चीन और कांग्रेस पाल रही है सनातन विरोधी पत्रकारों को

3e67ac70-7807-11ee-a503-4588075e3427.jpg.webp

आचार्य श्रीहरि

राज्यसभा टीवी सोनिया गांधी की वार रूम हुआ करती थी। उर्मिलेश यादव, अखिलेश सुमन, अरविन्द सिंह और कुर्बान अली जैसों की नियुक्ति प्रतिभा के आधार पर नहीं बल्कि उनकी मुस्लिम, हामिद अंसारी और कांग्रेस भक्ति के आधार पर हुई थी। राज्य सभा टीवी में उन सभी लोगो को नियुक्तियां मिलती थी और अन्य जगह जैसे बहस, सीरियल निर्माण आदि में मिलती थी जो हिन्दू विरोधी होते थे, जो इंडियन स्टेट के खिलाफ लडने की मानसिकता रखते थे, जिनका समर्पण मुस्लिम परस्ती और हज मानसिकता से जुडी होती थी। उर्मिलेश यादव, अरविंद सिंह, अखिलेश समुन सहित दर्जनों लोगों का कोई टीवी बैकग्राउंड नहीं था फिर भी इन्हें राज्य सभा टीवी में जगह मिली थी। राज्य सभा टीवी संसदीय मामलों पर कम ही ध्यान देती थी, घोडे और खच्चर की रिर्पोिटंग पर ज्यादा ध्यान देती थी, राज्यसभा टीवी के रिपोर्टर मनोरंजन लूटते थे और पानी की तरह पैसा बहाते थे। राज्यसभा टीवी आशिकी की भी जगह बन गयी थी। बहुत सारी बाते सही थी फिर भी न लिखने योग्य थी।चुनावी रिपोर्टिंग में करोड़ों रूपये स्वाहा किये गये थे। सबसे बडी बात यह थी कि राज्य सभा टीवी भाजपा और सनातन की कब्र खोदती थी। कांग्रेस के खिलाफ सुनना भी नहीं चाहती थी। राज्यसभा टीवी ही नहीं बल्कि अन्य संवैधानिक संस्थाओं में भी कांग्रेसी हस्तियां नियुक्ति पाकर सनातन की कब्र खोदती थी।

राज्य सभा टीवी का पहला सीईए गुरदीप सप्पल को बनाया गया था। जो कांग्रेसी था। उसने कांग्रेसियों से राज्यसभा टीवी को भर दिया था। राज्यसभा टीवी के दफ्तर को कांग्रेस का दफ्तर बना दिया गया था। सोनिया गांधी और उसके बेटे और बेटियों का भाषण स्पीच लिखा जाता था, भाजपा के खिलाफ किस प्रकार से घृणा अभियान चलना चाहिए, उसकी नीतियां और व्यूह रचना तैयार होता था। राज्यसभा टीवी के पत्रकारों से संघ नेताओ की गुप्तचरी करायी जाती थी और संघ की रणनीतियों की जानकारी जुटाने के इस्तेमाल किया जाता था। चर्चा होती थी कि दंगारोधी विधेयक भी राज्यसभा टीवी के दफ्तर मंे तैयार हुआ था। दंगारोधी विधेयक हिन्दू अस्मित पर अंतिम कील ठोकने वाला था, दंगा होने पर सिर्फ हिन्दू ही जेल जायेगा, सिर्फ हिन्दू ही अपराधी होगा, ऐसा था। दंगा रोधी विधेयक का व्यापक विरोध हुआ था। अगर 2014 में कांग्रेस वापस आती तो फिर दंगा रोधी विधेयक लागू हो जाता। खासकर राज्यसभा के सभापति और उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी का दखल कुछ ज्यादा ही था। हामिद अंसारी के कारण राज्यसभा टीवी के पत्रकारों और गैर पत्रकारों की कांग्रेस भक्ति, पाकिस्तान भक्ति और मुस्लिम भक्ति सिर चढकर बोलती थी। आईएसआई का एजेंट ने खुलासा किया था कि हामिद अंसारी कैसे भारत की कब्र खोदने में उनकी मदद करता था। भारत की कब्र खोदने की इच्छा रखने वाला हामिद अंसारी राज्यसभा टीवी के पत्रकारों और गैर पत्रकरों को मुस्लिम परस्ती और पाकिस्तान परस्ती दिखाने के लिए कैसे नहीं प्रेरित किया होगा?

