उत्तर प्रदेश उपचुनाव  परिणाम के निहितार्थ, सभी दलों को मिला सन्देश  

मृत्युंजय दीक्षित 

उप्र में मैनपुरी लोकसभा व खतौली तथा रामपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव परिणाम आ चुके हैं । राजनीति के पंडित इनका विश्लेषण कर रहे हैं  जबकि राजनैतिक दल इनके आधार पर अपनी भविष्य की रणनीति का संकेत दे रहे हैं।मैनपुरी लोकसभा उचुपनाव में समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार और सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद उपजी सहानुभूति के चलते  क्षेत्र के मतदाताओं का स्नेह प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की है। मुजफ्फरनगर के खतौली सीट में  सपा -रालोद गठबंधन प्रत्याशी मदन भैया ने अपनी नई सोशल इंजीनियरिंग और  रालोद नेता जयंत चौधरी के  क्षेत्र में लगातार कैंप करने के कारण ये सीट भाजपा से  छीन ली है। रामपुर से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार आकाश सक्सेना चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं। भाजपा ने पहली बार यह सीट जीतकर  सपा के कद्दावर मुस्लिम नेता आजम खां की राजनैतिक जमीन को गहरा झटका दिया  है। 

उपचुनाव परिणामों  से सबसे बड़ा लाभ समाजवादी पार्टी के मनोबल को मिला है जबकि भारतीय जनता पार्टी को अब अति आत्मविश्वास से बचकर जनता के बीच रह कर काम करना पड़ेगा। यद्यपि समाजवादी पार्टी को मैनपुरी में  सफलता का स्वाद बहुत आसानी से नहीं मिला है जबकि वहां पर स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के प्रति सहानुभूति की लहर दौड़ रही थी। मैनपुरी में सपा प्रत्याशी डिंपल यादव को विजयी बनाने के लिए सम्पूर्ण यादव परिवार ने एकजुट होकर जोर लगाया और सपा नेता अखिलेश यादव ने घर- घर जाकर मतदाता सम्पर्क किया। मैनपुरी में यह पहली बार देखा गया कि सपा के पक्ष में हवा बह रही थी और सहानुभूति लहर के कारण उनकी जीत तय थी तब भी यह लोग चुनावों में मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए प्रशासन पर चुनावों में धांधली करने का आरोप लगा रहे थे। सपा मुखिया ने चाचा शिवपाल का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंच पर ही सबके सामने उनके पैर छुए जिसका सकारात्मक प्रभाव  पड़ा। मैनपुरी का चुनाव जीतने के लिए सपा पर इतना अधिक दबाव था कि सपा मुखिया और चाचा शिवपाल यादव 20 दिनों तक मैनपुरी में डेरा डाले रहे। 

मैनपुरी में भाजपा प्रत्याशी रघुराज सिंह शाक्य भले ही मुकाबले में कहीं नजर नहीं आए लेकिन उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए एक मार्ग खोल दिया हैं।यहां पर चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने यादव बनाम अन्य का समीकरण बनाने का प्रयास किया है और अब भविष्य में भाजपा अपनी इसी रणनीति को आगे बढ़ाने का काम करेगी।

उपचुनाव परिणामों ने समाजादी पार्टी व रालोद गठबंधन को एक नई संजीवनी प्रदान करने का काम किया है।चाचा शिवपाल यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का सपा में विलय हो गया है और अब उनकी गाड़ी में सपा का झंडा फिर से लग गया है। 

माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के नेताओं की इस एकजुटता व चुनाव में मिली संजीवनी का असर नगर निगम व निकाय चुनावें में भी देखने को मिल सकता है क्योंकि अब सपा परिवार में दूरियां समाप्त हो चुकी हैं जिसका असर सपा के बिखरे संगठन व कार्यकर्ताओं पर भी पड़ा है। लेकिन यह भी सच है कि इन उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला था जबकि आगामी चुनावों में बसपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित कई अन्य छोटे दल व उनका गठबंधन भी चुनावी मैदान में अपनी ताकत के साथ उतरेगा और कहीं न कहीं समाजवाद व उनकी एकजुटता को को सीधी टक्कर  देंगे।चुनावी मैदान में ओवैसी की पार्टी भी होगी और सभी दल मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति भी करेंगे। 

