कानून को धता बताने की कोशिश नाकाम, सीकर में निषेधाज्ञा से रोका गया दो बहनों का बाल विवाह

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जयपुर । राजस्थान के सीकर जिले के श्रीमाधोपुर में कानून को धता बताकर गुपचुप तरीके से दो बहनों के बाल विवाह को अदालती आदेशों के जरिए रोक दिया गया। जिले में यह पहला मामला है जब बाल विवाह रोकने के लिए अदालत ने निषेधाज्ञा (Injunction Order) जारी की। बाल विवाह की रोकथाम के लिए काम कर रहे नागरिक समाज संगठन गायत्री सेवा संस्थान को अपने एक सदस्य के जरिए सूचना मिली थी कि दो बहनों के बाल विवाह की तैयारी की जा रही है। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए गायत्री सेवा संस्थान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं श्रीमाधोपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। बच्चियों के परिजनों को बाल विवाह के कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए उन्हें समझाया गया और इस विवाह को रोकने के लिए नोटिस दिया गया।

पुलिस व प्रशासनिक टीम के मौके से लौटने के बाद बच्चियों के परिजन कानून को धता बता कर गुपचुप तरीके से विवाह के प्रयास में जुटे रहे। अक्षय तृतीया के दिन यानी 19 अप्रैल को सूचना मिली कि दोनों बच्चियों का बाल विवाह होने जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अगले दिन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं बाल अधिकारिता विभाग के सहयोग से अदालत में अर्जी दी गई, जिस पर श्रीमाधोपुर न्यायालय के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने परिजनों को अदालत में तलब किया और निषेधाज्ञा जारी कर इस बाल विवाह को रोकने का आदेश दिया।

दोनों बच्चियों की उम्र 15 व 17 साल है और वे स्थानीय विद्यालय में पढ़ रही हैं। इस पूरी कार्रवाई में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डॉ. शालिनी गोयल, सीताराम जाखड़, बाल अधिकारिता विभाग से सहायक उपनिदेशक डॉ. गार्गी शर्मा, गायत्री सेवा संस्थान से नरेश कुमार सैनी, अभिषेक बगड़िया, चाइल्ड हेल्पलाइन से राकेश कुमार, राहुल दानोदिया और श्रीमाधोपुर थाना पुलिस टीम सक्रिय रूप से शामिल रही।

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक व राजस्थान बाल आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. शैलेंद्र पंड्या ने कहा कि यह आदेश जिले में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए) 2006 के तहत पहली न्यायिक निषेधाज्ञा है जो भविष्य में ऐसे मामलों में एक नजीर पेश करेगी। यह न केवल दो बालिकाओं के जीवन को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि अब बाल विवाह जैसे अपराधों के विरुद्ध कानूनी हस्तक्षेप और प्रभावी एवं सख्त हो रहा है।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने अदालती आदेश की प्रशंसा करते हुए कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए हमारे देश में कानून हमेशा से सख्त और प्रगतिशील रहे हैं। जरूरत इन कानूनों पर गंभीरता से अमल की है। इस तरह की निषेधाज्ञाएं एक स्पष्ट संदेश देती हैं कि कानून के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता और बाल विवाह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में जिस तरह से सरकार, समाज व न्यायपालिका बाल विवाह के खिलाफ एकजुटता व दृढ़ संकल्प दिखा रहे हैं, उससे उम्मीद जगी है कि हम जल्द ही बाल विवाह मुक्त राजस्थान के सपने को पूरा होते देखेंगे।

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