दयानंद पांडेय
लखनऊ: हम जब बच्चे थे कुछ वाक़ये ग़ज़ब घटते थे l जब अम्मा के साथ बैलगाड़ी से ननिहाल जाते थे तो चलते समय गांव में हमारे बाबा यानी पितामह बड़े प्यार से मुस्कुराते हुए कहते थे कि बाबू अपनी नानी से कहना कि तैयार रहेंगी, हम जल्दी ही उन्हें विदा कराने आने वाले हैं l उधर से वापस आते समय, नाना कहते कि नाती अपनी इया यानी दादी से कहना कि हम जल्दी ही उन को विदा कराने आ रहे हैं l और हम किसी कबूतर की तरह बाल सुलभ अंदाज़ दोनों को यह संदेश दे देते थे l सुन कर इधर इया हंसतीं, उधर नानी हंसतीं l
ग़ज़ब तो तब होता जब ननिहाल का हलवाह , नाई या कहार बड़े प्यार से कहता कि फूफा कहो l ददिहाल में भी यही लोग कहते मौसा कहो l हम किसी छोटी मोटी लालच में आ कर कह देते l तो पाता कि अम्मा दोनों तरफ़ नाराज हो जाती l दुखी हो जाती l ददिहाल में भी , ननिहाल में भी l बात तब समझ नहीं आती थी l कि माजरा क्या है ?
इसी तरह गांव के कुछ चाचा लोग फुआ पक्ष के लोगों को देखते ही कहते थे , पहुना कहो ! पहुना मतलब बहनोई ! ननिहाल पक्ष के लोग तो लोग पहुना कहते ही थे l गांव में इस तरह की ठिठोली, हँसी, मज़ाक़ रिश्तों में मिठास , अपनापन और आत्मीयता घोलते थे l एक दूसरे के प्रति सम्मान और मर्यादा का भाव रखते l
एक समय हरिशंकर तिवारी जब गोरखपुर के चिल्लूपार से विधायक चुन कर लखनऊ आए तो पार्क रोड पर बलिया के विधायक भोला पांडेय के बगल में ही उन्हें आवास आवंटित हुआ l दोनों ब्राह्मण , दोनों माफिया l दोनों में ही गहरा मेलजोल और हँसी मज़ाक इसी भाव में होता l कोई 1986-1987 की बात होगी यह l
भोला पांडेय से हरिशंकर तिवारी कहते , पहुना नहीं कहा l पहुना कहिए l तो यही संवाद भोला पांडेय भी दुहराते l देखा कि अकसर भोला पांडेय को ही पहुना कहना पड़ता l चुहुल चलती रहती l मिठास बनी रहती l भोला पांडेय, तिवारी के पांव भी छूते थे l पहुना भाव बना रहता l
भोला पांडेय के ऊपर बैडमिंटन खिलाड़ी सैय्यद मोदी और अमिता मोदी भी रहते थे l फर्स्ट फ्लोर पर l संजय सिंह का मोदी के घर आना जाना बना रहता था l सैय्यद मोदी के फ्लैट के सामने ही न्यूज एजेंसी यू एन आई का दफ़्तर था l सदाशिव द्विवेदी वहाँ संवाददाता थे l बलिया के ही थे l हमारी अच्छी दोस्ती थी l तो अकसर देखता था कि संजय सिंह आते l जिप्सी चलाते हुए l बिना ड्राइवर के l
सैय्यद मोदी दरवाज़ा खोलता और बाहर निकल कर सीढ़ी उतर जाता l संजय सिंह अंदर जा कर दरवाज़ा बंद कर लेते l एक बार भोला पांडेय से इस की चर्चा की l चुहुल में l वह हँसे l भोला पांडेय भले विधायक थे l माफिया थे l पर रंगबाजी और लौंडपना भी बहुत था l उन्हीं दिनों भोला पांडेय ने एक महिला विधायक सुमनलता दीक्षित से दूसरा विवाह भी कर लिया था l
सुमन लता दीक्षित सुंदर भी थीं और हट्ठी कट्ठी भी l लंबी सी l इस लिए भी भोला पांडेय चर्चा में थे l यह वही भोला पांडेय थे जो जनता पार्टी की मोरार जी देसाई सरकार के समय एक बार आकाशवाणी लखनऊ के स्टूडियो में जबरिया घुस कर इंदिरा गांधी जिंदाबाद का नारा लगा दिया था l जो प्रसारित हो गया था l उन के साथ सुल्तानपुर के देवेंद्र पांडेय भी थे l जल्दी ही भोला पांडेय और देवेंद्र पांडेय ने एक फ़्लाइट में टेनिस बाल को बम बता कर हाईजैक कर लिया था l बाद में कांग्रेस ने दोनों को टिकट दिया और दोनों विधायक चुने गए l
ख़ैर एक दिन भोला पांडेय ने संजय सिंह के भीतर जाते ही बाहर से बेलन लगा कर दरवाज़ा बंद कर पुलिस को फ़ोन कर दिया कि फला फ़्लैट में रंडीबाजी हो रही है l आनन फानन पुलिस ने फ़्लैट घेर लिया l दरवाज़ा खुलवाने पर संजय सिंह बाहर निकले l सरकार में ताक़तवर मंत्री थे l तत्कालीन मुख्य मंत्री वीर बहादुर सिंह को चुनौती देते हुए , मुख्य मंत्री पद के दावेदार l पुलिस उन्हें देखते ही सकपका गई l उल्टे पांव लौट गई l पर हंगामा हो गया l पूरा पार्क रोड जुट गया l
उस दिन भोला पांडेय ने बिना टोके हरिशंकर तिवारी से हंसते हुए कहा , पहुना आज त मजा आ गईल ! हरिशंकर तिवारी अपनी मूंछों में मुस्कुराए और बोले , सरऊ हम के बदनाम करे ख़ातिर हमरे घरे आ गईलs !
पहुना ! कह कर हाथ जोड़ कर भोला पांडेय भी ठठा कर हंस पड़े l
यह पहुना प्रकरण इटली में मेलोनी को मोदी ने जो मेलोडी खिलाई उस संदर्भ में याद आ गया l मेलोनी और मोदी की मिठास के किसिम-किसिम के रिश्ते गढ़ने , मिठास और ठिठोली के बीच ही कोई राहुल की मौसी का मज़ा ले रहा है , कोई ममेरी बहन का रिश्ता खोज रहा है , कोई कुछ l इंदिरा गांधी की भी याद आ गई है l कभी ब्रेजनेव , कभी फ़िदेल कास्त्रो के साथ उन की भी बड़ी चर्चा हुई l रीगन के साथ भी l
मोदी, मेलोनी के क़िस्से पहले भी ख़ूब गढ़े गए , गाए और बताए गए हैं l पर अब की राहुल गांधी की बौखलाहट ने इस में एक नया और चटक रंग भर दिया है l राहुल गांधी के भक्तों ने इस रंग में फिटकिरी डाल-डाल कर इसे और चटक कर दिया है l इतना कि शारदा सिन्हा का गाया मैथिली गीत, पहुनवा राघो ! याद आ गया है l पहुनवा राघो की सोंधी मिठास मन में घुल गई है l किसी राजनयिक यात्रा में पहुनवा राघो भी हो सकता है भला ! यह ठीक ही कहा जाता है कि मोदी दिल , दिमाग़ और ड्रामा एक साथ ले कर चलता है l पहुनवा राघो गाने को मजबूर कर देता है l



