• कार्यक्रम का शुभारम्भ वन्देमातरम् के जीवन्त समूहगान और ‘आदीश्वर’ के शीर्षक-गीत — ‘ये देश हमारा है’ की प्रस्तुति से हुआ। अतिथियों का स्वागत साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार और सरसभारत की महासचिव सुश्री सोनी सुगन्धा तथा कलाकलन कोलकाता के स्थानीय संयोजक प्रसिद्ध हास्यकवि डॉ. गिरिधर राय ने और विषयप्रवर्तन आयोजन सचिव श्री आशीष झुनझुनवाला ने किया।
• ‘बंगाल, बंकिम और वन्दे मातरम्’ शीर्षित प्रथम सत्र — प्रबोधन में प्रधान वक्ता प्रोफ़ेसर प्रेमशंकर त्रिपाठी ने वन्दे मातरम् के मुक्तिमन्त्र बनने पर कहा कि विशिष्ट पल ही शब्द को मन्त्र में बदलते हैं। वन्दे मातरम् की अद्यतन यात्रा एक शब्दर्षि के प्रज्ञापूत वचनों की अमृत सिद्धि है जिसने भारत को युगान्तरकारी अपराजेय ओज प्रदान किया।
• कार्यक्रम के प्रधान अभ्यागत सीवीओ सीआईएल श्री ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने भारत के वैश्विक भविष्य का लक्ष्य रेखांकित करते हुए कहा कि जिस प्रकार वन्दे मातरम् ने भारत की मुक्ति की नींव मज़बूत की, अब वही चेतना भविष्य के समुन्नत शिखर की कलश स्थापना करेगी। भारतीय भाषा परिषद् के निदेशक डॉ. शम्भुनाथ ने भरतवाक्यवत् कहा कि वन्दे मातरम् न केवल एक रचना है वरन् भारत के भावन भवन की रचनात्मकता का सिद्धिसूत्र भी है। इस सत्र में भारतीय भाषा परिषद् से श्रीमती विमला पोद्दार और श्री घनश्याम सुगला की विशेष उपस्थिति रही।

• द्वितीय सत्र में साहित्यकार और संगीतकार श्री सुशील साहिल के नेतृत्व में बहुभाषी सांगीतिक प्रस्तुतियाँ हुईं। स्वयं श्री साहिल ने चार भाषाओं — बंगाली, असमी, मैथिली और खड़ी बोली में गायन करते हुए सभागार को अपनी स्वर लहरियों पर झुमा झुमा डाला। इंस्पेक्टर राजीव कुमार सिंह (टाटानगर), डॉ. राखी सिंह कटियार (बड़ौदा) और आशीष कुमार मिश्र ने भोजपुरी और अन्य भाषाओं में प्रस्तुतियाँ दी।
• पाठ सत्र के नयी कहन में रहे — सबसे कब उम्र में होने वाले सीए डॉ. शैलेन्द्र सिंह मृदुल, डॉ. सर्वेश त्रिपाठी (लखनऊ) डॉ. अभिषेक तिवारी (शिमला)। इसके अतिरिक्त डॉ. नयना रमणिकलाल डेलीवाला (गुजराती, वडोदरा) अशोक कुमार सिंह अजय (मगही) किशनजी खण्डेलवाल (भुवनेश्वर) राजीव कुमार सिंह, देवेश मिश्रा (ओज) बालकृष्ण मिश्र (नरवा पहाड़) सूरज सिंह राजपूत (चाईबासा) नीतेश, कामेश्वर कुमार सिंह (राँची), सुमन राय (जामताड़ा) शम्स परवाना, उर्वशी श्रीवास्तव आदि ने भी पाठ किया। आध्यात्मिक व्यक्तित्व वयोवृद्ध दादा स्वामी तिवारी ने मंगलमन्त्रपाठ से समापन किया।
• लोकार्पण सत्र में — यहाँ सब लोग हँसते-बोलते हैं (भवानी प्रसाद मिश्र साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त, श्री सुशील साहिल), आसमान का आँगन (भवानी प्रसाद मिश्र साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त, सुश्री सोनी सुगन्धा) आपके आस-पास (डॉ. सर्वेश त्रिपाठी, हृदयपुष्प (श्रीमती मीतू कानोडिया) पद्मपराग (श्रद्धा टिबड़ेवाल) पुस्तकों के प्रथम और पुनः संस्करण लोकार्पित हुए।
• सम्मान सत्र में श्री शंकर सान्याल के प्रति जनश्री सम्मान, नवागत पीढ़ी के निर्माण और कल्याणकारी कार्यों के लिये समर्पित संस्था ‘परिवारमिलन’ के प्रति राष्ट्रनिर्माता सम्मान, श्री सुशील साहिल (बिहार) के प्रति ‘मिथिलेन्दु’ सम्मान, संवेदनशील प्रशासनिकता के लिये श्री ब्रजेश कुमार त्रिपाठी (गोपालगंज) के प्रति ‘मनुजश्रेष्ठ सम्मान’ और साहित्यर्षि श्री प्रेमशंकर त्रिपाठी के प्रति ‘लोकगुरु’ सम्मान निवेदित हुआ। गायक, कवि और प्रस्तोता डॉ. अभिषेक तिवारी (शिमला) को ‘काव्यमंगल’ सम्मान, श्री शैलेन्द्र मृदुल को काव्यकलश सम्मान और श्री सर्वेश त्रिपाठी को काव्यरंजन सम्मान प्रदान किया गया।
• हिन्दी कवि सम्मेलनों के जाने-माने कवि, साहित्यकार और प्रोफ़ेसर डॉ. राहुल अवस्थी के समग्र कर्त्तत्व और व्यक्तित्व के प्रति यशोकाय कवि पण्डित रामेश्वरनाथ त्रिवेदी मुफ़लिस की स्मृति में राष्ट्रप्रचेता शब्दर्षि शिखर सम्मान २०२६ निवेदन किया गया। सम्मान के अन्तर्गत शॉल, श्रीफल और पुरस्कार की नियत राशि प्रदान की गयी। संकल्प सृष्टि के श्री अविनाश गुप्ता और समाजसेवी श्री भगीरथ सारस्वत को भी सम्मानित किया गया।
• इस अवसर पर श्रीमती दुर्गा व्यास, निखिल दुबे, नीलम दुबे, लक्ष्मीकुमार शर्मा, अशोक शर्मा, अमित मूँदड़ा, श्रीमोहन तिवारी, कवि कृष्णकुमार दुबे, डॉ. आरएस मिश्र, अशोक सिंह, योगेश अवस्थी, सुरेश चौधरी, कृष्णा भिवानीवाला, राहुल सिंह दस्तक, ऊषा जैन, विनय जायसवाल, विजय कुमार पाण्डेय, दयाशंकर मिश्र राजन, रंजना झा, श्वेता श्वेताम्बरी, कविता कोठारी, कृष्णानन्द राय, प्रेमानन्द पाण्डा, मौसमी, विक्की, बैजनाथ आदि की उपस्थिति रही। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के स्थानीय संयोजक डॉ. गिरिधर राय ने किया। ‘कलाकलन कोलकाता’ का आद्यान्त मंचनियमन डॉ. राहुल अवस्थी ने किया। ■



