Nepal’s First Skydiving Event Led by Nepali Instructors Takes Off in Pokhara with Simrik Air

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Pokhara, Nepal : In a historic milestone for aerial sports in Nepal,Simrik air in association with local instructors with over a decade of experience in skydiving and thousands of successful jumps are hosting the country’s first skydiving event led entirely by Nepali professionals. The event marks a significant shift in Nepal’s adventure tourism landscape, showcasing the potential of its homegrown talent. Simrik Air having history of conducting multitude of helicopter tours and activities has associated the team of local experts working in different countries to host this event to mark this event.

Turning Dreams into Reality
“This has been my dream for years,” says Alish.
Alish Thapa is a seasoned instructor with 18 years of experience with more than 4000 jumps recorded and aerial sports enthusiast.

“Thanks to Simrik Air, CAAN, and the Ministry of Tourism, we are finally taking steps to establish Nepal as a skydiving hub for adventure enthusiasts. With government support for dedicated airspace, skydiving could provide opportunities for youth and year-round economic benefits.”

The Team Behind the Leap
Alish is joined by a team of highly skilled instructors, including Subash Thapa, Manish Hirachan, Aashish Thapa, and Nepal’s first female skydiver and USPA-certified coach, Yeshoda KC Thapa. Together with Simrik Air, they aim to leverage Nepal’s natural beauty and towering peaks to attract adventure seekers from around the world.

Nepal has some of the most breathtaking landscapes for skydiving, We see immense potential, but proper policies and dedicated airspace are essential to fully capitalize on it. The majestic mountains beneath the diver and a reluctant fall is what excites an adventurous heart says Murali Dhar Joshi General manager of Simrik Air.

After successful dive from 13000 feet Capt Rameshwar Thapa , celebrated entrepreneur of Nepal narrates ‘It was an unforgettable and lifetime moment to dive into open sky. I found this adventure,The best and efficient of all to enhance energy and strengthen will to come-over internal fear. And also invites all of you to embrace and conquer the ultimate leap from 13000 feet and witness majestic mountains and mother nature.

Renowned business man and Marketing Director of Simrik air speaks to media post jump saying that ski diving unveiled energy and confidence out of me. Its not about the age that blocks to leap into open sky its the enthusiasm that comes from inner core for the adventure.


Anyone above age of 16 can take a dive, until they are medically and mentally fit.

“Interested clients often leave because of the long wait times for approvals,” explains Subash Thapa. “Pokhara needs a dedicated airspace for aerial sports like skydiving, paragliding, paramotor, hot air balloons, and ultra-light flights. This would not only streamline operations but also enhance Nepal’s reputation as an adventure tourism destination.”

A Vision for the Future
The team believes that with proper policies, infrastructure, and government support, Nepal could emerge as a global hub for skydiving and other aerial sports. The natural beauty of Pokhara, combined with its proximity to the Himalayas, offers an unparalleled experience for adventure enthusiasts.

“This is not just about skydiving,” says Alish. “It’s about creating opportunities for Nepal’s youth and unlocking the economic potential of adventure tourism.”
The event has started from 10th of Jan to 21st of Jan 2025 intially and with further demand of diver is being extended for next 15 days to end by 5th February 2025. The enthusiasts willing to jump can contact Simrik air or Insky skidive team pokhara to secure their seats. Currently there are two package VIP package and deluxe package under the event and package starts from NRS 95000.

The success of this event will likely set the stage for further developments in aerial sports, as Nepal takes a bold leap toward becoming an international destination for thrill-seekers.

जैसे कर्म वैसा फल, बंद हो गई हिंडनबर्ग

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अमेरिका में भारत समर्थक नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के पूर्व ही अमेरिका से भारत हित के दो महत्वपूर्ण समाचार प्राप्त हुए हैं, जिनके कारण जहां एक और भारतीय शेयर बाजार में आनंदोत्सव मनाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक हलकों में निराशा व दुख का वातवरण है। जिस कंपनी की रिपोर्ट को आधार मानकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में संपूर्ण विपक्ष हर चुनाव में अंबानी -अडाणी,अंबानी -अडाणी की रट लगा रहा था अब वह कंपनी ही बंद हो गई है। अमेरिका से दूसरा समाचार यह है कि अमेरिका ने भारत पर लगे परमाणु प्रतिबंधो को समाप्त कर दिया है।

