नवाचार प्रयोग भविष्य की संभावनाएं

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समीर कौशिक

तकनीकी शिक्षा द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान का उद्देश्य देश को आर्थिक एवं तकनिकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है, जिसमें तकनीकी शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। तकनीकी शिक्षा के माध्यम से नवाचार, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सुधार होते हैं, जो न केवल रोजगार के अवसर पैदा करते हैं, अपितु देश की उत्पादन क्षमता को भी बढ़ाते हैं । इसके माध्यम से लोग अपनी खुद की तकनीकी क्षमताओं का निर्माण करते हैं और अपने रोजगार के लिए आत्मनिर्भर बनते हैं। भारत में तकनीकी शिक्षा के कार्य और प्रयोग भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से, नई राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन तकनीकी शिक्षा के माध्यम से महत्वपूर्ण है। यह नीति स्वदेशी विकास, मूलभूत एवं स्थानीय कौशल कार्यों की पुनर्जिविका के रूप में और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और समाज को सशक्त बनाया जा सके ।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में तकनीकी शिक्षा के स्थान को नई शिक्षा नीति में तकनीकी शिक्षा को नए दृष्टिकोण से देखा गया है। इसमें मुख्य रूप से जिन बिंदुओं पर जोर दिया गया है उसमे मुख्यत: आधारभूत तकनीकी शिक्षा के विषय में बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी शिक्षा देने की बात की गई है। यह “स्किल डेवलपमेंट” को बढ़ावा देगा।इंटरडिसिप्लिनरी अप्रोच के ममाधयम से विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग और कला के क्षेत्रों को एकीकृत करने का प्रयास किया गया है, ताकि छात्र अपने क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी दक्षता प्राप्त कर सकें। नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र के विस्तार हेतु तकनीकी शिक्षा में अनुसंधान और नवाचार को प्राथमिकता दी गई है। यह उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देगा। ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से तकनीकी शिक्षा को सुलभ बनाना। यह विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों के लिए सहायक है तकनीकी शिक्षा के क्रियान्वयन हेतु संस्थान और नवाचार प्रयोग के प्रयोग विभिन्न संस्थान इस नीति को लागू करने के लिए कर रहे हैं। कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं आईआईटी IITs और एनआईटी NITs: इन संस्थानों में अनुसंधान, नवाचार, और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। छात्रों को प्रैक्टिकल ज्ञान और उद्योग के वास्तविक मुद्दों पर काम करने का अवसर मिल रहा है।

आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मद्रास जैसे संस्थानों में स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर चलाए जा रहे हैं। ये सेंटर छात्रों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के सहयोग से नए विचारों को व्यावसायिक रूप में बदलने का कार्य करते हैं। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में कौशल विकास पर जोर दे रहा है। इसके द्वारा स्थापित विभिन्न प्रशिक्षण केंद्र देशभर में स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चला रहे हैं, ताकि युवा रोजगार के लिए तैयार हो सकें।आधुनिक तकनीकी और डिजिटल प्रशिक्षण हेतु NSDC ने डिजिटल प्रशिक्षण के लिए Skill India Portal का निर्माण किया है। स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म दीक्षा प्लेटफॉर्म यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां स्कूलों और कॉलेजों के लिए तकनीकी शिक्षा, संसाधन और पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाते हैं।स्वयं पोर्टल यह एक ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफ़ॉर्म है जो उच्च शिक्षा और तकनीकी विषयों में पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है।टेक्नोलॉजी आधारित नवाचार (Innovation in Tech):कई संस्थान भविष्य की संभावनाएं के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML): जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का उपयोग बढ़ रहा है, भारतीय शिक्षा प्रणाली में इन तकनीकों को शामिल किया जा रहा है। भविष्य में इससे उच्च तकनीकी शिक्षा को और भी सशक्त बनाया जाएगा।, डेटा साइंस, और रोबोटिक्स में नवाचार कर रहे हैं। आईआईटी कानपुर और आईआईटी हैदराबाद जैसे संस्थान इन तकनीकों में शोध और विकास में अग्रणी हैं।डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षण सामग्री का उपयोग बढ़ाया गया है, जिससे छात्र उन्नत पद्धति से सीख सकें। संस्थान स्मार्ट लैब्स और टेक्निकल वर्कशॉप्स के माध्यम से छात्रों को नवीनतम तकनीकी यंत्रों से परिचित कराते हैं, जैसे 3D प्रिंटिंग, वर्चुअल रियलिटी (VR), और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)। राजीव गांधी राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान यह संस्थान नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न तकनीकी अनुसंधान परियोजनाओं और सॉफ्टवेयर विकास कार्यक्रमों पर काम कर रहा है। इन संस्थानों और नवाचार प्रयोगों के माध्यम से भारत में तकनीकी शिक्षा को सशक्त किया जा रहा है, जिससे छात्रों को न केवल वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफलता प्राप्त हो, बल्कि देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) इस योजना के तहत भारत में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को नई तकनीकों से लैस करना है ताकि वे उद्योगों में बेहतर तरीके से काम कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NITs) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs): ये संस्थान देश में उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा प्रदान करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इन संस्थानों से निकलने वाले छात्र न केवल वैश्विक स्तर पर काम करते हैं, बल्कि स्वदेशी तकनीकी विकास में भी योगदान करते हैं। भारत सरकार की ‘Startup India’ पहल के तहत तकनीकी शिक्षा से जुड़े स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके माध्यम से युवा उद्यमियों को नई-नई तकनीकी परियोजनाओं पर काम करने के लिए सहायता दी जाती है, जिससे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