भाजपा सत्ता में आयी फिर भी सोनिया गांधी के लिए काम करने वाले पत्रकारों का कोई बाल बांका नहीं हुआ और न ही उन्हें राष्ट्रभक्ति का पाठ पढाया गया और न ही उन्हें भारतीय कानूनों का पाठ पढाया गया। हामिद अंसारी की पाकिस्तान परस्ती पर भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया। कुछ परिवर्तन हुए। जैसे राज्यसभा टीवी और लोकसभा टीवी का एक कर दिया गया। बहुत सारे पत्रकारों ने अपनी सोनिया गांधी भक्ति छिपायी और भाजपाई बन गये, बहुत सारे पत्रकारों का टर्म पूरा हो गया और वे राज्यसभा टीवी से मुक्त हो गये। काग्रेस और सोनिया गांधी ने अपने पप्पू पत्रकारों को बेरोजगार नहीं होने दिया। राज्यसभा टीवी के पहले सीईओ गुरदीप सप्पल को सोनिया गांधी ने कांग्रेस का पदाधिकारी और प्रवक्ता बनवा दिया। जबकि अरविद सिंह ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का सलाहकार स्टाप की नौकरी पायी। इसके साथ ही साथ राज्सभा टीवी के अन्य स्टापों का भी प्रबंधन कांग्र्रेस ने कर दिया। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि कई पत्रकारों को विदेशों से फंडिंग भी करायी है, नौकरियां भी दिलवायी। न्यूज क्लिक का प्रकरण आपने सुना होगा। भारत को अस्थिर करने और नरेन्द्र मोदी की छबि को खराब कराने के लिए चीन ने अपना हथकंडा न्यूज क्लिक के तौर पर खडा किया था। न्यूज क्लिक को चीनी फंडिंग मिली थी। न्यूज क्लिक से उर्मिलेश यादव को लाखों रूपये मिले हैं।

चोरी और सीनाजोरी। आज गोदी मीडिया कहने वाले कौन लोग हैं? वही हैं जो कांग्रेस के पैसे और पद पर पलते थे, बढते थे और राज्यसभा टीवी जैसी जगहों पर मनोरंजन करते थे। अब नरेन्द्र मोदी के राज मंें कांग्रेसी पत्रकारों को पैसे और पद नहीं मिल रहे हैं तो अंगूर खट्टे हैं की परिभाषा पर सवार हो गये। अभी-अभी राहुल गांधी ने इंडियन स्टेट से लडने की बात की थी। उसने कहा था कि सभी संवैधानिक संस्थाओं में बीजेपी के लोग भरे पडे हैं। पर सच्चाई यह है कि नरेन्द्र मोदी के राज में भी कांग्रेसी चमचे ही पत्रकार के रूप में मलाई खा रहे हैं। कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं को किस प्रकार से अपने चंगूल में कैद कर रखा था उसका राज्यसभा टीवी एक उदाहरण मात्र हैं, ऐसे उदाहरण भरे पडे हैं।

विकसित भारत @ 2047 व्याख्यान श्रृंखला के तीसरे एडवोकेसी कार्यक्रम का ऐतिहासिक आयोजन

1-8.jpeg

नई दिल्ली: करुणा फाउंडेशन द्वारा 10 जनवरी 2025 को आयोजित साइबर सुरक्षा संगोष्ठी, विकसित भारत @ 2047 व्याख्यान श्रृंखला के तीसरे एडवोकेसी कार्यक्रम के रूप में एक ऐतिहासिक सफलता रही। यह कार्यक्रम सी. डी. देशमुख सभागार, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, मैक्स मूलर मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें भारत की डिजिटल सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए गहन चर्चाएँ और विचार-विमर्श हुए।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ:
इस संगोष्ठी में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, और उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तित्वों ने भाग लिया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

