TRAI के फैसले के खिलाफ उतरा मीडिया समूह

सन टीवी’  नेटवर्क ‘टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (ट्राई) द्वारा टैरिफ ऑर्डर में पिछले दिनों किए गए संशोधन के खिलाफ खुलकर मैदान में आ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘सन टीवी’ ने ट्राई के नए टैरिफ ऑर्डर-2.0 (NTO 2.0) को चुनौती देते हुए मद्रास हाई कोर्ट में एक केस दायर किया है। नेटवर्क का कहना है कि ट्राई ने ब्रॉडकास्टर्स से सलाह मशविरा किए बिना टैरिफ ऑर्डर में संशोधन किया है।

 जानकारी के अनुसार ट्राई के वकील ने मद्रास हाई कोर्ट से इस मामले को स्थगित करने के लिए कहा है, जब तक कि बॉम्बे हाई कोर्ट में  30 जनवरी को मामले की सुनवाई नहीं हो जाती। इस पर मद्रास हाई कोर्ट ने अब इस मामले में सुनवाई के लिए चार फरवरी की तारीख निश्चित की है।

13 जनवरी को बॉम्बे हाई कोर्ट में ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ ने ट्राई के खिलाफ एक याचिका दायर कर नए टैरिफ ऑर्डर-2.0 के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की है। हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 30 जनवरी की तारीख तय की है और दोनों पक्षों को तलब किया है। वहीं, ब्रॉडकास्टर्स की याचिकाओं के जवाब में ट्राई ने हाई कोर्ट में एक एफिडेविट दायर किया है।

ज्ञात हो कि ट्राई ने एक जनवरी को नई टैरिफ पॉलिसी जारी की थी, जिसके तहत ब्रॉडकास्टर्स को 15 जनवरी से चैनल्स के लिए नई मूल्य सूची अपनाने का निर्देश दिया गया था। ट्राई के इस नए टैरिफ ऑर्डर-2.0 (NTO 2.0) का पिछले दिनों टीवी ब्रॉडकास्टर्स ने विरोध किया था और संयुक्त रूप से इस मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी।

जरा सी बात पर अधिकारी ने पत्रकार को जड़ा थप्पड़

दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने मीडिया में अपने खिलाफ चली खबर से तिलमिलाकर पत्रकार से मारपीट कर दी। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग हो रही है। वहीं, दिल्ली पत्रकार संघ ने केजरीवाल सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार कोई कदम नहीं उठाती, तो पत्रकारों को सड़कों पर उतरना होगा। इस बीच, अधिकारी के बचाव में भी दलीलें दी जाने लगी हैं। सोशल मीडिया पर एक विडियो वायरल किया जा रहा है जिसमें उक्त पत्रकार को गालीगलौज करते दिखाया गया है।

यह मामला ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के दिल्ली संवाददाता मानव यादव से जुड़ा है। मानव का आरोप है कि सूचना और प्रचार निदेशालय (डीआईपी) के निदेशक शमीम अख्तर ने उनके साथ मारपीट की, अख्तर उनके द्वारा चलाई गई एक खबर से नाराज थे।

बतौर मानव यादव डीआईपी के कार्यालय में कुछ पोस्टर चिपकाए गए थे, जिसकी खबर उन्होंने कवर की थी। जब इस संबंध में उन्होंने डीआईपी अधिकारी शमीम अख्तर से सवाल किया, तो वह भड़क गए और मारपीट कर डाली। मामला सामने आने के बाद पत्रकारों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग मुख्यमंत्री केजरीवाल से की है।

घटना का जिक्र करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम ने ट्वीट किया है कि ‘किसी भी सूरत में एक रिपोर्टर पर हाथ उठाने वाले इस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अब तक नहीं हुई है तो हैरानी की बात है। कोई अधिकारी इतना बददिमाग कैसे हो सकता है? और अगर है तो किसके दम पर’?

पत्रकार के साथ मारपीट की निंदा करते हुए दिल्ली पत्रकार संघ ने भी एक बयान जारी कर आरोपित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की है। संघ के अध्यक्ष मनोहर सिंह की तरफ से कहा गया है कि ‘उपराज्यपाल, प्रमुख सचिव और चुनाव आयोग से मारपीट करने वाले अधिकारी को तुरंत बर्खास्त कर उसके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई करने की मांग की जाती है। यदि कार्रवाई नहीं की गई, तो दिल्ली के पत्रकार सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं।’

