विदेशी मीडिया में मोदी की जीत की कवरेज

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नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत की गूंज विदेश में भी सुनाई दी। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के भविष्य से जुड़ी पल-पल को ख़बरों को विदेशी मीडिया ने कवर किया। हालांकि, मोदी की वापसी को लेकर सभी का अलग नजरिया है। कोई इसे हिंदूवादी चश्मे से देख रहा है तो किसी के लिए यह राष्ट्रवाद की जीत है।

वॉशिंगटन पोस्ट ने ‘राष्ट्रवाद की अपील के साथ भारत के मोदी ने जीता चुनाव’ शीर्षक तले लिखा है, ‘भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी ने दुनिया के सबसे बड़े चुनाव में भारी जीत हासिल की। मतदाताओं ने मोदी की शक्तिशाली और गर्वान्वित हिंदू की छवि पर मुहर लगा दी। मोदी की जीत उस धार्मिक राष्ट्रवाद की जीत है जिसमें भारत को धर्मनिरपेक्षता की राह से अलग हिंदू राष्ट्र के तौर पर देखा जाता है। भले ही भारत में 80 प्रतिशत हिंदू हैं, लेकिन मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और अन्य धर्म भी वहां अल्पसंख्यकों के तौर पर मौजूद हैं।’

इस जीत को अमेरिका के प्रसिद्ध अखबार ‘गार्डियन’ ने भी हिंदू राष्ट्रवाद से जोड़ा है। अख़बार लिखता है, ‘मोदी की असाधारण लोकप्रियता से भारतीय राजनीति अब हिंदू राष्ट्रवाद के एक नए युग में प्रवेश कर गई है। आर्थिक समस्याएं और बाकी मुद्दे किसी काम के नहीं रहे और हिंदू राष्ट्रवाद ने लोकप्रियता हासिल कर ली।’ इसके अलावा गार्डियन ने अपने संपादकीय लेख में कहा है कि भारत की आत्मा के लिए मोदी की जीत बुरी है। दुनिया को एक और लोकप्रिय राष्ट्रवादी नेता की जरूरत नहीं है, जो अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे का नागरिक मानता हो।’

कुछ भारतीय अख़बारों की तरह ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने मोदी की जीत में ‘चौकीदार’ शब्द का उल्लेख किया है। अख़बार का शीर्षक है ‘भारत के चौकीदार नरेंद्र मोदी की चुनाव में ऐतिहासिक जीत।’ खबर में मोदी को सबसे ज्यादा ताकतवर लीडर बताने के साथ-साथ उन्हें कठघरे में भी खड़ा किया गया है। अख़बार ने लिखा है ‘मोदी ने खुद को भारत का चौकीदार कहा जबकि अल्पसंख्यकों ने उनकी सरकार में खुद को असुरक्षित महसूस किया। अरबपतियों को फायदा पहुंचाने के साथ-साथ उन्होंने अपने कमजोर पारिवारिक पृष्ठभूमि का बखान किया। इन सभी के बावजूद मोदी ने आधुनिक भारत के इतिहास में अब तक के सबसे मजबूत हिंदू राष्ट्रवाद के सहारे अपनी पार्टी को शानदार जीत दिलाई।’

भारतीय चुनाव और भाजपा की जीत को ब्रिटिश मीडिया ने भी अच्छी तरह कवर किया। डेली मेल ने चुनाव परिणामों पर काफी विस्तृत खबर लगाई, जिसमें मोदी और अमित शाह सहित भाजपा समर्थकों के ख़ुशी मानते कई फोटो थे। अख़बार की हैडलाइन थी, ‘भारत के हिंदू राष्ट्रवादी पीएम ने अपनी पार्टी की प्रचंड जीत पर कहा देश एक बार फिर जीत गया।’ इस खबर में पाकिस्तानी पीएम इमरान खान की मोदी को दी गई शुभकामना का भी जिक्र है।

चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है ‘भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने के बाद समावेशी भारत का वादा किया। अब मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां रोजगार, कृषि और बैकिंग क्षेत्र होंगे।’ अलजजीरा ने भी भारतीय चुनाव मोदी की जीत को जगह दी। वेबसाइट ने लिखा ‘हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी के गठबंधन ने भारत में जीत हासिल की। मोदी पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं, जो पांच वर्षों के कार्यकाल के बाद दोबारा सत्ता में लौटे हैं।’ जबकि, गल्फ न्यूज ने हैडलाइन के साथ काफी अच्छा प्रयोग किया। ‘TSUNAMO 2.0 SWEEPS INDIA’ शीर्षक के तहत लिखा गया है कि दशकों बाद भाजपा की अभूतपूर्व जीत। साल के शुरुआत में मोदी के सामने राफेल जैसे मुद्दे खड़े किये गए, लेकिन पुलवामा और भारत की बालाकोट में स्ट्राइक के बाद मोदी व अमित शाह ने भाजपा की कहानी नए सिरे से लिख दी।’