मेजर जनरल एम. यू. नायर (सेवानिवृत्त), सलाहकार, रक्षा मंत्रालय, जिन्होंने जेनेरेटिव एआई-आधारित साइबर रक्षा तंत्र को विकसित करने पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

श्री बी. शंकर जायसवाल, आईपीएस, संयुक्त पुलिस आयुक्त, दिल्ली पुलिस, जिन्होंने ज़ीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर और एआई सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।

लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पंत (सेवानिवृत्त), माननीय प्रधानमंत्री के पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा सलाहकार, जिन्होंने भारत की डिजिटल सुरक्षा में एआई की क्रांतिकारी भूमिका पर जोर दिया।

एफसीएस नेसर अहमद, परिषद सदस्य, आईसीएसआई, एमओसीए, और जिनेवा के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष, जिन्होंने साइबर सुरक्षा शासन पर अपने विचार साझा किए।

श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, सीईओ, एचआईटीईएस, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एआई अनुप्रयोगों पर विस्तृत चर्चा की।
इसके अतिरिक्त, फोर्टिनेट, पैराडाइम आईटी, और सावेक्स जैसे अग्रणी साइबर सुरक्षा समाधान प्रदाताओं के सीईओ, आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर, और अन्य प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

मुख्य निष्कर्ष:
संगोष्ठी में ज़ीरो ट्रस्ट सुरक्षा मॉडल और जेनेरेटिव एआई जैसी आधुनिक साइबर सुरक्षा तकनीकों पर केंद्रित गहन चर्चा हुई। इस कार्यक्रम ने न केवल साइबर सुरक्षा चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत किया, बल्कि नीति निर्माण, उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के बीच सहयोग का मार्ग भी प्रशस्त किया।

संस्थापक का वक्तव्य:
करुणा फाउंडेशन के संस्थापक श्री कुंदन कुमार झा ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “यह संगोष्ठी हमारे विकसित भारत @ 2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए यह मंच महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

यह संगोष्ठी राष्ट्रीय स्तर पर साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और डिजिटल भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए नए विचारों और रणनीतियों को सामने लाने में सफल रही।

मेटा के भारत और दक्षिण एशिया के सार्वजनिक नीति निदेशक, श्री शिवनाथ ठुकराल ने सोशल मीडिया पर माफी जारी की और भारत को मेटा के नवाचारों के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बताया।

bigstock-Moscow-Oct-Meta-Lo-437891606-1024x688-1.jpg

मार्क जुकरबर्ग का भारत पर बयान – जो रोगन पॉडकास्ट

मार्क जुकरबर्ग ने झूठा दावा किया कि भारत की वर्तमान सरकार कोविड-19 की कमजोर प्रतिक्रिया के कारण चुनाव हार गई, जिसके चलते केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।

संसदीय समिति ने मेटा को मार्क के बयान पर तलब किया

मेटा ने मार्क जुकरबर्ग के बयान पर माफी मांगी

घटनाओं की सूची:

