जब मंदिर निर्माण जैसे पवित्र कार्य पर सवाल उठाने वाले अखिलेश यादव सरीखे लोग खुद विवादों में घिरे हों, तब संदीप बिना सबूत के आरोपों की बौछार कर रहे हैं।
मेरठ मामले में आईपीएस अधिकारी को आज कानून पढ़ाते हुए उनका घमंडी अंदाज देखकर लानत भेजने को दिल करता है, उनकी एंकरिंग पर। खुद की पत्रकारिता की बुनियाद कमजोर होने पर दूसरों को ज्ञान बांटना उनकी सबसे बड़ी बेशर्मी है।

पहले अपनी रिपोर्टिंग की पढ़ाई तो ठीक से कर लीजिए साहब! तथ्यों की जांच, संतुलित विश्लेषण और नैतिकता-ये बुनियादी सिद्धांत आपको अभी भी समझ नहीं आए।
लोग आज भी अक्सर उन्हें सुधीर कहकर पुकार देते हैं, क्योंकि संदीप चौधरी सुधीर चौधरी की छाया भी नहीं बन पाए। सुधीर की तीखी, साहसिक और तथ्यपरक पत्रकारिता का मुकाबला करने की क्षमता उनमें कहां? एक औसत एंकर बनकर रह गए, जो चीख-चीखकर बहस जीतने का भ्रम पालते हैं।
सबसे बड़ा ढोंग तो ‘गोदी मीडिया’ का है। संदीप से कोई पूछे-किस संविधान की धारा में लिखा है कि जो आपकी मन की बात न करे, उसे गोदी कह दो?
जबकि उनका अपना अतीत न्यूज 24 का रहा है, जहां ‘मैडम’ की चापलूसी और सनसनीखेज खबरों का बाजार गरम था। इसीलिए संदीप से लेकर अजीत तक, सारे सनसनीखेज पत्रकार न्यूज 24 से ही निकले हैं।



