गोदी मीडिया का गजब खेल

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दिल्ली। कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत जी को न्यूज 24 के पत्रकार को निष्पक्षता का सर्टिफिकेट थमाते देख, हंसी भी आती है और तरस भी। न्यूज 24, जिसे सारी दुनिया राजीव शुक्ला का चैनल मानती है, और राजीव जी तो कांग्रेस के ऐसे वफादार हैं कि उनकी भक्ति में भजन लिखे जा सकते हैं। लेकिन मजाल है कि “गोदी मीडिया” का तमगा बांटने वाले समाजसेवियों ने कभी राजीव जी या उनकी चेली सुप्रिया श्रीनेत का नाम अपनी पवित्र सूची में डाला हो! ये वही लोग हैं जो दिन-रात “निष्पक्षता” का ढोल पीटते हैं, लेकिन जब आईना सामने आता है, तो मुंह छिपाकर भागते हैं।

अरे भाई, गोदी मीडिया का कॉपीराइट तो इनके पास है, फिर अपने “आदि गोदी” सिपाहियों को क्यों भूल गए? राजीव जी का चैनल तो निष्पक्षता का ऐसा मॉडल है कि हर खबर में कांग्रेस का झंडा लहराता दिखता है। और सुप्रिया जी? उनकी तो सोशल मीडिया पर हर ट्वीट एक तीर है, जो विपक्ष को भेदने के लिए छोड़ा जाता है। फिर भी, गोदी लिस्ट में इनका नाम गायब! ये कैसी साजिश है, भाइयो? क्या इनके निष्पक्ष चेहरों पर कोई उंगली उठाने की हिम्मत नहीं कर पाता?

सुरेंद्र जी का सर्टिफिकेट देना तो बस ट्रेलर था। असली फिल्म तो तब शुरू होती है, जब ये लोग टीवी पर बैठकर नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं। एक तरफ “गोदी मीडिया” चिल्लाते हैं, दूसरी तरफ अपने चैनल को “स्वतंत्रता का मसीहा” बताते हैं। अरे, अगर न्यूज 24 निष्पक्ष है, तो चांद पर भी खेती हो रही है! ये दोहरा चरित्र देखकर लगता है, जैसे निष्पक्षता का सारा ठेका इन्हीं ने ले रखा हो।

तो भाइयो, अगली बार जब गोदी मीडिया की लिस्ट बने, तो राजीव जी और सुप्रिया जी को भी शामिल कर लो। आखिर, निष्पक्षता के इस सर्कस में सबको मंच तो मिलना चाहिए, ना?

प्रतिबंधों से संघ के कार्यविस्तार को नहीं रोक सकेगी कर्नाटक सरकार

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-सर्वेश कुमार सिंह

दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना को 100 साल पूरे हो गए हैं। इस संगठन की क्षमता और आन्तरिक ऊर्जा को विश्व ने पहचान लिया है। दुनिया का कोई देश और कोई भी विश्लेषक ऐसा नहीं है जिसने संघ को पहचाना न हो। वे संघ की अद्भुत कार्यप्रणाली का अध्ययन कर रहे हैं। लेकिन, कांग्रेस आज तक संघ को नहीं समझ सकी और न ही उसकी शक्ति को पहचान सकी है। वह आज भी उसी भ्रम में है, जिसमें 50 साल पहले थी। जब बार-बार संघ पर प्रतिबंध लगाये जाते थे। लेकिन इन प्रतिबंधों से क्या कांग्रेस और उसकी निरंकुश सरकारें संघ के कार्य विस्तार को रोक पायीं। संघ ने तीन प्रतिबंधों का सामना किया। लेकिन उसके काम पर कोई असर नहीं पडा। संघ जिस गति से चल रहा था, उसी से चलता हुआ और वटवृक्ष का रूप ले चुका है। लेकिन, कांग्रेस को लगता है कि वह अब भी उसे किसी प्रतिबंध या रोक टोक से प्रभावित कर देगी या उसका रास्ता रोक लेगी। यह कांग्रेस की बडी भूल है।
एक बार फिर यही कार्य कांग्रेस की कर्नाटक सरकार ने किया है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार अपनी ही पूर्ववर्ती केन्द्र सरकारों की गलतियों से कोई सबक नहीं ले रही है। बल्कि उन कामों को दोहरा रही है, जो कांग्रेस की पूर्ववर्ती नेहरू और इन्दिरा सरकारों ने किये थे।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सार्वजनिक स्थलों पर कार्यक्रमों को आयोजित करने पर रोक लगायी है। सरकार ने केबिनेट में प्रस्ताव पारित करके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विविध कार्यक्रम, शाखाएं और पथ संचलन आदि को सार्वजनिक स्थल पर आयोजित करने की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया है। साथ ही संघ के कार्यक्रमों में भाग लेने वाले अधिकारियों को भी रोकने के लिए नियम बनाने का फैसला किया है। ये फैसले 16 अक्टूबर को केबिनेट की बैठक में लिये गए।