लोकसभा, उसके बाद हुए विधान सभा चुनावों के बाद संसद के विगत शीतकालीन सत्र में भी विपक्ष ने अडाणी का मुद्दा उठाकर सदन की कार्यवाही तक नहीं चलने दी। राहुल गांधी ने एक पोस्टर जारी किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और गौतम अडाणी का चित्र बना था तथा लिखा था “एक हैं तो सेफ हैं।“विपक्ष हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट तक चला गया था यद्यपि वहां उसे मात खानी पड़ी थी। विपक्ष हिंडनबर्ग की तथाकथित रिपोर्ट के मुद्दे जाँच संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग कर तथा किन्तु उनका परम हितैषी हिंडनबर्ग अमेरिका में अपनी जांच प्रारंभ होने से पहले ही दुकान बंद करके भाग खड़ा हुआ।

अमेरिका की इंवेस्टमेंट रिसर्च फर्म और शॉर्ट सेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग के संस्थापक नाथन एंडरसन ने कंपनी बंद करने की घोषणा की, यह घोषणा उस समय की गई है जब हिंडनबर्ग रिसर्च कंपनी न्याय विभाग और यूएस एसईसी द्वारा जांच के दायरे में आ गई। कंपनी को नियमों के उल्लंधन के लिए भारतीय नियामक सेबी द्वारा जांच और कारण बताओ नोटिस भी जारी किया चुका है। कई अन्य नियामकों ने भी हिंडनबर्ग पर चारों ओर से शिकंजा कसा । इस कंपनी ने अभी तक सेबी के नोटिस का जवाब तक नहीं दिया है।

जब से हिडनबर्ग के बंद होने की घोषणा हुई है, तब से सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म्स इसको लेकर हलचल है, एक यूजर ने लिखा,“ कितने गाजी आए और कितने गाजी गए“। सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि हिंडनबर्ग सुपारी लेकर भारत की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने और निजी मुनाफा कमाने के लिए काम कर रहा थी। कुछ यूजर्स का कहना है कि हिंडनबर्ग रिसर्च के बंद होने का फैसला हैरान करने वाला है।यह फैसला उस समय लिया गया जब अमेरिकी न्याय विभाग हिंडनबर्ग की जांच करने की योजना बना रहा था। यह फैसला उस समय लिया गया जब ट्रंप सत्ता में आने जा रहे हैं।इस बात की भी गहराई से जांच होनी चाहिए कि राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर कैसे भरोसा कर लिया था? इसी रिपोर्ट के आधार पर राहुल गांधी ने अपने मित्रों के साथ प्रेस वार्ता कर संसद की कार्यवाही बाधित की थी।

हिंडनबर्ग ने अपने सात वर्ष के कार्यकाल में सात बड़े शिकार किए और शेयर बाजार में उन्हें लहूलुहान कर डाला, इसी क्रम में कंपनी ने अदाणी समूह को भी लगातार निशाना बनाया। कंपनी 2023 में कम्पनी रिपोर्ट प्रकाशित करके अदाणी समूह पर कारपोरेट धोखाधड़ी का आरोप लगाती रही जिससे अदाणी समूह को वित्तीय मोर्चे पर दबाव का सामना करना पडा। हिंडनबर्ग ने सेबी प्रमुख माधवी पुरी और उनके पति धवल बुच पर हितों के टकराव का आरोप लगाया। कंपनी ने दावा किया था कि उनकी विदेश स्थित ऐसी कंपनियों में हिस्सेदारी है जो गौतम अदाणी के लिए पैसों की हेराफेरी करती हैं। 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने आय और राजस्व की रिपोर्टिंग को लेकर इकान एंटरप्राइजेज एलपी की आलोचना की थी। हिंडनबर्ग 2020 में इलेक्ट्रिक ट्रक बनाने वाली कंपनी निकोला के पीछे पड़ गया था कहा गया कि निकेला ने अपनी तकनीक को लेकर निवेशकों से झूठ बोला है । इस मामले मे एक यूएस ज्यूरी ने 2022 में निकोला के संस्थापक ट्रेवर मिल्टन को धोखाधड़ी का दोषी करार दिया था। इसी प्रकार हिंडनबर्ग कंपनी ने पेमेंट कंपनी ब्लाक इंक में शॉर्ट पोजिशन मामले में आरोप लगाया कि कंपनी ने यूजर्स की संख्या को बढ़ा चढ़ाकर और लागत को कम करके दिखाया है। इसी प्रकार हिंडनबर्ग ने 2022 में टिवटर इंक पर चढ़ाई कर दी थी। 2022 में ही जेएंडजे परचेजिंग के खिलाफ जांच प्रारम्भ कर दी थी। इसके लिए हिंडनबर्ग ने किसी प्रकार से कंपनी के निगरानी वाले फुटेज तक प्राप्त कर लिये थे। फुटेज से पता चला कि जेएंड जे की मार्केंटिंग टीम के लोग लोगों को धोखाधड़ी वाली निवेश स्कीम में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे।

