राजस्थान भारतीय और वैश्विक सिनेमा के लिए शूटिंग का पसंदीदा स्थान : भजनलाल शर्मा

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जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आईफा अवार्ड्स समारोह के सिल्वर जुबली आयोजन के साथ ही जयपुर न्यूयॉर्क, लंदन, दुबई, और अबुधाबी जैसे उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो गया है, जहां आईफा का आयोजन हुआ है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन हमारे राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को दुनिया भर में एक नई पहचान देगा।

श्री शर्मा रविवार को जयपुर में आयोजित आईफा अवार्ड्स समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान भारत के टूरिज्म मैप का एक प्रमुख केंद्र है। यहां इतिहास भी है और धरोहर भी है। ट्रैवल्स और टूरिज्म सेक्टर को जो चाहिए, वह सब राजस्थान में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती भारतीय और वैश्विक सिनेमा के लिए शूटिंग का हमेशा से पसंदीदा स्थान रही है। यहां की विविधता इस प्रदेश को फिल्म शूटिंग के लिए और भी आकर्षक बनाती है। मैं फिल्म जगत से जुडी सभी हस्तियों को राजस्थान में अधिक से अधिक शूटिंग करने के लिए आमंत्रित करता हूं।

उन्होंने कहा कि दुनियाभर में राजस्थान ऐतिहासिक किलों, महलों के लिए प्रसिद्ध है। इनके हर पत्थर में शूरवीरों की गाथायें हैं। यहां चितौडगढ़ का दुर्ग, कुम्भलगढ़ दुर्ग, महाराणा प्रताप के उदयपुर का किला, आमेर किला, सवाईमाधोपुर का रणथम्भौर दुर्ग, भरतपुर का लोहागढ़ किला, बीकानेर का जूनागढ़ किला, जोधपुर का मेहरानगढ़ दुर्ग, जैसलमेर का सोनार किला दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

*धार्मिक पर्यटन के लिए राजस्थान आते है देश-दुनिया से पर्यटक*
श्री शर्मा ने कहा कि देश दुनिया के करोडों लोग राजस्थान में धार्मिक पर्यटन के लिए भी आते हैं। यहां के विभिन्न मन्दिर, देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केन्द्र है। उन्होंने कहा कि राजस्थान को प्रकृति का भी बहुत बडा वरदान मिला हुआ है, जैसलमेर धोरों की धरती है, तो उदयपुर झीलों की नगरी है और माउण्ट आबू पहाडों की रानी है। हमारा जयपुर पिंकसिटी है, तो जोधपुर ब्लू सिटी है। उन्होंने कहा कि शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियां सुनहरे इतिहास की साक्षी हैं और हमारे यहां के तीज-त्यौंहार हमारी लोक संस्कृति की पहचान है।

*राजस्थान को 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य*
मुख्यमंत्री ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ रही है, उनसे प्रेरणा लेते हुए हम भी राजस्थान को पांच वर्षों में 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को लेकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारी सरकार ने पहले ही साल में राइजिंग राजस्थान का आयोजन किया। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने इस आयोजन में पधारकर हमें आत्मबल दिया और ये ब्रांड मोदी का ही चमत्कार है कि हम 35 लाख करोड़ के एमओयू करने में सफल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत हो, इसके लिए निवेश को आकर्षित करने के साथ ही हम प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से भी प्रदेश को आर्थिक मजबूती देने का काम कर रहे हैं। खनन क्षेत्र में नवाचार कर रहे हैं और नियमों को आसान बना रहे हैं।

श्री शर्मा ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के अभियान एक पेड़ मां के नाम से प्रेरित होकर जयपुर में आईफा गार्डन के रूप में पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन की एक नई पहल की गई है। यहां आईफा अवॉर्ड जीतने वाले कलाकारों और उनकी मां के नाम पर पौधे लगाए जा रहे हैं। इस गार्डन में लगाए जाने वाले 15 हजार पौधे इस समारोह को चिरस्थायी एवं यादगार बनाएंगे।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राजस्थानी लोकनृत्यों की प्रस्तुति भी दी गई।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी व डॉ. प्रेमचन्द बैरवा सहित फिल्म एवं टीवी जगत की जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं।

मीडिया प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए अन्नपूर्णा के महाप्रबंधक मनोज को अमेरिका ने सम्मानित किया

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न्यूयॉर्क (यूएसए) – न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य डेविड आई. वेप्रिन ने मीडिया प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य कौशल और दूरदर्शी नेतृत्व प्रदान करने के लिए अन्नपूर्णा मीडिया नेटवर्क के महाप्रबंधक मनोज बासनेट को सम्मानित किया है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, वेप्रिन ने उन्हें अमेरिका के न्यूयॉर्क से संचालित मीडिया हाउस त्रिवेणी टाइम्स की अनुशंसा पर एक लिखित प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।