मेक इन इंडिया और अटल इनोवेशन मिशन (AIM): ‘मेक इन इंडिया’ और ‘अटल इनोवेशन मिशन’ जैसी योजनाओं के तहत छात्रों और तकनीकी पेशेवरों को नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस पहल का उद्देश्य घरेलू उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और स्मार्ट सिटी प्रौद्योगिकि स्मार्ट सिटी निर्माण और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय तकनीकी शिक्षा में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे छात्रों को इन उन्नत क्षेत्रों में काम करने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे। सस्टेनेबल तकनीक के माध्यम से पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए, सस्टेनेबल तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी तकनीकी शिक्षा को प्रमुख रूप से शामिल किया जाएगा। इससे न केवल आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा। भारतीय तकनीकी शिक्षा को उद्यमिता (एंटरप्रन्योरशिप ) के दृष्टिकोण से अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है, जिससे छात्र अपने व्यवसाय शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ा सकें। तकनीकी शिक्षा का सही उपयोग और सुधार आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत में कई शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास जैसे स्वयं सेवी संस्था एवं शिक्षण संस्थान और सरकारी योजनाएं इस दिशा में कार्य कर रही हैं। भविष्य में नई राष्ट्रीय निति २०२० के माधयम से तकनीकी शिक्षा में और भी सुधार होंगे, जिससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और देश के आर्थिक विकास में वृद्धि होगी।

विराट और भव्य भारत का होगा दर्शन, सज्जनशक्तियों का अनोखा संगम

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डॉ.देवकुमार पुखराज

हैदराबाद : प्रयागराज में चल रहे आध्यात्मिक महाकुंभ के बीच दक्षिण का राज्य कर्नाटक का सेडम शहर एक वैश्विक सांस्कृतिक महाकुंभ के लिए तैयार हो रहा है। कलबुर्गी जिले के सेडम में 29 जनवरी से आरंभ हो रहे 9 दिवसीय आयोजन का नाम है- भारतीय संस्कृति उत्सव-7। आयोजन का थीम है- प्रकृति केन्द्रित विकास। भारत विकास संगम और विकास अकादमी ने संयुक्त रुप से इसे आयोजित किया है। निमंत्रण पत्रिका पर ऊपर में लिखा है- सज्जन शक्तियों का अनोखा संगम।

भारत विकास संगम का यह आयोजन हर तीसरे साल होता है। अबतक छह आयोजन हो चुके हैं। सातवां संस्कृति उत्सव श्री कोत्तल बसवेश्वर भारतीय शिक्षण समिति की स्थापना के पचास साल पूरे होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। 28 जनवरी को आयोजन के निमित्त दो शोभायात्राएं निकलेंगी। पहली शोभायात्रा कलबुरगी में सुबह 09 बजे शुरू होगी ठीक उसी समय सेडम में एक दूसरी शोभायात्रा शिवशंकर शिवाचार्य स्वामीजी के सान्निध्य में निकाली जाएगी।