वहीं आगामी चुनावों में मुस्लिम बहुल रामपुर में मिली विजय को आधार बनाकर भाजपा पसमांदा मुसलमानों  के बीच अपनी पैठ और मजबूत बनाएगी।प्रदेश की राजनीति में चाचा शिवपाल की वास्तविक अहमियत का पता आने वाले निकाय  चुनावों में चल जाएगा। सपा के लिए अभी सबसे बड़ी समस्या 19 प्रतिशत मुसलमानों के बीच एक नया मुस्लिम चेहरा खोजने की भी रहेगी क्योंकि रामपुर में अब आजम खां की राजनीति का सूरज ढल चुका है। 

मुजफ्फरनगर की खतौली सीट पर भाजपा प्रत्याशी राजकुमार सैनी की पराजय भाजपा को परेशान करने वाली है।यहां पर दलित समाज, मुस्लिम, जाट मतदाता के मजबूत समीकरण ने भाजपा को हरा दिया।नोएडा के चर्चित त्यागी प्रकरण के कारण त्यागी समाज की नाराजगी का असर भी दिखाई दिया ।दलितों की आजाद समाज पार्टी ने भी रालोद प्रत्याशी मदन भैया को वोट देकर विजयी बना दिया। 

रामपुर – रामपुर विधानसभा उपचुनाव में 71 सालों के बाद मुस्लिम  बहुल इलाके में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे के बल पर भाजपा प्रत्याशी आकाश सक्सेना चुनाव जीतने में कामयाब रहे। रामपुर में मात्र 33 फीसदी मतदान के बावजूद आकाश सक्सेना 34 हजार मतों से चुनाव जीतने में सफल रहे। रामपुर सीट जीतने के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का मनोबल ऊंचा हुआ है। आने वाले समय में भाजपा रामपुर की रणनीति को नई धार देगी यह तय है।मुस्लिम बहुल सीट जीतकर भाजपा ने अब यह संकेत दे दिया है कि वह अब मुसलमानों के लिए अछूत नहीं रह गई है। रामपुर को अपना बनाकर भाजपा सबका साथ , सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विश्वास  के मूलमंत्र को चरितार्थ करने का सन्देश भी देने में सफल रही है। 

रामपुर की सफलता भाजपा के लिए सबसे बड़ी इसलिए है क्योंकि यहां पर 22 साल से आजम खां के परिवार का कब्जा था 10 चुनावों  में आजम खां और एक बार उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फात्मा विजयी रही हैं।वर्ष 2002 के बाद यह पहला अवसर था जब उनके परिवार से यहां पर कोई उम्मीदवार नहीं था। ।मैनपुरी व खतौली की पराजय के बाद जहां भाजपा  नई रणनीति पर काम करने जा रही है वहीं दूसरी ओर अब वह रामपुर की जीत को आधार बनाकर पसमांदा मुस्लिम समाज के बीच अपनी उपस्थिति को गहनता के साथ दर्ज कराने का अभियान प्रारंभ  करने जा रही है और मुस्लिम बहुल सीटों विशेषकर जहां पर पसमांदा मुस्लिम समाज की संख्या अधिक है व वहां पर कुछ मुस्लिम चेहरों  को भी मैदान में उतार सकती है। 

वैसे भी अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि आगामी निकाय चुनाव या 2024 के लोकसभा चुनावों पर अथवा  भविष्य की राजनीति पर क्या असर होगा, न ही इन उपचुनावों  के आधार पर 2024 की राजनीति और समीकरणों को लेकर कोई भविष्यवाणी की जा सकती है ।अतीत में गोरखपुर, फूलपुर,कैराना और नूरपुर सीटों पर भी उपचुनाव में हार के बावजूद 2019 के लोकसभ चुनावों में भाजपा को बड़ी ऐतिहासिक सफलता मिली। 2024 में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण भी पूरा हो चुका होगा और काशी में ज्ञानवापी विवाद पर कुछ स्थिति साफ हो चुकी होगी। 

इसमें संशय नहीं है कि उपचुनावों के परिणामों ने भाजपा को सावधान होने का संकेत अवश्य  दे दिया है। भाजपा को संगठन और सरकार के अंदर और बाहर हर तरह से सतर्क रहना  है। मैनपुरी में ही सपा मुखिया ने दोनो उपमुख्यमंत्रियों  से कहा था कि आप सौ विधायक लेकर आयें हम आपको मुख्यमंत्री बना देंगे।अब राजनीति के खाली समय में चाचा और भतीजा मिलकर योगी सरकार को गिराने की साजिशें तेज कर सकते हैं। भाजपा को जमीनी धरातल पर चाचा -भतीजा के षड्यंत्रों  से बचकर रहना होगा।

नोबल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी की किताब ‘तुम पहले क्यों नहीं आए’ का लोकार्पण 

