ED के हाथ लगी NewsClick पर छापेमारी से अहम जानकारी

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प्रवर्तन निदेशालय की रेड ऑनलाइन न्यूज पोर्ट्ल ‘न्यूज क्लिक’  पर क्या हुई, इस पर बवाल मचना शुरू हो गया है। यही नहीं, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने तुरंत ही इस रेड को मीडिया के ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’  को दबाने का प्रयास बताया।

प्रवर्तन निदेशालय से मिले सूत्रों से निकलकर सामने आनेवाली बात बहुत ही हैरानी भरी है। दरअसल, ‘न्यूज क्लिक’ पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से 10 करोड़ रुपए मिले हैं। खास बात ये है कि न्यूज क्लिक के मालिक प्रवीर पुरकायस्थ को यह नहीं पता कि अमेरिका की कंपनी ने यह 10 करोड़ रुपया उन्हें क्यों दिया है।

गाड़ी, 10 करोड़ के विदेशी धन लेने के बाद भी नहीं रुकी। इस बार एक दूसरी अमेरिकी कंपनी से 20 करोड़ मिले। सूत्रों ने बताया कि न्यूज क्लिक को अमेरिका की एक दूसरी कंपनी ने Export Remittance के रूप में 20 करोड़ रुपया दिया… वह भी सिर्फ इस काम के लिए कि न्यूजक्लिक ने People’s Dispatch नाम के एक पोर्टल पर कंटेंट को अपलोड किया।

फर्जीवाड़े की कहानी यहीं खत्म नहीं होती… न्यूज क्लिक के मालिक प्रवीर पुरकायस्थ ने 1.5 करोड़ रुपए मेंटेनेंस के नाम पर ले लिए, लेकिन पता चला है कि प्रवीर पुरकायस्थ के यहां मेंटेनेंस का काम एक नौवीं पास इटेक्ट्रीशियन करता है। मेंटेनेंस का काम भी बिना किसी डॉक्यूमेंटेशन के किया गया, लिहाजा इसका कोई प्रूफ वे प्रवर्तन निदेशालय को नहीं दे पाए।

पत्रकारिता और राजनीति का रिश्ता इस पूरे घालमेल में चोली दामन का है। जरा खुद देखिए, किस प्रकार न्यूज क्लिक का रिश्ता सीपीआई से जुड़ा है। सूत्रों ने बताया, प्रवर्तन निदेशालय को जो जानकारी हाथ लगी है उसके मुताबिक, न्यूज क्लिक में काम करने वाले एक व्यक्ति को 52 लाख रुपए अमेरिकी कंपनी से मिले हैं और हां, ये व्यक्ति सीपीआई के आईटी सेल का मेंबर भी है और सीपीआई के नेताओं का ट्विटर अकाउंट भी चलाता है।

प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार न्यूज क्लिक को अमेरिका में एक ही जगह रजिस्टर्ड अलग-अलग कंपनियों से बड़े पैमाने पर धन मिला है। इसी में एक डिफेंस सप्लायर  की कंपनी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, न्यूज क्लिक के मालिक प्रवीर पुरकायस्थ को गौतम नौलखा के साथ मिलकर कंपनी खोलने के लिए 20 लाख रुपए दिए हैं। ये वही गौतम नौलखा है, जो भीमा कोरेगांव दंगों का मुख्य आरोपी है और जेल में बंद है।

 सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका डिफेंस सप्लायर कंपनी आखिर एक मीडिया संस्थान को पैसे क्यो दे रही है, वो भी उस शख्स को जो दंगों का आरोपी है और जेल में बंद है।

गौरतलब है कि बीते मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा ‘न्यूज क्लिक’ के दिल्ली स्थित कार्यालय पर छापा मारे जाने की खबर सामने आई थी। जांच एजेंसी ने ‘न्यूज क्लिक’ के एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ के घर पर भी छापा मारा था।  ईडी अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि इस पोर्टल को कुछ संदिग्ध विदेशी कंपनियों से फंडिंग की गई है, जिसकी जांच की जा रही है।

मालूम हो कि इस पोर्टल को वरिष्ठ पत्रकार प्रबीर पुरकायस्थ ने वर्ष 2009 में शुरू किया था। अपनी कवरेज में मोदी सरकार के खिलाफ मुखर यह पोर्टल दिल्ली में किसानों के विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहा है।

15 फरवरी तक BARC इंडिया के पूर्व CEO पार्थो दासगुप्ता की जमानत अर्जी पर सुनवाई स्थगित

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टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ इंडिया के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पार्थो दासगुप्ता की जमानत याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनवाई 15 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी है।

मीडिया सुत्र के अनुसार, दासगुप्ता के  अधिवक्ता शार्दुल सिंह का कहना था कि यह याचिका स्वास्थ्य कारणों के आधार पर दाखिल की गई थी, न कि मेरिट के आधार पर। स्पेशल लोक अभियोजक शिशिर हिरे ने जस्टिस पीडी नाइक को बताया कि दासगुप्ता की ओर से दो फरवरी को याचिका वापस लेने की सूचना देने के बावजूद यह लंबित थी।