दरअसल संघ के कार्यक्रमों पर रोक और अधिकारियों, कर्मचारियों को संघ की शाखाओं में जाने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार के सूचना और जैव प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खरगे ने पहल की। उन्होंने एक दिन पहले ही बयान दिया कि संघ के कार्यक्रमों को सार्वजनिक स्थलों पर रोकने के लिए कानून बनाया जाएगा। इसी तरह संघ की शाखाएं भी सार्वजनिक स्थलों, सरकारी विद्यालयों, सहायता प्राप्त विद्यालयों में नहीं लगने दी जाएंगी। उन्होंने इस आशय का एक पत्र मुख्यमंत्री सिद्दरमैया को लिखा। ज्ञातव्य है कि प्रियांक खऱगे कांग्रेस के अखिल भारतीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र हैं। इसलिए उनका कांग्रेस और प्रदेश सरकार में प्रभाव है। इसी प्रभाव के चलते मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने अगले ही दिन केबिनेट बैठक में एक प्रस्ताव पारित करा दिया कि संघ की शाखाओं, कार्यक्रमों, पथसंचलन आदि को सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित नहीं किया जा सकता है। इस फैसले की देश भर में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है।

संघ पर इस तरह के प्रतिबंध लगाकर कांग्रेस नेतृत्व की कर्नाटक सरकार यह दिखाना चाहती है कि वह सबसे बड़ी संघ विरोधी सरकार है। शायद इससे मुख्यमंत्री सिद्दरमैया को कुछ राजनीतिक लाभ मिल जाए। क्योंकि उनके सामने डीके शिवकुमार की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी हमेशा से बनी हुई है। सिद्धरमैया को हर समय कांग्रेस नेतृत्व को यह बताना पड़ता है कि वे ही कांग्रेस की नीतियों को सही और प्रभावी ढंग से लागू कर सकते हैं। हालांकि, अब विवाद और अधिक बढ़ गया है क्योंकि प्रिंयाक खरगे ने दीपावली के दिन यह बयान भी दे दिया है कि वे संघ पर राज्य में प्रतिबंध भी लगा सकते हैं। हालांकि यह फैसला लेने के लिए कर्नाटक सरकार को अपने आला कमना से अनुमति लेनी होगी।

किन्तु संघ पर इन सब प्रतिबंधों का कोई असर नहीं होने वाला है। संघ तीन प्रतिबंधों का सामना कर चुका है। हर बार इसके स्वयंसेवकों ने साहस और कुशलता से इन प्रतिबंधों का सामना किया और संघ को निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने में योगदान किया। जब-जब संघ पर प्रतिबंध लगे तब तब संघ के कार्य में विस्तार ही हुआ है। इस बार भी कर्नाटक में ऐसा ही होगा। कांग्रेस वहां अपनी राजनीतिक ताकत को बढाना चाहती है लेकिन, प्रतिबंधों की राजनीति से उसे उलटा नुकसान ही होगा। इसके जिम्मेदार भी मुख्यमंत्री सिद्दरमैया और मंत्री प्रियांक खरगे होंगे।