IMG-20221210-WA0012.jpg

मीडिया स्कैन संवाददाता

इसमें दासता और उत्पीड़न की कैद से प्रताड़ित बच्चों की 12 सच्ची कहानियां हैं
• इन कहानियों को पढ़कर अगर आपकी आँखों में आंसू आते हैं तो वह आपकी इंसानियत का सबूत है : कैलाश सत्यार्थी
• जैसा कि महात्‍मा गांधी जी ने कहा था कि उनका जीवन ही उनका संदेश है, ठीक वैसे ही कैलाश सत्‍यार्थी जी का जीवन ही उनका संदेश है :  अनुपम खेर

‘तुम पहले क्यों नहीं आए’  में दर्ज हर कहानी अंधेरों पर रौशनी की, निराशा पर आशा की, अन्याय पर न्याय की, क्रूरता पर करुणा की और हैवानियत पर इंसानियत की जीत का भरोसा दिलाती है। राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी की पुस्तक का लोकार्पण कॉन्सिटीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में राजकमल प्रकाशन एवं इंडिया फॉर चिल्ड्रेन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

‘तुम पहले क्यों नहीं आए’ में जिन बच्‍चों की कहानियां हैं उनमें से कई को संयुक्‍त राष्‍ट्र जैसे वैश्विक मंच से विश्‍व नेताओं से मुखातिब होने और बच्‍चों के अधिकार की मांग उठाने के मौके भी मिले। इसके बाद बेहतर बचपन को सुनिश्चित करने के लिए कई राष्‍ट्रीय-अंतरराष्‍ट्रीय कानून भी बने। 

कार्यक्रम से ठीक पहले बच्चों के ‘हम निकल पड़े हैं’  समूह गान और नारों ने वातावरण को उल्लास से भर दिया। इस दौरान बच्चों ने ‘हर बच्चे का है अधिकार, रोटी खेल पढ़ाई प्यार’ का नारा लगाया। इसके बाद प्रख्यात अभिनेता अनुपम खेर, नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी, श्रीमती सुमेधा कैलाश, राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक माहेश्वरी और पुस्तक के नायक व पूर्व बाल मजदूरों ने किताब का लोकार्पण किया।

अपने संबोधन में अनुपम खेर ने कहा, ‘फिल्मों के नायक भले ही लार्जर देन लाइफ हों, लेकिन सत्यार्थी जी ने असली नायकों को बनाया है। वे खुद में एक प्रोडक्शन हाउस हैं।’ दिग्‍ग्‍ज अभिनेता ने कहा, ‘फिल्मों में जो नायक-नायिका होते हैं वे नकली होते हैं,  असली नायक-नायिका तो इस किताब के बच्चे हैं, जिन्हें कैलाश सत्यार्थी जी ने बनाया है। ये आपकी ही नहीं देश की भी पूंजी हैं। मैं लेखक के साथ राजकमल प्रकाशन को भी बधाई देता हूं कि उन्होंने ऐसी किताब प्रकाशित की है।’

दिग्‍गज अभिनेता ने कहा,  ‘जैसा कि महात्‍मा गांधी जी ने कहा था कि उनका जीवन ही उनका संदेश है, ठीक वैसे ही कैलाश सत्‍यार्थी जी का जीवन ही उनका संदेश है।’

इसके बाद अनुपम खेर ने किताब की भूमिका के कुछ अंश भी पढ़कर सुनाए। अनुपम खेर से बातचीत में कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि अगर इन कहानियों को पढ़कर आपकी आंखों में आसूं आते हैं तो वह आपकी इंसानियत का सबूत है। बच्चों से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। हमारे लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम खुद भी अपने भीतर के बच्चे को पहचानें।

श्री सत्‍यार्थी ने आगे कहा, ‘इस किताब को कागज पर लिखने में भले ही मुझे 12-13 साल लगे हों लेकिन इसमें जो कहानियां दर्ज हैं उन्हें मेरे हृदय पटल पर अंकित होने में 40 वर्षों से भी अधिक समय लगा है। मैं साहित्यकार तो नहीं हूं पर एक ऐसी कृति बनाने की कोशिश की है जिसमें सत्य के साथ साहित्य का तत्व भी समृद्ध रहे। ये कहानियां जिनकी हैं, मैं उनका सहयात्री रहा हूं; इसलिए जिम्मेदारी बढ़ जाती है। स्मरण के आधार पर कहानियां लिखीं, फिर उन पात्रों को सुनाया जिनकी ये कहानियां हैं। इस तरह सत्य घटनाओं का साहित्य की विधा के साथ समन्वय बनाना था। मैंने पूरी ईमानदारी से एक कोशिश की है। साहित्य की दृष्टि से कितना खरा उतर पाया हूं ये तो साहित्यकारों और पाठकों की प्रतिक्रिया के बाद ही कह सकूंगा।’

