वाराणसी। विश्वप्रसिद्ध कथक युगल नृत्यांगना पद्मश्री नलिनी-कमलिनी ने गुरुवार को बीएलडब्ल्यू ऑफिसर्स क्लब गेस्ट हाउस में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक’ को लेकर पत्रकारों से विस्तारपूर्वक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने न केवल इस विधेयक के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया, बल्कि भारतीय संस्कृति, महिला सशक्तिकरण और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर भी अपने विचार रखे।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की महिलाओं में आज जागरूकता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का अभूतपूर्व विकास हुआ है। ऐसे समय में नारी शक्ति वंदन विधेयक महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने का एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि “हमें पूर्ण विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह विधेयक अवश्य पारित होगा और देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।”
नलिनी-कमलिनी ने कहा कि महिलाएं केवल घर-परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे प्रशासन, शिक्षा, कला, राजनीति और उद्यमिता जैसे हर क्षेत्र में अपनी दक्षता साबित कर चुकी हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि महिलाएं किसी भी कार्य को अधिक संवेदनशीलता, अनुशासन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ करती हैं, जिससे समाज में स्थायित्व और संतुलन आता है।
भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ‘अर्धनारीश्वर’ की अवधारणा को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह प्रतीक बताता है कि स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं। ऐसे में नारी शक्ति को सशक्त बनाने वाले किसी भी प्रयास का विरोध करना हमारी सांस्कृतिक विरासत के भी विरुद्ध है।
सरकारी योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी पहल ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज भी जनधन खाते, उज्ज्वला योजना और अन्य योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सीधे लाभ पहुंच रहा है, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है।
पूर्व और वर्तमान सरकारों की तुलना करते हुए उन्होंने एक प्रभावशाली रूपक का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि “पहले की सरकारें फूल तोड़कर गुलदस्ता बनाने जैसी थीं, जो कुछ समय बाद मुरझा जाता था। लेकिन वर्तमान सरकार बीज बोने का कार्य कर रही है, जो धीरे-धीरे वृक्ष बनकर कई पीढ़ियों को लाभ पहुंचाता है।” इस रूपक के माध्यम से उन्होंने दीर्घकालिक नीतियों और स्थायी विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
अपने वक्तव्य के दौरान उन्होंने एक रोचक टिप्पणी करते हुए कहा कि “मोदी जी को मेकअप में नहीं, गेटअप में विश्वास है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका आशय यह है कि वर्तमान नेतृत्व दिखावे की राजनीति से दूर रहकर वास्तविक और जमीनी कार्यों पर अधिक ध्यान देता है।
पद्मश्री नलिनी-कमलिनी ने देश की महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और समाज व राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। जब नारी शक्ति आगे बढ़ेगी, तभी देश सशक्त और समृद्ध बनेगा।