15 वर्षों तक बासनेट के उत्कृष्ट कार्य कौशल और दूरदर्शी मीडिया प्रबंधन ने अन्नपूर्णा मीडिया नेटवर्क को एक अग्रणी नेपाली मीडिया हाउस के रूप में प्रसिद्ध बनाने में अतुलनीय योगदान दिया है। वेप्रिन द्वारा लिखित रूप में दिए गए सम्मान पत्र में कहा गया, ‘इसके लिए मैं बासनेट का सम्मान करता हूं।’ उन्होंने नेपाल में एक लोकप्रिय, उत्कृष्ट और प्रभावशाली मीडिया हाउस के रूप में अन्नपूर्णा मीडिया नेटवर्क की प्रशंसा की।

वेप्रिन पहली बार 2010 में न्यूयॉर्क राज्य विधानसभा के लिए चुने गए थे। तब से वह हर चुनाव में विधानसभा सदस्य का चुनाव जीतते आ रहे हैं। वह न्यूयॉर्क राज्य बीमा समिति के अध्यक्ष, बैंक की समिति, न्यायपालिका की समिति, एशियाई प्रशांत अमेरिकी यातायात बल सहित राज्य की विभिन्न समितियों के सदस्य के रूप में काम कर रहे हैं।

PEC expresses relief over scribes’ release

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Nava Thakuria

Geneva: Press Emblem Campaign, the global media safety and rights body, expressed relief that Kashmiri journalist Majid Hyderi was released recently following an Indian court’s order stating that criticism of the government can not constitute grounds for detention. Arrested under the Public Safety Act, Hyderi was released by the Jammu & Kashmir High Court after over 525 days of detention. The independent journalist and political analyst, who is partially associated with local newspaper Greater Kashmir, had already arrived home in Srinagar.

He was arrested in September 2023 on charges of alleged extortion and defamation. Hyderi was kept in Kot Bhalwal jail in Jammu locality under the particular law that allows the authorities to detain one individual without trial for up to two years. Various local, regional and national media bodies including Kashmir Press Club raised voices for his release and now they have welcomed the court order. Not only Hyderi, but several journalists from the Kashmiri valley have been arrested and many of them are still facing legal procedures.

Release in Malaysia

Earlier, the PEC expressed respite over the release of Malaysiakini (English online news portal) journalist B Nantha Kumar after four days of the Malaysian Anti-Corruption Commission’s remand. He was arrested by commission for allegedly accepting a bribe of RM 20,000 from an agent dealing with foreign workers last Friday and his release on bail was ordered by the Magistrate’s Court in Putrajaya locality.

Nantha, since he started working for the Malaysian news outlet in 2018, prepared some excellent articles on migrant workers exposing corruption in the country’s immigration department. “The Malaysia authorities should ensure a fair, impartial and transparent investigation over the issue of B Nantha Kumar’s arrest and he should get justice with no political interference,” said Blaise Lempen, president of PEC (www.pressemblem.ch/pec-news).

PEC’s south & southeast Asian representative Nava Thakuria informed that the ASEAN Parliamentarians for Human Rights (APHR) also expressed serious concern over Kumar’s arrest. The forum of Parliamentarians pointed out that the journalists can play a critical role in exposing corruption and holding those in power accountable. While corruption must be tackled, any attempt to use anti-graft laws to intimidate or silence the press is unacceptable, said an APHR statement.

मतान्तरण न करने पर पूरे परिवार का एक एक अंग काटा था लाहौर के किलेदार ने

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बलिदानी भाई मणिसिंह का उल्लेख लगभग सभी सिक्ख ग्रंथों में है । एक अरदास में भी उनका नाम आता है । पर उनके जन्म की तिथि पर मतभेद है । मुगल काल में उन्हें परिवार सहित बंदी बनाया था और मतान्तरण के लिये दबाव डाला गया । वे तैयार नहीं हुये तो पूरे परिवार के एक एक अंग काटकर प्राण लिये गये ।