समाज के असली नायकों को गढ़ा है कैलाश सत्‍यार्थी ने : अनुपम खेर 

लोकार्पण के मौके पर राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक माहेश्वरी ने कहा कि इस पुस्तक को प्रकाशित करना हमारे लिए विशेष रहा है क्‍योंकि यह बच्चों के बारे में है, वह भी उन बच्चों के बारे में जिन्हें समाज की विसंगतियों का शिकार होना पड़ा, जिन्हें हर तरह के अभाव और अपमान से गुजरना पड़ा। कैलाश सत्यार्थी और उनके ‘बचपन बचाओ अभियान’ के चलते वे उन अमानवीय हालात से मुक्त होकर आज हमारे बीच हैं, नए जीवन के सपने देख रहे हैं। यह किताब हमें यह भी याद दिलाती है कि अनेक बच्चे आज भी ऐसी ही परिस्थितियों में जीवन बिता रहे होंगे, उनके लिए हमें लगातार काम करते रहना होगा। सिर्फ संगठन के स्तर पर नहीं, निजी तौर पर भी एक जागरूकता पैदा करनी होगी ताकि समाज खुद भी उन बच्चों के प्रति संवेदनशील बने, और ऐसे हालत ही न बनने दें कि भविष्य के ये नागरिक इस तरह नष्ट हों। गुलामी अभिशाप है। हमारे समय में भी गुलामी की मौजूदगी बहुत चिंता की बात है। लेकिन यह एक कठोर सच्‍चाई है कि हमारे समय में भी गुलामी शेष है। बच्चों को भी गुलामी से बख्‍शा नहीं जाता। पर एक और सच्‍चाई है कि हमारे समय में कैलाश सत्यार्थी जैसे लोग हैं जो बच्चों को गुलाम बनाए जाने के खतरों से पूरी दुनिया को अगाह कर रहे हैं। सत्यार्थी जी ने बचपन पर मंडराते खतरों के बारे में बताया है। साथ ही बच्चों को उन खतरों से मुक्त कराने का कार्य जान का जोखिम उठा कर भी किया है। अपनी किताब में उन्होंने अपने अनुभव और संस्मरण लिखे हैं यह एक प्रेरक दस्तावेज है। बचपन अगर सुरक्षित नहीं है तो दुनिया का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता। कैलाश जी की किताब इस सच्‍चाई को रेखांकित करती है और बचपन को हर प्रकार के शोषण से मुक्त रखने में छोटे से छोटे प्रयास की आवश्यकता व उसकी सार्थकता को स्पष्ट करती है।’

लोकार्पण कार्यक्रम से पहले ‘कैलाश सत्यार्थी से मुलाकात’ के दौरान आमंत्रित अतिथियों और मीडियाकर्मियों ने उनसे आंदोलन के विषय में सवाल किए। इस दौरान श्री सत्यार्थी ने उन्हें अपने आंदोलन के सरोकारों और प्रक्रिया से अवगत कराया। इस अवसर पर पुस्तक के नायक बच्चों पर केंद्रित एक लघु फिल्‍म का प्रदर्शन किया गया। बच्चों ने उपस्थित जनों को संबोधित भी किया और आज वे किन जिम्मेदारियों का निर्वाह कर रहे हैं, उनके बारे में बताया।

‘तुम पहले क्यों नहीं आए’ किताब के बारे में :

