शेख हसीना पांचवीं बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनी

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शेख हसीना ने आज शाम पांचवी बार देश की प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने ढाका के बंगभवन में प्रधान मंत्री और नए मंत्रिमंडल के सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। प्रधानमंत्री के रूप में सुश्री हसीना का यह लगातार चौथा कार्यकाल होगा। 76 वर्षीय शेख हसीना बांग्लादेश की 12वीं प्रधान मंत्री हैं।

इससे पहले दोपहर में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 25 मंत्रियों और 11 राज्य मंत्रियों को नये मंत्रिमंडल का सदस्य नियुक्त किया। शेख हसीना ने वित्त मंत्री मुस्तफा कमाल, कृषि मंत्री अब्दुर रज्जाक, विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन और वाणिज्य मंत्री टीपू मुंशी जैसे कुछ दिग्गजों सहित 30 मौजूदा कैबिनेट सदस्यों को नये मंत्रिमंडल में शामिल नही किया है।

निर्वासन में रहते हुए 34 साल की उम्र में शेख हसीना को अवामी लीग का अध्‍यक्ष चुना गया। वह 17 मई, 1981 को बांग्‍लादेश लौटीं और लोकतंत्र की बहाली के लिए सैन्य शासक जियाउर रहमान के शासन के खिलाफ अभियान शुरू किया। शेख हसीना के नेतृत्व में अवामी लीग ने जून 1996 के संसदीय चुनावों में जीत हासिल की और शेख हसीना प्रधानमंत्री बनी।

राम मंदिर निमंत्रण को कांग्रेस ने किया अस्वीकार

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कांग्रेस ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यक्रम बताते हुए इसके निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी को प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का निमंत्रण मिला था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को एक बयान में कहा, “कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी ससम्मान निमंत्रण अस्वीकार करते हैं जो कि स्पष्ट रूप से आरएसएस-भाजपा का कार्यक्रम है।”

जयराम रमेश ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे, सोनिया गांधी और अधीर रंजन चौधरी को 22 जनवरी को आयोजित होने वाले श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए निमंत्रण पत्र प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि राम देश में लाखों लोगों की आस्था हैं।

धर्म व्यक्तिगत विषय है। रमेश ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस ने राम मंदिर निर्माण को सालों से राजनीतिक परियोजना बनाया हुआ है। एक अधूरे निर्मित मंदिर का उद्घाटन स्पष्ट तौर पर राजनीति लाभ के लिए किया जा रहा है।

कोहली आज सीरीज के पहले मैच में नहीं खेल पाएंगे

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आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2022 के बाद पहली बार टी20 सेटअप में वापसी कर रहे स्टार भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली व्यक्तिगत कारणों से 11 जनवरी को मोहाली में अफगानिस्तान के खिलाफ ओपनर के तौर पर बाहर बैठेंगे। भारत के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी पुष्टि की और कहा कि यशस्वी जयसवाल कप्तान रोहित शर्मा के साथ ओपनिंग करेंगे।

भारत और अफगानिस्तान के बीच टी20 सीरीज की शुरुआत आज मोहाली में होगी; दूसरा मैच 14 जनवरी को इंदौर में खेला जाएगा; और यह सीरीज 17 जनवरी को बेंगलुरु में खत्म होगी।

अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज से इशान किशन और श्रेयस अय्यर की अनुपस्थिति के बारे में बताते हुए द्रविड़ ने स्पष्ट किया कि किशन ने मानसिक थकान के कारण दक्षिण अफ्रीका दौरे के दौरान ब्रेक का अनुरोध किया था और टीम प्रबंधन ने उनके फैसले का समर्थन किया था। हालाँकि, किशन ने तब से खुद को चयन के लिए उपलब्ध नहीं कराया है और तैयार होने पर घरेलू क्रिकेट में वापसी करेंगे।

अफगानिस्तान बनाम श्रृंखला के लिए भारत की टी20 टीम:
रोहित शर्मा (कप्तान), शुबमन गिल, यशस्वी जयसवाल, विराट कोहली, तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, रवि बिश्नोई, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, अवेश खान, मुकेश कुमार