पाकिस्तान ने भी भारतीय चुनावों पर करीबी नज़र रखी और भाजपा की जीत को वहां की मीडिया ने प्रमुखता से स्थान दिया। ‘द डॉन’ ने अपने फ्रंट पेज पर तीन कॉलम के काफी लंबे बॉक्स में चुनाव परिणाम की खबर लगाई। सबसे ऊपर श्रीनगर में वोटों की गिनती का फोटो लगाने के बाद अख़बार ने अपने शीर्षक में लिखा ‘मोदी ने दूसरी बार बड़ी जीत हासिल की।’ खबर में ऊपर ही राहुल गांधी की हार और नीचे अलग से मोदी को लेकर इमरान खान की उम्मीद का जिक्र किया गया।

न्यूज वेबसाइट समा टीवी ने मोदी की जीत की खबर के साथ राहुल गांधी की हार पर ज्यादा फोकस किया। वेबसाइट ने लिखा कि हिंदू राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के आम चुनाव में जीत हासिल की और गांधी की सत्ता में वापसी की उम्मीद को चकनाचूर कर दिया। इसी तरह ‘जियो टीवी’ की तरफ से मोदी की जीत पर दो आर्टिकल प्रकाशित किए गए। पहले में मोदी की जीत से अधिक राहुल गांधी की हार पर बात हुई और दूसरे में पीएम मोदी की जीत से ज्यादा इमरान खान को धन्यवाद देने की बात कही गई।

कई बार निकली है Exit Poll की हवा

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एग्जिट पोल्स कहते हैं कि एनडीए को 300 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। एग्जिट पोल्स सामने आने के बाद भाजपा समर्थकों में ख़ुशी की लहर है, लेकिन परिणाम इस ख़ुशी को काफुर भी कर सकते हैं। क्योंकि एग्जिट पोल्स का इतिहास काफी प्रभावशाली नहीं रहा है। 

 पिछले कुछ पोल्स पर नज़र डालने पर साफ़ हो जाता है कि एग्जिट पोल्स पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता। हालांकि, 2014 के एग्जिट पोल्स कुछ हद तक असल परिणामों के नज़दीक रहे, लेकिन सत्ता तक पहुँचने में यह ‘कुछ’ खेल बना और बिगाड़ दोनों सकता है। पिछले लोकसभा चुनाव को लेकर अधिकांश एजेंसियों ने एनडीए को 260 से 280 सीटें मिलने की बात कही थी, जबकि यूपीए की अनुमानित सीटों की संख्या 100 के आसपास बताई गई थी। मगर जब परिणाम आये तो हर कोई चौंक गया। एनडीए ने रिकॉर्डतोड़ 336 सीटें हासिल कीं और यूपीए महज 60 पर सिमटकर रह गई। इस लिहाज से देखें तो एग्जिट पोल्स में भाजपा नीत एनडीए की जीत की बात सही साबित हुई, लेकिन अनुमानित और असल सीटों के बीच एक बहुत बड़ा अंतर छूट गया। यदि इस बार भी ऐसा कुछ होता है, तो सियासी उंट किसी भी करवट बैठ सकता है।
  
2014 के एग्जिट पोल्स में इंडिया टुडे ने एनडीए को 261-183, CNN-IBN, CSDS ने 270-282 और इंडिया टीवी-सी वोटर ने 289 सीटें मिलने की बात कही थी। जबकि यूपीए को क्रमश: 110-120, 92-102 और 100 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। इन पोल्स में ममता बनर्जी की टीएमसी और AIADMK के बारे में कहा गया था कि दोनों दलों को 20 से ज्यादा सीटों पर जीत मिल सकती है, लेकिन कितनी ज्यादा इसका कोई जिक्र नहीं था। परिणामों में ममता की पार्टी को 42 में से 34 और AIADMK को 39 में से 37 सीटें मिलीं।

 2004 में एग्जिट पोल्स बुरी तरह विफल रहे। उस वक्त ज्यादातर पोल्स में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के फिर सत्ता में आने की भविष्यवाणी की गई थी, मगर नतीजे बिल्कुल उलट आए। एनडीए को 189 सीटें मिलीं और कांग्रेस की अगुआई वाले यूपीए को 222 सीटें। 2009 में भी एग्जिट पोल्स फेल रहे। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में यह तो कहा गया कि यूपीए को एनडीए पर बढ़त मिलेगी, लेकिन किसी ने यह अनुमान नहीं लगाया कि कांग्रेस अकेले ही 200 पार पहुंच जाएगी। परिणाम सामने आये तो कांग्रेस को अकेले 206 और यूपीए को 262 सीटें मिलीं। ऐसे ही 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी एग्जिट पोल्स गलत रहे। सभी एग्जिट पोल्स में भाजपा+ को जेडीयू-आरजेडी गठबंधन पर बढ़त दिखाई गई, लेकिन नतीजे इसके विपरीत आये। भाजपा+ 58 सीटों पर सिमट गई और जेडीयू-आरजेडी गठबंधन ने 178 सीटें अपने नाम कीं।