वे चन्द्रवंशी राजपूत परिवार से थे । समय के साथ पंजाब गये और वहीं बस गये । राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिये जब सिक्ख पंथ अस्तित्व में तो परिवार सिक्ख पंथ से जुड़ घया । भाई मणिसिंह की गणना प्रमुख सिख विद्वानों में और पंथ प्रचारकों में होती है । गुरु तेग बहादुर के साथ बलिदान हुये भाई दयालदास इनके बड़े भाई थे । भाई मणिसिंह उनका जन्म 10 मार्च 1670 को मुल्तान प्राँत के अलीपुर गाँव में हुआ था । यह क्षेत्र अब पाकिस्तान में है । कहीं कहीं यह जन्म तिथि अप्रैल 1744 तो कहीं 1764 लिखी है । कुछ शोधकर्ताओं ने जन्तिथि पर शोध भी किये पर तिथि पर मतैक्य न हो सका । उनके के बचपन का नाम ‘मणि राम’ था। सिक्ख पंथ से जुड़े तो नाम मणिसिंह हुआ । पिता माई दास भी गुरुसेवा में लग गये थे । माता मधरी देवी गृहणीं थीं।15 वर्ष की उम्र में मणि सिंह का विवाह खैरपुर के यादववंशी लखी राय जी की बेटी सीतो बाई से हुआ। शादी के बाद मणि सिंह ने कुछ समय परिवार के साथ गांव अलीपुर में रहे फिर पत्नि के साथ अमृतसर आ गये । यहाँ रहकर उन्होने सिक्ख साहित्य की रचना की । वे प्रतिदिन प्रवचन करते थे और क्षेत्र में भ्रमण करके समाज से अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश देते । उनके प्रवचनों में स्वत्व और स्वाभिमान जागरण का आव्हान होता । कुछ दिनों आद उन्होने एक विवाह और खेमी बाई से किया ।

1699 में जब गुरु गोविन्द सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी तो वे पंथ के प्रचार और विस्तार अभियान से जुड़ गये । उन्हें अमृतसर हरमंदिर साहब की व्यवस्था देखने का दायित्व मिला । आज यदि हरमिन्दर साहब की ख्याति है तो इसमें बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका भाई मणिसिंह की रही है । समय के साथ उनके कुल नौ पुत्र हुये । सात पुत्र पहली पत्नि सीतो बाई से और दो पुत्र दूसरी पत्नि खेमी बाई से । ये सभी सभी स्वत्व, स्वाभिमान और स्वधर्म के लिये बलिदान हुये । कोई युद्ध में तो कोई राष्ट्र रक्षा अभियान में ।

भाई मणिसिंह सिक्ख पंथ प्रचार के साथ समाज को संगठित करने और अपनी रक्षा स्वयं करने के अभियान में जुटे थे । उनकी गतिविधियों की सूचना लाहौर के मुगल किलेदार जकारिया खान के पास पहुँच रही थी । वह मौके की तलाश में था । उसे मौका मिला 1734 में । भाई मणि सिंह ने हरमिन्दर साहिब में एक उत्सव का आयोजन किया । यद्यपि समागम की सूचना किलेदार को दे दी गई थी और सहमति भी मिल गई थी । पर यह किलेदार जकारिया खान की चाल थी । समागम की तिथि जैसे ही समीप आई तो किलेदार ने सेना तैनात कर दी और इस आयोजन को विद्रोह माना । भाई मणिसिंह को जब इसका संकेत मिला तो उन्होने आने वाले अतिथियों को न आने का संदेश भी भेज दिया । मुगल सेना हरमिन्दर साहिब और उसे जोड़ने वाले सभी रास्तों पर तैनात हो गई। भाई मणिसिंह परिवार सहित बंदी बना लिये गये । भाई मणि सिंह को जंजीरों में बांधकर लाहौर ले जाया गया। उनपर पाँच हजार की राशि का जुर्माना लगा । जो उस समय के अनुसार बहुत बड़ी रकम थी । जुर्माने की रकम माफ करने केलिये इस्लाम धर्म अपनाने की शर्त रखी गई। जिसे भाई मणिसिंह ने इंकार कर दिया । तब उनके सामने उनके दो पुत्रों छीतर सिंह और गुरुबख्श सिंह को प्रताड़ना दी गई । एक एक अंग काटा गया । दोनों का बलिदान हुआ । फिर भी भाई मणिसिंह अडिग रहे । तब किलेदार ने उनक अंग-भंग करके मौत का आदेश दिया गया। यह नौ जुलाई 1734 की तिथि थी जब भाई मणिसिंह अपने पुत्र और परिवार सहित बलिदान हुये ।

स्वत्व और स्वाभिमान के लिये इस परिवार के बलिदान की एक लंबी परंपरा रही है । उनके पिता, बड़े भाई और दादाजी सभी बलिदान हुये । भाई मणिसिंह के सभी पुत्र भी बलिदान हुये । पुत्र उदय सिंह, 1704 में आनंदपुर साहिब के पास साही तिब्बी में, अनेक सिंह, अजब सिंह और अजायब सिंह 1704 में चमकौर के युद्ध में बलिदान हुये ।

बलिदानों की यह गाथा सिक्ख साहित्य और अरदास में तो है पर इतिहास से नदारत । ऐसे बलिदानों के कारण ही भारतीय संस्कृति पुष्पित और पल्लवित हो रही है ।

कोटिशः नमन ऐसे बलिदानियों को .

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