‘तुम पहले क्यों नहीं आए’ में दर्ज हर कहानी अंधेरों पर रौशनी की, निराशा पर आशा की, अन्याय पर न्याय की, क्रूरता पर करुणा की और हैवानियत पर इंसानियत की जीत का भरोसा दिलाती है। लेकिन इस जीत का रास्ता बहुत लंबा, टेढ़ा-मेढ़ा और ऊबड़-खाबड़ रहा है। उस पर मिली पीड़ा, आशंका, डर, अविश्वास, अनिश्चितता, खतरों और हमलों के बीच इन कहानियों के नायक और मैं, वर्षों तक साथ-साथ चले हैं। इसीलिए ये एक सहयात्री की बेचैनी, उत्तेजना, कसमसाहट, झुंझलाहट और क्रोध के अलावा आशा, सपनों और संकल्प की अभिव्यक्ति भी हैं। पुस्तक में ऐसी 12 सच्ची कहानियां हैं जिनसे बच्चों की दासता और उत्पीड़न के अलग-अलग प्रकारों और विभिन्न इलाक़ों तथा काम-धंधों में होने वाले शोषण के तौर-तरीक़ों को समझा जा सकता है। जैसे; पत्थर व अभ्रक की खदानें, ईंट-भट्ठे, कालीन कारखाने, सर्कस, खेतिहर मजदूरी, जबरिया भिखमंगी, बाल विवाह, दुर्व्यापार (ट्रैफिकिंग), यौन उत्पीड़न, घरेलू बाल मजदूरी और नरबलि आदि। हमारे समाज के अंधेरे कोनों पर रोशनी डालती ये कहानियां एक तरफ हमें उन खतरों से आगाह करती हैं जिनसे भारत समेत दुनियाभर में लाखों बच्चे आज भी जूझ रहे हैं। दूसरी तरफ धूल से उठे फूलों की ये कहानियां यह भी बतलाती हैं कि हमारी एक छोटी-सी सकारात्मक पहल भी बच्चों को गुमनामी से बाहर निकालने में कितना महत्त्वपूर्ण हो सकती है, नोबेल पुरस्कार विजेता की कलम से निकली ये कहानियां आपको और अधिक मानवीय बनाती हैं, और ज्‍यादा जिम्‍मेदार बनाती है।

भारत सरकार के 2070 के लक्ष्य से पहले कार्बन न्यूट्रल का लक्ष्य हासिल करने की घोषणा की

tamil.jpg

मीडिया स्कैन संवाददाता

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने कहा, “जलवायु परिवर्तन आज मानवता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है. एक तटीय राज्य होने के कारण, जलवायु परिवर्तन के संभावित दुष्प्रभावों का सामना करने के लिए तमिलनाडु क्लाइमेट चेंज मूवमेंट का योगदान महत्वपूर्ण होगा. मुझे यकीन है कि यह पहल हमारे पर्यावरण और हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवन की रक्षा के लिए समर्पित होकर कार्य करेगा.”

जलवायु अनुकूलन संबंधी कई अग्रणी पहल करने के लिए जाने जाना वाला तमिलनाडु भारत का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने देश को जी20 की अध्यक्षता मिलने के तुरंत बाद शुक्रवार 9 दिसंबर को तमिलनाडु जलवायु परिवर्तन मिशन शुरू किया.

इसके साथ तमिलनाडु भारतीय राज्यों में जलवायु परिवर्तन मिशन शुरू करने वाला पहला राज्य बनने के लिए भी तैयार है. इस मिशन के साथ-साथ राज्य ने इस साल सितंबर में ग्रीन तमिलनाडु मिशन और अगस्त में तमिलनाडु वेटलैंड्स मिशन भी प्रारंभ किया है. इस नवीनतम जलवायु परिवर्तन मिशन के तहत, समर्पित रूप से कार्य करने वाली एक विशेष प्रयोजन कंपनी – तमिलनाडु ग्रीन क्लाइमेट कंपनी (टीएनजीसीसी) राज्य जलवायु कार्य योजना का प्रभावी कार्यान्वयन करेगी.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने कहा, “जलवायु परिवर्तन आज मानवता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है. एक तटीय राज्य होने के कारण, जलवायु परिवर्तन के संभावित दुष्प्रभावों का सामना करने के लिए तमिलनाडु क्लाइमेट चेंज मूवमेंट का योगदान महत्वपूर्ण होगा. मुझे यकीन है कि यह पहल हमारे पर्यावरण और हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवन की रक्षा के लिए समर्पित होकर कार्य करेगा.”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “हमारी सरकार जलवायु परिवर्तन को एक प्रमुख मानवीय संकट के रूप में देखती है. सत्ता में आने के बाद से हमने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई उपाय किए हैं. उच्च कार्बन उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वार्मिंग की समस्या पैदा हुई है. कई वैज्ञानिकों ने कहा है कि दुनिया को 2050 तक कार्बन न्यूट्रल का लक्ष्य हासिल कर लेना चाहिए. पिछले साल कॉप-26 में भारत सरकार ने घोषणा की थी कि वह 2070 तक कार्बन न्यूट्रल का लक्ष्य हासिल कर लेगी. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि तमिलनाडु उससे पहले यह लक्ष्य हासिल कर लेगा.”