भारत को भारत बनाएं – चलें गांव की ओर

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प्राचीन काल में भारत का पूरे विश्व में साम्राज्य था। आज ऐसे कई प्रमाण मिल रहे हैं, जिससे सिद्ध हो रहा है कि सनातन संस्कृति का अनुपालन करने वाले लोग इंडोनेशिया तक फैले थे। यह तो हम सब जानते ही हैं कि अफगनिस्तान, ईरान, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, बांग्लादेश अखंड भारत का ही हिस्सा रहे हैं। आज एक बार पुनः वैश्विक स्तर पर कई देशों का भारत की सनातन संस्कृति की ओर विश्वास बढ़ रहा है क्योंकि ये देश विभिन्न प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त हैं और उनकी इन समस्याओं का हल ये देश निकाल नहीं पा रहे हैं। प्रत्येक भारतीय वसुद्धैव कुटुम्बकम की भावना पर भरोसा करता है अतः पूरे विश्व को ही अपने कुटुंब का हिस्सा मानते हुए चलता है। और, यह भावना हाल ही में पूरे विश्व ने देखी भी है। कोरोना महामारी के दौरान भारत में भारत सरकार एवं राज्य सरकारों के कर्मचारियों के अतिरिक्त समाज से भी लाखों लोग घर से बाहर निकले एवं समाज में कोरोना बीमारी से ग्रसित नागरिकों की सेवा की। यह केवल भारत में ही हुआ है, विश्व में अन्य देशों के बीच इस प्रकार की भावना नहीं देखी गई थी।

और तो और, भारत ने विभिन्न देशों में दवाईयों एवं टीकों को पर्याप्त मात्रा में पहुंचाया भी। भारत की वास्तविक जीवन दृष्टि यही रही है। इस जीवन दृष्टि के चलते भारत को अन्य देशों से कुछ अलग माना जाता है। भारतीय एक दूसरे के साथ आत्मीय सम्बंध स्थापित करते हैं। प्रत्येक भारतीय की नजर में चर और अचर दोनों में ईश्वर व्याप्त है। इसीलिए भारत के नागरिक पूरे विश्व को आपस में जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। अनेकता में एकता, यह भारत की दृष्टि है। भारत में अनेकता को भी एक त्यौहार की तरह देखा जाता है। केवल भारत में ही इस्लाम के समस्त फिर्के, इसाईयों के विभिन्न मत, पारसी, यहूदी आदि भी बड़ी मात्रा में भारत के अन्य समाज बन्धुओं के साथ भाईचारा रखते हुए खुशी खुशी निवास करते हैं। दरअसल, भारत समाज आधारित इकाई है, पश्चिम की तरह यह राज्य आधारित इकाई नहीं है।

यह भी केवल भारत की विशेषता है कि विदेशों में पले बढ़े, रचे बसे भारतीय मूल के नागरिक भारी संख्या में भारत वापिस आकर यहां पुनः भारत के ही बन जाते हैं। इनमें से भारतीय मूल के कई नागरिक तो अपने शेष बचे जीवन को जीने के लिए भारत के गांवों को चुनते हैं। भारत के गांवों में नैसर्गिक जीवन है। गांवों में निवास कर रहे नागरिकों के बीच आपस में प्रतिस्पर्धा नहीं है। आज भारत के गांव पक्की सड़कों के माध्यम से शहरों के साथ जुड़ गए हैं। 24 घंटे बिजली उपलब्ध रहती है। इंटरनेट जैसी समस्त आधुनिक सुविधाएं भी भारतीय गावों में उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर आज भारत के गांवों में समस्त प्रकार की आधारभूत संरचना विकसित हो चुकी है। गांवों में तुलनात्मक रूप से खर्च भी कम होता है। इसके ठीक विपरीत आज शहरों पर अत्यधिक जनसंख्या का दबाव है एवं शहरों का पर्यावरण बिगड़ रहा है।

पश्चिमी सभ्यता ने मानव जाति का सबसे अधिक नुक्सान किया है। आर्थिक विकास के नाम पर नागरिकों के आपसी भाईचारे को खत्म किया है। प्रत्येक नागरिक केवल अपने बारे में ही सोचता है और चाहता है कि मैं जल्दी से जल्दी किस प्रकार अमीर बनूं, चाहे इसके लिए उसे कुछ गलत कार्य भी क्यों न करना पड़े। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए खाद एवं बीज के नाम पर रासायनिक पदार्थों का उपयोग अत्यधिक मात्रा में किया गया है, इससे जमीन बांझ बन गई है। आज पूरे विश्व में किसान जैविक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं एवं जैविक खेती के माध्यम से उगाए गए फल, सब्जियां महंगे दाम पर भी खरीदने को नागरिक लालायित हो रहे हैं। प्राचीन काल में भारत में कृषि कार्य केवल जैविक खेती के माध्यम से ही क्या जाता था। इसलिए उस खंडकाल में नागरिक बीमारियों से ग्रस्त भी नहीं होते थे। नागरिक ग्रामों में ही हृष्ट पुष्ट, स्वस्थ एवं हंसी खुशी से आपसी भाईचारे से रहते थे।अन्य देशों के साथ साथ आज भारतीय शहरों में भी ग्रामीण नागरिकों के बीच पाई जाने वाली विशेषताओं का अभाव दिखाई देता है।