भारत में प्रवेश करते ही हिंडनबर्ग के सपने ऐसे चकनाचूर हुए कि वह अपनी दुकान बंद करके भाग निकली। भारत में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस नेता राहुल गांधी व संपूर्ण विपक्ष ने अदाणी समूह पर लगातार दोहरा रवैया अपना रखा है। एक ओर यह लोग अपनी सरकार वाले राज्यों में अदाणी समूह को निवेश के लिए बुलाते हैं और दूसरी और उनके नाम पर संसद ठप करते हैं । बीच में आए और सत्य सिद्ध हुए समाचार कि हिंडनबर्ग का मालिक नैट एंडरसन का भारत विरोधी जार्ज सोरोस से सीधा संपर्क रहा है। हिंडनबर्ग कंपनी अपना नया खुलासा करने से एक दिन पूर्व ही एक रहस्यमय ई मेल संदेश जारी कर देती थी और उसके बाद का काम राहुल गाँधी करते थे जिससे राजनैतिक गलियारों में गहमागहमी बढ़ जाती थी और शेयर बाजार हिल जाते थे फिर इसी आधार पर संसद तथा राज्य विधानमंडलों में अराजकता फैलाई जाती थी। इसीलिए कहा जा रहा है कि हिंडनबर्ग के बंद हो जाने के बाद जहां कुछ लोग आनंदोत्सव मना रहे हैं वहीं कुछ लोग दर्द से कराह उठे हैं।

जिन राजनैतिक तत्वों ने अपने स्वार्थ साधने की दृष्टि से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा व संघ की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया तथा विदेशों में जाकर भारत विरोधी बयान दिए क्या अब वह लोग अपने कुकर्मो के लिए माफी मागेंगे? इन स्वार्थी तत्वों से फिलहाल ऐसी आस लगाना बेकार ही है क्यांकि अब यह लोग अपनी बात को सही साबित करने के लिए कोई नया रास्ता ढूंढ रहे होंगे । इस पूरे प्रकरण में यह तथ्य भी जांचने योग्य हो गया है कि हिंडनबर्ग के सभी खुलासे संसद सत्र आरम्भ होने के पूर्व ही क्यों होते थे?

ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद अमेरिकी धरती पर भारत विरोधी हरकतें करने वालों का एजेंडा संभवतः नही चलेगा और न ही इसमें व्हाइट हाउस का सहयेग मिल सकेगा । यह भी कहा जा रहा है कि हिंडनबर्ग भारत विरोधी डी पस्टेट का ही एक अहम हिस्सा था और ट्रंप के आगमन के साथ ही जब उसे लगा कि उसकी जांच होकर ही रहेगी और दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा तो डर कर हिंडनबर्ग का मालिक एंडरसन कंपनी बंद कर भाग खड़ा हुआ है।अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद हिंडनबर्ग की कड़ी जांच और उसे अमेरिकी कानूनों के तहत कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रह हैं और यह भी मांग कर रहे है कि हिंडनबर्ग से जुड़ी सभी फाइलों व कागजो को सुरक्षित रखा जाये क्योकि अमेरिकी कानूनों के तहत जब वहां पर सत्ता परिवतन होता है तब जज भी बदल जाते हैं।

“इंडियन स्टेट से लड़ाई” वाले बयान पर श्री राहुल गांधी के नाम “खुला प्रेम पत्र!”