संचलन रोक स्वयंसेवकों की गिरफ्तारी : कर्नाटक

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आज सेडम(जिला कलबुर्गी,कर्नाटक उत्तर प्रांत) का पथ संचलन सायं 4 बजे निकलना तय किया गया था जिसमें यह एक स्थान से प्रारंभ होकर दो अलग अलग मार्गों पर चलते हुए पुनः एक होकर समाप्त होना था। कुल आठ वाहिनियों तथा चार घोष पथक संचलन हेतु तैयार थे लेकिन 3:30 बजे मैदान के पास प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया और 5 बसें संचलन मार्ग अवरुद्ध कर खड़ी कर दी गई। DSP ने सूचना भेज दी कि बिना अनुमति संचलन नहीं हो सकता है। संघ ने कहा कि प्रतिवर्ष एक सप्ताह पूर्व ही लिखित सूचना देते रहे हैं,इस बार भी 13 अक्टूबर को लिखित सूचना दी गई थी। उत्तर मिला कि संघ ने लिखित सूचना दी थी लेकिन प्रशासन ने अनुमति तो लिखित में नहीं दी अर्थात आपको अनुमति नहीं है।

अंत में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने तय किया कि संचलन प्रारंभ किया जाए।जैसे ही संचलन 5 बजे प्रारंभ होकर मुख्य मार्ग पर आया और पुलिस बल ने वाहिनियों को गिरफ्तार कर बसों में बैठना प्रारंभ कर दिया।सभी बसें भरकर पुलिस स्टेशन लाई गई लेकिन पुलिस ने मौखिक रूप से पाबंद कर छोड़ दिया।
उधर शेष वाहिनियों ने मार्ग बदल कर आधे नगर में संचलन कर लिया। यह हिस्सा संकरे मार्ग का पुराने कस्बे का भाग है अतः पुलिस के वाहन और बसें यहां नहीं पहुंच सकती थीं।
विलम्ब होने के बाद भी जनता स्वागत हेतु उपस्थित थी।

उपरोक्त घटनाक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पुत्र, मंत्री प्रियंक खड़गे के निर्देश पर हुआ। क्योंकि वे इस क्षेत्र के प्रभारी हैं और वे संघ पर प्रतिबंध हेतु प्रयासरत हैं।
संघ की ओर से न्यायालय में वाद दायर किया गया है जिसमें 24 अक्टूबर को सुनवाई होगी तथा राज्य सरकार का पक्ष सुना जाएगा। सरकार ने सार्वजनिक पार्क,मैदान,स्कूल, कॉलेज में बिना अनुमति किसी संगठन को कार्यक्रम करने पर प्रतिबंध लगाया है तथा राज्य के कर्मचारियों को राजनैतिक गतिविधि में भाग लेने के नाम पर संघ के पथ संचलन में भाग लेने वालों को सेवा से निलंबित कर दिया है।

प्रकृति के साथ शाश्वत जीवन का मार्ग भारत के पास है – डॉ. मोहन भागवत जी

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लोनावला: लोनावला स्थित स्वामी कुवल्यानंद द्वारा स्थापित कैवल्यधाम योग अनुसंधान संस्था के 101वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भौतिक प्रगति के नाम पर मानव ने प्रकृति को भारी नुकसान पहुंचाया है। सतत विकास के लिए मानव के साथ-साथ प्रकृति के उत्थान का मार्ग आवश्यक है। सृष्टि के पोषण का यह विचार योग शास्त्र में है। प्रकृति के साथ शाश्वत जीवन का मार्ग भारत के पास है और हमें इसे विश्व कल्याण के लिए प्रशस्त करना होगा।