जलवायु परिवर्तन पर भारत के प्रयास में अग्रणी बना तमिलनाडु

स्टालिन ने कहा, “यह सिर्फ तमिलनाडु या भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक पहल है. जलवायु परिवर्तन हम सभी के लिए चिंता का विषय है और तमिलनाडु सरकार इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से लेती है. मैं आगे बढ़कर नेतृत्व करने में गौरवान्वित महसूस करता हूँ और इस मिशन को मैं अपने जीवन के मिशन के रूप में देखता हूं.”

एम के स्टालिन ने हाल ही में जी20 तैयारी बैठक में भाग लेते हुए भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया था. पिछले महीने बाली में जी20 सम्मेलन में वैश्विक नेताओं ने भू-मंडलीय तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सिमित रखने की कोशिशों को आगे बढ़ाने का फैसला किया और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता को भी स्वीकार किया.

इस जलवायु परिवर्तन मिशन के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल हैं: तमिलनाडु में ग्रीनहाउस गैस का समग्र उत्सर्जन कम करना, सार्वजनिक परिवहन उपयोग में वृद्धि, हरित ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से उत्सर्जन कम करने की कार्यनीति तैयार करना, तमिलनाडु में वन आच्छादन बढ़ाना, कचरे का प्रभावी ढंग से निपटारा करना, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के तरीकों का विकास, अनुकूलन के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना, शैक्षिक संस्थानों में जलवायु शिक्षा की शुरुआत, जलवायु कार्ययोजना में महिलाओं और बच्चों पर प्राथमिक रूप से ध्यान केंद्रित करना और जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समझने के लिए स्वास्थ्य संबंधी एक समग्र दृष्टिकोण, जिसमें मानव, पशु और पारिस्थितिक स्वास्थ्य शामिल है, अपनाना.

तमिलनाडु सरकार ने जलवायु परिवर्तन पर तमिलनाडु गवर्निंग काउंसिल की भी स्थापना की है. भारत में यह पहली बार है कि जलवायु परिषद की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे. परिषद तमिलनाडु जलवायु परिवर्तन मिशन के लिए नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करेगी, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव कम करने संबंधी सलाह देगी, तमिलनाडु राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना तैयार करेगी और इसके कार्यान्वयन के लिए उचित दिशानिर्देश प्रदान करेगी.

डॉ. सुप्रिया साहू (आईएएस – अपर मुख्य सचिव, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग, तमिलनाडु) ने कहा, “एक तटीय राज्य होने से तमिलनाडु लगातार सख्त मौसम की घटनाओं के कारण जलवायु परिवर्तन के प्रकोप का सामना कर रहा है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व में राज्य ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के तीन पहलुओं – न्यूनीकरण, अनुकूलन और इसका सामना करने में सक्षम बनने संबंधी कई अभिनव और अनूठे कार्यक्रम और अभियान शुरू किए हैं.

उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, हमारा प्रयास सभी हितधारकों और आम जनता को जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूक करना है. इस संबंध में व्यापक जलवायु साक्षरता कार्यक्रम शुरू करने की योजना पर काम चल रहा है जो आने वाले वर्षों में राज्य को जलवायु परिवर्तन के बारे में जानकार और जागरूक बना देगा.”

विभिन्न प्रमुख सरकारी विभागों के अनुभवी वरिष्ठ सचिवों के अलावा, जलवायु परिवर्तन से संबंधित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ पैनल में शामिल हैं. अर्थशास्त्री श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया, इंफोसिस के संस्थापक और अध्यक्ष श्री नंदन एम. नीलकेनी, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के छठे कार्यकारी निदेशक श्री एरिक. एस. सोलहेम, नेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट के संस्थापक और निदेशक श्री रमेश रामचंद्रन, पूवुलागिन नानबर्गल के समन्वयक श्री जी. सुंदरराजन, रामको सोशल सर्विसेज के प्रमुख श्री निर्मला राजा इस कार्यकारी परिषद के विशिष्ट सदस्य हैं.

गवर्निंग काउंसिल के सदस्य जी सुंदरराजन ने कहा, “ऐसे समय में जब भारत जलवायु परिवर्तन के गंभीर दुष्प्रभावों का सामना कर रहा है, यह मिशन स्थापित करने की तमिलनाडु सरकार की पहल स्वागत योग्य है. ऐसा करते हुए तमिलनाडु सरकार भारत के अन्य राज्यों के लिए मिसाल भी कायम कर रही है. मुझे आशा है कि यह मिशन जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को अनुकूल बनाने और कम करने में मदद करेगा.”