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– अभिरंजन कुमार

प्रिय श्री राहुल गांधी जी,

आप एक लोकतंत्र में हैं। वस्तुतः दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हैं। हो सकता है कि आप इस सत्य को स्वीकार न कर सकें, लेकिन वास्तविकता यह है कि आप दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र में हैं, जो सबके लिए सहिष्णुता, समानता, सम्मान और स्वतंत्रता के मानवतावादी विचारों की नींव पर सहस्त्राब्दियों से खड़ा है। इसलिए आपके प्रति पूर्ण सम्मान रखते हुए आपके नाम यह खुला प्रेम पत्र लिख रहा हूं।

तो प्रिय श्री राहुल गांधी जी,
चूंकि आप दुनिया के सबसे विशाल और प्राचीन लोकतंत्र में हैं, जिसका प्रादुर्भाव 1947 या 2014 में ही नहीं हुआ है, इसलिए इस देश में अभिव्यक्ति और विचारों की स्वतंत्रता आपको सहस्त्राब्दियों से मिली हुई है। इसलिए आपको किसी भी व्यक्ति , विचार, संगठन या सरकार से असहमति एवं नाराज़गी रखने की स्वतंत्रता भी सहज ही प्राप्त है। इसलिए आप किसी का भी राजनीतिक विरोध करें, जनता को अपनी बातें समझाकर, उन्हें साथ लेकर चुनाव के माध्यम से किसी को भी सत्ता से उखाड़ फेंकें, इसकी भी आपको स्वतंत्रता है। इस लिहाज से आप भारतीय जनता पार्टी का विरोध करें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विरोध करें, मोदी शाह भागवत का विरोध करें, आपसे कोई गिला नहीं। लेकिन आप “इंडियन स्टेट” से विरोध और लड़ाई की बात कैसे कह सकते हैं, इसके बावजूद कि आप कह रहे हैं कि भाजपा और आरएसएस ने देश की सभी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है?

प्रिय श्री राहुल गांधी जी,
जब आप कहते हैं कि भाजपा और आरएसएस ने देश की संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है, तो इसमें प्रच्छन्न रूप से यह भी निहित है कि पहले किसी और का कब्जा था, जिसे छीनकर भाजपा और आरएसएस ने यह कब्जा किया है। तो वह कब्जा किसका था? स्पष्ट रूप से आप ही लोगों का था। 1947 से 2014 तक 67 वर्षों में 55 वर्षों तक केंद्र में आपकी पार्टी की सरकार रही, जिस दौरान देश ने बहुत गंभीरता से यह महसूस किया कि देश की सभी संस्थाओं पर आपकी पार्टी का प्रत्यक्ष कब्जा था। बीच के अन्य 12 वर्षों में चली कमज़ोर गठबंधन सरकारें भी संस्थाओं से आप लोगों का कब्ज़ा हटाने में सक्षम नहीं थीं, सो उस अवधि में भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आप ही लोगों का कब्ज़ा रहा।

प्रिय श्री राहुल गांधी जी,
उक्त अवधि में देश की तमाम संस्थाओं पर आप लोगों का कब्ज़ा इतना मजबूत था कि आपकी दादी श्रीमती इंदिरा गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज़ होकर देश में उसी संविधान को निलंबित करके इमर्जेंसी लगा दी, जिसकी प्रति अपने हाथों में लेकर आजकल आप यत्र तत्र सर्वत्र घूमते हुए पाए जाते हैं। आप लोगों का कब्ज़ा इतना मजबूत था कि आप लोगों ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी सहित देश के समस्त संविधान निर्माताओं की भावनाओं की अवहेलना करते हुए देश के संविधान की प्रस्तावना तक बदल डाली और उसमें अवांछित तरीके से धर्मनिरपेक्ष शब्द डाल दिया। कृपया याद रखें कि आप संविधान की जिस प्रति के साथ इन दिनों यत्र तत्र सर्वत्र घूमते हुए पाए जाते हैं, वह बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी सहित अन्य संविधान निर्माताओं द्वारा रचित मूल संविधान नहीं है। देश की संस्थाओं पर आप लोगों का कब्ज़ा इतना कठोर था कि शाहबानो नाम की पीड़ित किंतु बहादुर मुस्लिम महिला को सुप्रीम कोर्ट से मिले न्याय तक को आप लोगों ने कुचल दिया। वास्तव में वह न केवल एक बहादुर मुस्लिम महिला को कुचलना या, बल्कि समस्त मुस्लिम महिलाओं को, न्याय को और स्वयं देश के सर्वोच्च न्यायाधिकरण सुप्रीम कोर्ट को कुचलना था। देश की संस्थाओं पर आप लोगों का कब्ज़ा इतना मजबूत था कि स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को आप की सरकार का तोता बताया था। आपके पूज्य पिताजी स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जी के काल तक चुनाव आयोग की भी क्या हालत थी? चुनावों में बूथ लूट, हिंसा, हत्याएं और कमज़ोर नागरिकों को मतदान से रोके जाने की घटनाएं आम थीं। बाद में मुख्य चुनाव आयुक्त टी एन शेषन ने जो चुनाव सुधार किए, वह वास्तव में चुनाव आयोग से आप लोगों का कब्ज़ा हटाने के लिए ही तो किए थे।

