OPERATION SINDOOR : INDIAN ARMED FORCES CARRIED OUT PRECISION STRIKE AT TERRORIST CAMPS

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Delhi : A little while ago, the Indian Armed Forces launched ‘OPERATION SINDOOR’, hitting terrorist infrastructure in Pakistan and Pakistan-occupied Jammu and Kashmir from where terrorist attacks against India have been planned and directed.

Altogether, nine (9) sites have been targeted.

Our actions have been focused, measured and non-escalatory in nature. No Pakistani military facilities have been targeted. India has demonstrated considerable restraint in selection of targets and method of execution.

These steps come in the wake of the barbaric Pahalgam terrorist attack in which 25 Indians and one Nepali citizen were murdered. We are living up to the commitment that those responsible for this attack will be held accountable.

There will be detailed briefing on ‘OPERATION SINDOOR’, later today.

सीबीआई निदेशक की नियुक्ति पर सहमति नहीं, राहुल गांधी ने दिया डिसेंट नोट

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नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नए निदेशक की नियुक्ति को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी। यह बैठक 5 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने इस बैठक में डिसेंट नोट दर्ज किया, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में एक नया मोड़ आ गया है।

सीबीआई निदेशक की नियुक्ति एक तीन सदस्यीय समिति की सिफारिश पर होती है, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं। वर्तमान सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का दो साल का कार्यकाल 25 मई 2025 को समाप्त हो रहा है। सूद, 1986 बैच के कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्होंने मई 2023 में यह जिम्मेदारी संभाली थी। सूत्रों का कहना है कि सरकार सूद का कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में है, लेकिन राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है।
बैठक में नए निदेशक के नाम पर चर्चा हुई, लेकिन सूत्रों के अनुसार, समिति के सदस्यों के बीच मतभेद उभरे। राहुल गांधी ने डिसेंट नोट में अपनी आपत्तियों को दर्ज किया, जिसका विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह पहली बार नहीं है जब सीबीआई निदेशक की नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ हो। इस पद की नियुक्ति हमेशा से ही राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से संवेदनशील रही है, क्योंकि सीबीआई देश की प्रमुख जांच एजेंसी है।
सीबीआई निदेशक का कार्यकाल सामान्य रूप से दो वर्ष का होता है, जिसे अधिकतम पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इस नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए समिति का गठन किया गया है। हालांकि, विपक्षी नेताओं ने अक्सर इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाल ही में मुख्य न्यायाधीश की इस समिति में भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

इस असहमति के बाद अब यह देखना होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है। यदि सहमति नहीं बनी, तो नियुक्ति प्रक्रिया में देरी हो सकती है, जिसका असर सीबीआई के कार्यों पर पड़ सकता है।

नेहा सिंह राठौड़ और संजय शर्मा को कपिल सिब्बल का कानूनी समर्थन

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दिल्ली। हाल के घटनाक्रम में, लोकप्रिय भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौड़ और पत्रकार संजय शर्मा, जो 4PM न्यूज़ यूट्यूब चैनल के संपादक हैं, को वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल का कानूनी समर्थन प्राप्त हुआ है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब संजय शर्मा के यूट्यूब चैनल 4PM न्यूज़ को “राष्ट्रीय सुरक्षा” के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा ब्लॉक कर दिया गया। इसके साथ ही, नेहा सिंह राठौड़ के खिलाफ एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई, जिसके बाद दोनों ने कानूनी सहायता के लिए कपिल सिब्बल से संपर्क किया।

सुप्रीम कोर्ट में 5 मई 2025 को इस मामले की सुनवाई हुई, जहां जस्टिस बी.आर. गवई और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र सरकार से 4PM न्यूज़ चैनल को ब्लॉक करने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर जवाब मांगा। संजय शर्मा की ओर से कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि चैनल को ब्लॉक करने से पहले कोई नोटिस जारी नहीं किया गया, और उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी एक मध्यस्थ के माध्यम से मिली। सिब्बल ने जोर देकर कहा कि ब्लॉकिंग आदेश और उससे संबंधित शिकायत की जानकारी याचिकाकर्ता को नहीं दी गई, जो संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा का उल्लंघन है। उन्होंने अंतरिम आदेश की मांग की, क्योंकि याचिकाकर्ता को ब्लॉकिंग के कारणों का पता नहीं है। याचिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हवाला देते हुए केंद्र से ब्लॉकिंग आदेश और रिकॉर्ड पेश करने की मांग की गई।