*कैसा होगा भारतीय संस्कृति उत्सव-*
भारतीय संस्कृति उत्सव की संचालन समिति के राष्ट्रीय संयोजक श्री माधव रेड्डी यड्मा के मुताबिक सेडम के प्रकृति नगर में 29 जनवरी से शुरू होकर 6 फरवरी तक चलने वाला मुख्य समारोह 240 एकड़ विस्तृत भूमि पर होगा। इसमें विविध प्रकार के स्वदेशी उत्पादों के 900 स्टॉल होंगे। 9 थीम एक्जीविशन लगेंगे। अलग-अलग क्षेत्रों के 90 विशेषज्ञों के वैचारिक सत्र होंगे। उम्मीद की जा रही है कि 25 लाख विजिटर्स इस दौरान यहां आएंगे। व्यवस्था संभालने के लिए नौ हजार स्वयंसेवकों की तैनाती रहेगी।
उत्सव का आयोजन जिस विशाल परिसर में हो रहा है, जिसका नाम महान संत श्री सिद्धेश्वर स्वामी जी की स्मृति में प्रकृति नगर रखा गया है। इसमें 24 एकड़ भूमि पर 70 हजार लोगों के बैठने के लिए सभागार बनाया जा रहा है जिसमें सभी 9 दिन मुख्य समारोह होंगे। सायं काल में प्रत्येक दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इसी के मुख्य मंच से होगा। इसके अलावे दो- दो हजार लोगों के बैठने की क्षमता वाले यनिगुंडी माते मनिकेश्वरी मंडप और जम्बलदिन्नी सभा मंडप भी तैयार हो रहा है। कृर्षि पद्धति औऱ एकीकृत जैविक खेती के लिए 11 एकड़ में कृषि लोक है। विज्ञान प्रदर्शनी के लिए 6 एकड़ आवंटित है। कलालोक में विविध कार्यशालाएं और प्रदर्शनियों के लिए दो एकड़ भूमि आवंटित है।

*किस दिन क्या होगा खास-*
9 दिनों तक चलने वाले महोत्सव में अलग-अलग दिन अलग-अलग सम्मेलन होने हैं। पहला दिन मातृ शक्ति सम्मेलन होना है, जबकि दूसरे दिन शैक्षणिक सम्मेलन के नाम रहने वाला है। इसी तरह युवा सम्मेलन तीसरे दिन और ग्राम कृषि सम्मेलन चौथे दिन प्रस्तावित है। आहार आरोग्य सम्मेलन के लिए 2 फरवरी ( पांचवा दिन) की तिथि निर्धारित है और उद्योग स्वयं उद्योग के लिए छठा दिन। सातवें दिन पर्यावरण सम्मेलन, आठवें दिन सेवा शक्ति सम्मेलन और अंतिम यानि 9वें दिन देश-धर्म- संस्कृति सम्मेलन होगा। समापन के दिन सायं काल में अनिवासी भारतीयों का सम्मान समारोह भी होगा। 7 फरवरी को एक विशेष आयोजन हो रहा है, जहां देश के जाने-माने विचारक-चिंतक और भारत विकास संगम के संस्थापक श्री के.एन गोविंदाचार्य के अभिनंदन एवं सहत्र चंद्र दर्शन कार्यक्रम भी आयोजित है।

*कौन- कौन होंगे विशेष आकर्षण-*
भारतीय संस्कृति उत्सव के लिए विविध प्रकार के प्रचार सामग्रियां हिंदी, अंग्रेजी, कन्नड और तेलुगू भाषा में छपी हैं। मुख्य आमंत्रण पत्र 52 पेज का है, जिसमें हर दिन होने वाले कार्यक्रमों की समय सारणी अतिथियों के नाम सहित प्रकाशित है। अतिथियों में जो नाम प्रमुख हैं और चर्चित हैं, उनमें पूर्व राष्ट्रपति श्रीरामनाथ कोविंद, भारत रत्न क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, इंफोसिस वाली श्रीमती सुधा मूर्ति( सांसद), कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले, श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि जी महाराज, पूर्व जस्टिस शिवराज वी पाटिल, इसरो प्रमुख डॉ. एस सोमनाथ, एनएएफटी के चेयरमैन डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे, यूजीसी के पूर्व चेयरमैन डॉ. जे एस राजपूत, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष विजयेन्द्र येदियरप्पा, अभिनेता रमेश अरविंद, लेखक चक्रवर्ती सुलीबेले, डॉ. नूमल मोमिन, पद्मश्री दीपा मलिक, पुणे के पद्मश्री मुरलीकांत पेटकर और ब्रह्माकुमारीज के सचिव डॉ. मृत्युंजय, केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान, मनसुख मंडविया, एच डी कुमारस्वामी, सुश्री शोभा करंदलाले, वी सोमन्ना, तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णुदेव शर्मा, पद्मभूषण डॉ. इंदरजीत कौर, दीनदयाल शोध संस्थान के श्री अतुल जैन, जल पुरुष राजेन्द्र सिंह, योगऋषि बाबा रामदेव, मिलेटमैन डॉ. खादर वली, कैप्टन गोपीनाथ, पद्मश्री नीलिमा मिश्रा, पद्मश्री जमुना ( रांची), पद्मश्री महेश शर्मा( झाबुआ), विधा भारती के श्री के.एन. रघुनंदन, झारखंड के विधायक सरयू राय, जीवन विद्या के डॉ. गणेश बागड़िया, वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री रामबहादुर राय प्रमुख हैं।