खैर, किस संस्था का नाम लेंगे, जिसपर आप लोगों का कठोर कब्जा नहीं था? देश की शिक्षा, संस्कृति और इतिहास के निर्धारण से जुड़ी तमाम संस्थाओं तक पर आप लोगों का कब्ज़ा रहा। आप लोगों ने झूठ सच जो चाहा, बच्चों को पढ़ाया, नागरिकों को बताया। कहीं से कोई चुनौती नहीं थी, इतना कठोर कब्जा था। आपके पुरखे एवं राजनीतिक परिवार के लोग स्वयं ही भारत रत्न ले लेते थे, अपने जन्मदिन को राष्ट्रीय दिवस घोषित करा लेते थे, लेकिन संस्थाओं पर कब्जा इतना कठोर था कि आलोचना के किसी स्वर की कहीं कोई गुंजाइश ही नहीं थी। यहां तक कि आप लोगों ने लगभग 90 बार विभिन्न राज्यों में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त कर दिया, जिनमें आपकी दादी श्रीमती इंदिरा गांधी ने अकेले 50 से अधिक राज्य सरकारों को बर्खास्त किया था।

लेकिन 67 वर्षों तक देश की तमाम प्रमुख संस्थाओं पर आप लोगों के ऐसे कठोर कब्जे के बावजूद आपके राजनीतिक विरोधियों और हम नागरिकों ने कभी यह नहीं कहा कि देश की समस्त संस्थाओं पर आप लोगों का कब्ज़ा इतना भयानक है कि “ऐसा लगता है कि अब हमारी लड़ाई इंडियन स्टेट से हो गई है।” लेकिन आप तो सिर्फ साढ़े दस साल सत्ता से बाहर रहने के बाद ऐसी मानसिक और वैचारिक स्थिति में पहुंच गए हैं कि अपनी लड़ाई को “इंडियन स्टेट” के ही खिलाफ बता रहे हैं। यद्यपि मैं ऐसे शब्दों का आपके लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहता, लेकिन यदि आपके विचार ऐसे हो गए हैं, तो दिल पर हाथ रखकर बताइए कि आपमें और नक्सलियों, माओवादियों अथवा आतंकवादियों में क्या अंतर रह गया है?

प्रिय श्री राहुल गांधी जी,
आप इस लोकतंत्र में सबसे बड़े विपक्षी दल के सबसे बड़े नेता हैं और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। यदि आप ही सत्ता में नहीं होने अथवा देश के नागरिकों को अपने नेतृत्व एवं विचारों से प्रभावित नहीं कर सकने के कारण ऐसी मानसिक और वैचारिक स्थिति का शिकार हो जाएंगे, तो इस देश को दुश्मन ताकतों का शिकार बनने से कौन बचा सकता है? क्या कथित “इंडिया” गठबंधन आपने “इंडियन स्टेट” से लड़ने के लिए ही बनाया है? क्या आपकी पार्टी के अन्य नेता और आपके गठबंधन के अन्य सहयोगी भी यह मानने लगे हैं कि भाजपा और आरएसएस से लड़ते लड़ते अब उनकी लड़ाई सीधे इंडियन स्टेट से हो गई है? यदि ऐसा है, तब तो देश की राजनीति में यह अत्यंत ही खतरनाक दौर आ गया है, जब आपके नेतृत्व में देश के समस्त विपक्षी दल एकजुट होकर सीधे देश के खिलाफ ही जंग का ऐलान कर चुके हैं। यह अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।