इस अवसर पर सन्यास आश्रम के प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरी जी, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं शताब्दी वर्ष समिति के अध्यक्ष सुरेश प्रभु, मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुबोध तिवारी आदि उपस्थित थे।

सरसंघचालक जी ने कहा कि “योग केवल व्यायाम का प्रकार नहीं है, बल्कि सभी को जोड़ने का एक माध्यम है। योगाभ्यास से शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का संतुलन प्राप्त होता है। योग विज्ञान के माध्यम से व्यक्ति निर्माण कर पृथ्वी पर शांति और सुख के एक नए युग की शुरुआत करने के लिए कैवल्यधाम कार्यरत है।”

उन्होंने कहा कि व्यक्ति, परिवार, समाज और विश्व का कल्याण योग कर सकता है। विविधता परिवर्तनशील होती है। एकता शाश्वत होती है। भारत का उत्थान समृद्धि विश्व के कल्याण के लिए है। विश्व कल्याण के लिए भारत का प्राचीन ज्ञान आवश्यक है।

विज्ञान और अध्यात्म परस्पर विरोधी नहीं

डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि ज्ञान और अध्यात्म में विरोध का कोई कारण नहीं है क्योंकि जिस प्रकार विज्ञान प्रयोगों से सिद्ध होता है, उसी प्रकार अध्यात्म अनुभव से सिद्ध होता है। आगे का वैज्ञानिक अनुसंधान केवल आंतरिक प्रेरणा या आंतरिक विज्ञान से ही संभव है। “विज्ञान की प्रगति सूक्ष्मतम कणों के ज्ञान तक पहुंच गई है। हालांकि, उससे आगे भी एक सूक्ष्म कण है। दूसरी ओर, अंतरिक्ष में दिखाई देने वाला विशाल ब्रह्मांड एक प्रकार का अतीत ही है। इसलिए, आधुनिक विज्ञान भी नए निष्कर्षों पर पहुंच रहा है।”

स्वामी विश्वेश्वरानंद ने कहा, “स्वामी कुवल्यानंद ने योग विज्ञान को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर कसने और संरक्षित करने का महान कार्य किया है। उनकी दूरदर्शिता से ही कैवल्यधाम जैसी संस्था का निर्माण हुआ, जिसने अपने प्राचीन ज्ञान और परंपरा को बीज रूप में संरक्षित रखा है। अपनी शताब्दी मनाने वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और कैवल्यधाम दोनों ही राष्ट्र सेवा का कार्य कर रहे हैं।”

सुरेश प्रभु ने कहा कि कैवल्यधाम योगशास्त्र में शुद्धता का प्रतीक है। “कैवल्यधाम व्यक्ति को समाज का एक उपयुक्त घटक बनाने का कार्य कर रहा है। वहीं, समर्थ और सक्षम भारत के निर्माण हेतु एक संगठित समाज के निर्माण हेतु रा. स्व. संघ कार्य कर रहा है। शताब्दी वर्ष में संघ द्वारा निर्धारित पंच परिवर्तन के विषयों में समाज ने अपनी सहभागिता निभाई है और इससे एक बड़ा सामाजिक परिवर्तन होगा।”

सुबोध तिवारी ने कहा कि कैवल्यधाम योगशास्त्र के विज्ञान और परंपरा को समाज तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा है। “उच्च शिक्षा में योगाभ्यास को शामिल करने के साथ-साथ, कैवल्यधाम में कैंसर के उपचार में योग विज्ञान के उपयोग पर भी शोधकार्य जारी है।”

कार्यक्रम में डॉ. शरदचंद्र भालेकर द्वारा लिखित ‘योग पोलिस’ और डॉ. ऋतु प्रसाद द्वारा लिखित ‘सात्विक आहार’ पुस्तकों का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का सूत्र संचालन शनाया वात्स्यायन ने किया। सरसंघचालक ने प्रातःकालीन सत्र में कैवल्यधाम स्थित प्रयोगशालाओं और संस्थानों का अवलोकन किया।

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