*आयोजन के मूल सूत्रधार कौन-कौन-*
भारतीय संस्कृति उत्सव का सातवां संस्करण जिनके दिमाग की उपज है उनका नाम है श्री के.एन गोविंदाचार्य। बताने की जरुरत नहीं है कि वे कभी संघ के प्रचारक थे और बीजेपी के महासचिव (संगठन) भी। उन्होंने ही वर्ष 2004 में भारत विकास संगम की स्थापना की। उनके संकल्प को जमीन पर उतारने के काम में वर्षों से लगे हैं- सेडम निवासी पूर्व सांसद और जाने-माने समाजसेवी श्री बसवराज पाटिल। पूरे आयोजन को विजयपुर, कर्नाटक वाले श्री सिद्धेशवर स्वामीजी का संरक्षण प्राप्त है। हैदराबाद के श्री माधव रेड्डी आयोजन के राष्ट्रीय संयोजक हैं। अक्षर वनम नामक उनका शैक्षणिक प्रकल्प बहुत ही प्रसिद्ध है।

*उत्सव को लेकर क्या कहते हैं गोविंदाचार्य-*
उत्सव के प्रेरणास्त्रोत श्री के एन गोविंदाचार्य सभी को आयोजन में सहभागी बनने का अनुरोध करते हुए कहते हैं, देखें कि समाज में सज्जन शक्तियां कितनी सक्रिय हैं और विविध क्षेत्रों में कितना अच्छा काम कर रही हैं। मिलें उन तमाम लोगों से जो आपके जीवन में एक नया आयाम जोड़ सकते हैं। समझें कि भारत के विकास में समाज की कितनी मह्त्वपूर्ण भूमिका है। जरुरत है कि समाज आगे बढ़कर सरकार को रास्ता दिखाए। गोविंदाचार्य कहते हैं- यह उत्सव भारत की प्राचीन संगम परंपरा का ही नया रुप है। सज्जन शक्तियों के बीच संवाद, सहमति और सहकार का माहौल बने इसके लिए प्रयास है। वे आग्रह करते हैं कि सभी इस आयोजन का हिस्सा बनें और भारत के एक अदभूत स्वरुप का अपनी आंखो से स्वयं साक्षात्कार करें।

इंडिया टुडे सर्वेक्षण 2025

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आम आदमी पार्टी (AAP) के बारे में यह सवाल कि क्या वह अब भी ‘आम आदमी’ की उस सोच का प्रतिनिधित्व करती है, जिस सोच को आगे रखकर 10 साल पहले उसका निर्माण हुआ था। दिल्ली वालों के बीच हुए सर्वेक्षण में 56 प्रतिशत लोग मानते हैं कि आज पार्टी उस सोच के साथ खड़ी नहीं है।
सर्वेक्षण के आंकड़े और धारणा

• 56% लोग मानते हैं कि AAP अब ‘आम आदमी’ का वैसे प्रतिनिधित्व नहीं करती जैसा उसने शुरुआत में किया था।
• केवल 14% लोग “कुछ हद तक सहमत हैं।
• 07% लोग तटस्थ हैं, और 8% “कुछ हद तक असहमत हैं।

AAP का बदलाव

• AAP ने एक भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन से शुरुआत की और खुद को पारदर्शिता, जवाबदेही, और आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित पार्टी के रूप में पेश किया।
• सत्ता में आने और शासन की चुनौतियों ने AAP को वास्तविक राजनीति के करीब ला दिया, जिससे उसकी विशिष्ट पहचान धुंधली हो सकती है।
मुख्य विशेषताएं
• AAP के समर्थकों का कहना है कि पार्टी आज भी शिक्षा सुधार, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का निर्माण, मुफ्त बिजली-पानी, और महिलाओं की सुरक्षा जैसे आम आदमी के मुद्दों पर काम कर रही है।
• यह दलील दी जाती है कि विपक्षी दल सिर्फ AAP पर आरोप लगाते हैं लेकिन आम आदमी के मुद्दों पर चर्चा नहीं करते।
जनता की धारणा में चुनौती
• विपक्षी दलों ने AAP को एक पारंपरिक राजनीतिक पार्टी की तरह दिखाने की कोशिश की है।
• भ्रष्टाचार के आरोप, आंतरिक विवाद, और शासन की जटिलताओं ने AAP की ‘पार्टी विद अ डिफरेंस’ वाली छवि को कमजोर किया है।
वोटर्स का मूल्यांकन
• अब वोटर AAP को उसकी परफॉर्मेंस के आधार पर आंक रहे हैं, न कि उसके मूलभूत विचार या विशिष्ट पहचान के आधार पर।