प्रिय श्री राहुल गांधी जी,
हम जैसे नागरिक आपकी बातों को ध्यान से सुनते हैं, उसपर चर्चा करते हैं, प्रतिक्रिया देते हैं, कायदे से तो यह भी अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि देश की राजनीति, लोकतंत्र, व्यवस्थाओं और भाग्य पर आपके परिवार का लंबे समय से कब्जा बना हुआ है। आप एक ऐसे परिवार में पैदा हुए हैं, जो हम पर शासन करता रहा है, तो मजबूरन आपकी बात सुननी पड़ती है और जवाब देना पड़ता है। यदि आप हमारी तरह एक सामान्य परिवार में पैदा हुए होते तो आपकी किस मेधा और वैचारिक शक्ति के कारण आपकी बात इतनी सुनी जा सकती थी? देश के किसी भी मुद्दे पर बड़े बड़े विद्वानों तो छोड़ दीजिए, हम जैसे सामान्य नागरिकों से भी 15 मिनट डिबेट में आप टिक सकते हैं क्या? यहां स्पष्ट कर दूं कि इस पत्र में की जा रही यह टिप्पणी आपकी अवहेलना नहीं, बल्कि आपके अपने ही व्यवहार द्वारा प्रमाणित किए गए तथ्यों और घटनाओं पर आधारित है। जब आप किसी डिबेट में नहीं टिकते अथवा आपके पास किसी सवाल का जवाब नहीं होता, तो आप सवाल पूछने वाले को ही संघी-भाजपाई करार देते हैं। ऐसा आपने कई ऐसे पत्रकारों तक के साथ किया हुआ है, जिनकी देश के मुख्य विपक्षी दल के सर्वोच्च नेता होने के कारण आपसे सहानुभूति ही रही है।

इसलिए प्रिय श्री राहुल गांधी जी,
आपको मेरी विनम्र सलाह यह होगी कि आप अपना वैचारिक परिष्कार कीजिए। इस बात की समीक्षा कीजिए कि आपकी पार्टी की नीयत और नीतियों से देश की एक विशाल आबादी का भरोसा क्यों उठ गया? यहां तक कि आपके नेतृत्व से भी अब तक आपके प्रति समर्पित रहे प्रमुख पार्टी व गठबंधन नेताओं का भरोसा क्यों उठता जा रहा है? आपकी पार्टी यदि महात्मा गांधी की राजनीतिक और वैचारिक विरासत का वारिस होने का दावा करती है, तो कृपया आप महात्मा की इस बात को अवश्य याद करें कि जब आप दूसरों की तरफ एक उंगली उठाते हैं, तो तीन उंगलियां स्वयं आप ही की तरफ होती हैं। आज मैं आपको स्पष्ट रूप से बता सकता हूं कि वे कौन सी तीन उंगलियां स्वयं आप ही की तरफ मुड़ी हुईं हैं? ये तीन उंगलियां हैं- आपका नेतृत्व, आपकी नीतियां, आपकी नीयत। इन तीनों पर ही देश के बहुतायत नागरिकों और यहां तक कि आपके सहयोगी नेताओं एवं दलों को भी भरोसा नहीं है। यदि किसी दिन आप इन तीन मुद्दों का सही समाधान कर लेंगे, तो मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपको सत्ता-विछोह से आसानी से मुक्ति मिल सकती है।

इसलिए प्रिय श्री राहुल गांधी जी,
आपको मेरी विनम्र सलाह यह भी होगी कि “इंडियन स्टेट” से लड़ने के बजाय आप इंडिया यानी भारत की आत्मा, विचारों एवं संस्कारों को समझिए और अपनाइए। केवल अपने गठबंधन का नाम “इंडिया” रखने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि “आंख का अंधा, नाम नयनसुख” जैसी कहावतों का अर्थ इस देश के लोग खूब समझते हैं।

प्रिय श्री राहुल गांधी जी,
अंत में फिर से यह कहना चाहता हूं कि यदि आप मोदी सरकार की किसी नीति का विरोध करना चाहते हैं, तो शौक से कीजिए। यदि आप भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के किसी विचार का विरोध करना चाहते हैं, तो भी धूम धाम से कीजिए। जहां लगता है, वहां मैं भी करता हूं, जैसे अभी आपके “इंडियन स्टेट” से लड़ाई वाले अगंभीर, अपरिपक्व, अचिंतित और अस्वीकार्य वक्तव्य का विरोध कर रहा हूं। प्रमुख कृषि-फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग को मैंने देश के किसानों का जन्मसिद्ध अधिकार बताया है, जिससे भाजपा और आरएसएस के मेरे अनेक प्यारे भाई-बहन भी सहमत नहीं हैं। ऐसे और भी कई मुद्दे हैं जिनपर मौजूदा सरकार से मेरी असहमति है, जैसे आपसे भी असहमति है। लेकिन मैं न तो “इंडियन स्टेट” से लड़ाई लड़ रहा हूं, न ही भाजपा, आरएसएस, कांग्रेस और वामपंथी दलों सहित किसी भी राजनीतिक दल से लड़ाई में हूँ। आप सभी इस लोकतंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं और आप सभी के परस्पर विरोधी विचार भी इस लोकतंत्र में संतुलन पैदा करने का काम करते हैं। इसलिए आप सभी लोगों और लोकतंत्र के सभी महत्वपूर्ण अंगों के लिए मेरे मन में काफी सम्मान है।