इसके अलावा, तमिलनाडु की नई सरकार ने सत्ता में आने के बाद पिछले डेढ़ साल के दौरान जलवायु परिवर्तन संबंधी कई पहल की हैं.

तमिलनाडु सरकार ने 10 समुद्र तटों को बेहतर बनाने और अगले 5 वर्षों में इंटरनेशनल ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन प्राप्त करने के लिए जिला-स्तरीय जलवायु मिशन, तमिलनाडु मुख्यमंत्री ग्रीन फेलोशिप कार्यक्रम, जलवायु परिवर्तन पर शोध के लिए जलवायु स्टूडियो निर्माण और ग्रीन स्कूल योजना की पहल भी की है.

इसके अतिरिक्त, तमिलनाडु सरकार पर्यावरण अनुकूल उपायों से तटीय क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के लिए तैयार करने हेतु उन्हें बेहतर बनाने, कचरे के कुशलतापूर्वक निपटारे और इसे पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी और खाद में बदलने के लिए कार्बन संवर्धन योजनाओं, ऊर्जा-बचत भवन रूपरेखा के लिए मानक विकसित करने हेतु स्थायी आवास कार्यक्रम और तमिलनाडु में इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए जलवायु साक्षरता अभियान जैसी परियोजनाओं को लागू करने की योजना बना रही है.

विशेषज्ञों के वक्तव्य:

“अपने प्राकृतिक संसाधनों, उर्जावान लोगों और प्रगतिशील नेतृत्व के साथ तमिलनाडु भारत और विश्व के पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन का नेतृत्व करने के लिए बेहतरीन स्थिति में है. राज्य की महत्वाकांक्षा सौर, पवन और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का बड़ा केंद्र बनने की है. यह अपने हरित आच्छादन को 23 से बढ़ाकर 33 करेगा. तमिलनाडु पर्यावरण अनुकूल कृषि, बिजली से चलने वाले वाहनों और ग्रीन फाइनेंस में अग्रणी बन सकता है. भारत के सबसे समृद्ध और सफल राज्यों में से एक के रूप में यह बेहतर पर्यावरण संरक्षण के जरिए पूरे देश को जलवायु संकट से सफलतापूर्वक निपटने में मदद कर सकता है तथा रोजगार और समृद्धि पैदा कर सकता है. मैं मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अध्यक्षता वाली तमिलनाडु क्लाइमेट गवर्निंग काउंसिल में शामिल होकर और राज्य के हरित नेतृत्व की राह का सहयात्री बनाकर उत्साहित हूं.

एरिक. एस. सोलहेम, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के छठे कार्यकारी निदेशक

“अगर हम अगले 10 वर्षों में प्रणालीगत बदलाव नहीं करते हैं, तो हमें बहुत कठिन भविष्य का सामना करना पड़ेगा. इस कारण हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए, हमें अभी से कार्य करना चाहिए और इसके लिए सभी स्तरों पर आमूलचूल और अहम परिवर्तन करने की आवश्यकता है. भूमिकाएँ स्पष्ट हैं; सरकार को कानून बनाना चाहिए, उद्योग को नए खोज करने के लिए कहा जाना चाहिए और नागरिक प्रशासन को इसे सुगम-सुलभ बनाना चाहिए. हमें मुद्दों का डटकर सामना करने की जरूरत है, किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या आत्म-प्रचार की कोई जगह नहीं है. हमें संबंधित क्षेत्र के विषयों में अत्याधुनिक ज्ञान रखने वालों की पहचान करनी चाहिए, उनके विचारों को अपनाना चाहिए और समाज को एक ऐसे भविष्य की ओर ले जाना चाहिए जो टिकाऊ और न्यायसंगत दोनों हो. समस्या हल करने के लिए साथ काम करना सबसे संतोषजनक होता है, इसलिए आइए हम सब खुशी से एक साथ आएं, नए दोस्त बनाएं और दुनिया के लिए जरुरी समाधान खोजने के लिए आवश्यक परिस्थितियों का निर्माण करें.”