अब मीडिया की ‘गैरजिम्मेदार’ रिपोर्टिंग पर लगेगी लगाम

मैसूर जिला कन्नड़ साहित्य परिषद की ओर से आयोजित एक बुक लॉन्चिंग के मौके पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी सरकार मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर लगाम लगाने के लिए एक कानून बनाने पर विचार कर रही है, ताकि इसकी गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर लगाम लग सके।

कुमारस्वामी का कहना था कि मीडिया की इस तरह की गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग को देखते हुए उन्होंने पिछले एक महीने से मीडिया से बात करना बंद कर दिया है।

कुमारस्वामी का यह भी कहना था, ‘हालांकि पूर्व मंत्री और जेडी (एस) चीफ एएच विश्वनाथ ने अपने भाषण में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मीडिया को संबोधित करने से डरते हैं, लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं है। मीडिया के साथ मेरे काफी अच्छे रिश्ते रहे हैं, लेकिन अब चूंकि मीडिया गैरजिम्मेदार रिपोर्टिंग कर रही है, खासकर नेताओं को जोकर्स की तरह दिखाया जाता है, मैं अब मीडिया से उतनी बात नहीं करता हूं।’

कुमारस्वामी ने कहा, ’यदि किसी टीवी चैनल के मुखिया के पास पर्याप्त अच्छी स्टोरी नहीं हैं तो उसे चैनल को बंद कर अपने घर चले जाना चाहिए, लेकिन गलत रिपोर्टंग नहीं करनी चाहिए। इस तरह की फर्जी खबरें और बेकार की डिबेट न तो समाज और न ही लोगों के किसी काम की हैं। पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में नैतिकता होती थी, लेकिन अब अधिकांश चैनल नैतिकता का पालन नहीं करते हैं। मीडिया को यह समझना चाहिए कि मैं उनकी रिपोर्टिंग के कारण नहीं, बल्कि राज्य की 6.6 करोड़ जनता के कारण अपने पद पर बना हुआ हूं।

मीडिया से अपनी नाराजगी जताते हुए कुमारस्वामी का यह भी कहना था कि मीडिया ने उनके अच्छे कामों की बजाय गलत और झूठी रिपोर्ट्स पर फोकस किया है। उन्होंने कहा, ‘लोग मेरे पास रोजाना विभिन्न परेशानियां लेकर आते हैं और मैं उनकी मदद करने की कोशिश करता हूं लेकिन मीडिया सूखे समेत लोगों की परेशानियों को हाईलाइट नहीं करना चाहता है, बल्कि उसका पूरा ध्यान सनसनीखेज अथवा झूठी खबरों पर रहता है।’

आखिर में उन्होंने कहा, ‘क्या आपको लगता है कि सरकार चुप बैठी रहेगी। सरकार एक ऐसा कानून बनाने पर विचार कर रही है, जिससे इस तरह की गैरजिम्मेदार रिपोर्टिंग पर लगाम लगाई जा सके।’

बाबा रामदेव ने संभाली आरोपों में घिरी अमेजॉन के बायकॉट की कमान

हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के कारण सोशल मीडिया पर अमेजॉन के बायकॉट की मुहिम शुरू हो गई है। इस बार इस अभियान की कमान योगगुरु बाबा रामदेव के हाथों में है। बाबा ने #अमेजनमाफीमांगे, #AmazonInsultsHindu जैसे हैशटैग के साथ अपने ट्विटर हैंडल पर कंपनी के खिलाफ कई सवाल उठाए हैं।

अमेजॉन की ऑनलाइन सूची में हिंदू देवताओं की तस्वीर वाले टॉयलेट सीट कवर, योगा मैट, कपड़े के जूते, कालीन और अन्य उत्पाद दिख रहे थे। यह खबर सामने आते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ट्विटर पर हजारों प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं। थोड़े ही वक़्त में कंपनी के खिलाफ 24,000 से ज्यादा ट्वीट किए गए।

‘बायकॉट अमेजॉन’ ट्विटर पर सबसे अधिक ट्रेंड कर रहा था। कुछ लोगों ने अपने ट्वीट में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी टैग किया, ताकि अमेजॉन पर दबाव बनाया जा सके। बाबा रामदेव सहित सभी लोगों का कहना है कि हिंदू धर्म के अपमान के लिए कंपनी पर कार्रवाई होनी चाहिए। उधर, अमेजॉन का कहना है कि उसके सभी विक्रेताओं को कंपनी के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। जो ऐसा नहीं करता, उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। कंपनी के मुताबिक, जिन उत्पादों को लेकर सवाल उठाया जा रहा है, उन्हें ऑनलाइन स्टोर से हटाने का काम शुरू हो चुका है।

बाबा रामदेव ने अपने ट्वीट में अमेजॉन पर मौजूद उत्पादों की फोटो भी शेयर की है, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं वाले टॉयलेट सीट कवर, जूते आदि नज़र आ रहे हैं। बाबा के ट्वीट को 11 हजार के आसपास लाइक मिले हैं, जबकि लगभग सात हजार बार उसे रीट्वीट किया गया है। इसके अलावा डेढ़ हजार लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें से अधिकांश में कंपनी के खिलाफ गुस्सा है।

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