प्रिय श्री राहुल गांधी जी,
चूंकि मैने सुना है कि आप अपनी पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं और यहां तक कि अपने मुख्यमंत्रियों तक से आसानी से नहीं मिलते हैं और उनका जब चाहे तिरस्कार कर देते हैं, इसलिए अब तक यह साहस नहीं जुटा पाया हूं कि आपसे मिलने का समय मांगूं और आपको यथोचित स्नेह व सम्मान के साथ समझाऊं कि लोकतंत्र का असली मतलब क्या है, भारत के मौलिक विचार और संस्कार क्या हैं, आप लोग क्या-क्या गलतियां कर रहे हैं और इंडिया, इंडियन स्टेट एवं इसके नागरिकों के प्रति वास्तव में आपके दायित्व क्या-क्या हैं।

आशा है, आप इन बातों को अन्यथा नहीं लेंगे और आवश्यक आत्मचिंतन एवं सुधार करेंगे।

बहुकोणीय दिल्ली विधानसभा चुनावों में रेवड़ियों पर दाँव

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वर्ष 2025 का पहला विधानसभा चुनाव देश की राजधानी दिल्ली में होने जा रहा है। दिल्ली में विगत दस वर्षों से आम आदमी पार्टी की सरकार चल रही है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व्यक्तिगत और आप पार्टी के संयोजक के रूप में शराब घोटाले के मुख्य आरोपी हैं तथा सुप्रीम कोर्ट की दया पर जमानत पर घूम रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी शर्तों के बाद भी वह जनता के बीच लोकलुभावन घोषणाएं कर जनता को गुमराह कर रहे हैं कि मानो कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया हो। पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया सहित कई अन्य मंत्री व विधायक जेल यात्रा कर चुके हैं तथा कई पर गंभीर आरोपों के चलते जमानत पर हैं।आप सरकार के दो विधायकों पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या को बसाने के मामले में गहन जांच चल रही है। अरविंद केजरीवाल पर शीशमहल जैसे कई अन्य घोटालों के भी दाग भी लगे हुए हैं। दिल्ली सरकार का शायद ही कोई भी विभाग ऐसा बचा है जहां हजारों करोड़ का घेटाला न हुआ हो और यह सच्चाई कैग रिपोर्ट से भी प्रकट हो रही है और यही कारण है कि आप सरकार ने कैग रिपोर्ट विधानसभा सत्र में प्रस्तुत नहीं करी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में आप सरकार को निशाने पर लेते हुए इसे आप-दा बाताया और जनता से इसे उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। इस बार कांग्रेस पार्टी भी दिल्ली चुनावों में कमर कस रही है तथा बसपा और एआईएआईएम जैसे कट्टर मजहबी भी चुनावी जंग में उतर चुके हैं। समाजवादी पार्टी ने आप-दा के साथ ही रहने का मन बनाया है। 17 जनवरी को नामांकन पत्र प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि के साथ ही चुनाव की तस्वीर एक सीमा तक स्पष्ट हो गई है। प्राथमिक और मोटे तौर पर दिल्ली चुनाव में सभी दल रेवड़ियों पर ही दाँव खेलते दिखाई दे रहे हैं शेष सभी मुद्दे गौण हैं।