वहीं, सोशल मीडिया पर ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के पत्रकार मानव यादव के खिलाफ भी मुहिम शुरू हो गई है। अरुण अरोरा नामक यूजर ने एक विडियो पोस्ट किया है, जिसमें मानव को पुलिस की मौजूदगी में अधिकारी से गालीगलौच करते दिखाया गया है। हालांकि, इस विषय पर मानव ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने अपने जवाबी ट्वीट में कहा है, ‘हां! निष्पक्षता से खबर चलाने के बदले मिले 3 थप्पड़ों के बाद मैंने उसको गाली दी लेकिन ये विडियो 6 बजे के बाद का है। 5:30 बजे के आसपास इन्होंने मुझे पीटा। 5:50 पर PCR पहुंची। पुलिस ने मुझे उनके केबिन में आकर बैठने को कहा, मैंने विरोध किया। कमरे के अंदर की पूरी recording मेरे पास है’।

नियमों की अनदेखी भारी पड़ सकती है केबल टीवी ऑपरेटर्स को

केबल टेलिविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) संशोधन विधेयक 2020 को लेकर ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’  ने आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव/फीडबैक मांगे हैं। ‘एमआईबी’ का कहना है कि प्रस्तावित संशोधनों को लेकर कोई भी व्यक्ति अथवा स्टेकहोल्डर अपने विचार, कमेंट्स और सुझाव 17 फरवरी 2020 तक भेज सकता है।  

केबल टेलिविजन नेटवर्क (रेगुलेशन) विधेयक 1995 में जो संशोधित प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, उनमें जुर्माना राशि बढ़ा दी गई है। इसके अलावा प्रोग्राम कोड और एडवर्टाइजिंग कोड का उल्लंघन करने पर दंड को लेकर एक नया सबसेक्शन शामिल किया गया है। इसके तहत पहली बार अपराध करने पर दो साल तक की कैद अथवा दस हजार रुपए का जुर्माना अथवा दोनों सजा दी जा सकती हैं। वहीं, इसके बाद प्रत्येक बार किए गए इस तरह के अपराध के लिए पांच साल तक की कैद और पचास हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है।   

संशोधनों के अनुसार, केंद्र सरकार दूरदर्शन के चैनल्स अथवा संसद की ओर से संचालित किए जा रहे चैनल्स के नाम तय कर सकती है, जिन्हें केबल ऑपरेटर्स द्वारा अपनी केबल सर्विस में शामिल करना होगा और उनका प्रसारण करना होगा। इस प्रस्तावित संशोधन में मौजूदा सेक्शन 4ए के सबसेक्शन (1) को खत्म कर दिया गया है। इस प्रावधान के तहत केबल ऑपरेटर को दूरदर्शन के दो टेरेस्ट्रियल चैनल्स और जिस राज्य में वह केबल सर्विस चला रहा है, वहां की प्रादेशिक भाषा के एक चैनल को शामिल करने की सीमा थी। इसके अलावा ब्रॉडबैंड इंटरनेट के उचित इस्तेमाल के साथ ही डाटा मेंटीनेंस को मैनुअल से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से किए जाने समेत कई प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।

पत्रकार पर लगा गंभीर आरोप : गिरफ्तार

वरिष्ठ पत्रकार वी. अंबालगन को चेन्नई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अंबालगन पर 43वें चेन्नई बुक फेयर में एक स्टॉल लगाकर राज्य की एआईएडीएमके सरकार के कथित भ्रष्टाचार को उजागर करतीं किताबें बेचने का आरोप है। पत्रकार को 24 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बताया जाता है कि इससे पहले बुक फेयर प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने अंबालगन से स्टॉल खाली करने के लिए कहा था। इस मामले में अंबालगन को एक नोटिस भी जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि सरकार विरोधी किताबें बेचना निर्धारित गाइडलाइंस का उल्लंघन है। इसके बावजूद स्टॉल खाली न करने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने अंबालगन को गिरफ्तार कर लिया।  

गिरफ्तार किए गए वी. अंबालगन ‘मक्कल सैइथी मइय्यम’ नाम से एक पब्लिशिंग हाउस चलाते हैं। वहीं, पत्रकार की गिरफ्तारी के साथ ही विवाद शुरू हो गया है। चेन्नई प्रेस क्लब ने अंबालगन को गिरफ्तार किए जाने की निंदा करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की है। काउंसिल का कहना है कि पत्रकार ने स्टॉल खाली कराए जाने का कारण लिखित में पूछा था और वह बताए जाने पर स्टॉल छोड़ दिया। वहीं, बुक फेयर के अधिकारियों का कहना है कि स्टॉल खाली करने के लिए कहने पर पत्रकार ने अधिकारियों पर हमला कर दिया। इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

बताया जाता है कि पत्रकार ने सरकार से ‘सूचना का अधिकार’ (आरटीआई) के तहत मिले जवाबों को किताबों की शक्ल दी है और उनमें कथित रूप से सरकार के विभिन्न विभागों में फैले भ्रष्टाचार को उजागर किया है। पुलिस ने पत्रकार के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।

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