दासगुप्ता की याचिका पर सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार हुई थी और उनके वकीलों ने संशोधन के लिए आवेदन दायर करने के लिए दो सप्ताह के स्थगन की मांग की थी। अदालत ने बताया कि दासगुप्ता के वकील द्वारा टेलीफोनिक अनुरोध किए जाने के बाद मामले को सूचीबद्ध किया गया था।

राजदीप सरदेसाई समेत छह पत्रकारों को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

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छह वरिष्ठ पत्रकारों और कांग्रेस नेता शशि थरूर को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इन सबकी गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने जिन लोगों को राहत दी है, उनमें कांग्रेस सांसद शशि थरूर, ‘इंडिया टुडे’ समूह के सलाहकार संपादक राजदीप सरदेसाई, ‘नेशनल हेराल्ड’ की वरिष्ठ संपादकीय सलाहकार मृणाल पाण्डेय, उर्दू अखबार ‘कौमी आवाज’ के मुख्य संपादक जफर आगा, ‘कारवां’ पत्रिका के मुख्य संपादक-प्रकाशक परेशनाथ, एडिटर विनोद के जोस और इसके कार्यकारी संपादक अनंतनाथ शामिल हैं। इसके अलावा इन सभी पर यूपी समेत अन्य दूसरे राज्यों में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग पर भी सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर और पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने पिछले हफ्ते 26 जनवरी पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान एक प्रदर्शनकारी की मौत के बारे में कथित तौर पर असत्यापित खबर शेयर करने के आरोप में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। पत्रकार मृणाल पांडे, जफर आगा, परेश नाथ और अनंत नाथ ने भी इन एफआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस. ए. बोबडे की अगुआई वाली बेंच में जस्टिस ए. एस. बोपन्ना और जस्टिस वी. रामसुब्रमणियन भी थे। इन्होंने शशि थरूर और छह पत्रकारों की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की। उनकी पैरवी मशहूर वकील कपिल सिब्बल ने की। दूसरी ओर, सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली पुलिस का पक्ष रखा।

30 जनवरी को थरूर, राजदीप, ‘कारवां’ पत्रिका और अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया था। इससे पहले थरूर और छह पत्रकारों पर नोएडा पुलिस ने दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा को लेकर और अन्य आरोपों के साथ राजद्रोह का मामला दर्ज किया था। मध्य प्रदेश पुलिस ने भी दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा पर भ्रामक ट्वीट करने के आरोप में थरूर और छह पत्रकारों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

जानें, कितने टीवी चैनल्स को मिली MIB की मंजूरी

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पिछले पांच वर्षों के दौरान सूचना-प्रसारण मंत्रालय द्वारा 205 टीवी चैनल्स के लाइसेंस कैंसल किए गए हैं। इसके साथ ही मंत्रालय की ओर से जनवरी 2021 तक कुल 909 सैटेलाइट टीवी चैनल्स को देश में परिचालन की अनुमति दी गई है।

लोक सभा में सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस बारे में कहा, ’31 जनवरी 2021 तक देश में स्वीकृत चैनल्स की संख्या 909 है। एक जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2021 तक यानी पिछले पांच वर्षों में विभिन्न कारणों से 205 टीवी चैनल्स के लाइसेंस कैंसल किए गए हैं। इनमें कुछ लोगों द्वारा लाइसेंस सरेंडर किए गए हैं, कुछ चैनल्स ने वार्षिक फीस जमा नहीं की है, वहीं कुछ ने संचालन बंद कर दिए है, जैसे कारण शामिल हैं।’

जावड़ेकर ने इसके साथ ही यह भी कहा, ‘इस तरह की अनुमति देने से पहले आवेदक कंपनी और उसके निदेशकों के संबंध में गृह मंत्रालय (MHA) से सुरक्षा मंजूरी ली जाती है।  वहीं, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में कोई भी बदलाव करने से पहले कंपनी को सूचना-प्रसारण मंत्रालय से मंजूरी लेनी होती है।’

जावड़ेकर ने एक अन्य सवाल के जवाब में यह भी कहा कि एमआईबी ने टेलिविजन चैनल के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए मौजूदा नीति दिशानिर्देशों के तहत निजी सैटेलाइट टीवी चैनल्स के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए 388 न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल्स को मंजूरी दी है।

मंत्रालय द्वारा एक जनवरी 2016 से 51 न्यूज और करेंट अफेयर्स टीवी चैनल्स को मंजूरी दी गई थी। इसके अलावा, मंत्रालय ने भारतीय संस्थाओं को भारत में 13 विदेशी समाचार और करेंट अफेयर्स चैनलों को डाउनलिंक करने की अनुमति दी है।

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