निर्मला राजा, प्रमुख, रामको सोशल सर्विसेज

“भारत के जी20 के अध्यक्ष बनने के कारण, हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसी रणनीतियां और केस स्टडी उपलब्ध कराएं जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के हमारे उपायों को प्रस्तुत करें. भारत को पर्यावरण और वन मंत्रालय के अलावा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक अलग मंत्रालय बनाने की जरूरत है. एक ऐसे संस्थागत ढांचे की जरूरत है जो सीधे पीएमओ को रिपोर्ट करे. राज्य जलवायु परिवर्तन मिशन की शुरूआत कर तमिलनाडु द्वारा एक सराहनीय प्रयास किया गया है. जलवायु कार्रवाई संबंधी केंद्रीय रूपरेखा के अनुरूप राज्य अपने प्रयासों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. साथ ही तमिलनाडु यह उदहारण प्रस्तुत कर रहा है कि हम कैसे जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को अपनी विकास योजनाओं में शामिल कर सकते हैं, जो अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय है. यह मिशन न केवल तमिलनाडु बल्कि अन्य राज्यों में भी जलवायु कार्रवाई के लिए उदहारण बनेगा.

अंजल प्रकाश, अनुसंधान निदेशक और एसोसिएट प्रोफेसर, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस और आईपीसीसी के मुख्य लेखक

राष्ट्रीय चिंतन में लगे रहने वाले लोगों का मिलन : कलेस समागम

01.jpg

जलज कुमार अनुपम

मुझे नीजी तौर पर मुख्यमंत्री, हरियाणा मनोहर लाल खट्टर की एक बात शानदार लगी कि वैचारिक युद्ध में शत्रु के प्रति कोई दयाभाव नही होनी चाहिए।

कलाप्रेमी लेखक संघ (कलेस) कहने को एक आम समूह है जिसमें राष्ट्रीय हित का चिंतन मनन करने वाले पत्रकार, स्तम्भकार, लेखक और कला समीक्षा से जुड़े लोग हैं। कोविड के बाद से एक मिलन की योजना बन रही थी जिसको मीडिया स्कैन के तत्वावधान में 26 नवंबर 2022 को धरातल पर उतारा गया। उतरा भी तो क्या गजब उतरा! जो आया कुछ न कुछ लेकर लौटा और जो न शामिल हुए उनके मन में एक मीठी आह उठी की मुझे भी आना था पर कोई बात नही अलगी बार!

लेखक पारितोष चकमा अपनी पुस्तक भेंट करते हुए

राष्ट्रवादी लोगों का सहृदय होना आम बात है लेकिन विचारधारा के आधार पर छोटे को थपथपाना, उनमें हौसला भरना, बड़ो द्वारा विचारधारा के वैश्विक विकास के लिए आबद्ध किये योजनाओं को धरातल पर उतारने में अपना सर्वस्व झोंक देना जैसी भावनाओं में पहले एक गैप दिखती थी जो अब मिटती नजर आ रही है। यह सुखद भविष्य के संकेत हैं।

अब लगता है कि सुदूर गाँव में अपने विचारधारा से जुड़े किसी भाई को दिल्ली से बैठे पुचकारना समान्य बात है।यह हौसला हर को नीज की चिंता छोड़ राष्ट्रीय चिंतन के लिए प्रेरित करेगा।

यह मिलन इसलिए भी अनोखा था कि इसमें सब बराबर थे! यहाँ जब मुख्यमन्त्री भी आये तो ऐसा लगा कि हमारे ही बीच से कोई हैं।

मुझे नीजी तौर पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल महोदय की एक बात शानदार लगी कि वैचारिक युद्ध से शत्रु के प्रति कोई दयाभाव नही होनी चाहिए।

कलेस के जुटान में थी सबकी बराबर की भागीदारी

मैं खुद भी यहीं मानते रहा हूँ कि मतभेद और मनभेद के ढोंग से बचना चाहिए। शत्रु के साथ कैसा समझौता! अधर्म का धर्म के साथ आखिर कैसा सबंध!

दुनिया में दो ही खेमे हैं! एक में आप धर्म के साथ हैं और दूसरे में अधर्म के साथ! कर्म और कुकर्म के आलावा किसी अन्य नये वर्गीकरण की कोइ जरुरत नही है।

कुछ वक्ताओं ने ऐसे भाव प्रकट किए कि जैसे वो मेरे ही हों! वहाँ पहुँचने के बाद मैं स्वत: आयोजक का भाव लिए खड़ा था! यह विचारधारा की ताकत है।यह भाव की राष्ट्रीय चिंतन से जुड़ा हर साथी हमारे लिए महत्वपूर्ण है ने इस कार्यक्रम को नये आयाम पर पहुँचा दिया!

हुकूम देव नारायण यादव,​ स्वामी विशालानंद और कलेस मंडली

कलेस के उन सारे साथियों तक बधाई और मंगलकामना पहुँचे जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाया! राष्ट्रहित आधारित सबके कर्म हो! राष्ट्रहित आधारित मनन हो!

जय हो! जय जय हो!

scroll to top