सिविल सोसाइटी ने दिल्ली की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाया प्रश्न

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नई दिल्ली, 23 जनवरी 2025: स्वतंत्र जन आवाज एनजीओ ने दिल्ली की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक महत्वपूर्ण प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी ए.के. मल्होत्रा, सेवानिवृत्त जस्टिस एस. एन. ढींगरा, और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर अश्विनी राय ने अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने द्वारा पिछले 10 वर्षों में दिल्ली की बिगड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार की जवाबदेही तय की गई और मतदाताओं को शत् प्रतिशत मतदान करने के लिए जागरूक किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेवानिवृत्त जस्टिस एस. एन. ढींगरा ने कहा कि मोहल्ला क्लिनिक की वास्तविकता क्या है, यह जानना हमारे लिए अहम है। दिल्ली जहाँ की आबादी 2.5 करोड़ है, और जहाँ 1.5 करोड़ की आबादी इन्सुरेंस नहीं करा सकती। ऐसे मे कोई बीमार हो जाए तो पूरा घर चिंता मे लग जाता है। 40 रुपया पर पेशेंट के हिसाब से कौन सा डॉक्टर बैठेगा। यह सोचने वाली बात है।

डॉ. अश्विनी राय ने कहा कि दिल्ली मे स्वास्थ्य सुविधायें 2007 से भी कम है, इंफ्रास्टक्चर कमजोर है। मोहल्ला क्लिनिक मात्र टेम्परेरी व्यवस्था पर चलाये गये।

इस अवसर पर सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी ए. के. मल्होत्रा ने कहा कि मोहल्ला क्लिनिक एक विज़न नहीं फ्रॉड है, जहाँ 1000 मोहल्ला क्लीनिक की बात की गयी थी, वहाँ 500 भी नहीं पूरे हुए।

स्वतंत्र जन आवाज एनजीओ द्वारा बताया गया कि स्वस्थ्य जीवन नागरिक का मौलिक अधिकार होता है लेकिन बढ़ता प्रदूषण और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने दिल्ली के नागरिकों से उनका यह अधिकार भी छीन लिया है और दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार के पास इसको लेकर कोई भी ठोस योजना नहीं है। दिल्ली सरकार की मोहल्ला क्लीनिक अब अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है। वर्तमान दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लगभग 8700 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, लेकिन इसके बावजूद मोहल्ला क्लीनिक में ज़रूरी जेनेरिक दवाइयों और एंटीबायोटिक्स की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है।

महिलाओं के लिए ये क्लीनिक पूरी तरह से अनुकूल नहीं माने जा सकते, क्योंकि यहां महिला रोगियों और स्वास्थ्य सेवाओं की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने में कमी देखी जा रही है। यदि मोहल्ला क्लीनिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का मॉडल माना जाता है, तो 2024 में 2023 की तुलना में 30% फुटफॉल में गिरावट क्यों दर्ज की गई? यह न केवल सरकारी दावों पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार की आवश्यकता है। जनता के विश्वास को बनाए रखने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हाल ही में कई मोहल्ला क्लीनिक बंद या बदहाल स्थिति में पाए गए। इन क्लीनिकों में घटिया दवाओं की आपूर्ति और फर्जी लैब टेस्ट से संबंधित घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा मेडिकल उपकरणों और दवाओं की कमी, साथ ही डॉक्टरों और स्टाफ की अनुपस्थिति जैसी समस्याएं भी देखने को मिली हैं।उक्त विषय को संज्ञान में लेते हुए गृह मंत्रालय (MHA) ने पिछले महीने उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की सिफारिश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच शुरू करवाई है।

कांफ्रेंस में मतदाताओं को शत् प्रतिशत मतदान करने के लिए जागरूक किया गया और उनसे अपील की गई कि वे उन उम्मीदवारों और पार्टियों का समर्थन करें जो स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए ठोस योजनाएं प्रस्तुत करते हैं और नागरिक को स्वस्थ्य जीवन उपलब्ध कराने एवं प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हों।

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