भाजपा ने जारी किया संकल्प पत्र – दिल्ली विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी इस बार केजरीवाल को उसी की भाषा में उत्तर दे रही है। पार्टी ने आप के घोटालों, दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण, यमुना नदी की दयनीय स्थिति व मुफ्त नल की असलियत को मुददा बनाते हुए अपना संकल्प पत्र जारी किया है। ऐसा पहली बार हुआ है कि भाजपा ने अपना पूरा संकल्प पत्र नहीं जारी किया है अपितु उसका एक अंश ही जारी किया है और आगामी दिनों में वह कुछ योजनाएं व संकल्प लगातार जारी करती रहेगी। भाजपा इस बार झुग्गीवासियों का बहुत ध्यान रख रही है और उनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास देने का वादा किया है। मध्य प्रदेश, राजस्थान व हरियाणा की की ही तरह गरीबों के लिए 5 रुपये में भोजन देने की घोषणा करते हुए पार्टी ने कहा कि इसके लिए अटल कैंटीन योजना का आरम्भ किया जाएगा। मध्य प्रदेश,हरियाणा तथा राजस्थान में यह योजना सफलतापूर्वक चल रही है तथा अत्यंत लोकप्रिय हो रही है।भाजपा रणनीतिकारों का मानना है कि गरीबों के लिए 5 रुपये में भोजन की योजना दिल्ली में भी गेमचेंजर साबित होगी।

भाजपा का संकल्प पत्र जारी करते हुए भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनैतिक संस्कृति को काफी बदल दिया है आज से पहले राजनैतिक दल चुनावी घोषणाओें को भूल जाया करते थे लेकिन अब घोषणापत्र संकल्प पत्र में बदल चुका है। भाजपा ने 2014 में 500 संकल्प किये थे जिनमें से 499 पूरे हो चुके हैं। भाजपा ने संकल्प पत्र जारी करते समय कहा कि जनता के हित में आप सरकार की सभी योजनाएं जारी रहेंगी अपितु उसमें से भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जायेगा। भारतीय जनता पार्टी की ओर से यह बात कई बार कही जा चुकी है कि क्योंकि आप की ओर से लगातार यह प्रचार किया जा रहा है कि जब बीजेपी सत्ता में आयेगी तब गरीबों की झुग्गियों में वह बुलडोजर चलवा देगी तथा सभी योजनाओं को बंद करवा देगी जबकि भाजपा का कहना है कि वह सभी झुग्गी वालों को मुख्यधारा में लेकर आएंगे।

भाजपा ने अपने द्वारा शासित अन्य राज्यों की तरह दिल्ली में भी महिलाओं को हर माह 2500 रुपये सहायता राशि देने का संकल्प लिया है। गर्भवती महिलाओ को 21000 रुपये देने व एक न्यूट्रीशनल किट भी देने का संकल्प किया है। भाजपा ने होली -दीपावली के अवसर पर मुफ्त सिलिंडर तथा 500 रुपए की एलपीजी सब्सिडी देने का वादा किया है। भाजपा ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए 3000 रुपए तक की पेंशन देने, आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में भी लागू करने का ऐलान किया हैं।आयुष्मान योजना का संकल्प लेते हुए भाजपा अध्यक्ष जेपी नडडा ने दिल्ली में चल रहे मोहल्ला क्लीनिक में 300 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया तथा जब बीजेपी सरकार आने पर मोहल्ला क्लीनिक के घोटालो की जांच कराने का संकल्प दोहराया। भाजपा ने दिल्ली में सौर योजना लागू करने सहित 300 यूनिट बिजली फ्री देने सहित धार्मिक स्थलों को 500 यूनिट तक फ्री बिजली देने का संकल्प लिया है।
दिल्ली विधानसभा चुनावों में कांग्रेस भी अपने वादों के साथ चुनावी मैदान में दम भर रही है जिसके कारण चुनाव काफी रोचक होता जा रहा है। दिल्ली में कांग्रेस अपनी जमीन वापस पाने तथा बीजेपी सत्ता में वापसी के लिए मैदान में हैं और दोनों ने अपने सभी स्टार प्रचारकों को मैदान में उतरने को कह दिया है। भाजपा की रणनीति में सभी मुख्यमंत्री चुनाव प्रचार करने जा रहे हैं। खबर है कि दिल्ली में भी उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियों की बहुत डिमांड है तथा “बटेंगे तो कटेंग“ के पोस्टर दिल्ली की दीवारों पर लग रहे हैं।

सभी दलों ने अपनी पोटली से वादो और संकल्पों का पिटारा खोलकर रख दिया है। सभी ने रेवड़ियों पर दाँव खेला है जिससे आप- दा की सरकार कुछ दबाव में है। यदि कांग्रेस व ओवैसी के कारण मुस्लिम मतों का विभाजन होता है अथवा बसपा के कारण दलित वोट बैंक कुछ खिसकता है तो फिर आप -दा के लिए दिल्ली की राह कठिन हो जायेगी।

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