उक्त कारणों के बीच यदि भारत को एक बार पुनः भारत बनाना है तो हमें गांवों की ओर लौटना होगा। इसकी शुरुआत शहरों में रह रहे युवाओं द्वारा की जा सकती है। आज भारत का युवा तकनीक के क्षेत्र में बहुत आगे निकाल आया है। वे यदि शहरों के स्थान पर अपनी विनिर्माण इकाईयों की स्थापना ग्रामों में करते हैं तो इससे ग्रामीण आबादी का शहरों की ओर पलायन रुकेगा क्योंकि रोजगार के अवसर ग्रामीण इलाकों में ही निर्मित होंगे। ग्रामों में रहकर नैसर्गिक जीवन का आनंद भी उठाया जा सकेगा। प्राचीन भारत में भी छोटे छोटे उद्योग ग्रामीण इलाकों में स्थापित किए जाते थे और उत्पादित वस्तुओं का बाजार भी इन्हीं इलाकों में आसानी से उपलब्ध रहता था। इसके कारण वस्तुओं के दाम तो बढ़ते ही नहीं थे बल्कि उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता के चलते वस्तुओं के दाम सदैव नियंत्रण में रहते थे और कई बार तो कम ही होते रहते थे। मुद्रा स्फीति की समस्या प्राचीन भारत में थी ही नहीं।

युवा वर्ग के ग्रामों की ओर रूख करने से ग्रामीण नागरिकों के शिक्षा के स्तर को सुधारा जा सकता है। स्वास्य सेवाओं को सुधारा जा सकता है। यदि 10 ग्रामों के एक समूह में एक भी अच्छा डॉक्टर उपलब्ध हो जाता है तो कम से कम इस समूह के ग्रामीणों की स्वास्थ्य सेवाओं में तो सुधार होने ही लगेगा। आज गांवों से नागरिकों को अपने इलाज के लिए शहरों की ओर रूख करना होता है। अच्छे युवा डॉक्टरों को गांवों की ओर मुड़ना चाहिए। असली भारत तो आज भी गांवों में ही बसा है। भारत की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी आज भी ग्रामों में ही निवास करती है। आज की युवा पीढ़ी ग्रामों की ओर रूख करने के सम्बंध में गम्भीरता से विचार करे।

भारत में कार्य कर रही विभिन्न आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों को भी इस ओर विशेष ध्यान देने की आज आवश्यकता है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान केवल 16 प्रतिशत के आसपास रहता है जबकि देश की 60 प्रतिशत आबादी ग्रामों में निवास कर रही है। इस वर्ग की प्रति व्यक्ति आय तुलनात्मक रूप से बहुत कम है। इस वर्ग को यदि मध्यम वर्ग में बदला जा सके तो भारत में ही उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ने लगेगी इससे देश के आर्थिक विकास को पंख लग सकते हैं।

भारत की युवा पीढ़ी के विशेष रूप के वे नागरिक जो विदेश में अपनी पढ़ाई सम्पन्न कर भारत लौटे हैं एवं वे भारत में अपना नया कारोबार प्रारम्भ करना चाहते हैं, उन्हें अपना नया कारोबार भारत के गांवों में प्रारम्भ करने के बारे में गम्भीरता से विचार करना चाहिए। इससे भारत को पुनः भारत बनाने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। ऐसा कहा भी जाता है कि भारत की आत्मा आज भी गांवों में ही निवास करती है। युवा उद्यमी यदि गांव की ओर रूख करेंगे तो निश्चित ही भारत के आर्थिक विकास को अगले लेवल पर पहुंचाया जा सकेगा, और भारत की आर्थिक विकास दर 10 प्रतिशत से भी आगे निकल सकती है।

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