दूसरी ओर, नेहा सिंह राठौड़, जिन्हें उनके सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित गीतों के लिए जाना जाता है, ने भी कपिल सिब्बल से कानूनी सलाह ली है। उनके खिलाफ दर्ज FIR के विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर सक्रिय पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने इस मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। कई यूजर्स ने कपिल सिब्बल की फीस और उनके जैसे वरिष्ठ वकील की सेवाओं की लागत पर सवाल उठाए, जबकि अन्य ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एक महत्वपूर्ण लड़ाई करार दिया। यह मामला न केवल कानूनी, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी संवेदनशील हो गया है, क्योंकि यह डिजिटल मीडिया और अभिव्यक्ति के अधिकारों पर बढ़ते नियंत्रण के सवाल उठाता है।

किशोर अवस्था की दोस्ती में सावधानी जरूरी

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किशोर और किशोरी के लिए एक-दूसरे का हाथ थामना एक भावनात्मक और सामाजिक अनुभव हो सकता है, जो उनके रिश्ते की शुरुआत या गहरे जुड़ाव का प्रतीक हो। यह एक साधारण-सा कदम प्रतीत हो सकता है, लेकिन इसमें कई महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि यह अनुभव सकारात्मक और सम्मानजनक रहे। निम्नलिखित बिंदुओं में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई है।

1. सहमति और सम्मान: किसी का हाथ थामने से पहले यह सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्ष इस कार्य के लिए सहज और सहमत हैं। बिना सहमति के किसी का हाथ थामना असुविधा या असम्मान का कारण बन सकता है। किशोर और किशोरी को एक-दूसरे की भावनाओं और सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति संकोच दिखाता है, तो उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें और दबाव न डालें।

2. भावनात्मक परिपक्वता: किशोरावस्था में भावनाएँ तीव्र होती हैं, और हाथ थामना एक गहरा भावनात्मक कदम हो सकता है। दोनों को यह समझना चाहिए कि यह कदम उनके रिश्ते में क्या दर्शाता है। क्या यह दोस्ती का प्रतीक है, या इससे अधिक कुछ? इस बारे में खुलकर बात करना और एक-दूसरे की अपेक्षाओं को समझना जरूरी है। भावनात्मक स्पष्टता से गलतफहमियाँ कम होती हैं।

3. सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ: भारतीय समाज में शारीरिक निकटता को लेकर अलग-अलग मान्यताएँ और नियम हो सकते हैं। किशोर और किशोरी को अपने परिवार, समाज, और संस्कृति के मूल्यों का ध्यान रखना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर हाथ थामना कुछ जगहों पर स्वीकार्य हो सकता है, लेकिन कुछ जगहों पर यह असहजता पैदा कर सकता है। इसलिए, परिस्थिति के अनुसार व्यवहार करना चाहिए।

4. आत्मविश्वास और संवेदनशीलता: हाथ थामते समय आत्मविश्वास और संवेदनशीलता का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। यह कदम स्वाभाविक और सहज होना चाहिए, ताकि दोनों पक्ष इसे सकारात्मक रूप से अनुभव करें। साथ ही, यदि कोई असहज महसूस करता है, तो उसकी भावनाओं को समझकर तुरंत पीछे हटना चाहिए। यह एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।

5. स्वच्छता और व्यक्तिगत देखभाल: छोटी-सी बात लग सकती है, लेकिन हाथ थामने से पहले स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है। साफ-सुथरे हाथ न केवल एक अच्छा प्रभाव डालते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि आप सामने वाले की परवाह करते हैं।

किशोर और किशोरी के लिए एक-दूसरे का हाथ थामना केवल एक शारीरिक कार्य नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान, और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। सहमति, भावनात्मक स्पष्टता, सामाजिक संदर्भ, और संवेदनशीलता का ध्यान रखकर इस अनुभव को और भी सार्थक बनाया जा सकता है। यह छोटा-सा कदम उनके रिश्ते में एक मजबूत नींव रख सकता है, बशर्ते इसे समझदारी और सम्मान के साथ उठाया जाए।

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