तारीख मुद्दा बयान/प्रतिक्रिया
10 जनवरी 2025 जो रोगन के साथ एक इंटरव्यू में, श्री मार्क जुकरबर्ग ने गलत दावा किया कि 2024 के चुनावों में अधिकांश सत्तारूढ़ सरकारें, जिसमें भारत भी शामिल है, हार गईं। मार्क जुकरबर्ग ने कहा, “2024 दुनिया भर में चुनावों का एक बड़ा साल था, और इन सभी देशों, भारत और अन्य कई देशों में चुनाव हुए। मौजूदा सरकारें लगभग हर जगह हार गईं।”
13 जनवरी 2025 भारत के संदर्भ में यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत था। 2024 के चुनावों में, एनडीए सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, सत्ता में बनी रही। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री, श्री अश्विनी वैष्णव ने मार्क जुकरबर्ग के बयान की तथ्य-जांच की और प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्वीट किया:
“दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत ने 2024 के चुनावों में 640 मिलियन से अधिक मतदाताओं के साथ एनडीए में विश्वास व्यक्त किया। जुकरबर्ग का यह दावा कि कोविड-19 के बाद 2024 के चुनावों में भारत सहित अधिकांश सत्तारूढ़ सरकारें हार गईं, तथ्यात्मक रूप से गलत है।”
13 जनवरी 2025 सूचना प्रौद्योगिकी और संचार पर संसदीय स्थायी समिति, जिसकी अध्यक्षता श्री निशिकांत दुबे कर रहे हैं, ने मेटा को इस गलत जानकारी के लिए तलब करने की योजना बनाई। श्री निशिकांत दुबे ने कहा:
“किसी भी लोकतांत्रिक देश के बारे में गलत जानकारी उसकी छवि खराब करती है। इस संगठन को इस गलती के लिए संसद और यहां की जनता से माफी मांगनी होगी।”
14 जनवरी 2025 मेटा इंडिया के सार्वजनिक नीति के उपाध्यक्ष, श्री शिवनाथ ठुकराल ने मंत्री के ट्वीट के जवाब में मेटा की ओर से माफी मांगी। उन्होंने लिखा:
“आदरणीय मंत्री @AshwiniVaishnaw, मार्क का यह अवलोकन कि 2024 के चुनावों में कई सत्तारूढ़ दलों को दोबारा नहीं चुना गया, कई देशों के लिए सही है, लेकिन भारत के लिए नहीं। हम इस अनजाने में हुई गलती के लिए माफी मांगते हैं। भारत मेटा के लिए एक अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण देश बना हुआ है, और हम इसके नवाचार के भविष्य में योगदान करने की उम्मीद करते हैं।”

विवाद का विवरण

मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. के अध्यक्ष और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने जो रोगन पॉडकास्ट में भारत को कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारों के प्रति असंतोष का उदाहरण दिया। उनका बयान यह सुझाव देता है कि महामारी के बाद अधिकांश सत्तारूढ़ सरकारें, जिनमें भारत भी शामिल है, अगले चुनाव हार गईं।

केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जुकरबर्ग के दावे की तथ्य-जांच करते हुए इसे खारिज किया। उन्होंने भारत के 2024 के चुनावों को दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक प्रयास के रूप में बताया, जिसमें 640 मिलियन से अधिक मतदाताओं ने भाग लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को एक मजबूत जनादेश दिया।

मंत्री वैष्णव ने भारत सरकार द्वारा कोविड-19 के दौरान उठाए गए कुछ प्रमुख कदम भी गिनाए:
• 800 मिलियन नागरिकों को मुफ्त खाद्यान्न वितरण।
• 2.2 बिलियन मुफ्त वैक्सीन खुराक।
• 110 मिलियन से अधिक किसानों को वित्तीय सहायता।
• “वसुधैव कुटुंबकम” (दुनिया एक परिवार है) की भावना को अपनाते हुए अन्य देशों को सहायता प्रदान करना।
• रणनीतिक निवेश के कारण मजबूत महामारी के बाद की आर्थिक सुधार।

संसदीय समिति का कदम

श्री निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति ने मेटा के अधिकारियों को तलब किया है और 20-24 जनवरी के बीच चर्चा करेगी। अगर मेटा द्वारा माफी नहीं दी गई तो कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

मेटा की माफी

मेटा के भारत और दक्षिण एशिया के सार्वजनिक नीति निदेशक, श्री शिवनाथ ठुकराल ने सोशल मीडिया पर माफी जारी की और भारत को मेटा के नवाचारों के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बताया।

अयोध्या में धार्मिक, आध्यात्म और आर्थिक समृद्धि का नया अध्याय : तीर्थ यात्रियों का भी कीर्तिमान

Ram-mandir-1.webp


रामलला के अपने जन्मस्थान अयोध्या में पुनः विराजमान होने की वर्षगाँठ का तीन दिवसीय उत्सव संपन्न हुआ । इस एक वर्ष में अयोध्या ने अनेक कीर्तिमान बनाये। कभी सरयू में दीनदान का तो कभी दीपावली दीपोत्सव का । इस पूरे वर्ष अयोध्या आने वाले तीर्थ यात्रियों का भी कीर्तिमान बना ।

