साथ अपनी बातें व आंकड़े पेश किए हैं, उन पर सरकारी स्तर पर कार्रवाई किए जाने की जरूरत है। लेखक का रिश्ता जिस विचारधारा से है, आज वह बहुत ही शक्तिशाली है। जिस राजनीतिक दल से कभी उनका जुड़ाव रहा है आज उसकी सरकार केंद्र में ही नहीं उन सभी राज्यों में है, जिनके चिंताजनक स्थिति की चर्चा इस पुस्तक में है। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार इन आंकड़ों का इस्तेमाल कर ठोस कदम उठाएगी।

‘अटल जी और बांग्लादेशी घुसपैठ’ वाले हिस्से में लिखा गया है- 13 फरवरी 1964-राष्ट्रपति जी की अस्वस्थता के चलते, उपराष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के विरोध में बोलते हुए श्री अटल जी का भाषण-“भारत में जो पाकिस्तानी रहते है जिनकी संख्या का हमे पता है, हम क्यों नहीं उनसे भारत छोड़कर जाने के लिए कहते है। असम में पाकिस्तानी अवैध रूप से घुस रहे हैं और घुस आए हैं उनको निकालने में हमने कमी कर दी है, क्योंकि इससे पूर्वी पाकिस्तान में दंगे हो जायेंगे। दंगे तो पूर्वी पाकिस्तान में हो रहे हैं। फिर भी हम असम से पाकिस्तानियों को निकालने में ढिलाई कर रहे है। 8 से 10 लाख तक पाकिस्तानी असम में बसे हुए हैं। पश्चिमी बंगाल में उनकी संख्या 4 लाख है। सारे देश में सन् 1961 की जनगणना के अनुसार 50 लाख पाकिस्तानी रह रहे है।” आज भी कमोबेश यही स्थिति है और वर्तमान सरकार के रहते यह चिंताजनक है।

पिछली बार जब हरेंद्र जी से दिसंबर 2023 में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन में ही मिला था। मिलते ही उन्होंने कहा, ‘तुम्हारी किताब कहां मिलेगी?’ मैंने कहा कि अधिवेशन स्थल पर ही प्रभात प्रकाशन का स्टॉल लगा है। इस पर उन्होंने मेरे साथ ही जाकर किताब खरीदी। करीब 10-15 मिनट तक किताब देखने के बाद कहा, ‘तुमने काफी मेहनत और शोध किया है।’ आपके लिए मैं यह तो नहीं कह सकता पर इतना जरूर कहूंगा कि आपकी पुस्तक शोधकर्ताओं और एक्शन लेने वालों के लिए पाथेय का काम कर सकती है। पुस्तक का प्रकाशन ‘सुरुचि प्रकाशन, नई दिल्ली’ ने किया है।

Glimpses from the opening day of the National School of Drama’s Three-Year Diploma Students’ Foreign Input Programme

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Delhi : Presented in collaboration with GITIS International, Russian Theatre Institute, the inaugural performances featured *The Courtyard as a Vanishing Species* written by Elena Isaeva, directed by Natalya Shurganova, and *Storm* written by Alexander Ostrovsky, directed by Alexander Khukhlin.


The opening performances were graced by Madame Diana Alipova, spouse of the Russian Ambassador to India, and Ms. Yulia Aryaeva, Counselor (Culture), Embassy of the Russian Federation in India. The programme was inaugurated by Shri Chittaranjan Tripathy, Director, National School of Drama.

The Foreign Input Programme offers NSD’s final-year students an opportunity to work with international theatre practitioners and engage with diverse theatrical traditions and creative approaches. The collaboration with GITIS International further strengthens avenues for artistic exchange and learning between India and Russia.

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