अपने जन्मस्थान अयोध्या में रामलला गत वर्ष पौष शुक्ल पक्ष द्वादशी को विराजमान हुये थे । तब अंग्रेजी तिथि 22 जनवरी थी । लेकिन विक्रम संवत के अनुसार पौष शुक्ल पक्ष द्वादशी इस वर्ष 11 जनवरी को आई । वर्षगाँठ उत्सव विक्रम संवत तिथि के अनुसार 11जनवरी से आरंभ हुआ जो तीन दिन चला । भीषण ठंड और महाकुंभ आरंभ होने के बाद भी इन तीन दिनों में लगभग साढ़े तीन लाख श्रृद्धालुओं ने सरयू में डुबकी लगाई और रामलला के दर्शन किये । इस तीन दिवसीय उत्सव का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया । इन तीन दिनों में पूरी अयोध्या राममय रही । रामलला को लगभग पचास क्विंटल फूलों से सजाया गया । इसमें विदेशी फूल भी थे । उत्सव के इन तीन दिनों में उन सभी कार्यक्रमों की झलक थी जो पूरे वर्ष अयोध्या में चले । इनमें आध्यात्मिक साधना, संतों के प्रवचन, यज्ञ हवन, पूजन के साथ भजन कीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी संपन्न हुये । अनुष्ठान यज्ञशाला में श्री राम बीज मन्त्रों का अनुष्ठान और 21 वैदिक आचार्य के द्वारा 6 लाख जाप संपन्न किया गया । 11 वैदिक आचार्यों द्वारा शुक्ल यजुर्वेद के मन्त्रोंच्चारण से आहुति दी गई । प्रतिदिन सबसे पहले रामलला का सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक पूजन होता, फिर मंदिर परिसर में चारों वेदों का पारायण और राम संरक्षण मंत्र का अखंड जप किया गया । उत्सव के प्रथम दिन 122035, दूसरे दिन 130155 और तीसरे दिन 105070 श्रद्धालुओं ने रामलला का पूजन दर्शन किया ।

अयोध्या आने वाले श्रृद्धालुओं में एक छै वर्ष का बालक मोहब्बत भी था जो पाकिस्तान बॉर्डर से सटे फाजिल जिले से लगभग बारह सौ किलोमीटर दौड़ लगाकर अयोध्या पहुंचा था। इस बालक ने 14 नवंबर से अपनी यात्रा आरंभ की थी। वह प्रतिदिन 20 किमी दौड़ता था। 10 जनवरी को वह फैजाबाद पहुंचा और 11 नवम्बर को अयोध्या पहुंचा। मुख्यमंत्री योगी योगेन्द्रनाथ ने साल श्रीफल से इस बालक का सम्मान किया ।

अपने जन्मस्थान में विराजमान होने की यह वर्षगाँठ का तीन दिवसीय उत्सव तो एक औपचारिकता थी । अयोध्या में तो यह पूरा वर्ष ही सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और आर्थिक उत्थान का रहा । इस वर्ष कई कीर्तिमान बने और अयोध्या ने विकास की नई अंगड़ाई ली। अयोध्या अब उसी भव्यता की यात्रा पर है जिसका वर्णन राम चरित मानस और अन्य ग्रंथों में मिलता है । संतों के प्रवचन, साधकों की साधना और भजन कीर्तन के साथ अयोध्या में विकास के नये कार्य आरंभ हुये हैं । पूरे नगर और उसके आसपास ऐसा कोई क्षेत्र कोई गली मोहल्ला ऐसा नहीं जहाँ नये निर्माण कार्य आरंभ न हुये हों । अयोध्या को उसके अतीत का वैभव लौटाने केलिये शासकीय और सार्वजनिक कार्यों केअतिरिक्त निजी स्तर की सक्रियता भी बढ़ी है ।

अयोध्या का अतीत और स्मृतियाँ

इतिहास में जहाँ तक दृष्टि जाती है, अयोध्या का वर्णन मिलता है । रामजी से पहले भी और रामजी के बाद भी । अयोध्या हर कालखंड में आकर्षण का केन्द्र रही । अयोध्या की भव्यता की ओर विदेशी राजनयिकों, पर्यटको और शोध कर्ताओं के आने का वर्णन मिलता है । ढाई हजार वर्ष पूर्व के चीनी और यूनानी यात्रियों द्वारा लिखे गये विवरण इसका प्रमाण हैं । लेकिन दसवीं शताब्दी के साथ अयोध्या के विध्वंस का दौर चला । यह भारत पर मध्य एशिया के आक्रमणों का नया दौर था । प्रत्येक आक्रमणकारी के निशाने पर अयोध्या रही । आक्रांता आते, लूटते विध्वंस करते और लौट जाते थे । उनके जाने के बाद स्थानीय शासक और जन सामान्य द्वारा पुनर्निर्माण हो जाया करता था । आक्रमण, प्रतिकार, बलिदान, विध्वंस और पुनर्निर्माण के संघर्ष का जितना लंबा इतिहास अयोध्या का है वैसा संसार में किसी और नगर का नहीं। यह संघर्ष चार प्रकार का रहा । पहले पाँच सौ वर्षों की अवधि विध्वंस और पुनर्निर्माण हुआ। दूसरी अवधि ऐसी आई जब जन्मस्थान मंदिर को पूरी तरह ढहाकर उसके स्थान पर मस्जिद बना दी गई । यह हमलावर बाबर के समय 1526 में हुआ । मुगल बादशाह अकबर के समय पूजन के लिये एक चबूतरा बनाने का स्थान मिलने का विवरण तो मिलता है लेकिन मूर्ति स्थापित करने की अनुमति नहीं मिली। लेकिन औरंगजेब के समय वह चबूतरा भी तोड़ दिया गया । तब से संघर्ष तीव्र हुआ जो अंत तक रुका नहीं । औरंगजेब के समय जन्मस्थान की मुक्ति केलिये साधु संतों, श्रद्धालुओं के साथ निहंगों के भी सतत बलिदान हुये । यह क्रम लगभग दो सौ वर्ष चला । इसमें पीढ़ियों के बलिदान हुये । फिर अंग्रेजीकाल आया । तब कानूनी लड़ाई का दौर आरंभ हुआ । 1858 में फैजाबाद कलेक्टर को आवेदन दिया गया । 1886 में जिला अदालत में भी सुनवाई हुई। अंग्रेजीकाल में यह कानूनी लड़ाई स्वतंत्रता के सूर्योदय तक लगभग नब्बे वर्ष चली । अंग्रेजों ने इसे विवादित स्थल घोषित कर दिया था। स्वतंत्रता के बाद संघर्ष का चौथा स्वरूप उभरा । रामलला इस विवादित स्थल में प्रकट हुये । तब कानूनी संघर्ष के साथ जन जागरण अभियान भी चला । समय के साथ इन संघर्षों का स्वरूप और शैली भले बदली हो बदली हो लेकिन प्राणों के बलिदान कभी रुका नहीं। जन जागरण अभियान में कारसेवकों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता । यह बलिदान अयोध्या में कारसेवा के दौरान पुलिस गोली चालन और कारसेवा लौटते कारसेवकों का गोधरा में हुआ । एक भीड़ ने योजना पूर्वक सावरमती एक्सप्रेस को रोका और कारसेवकों को घेरकर मारा गया वह घटना आज भी रोंगटे खड़े कर देती है ।
अयोध्या का गौरव लौटाने के लिये हुये सतत संघर्ष में, कितने प्राण गये, उनकी गिनती तक नहीं है। अंततः 2019 में अदालत का अंतिम निर्णय आया, 5 फरवरी 2020 को जन्मस्थान मंदिर न्यास गठित हुआ, 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी ने मंदिर निर्माण कार्य केलिये भूमि पूजन किया और 22 जनवरी 2024 को रामलला अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो गये ।

अयोध्या में बने कीर्तिमान

अयोध्या में अपने जन्मस्थान पर रामलला के विराजमान होने के बाद इस एक वर्ष में अनेक कीर्तिमान बने । ये कीर्तिमान राम नवमीं, दीपावली और नववर्ष पर श्रृद्धालुओं के आने, सरयूतट पर दीपोत्सव, परिक्रमा वासियों की संख्या एवं पूरे वर्ष में अयोध्या आने वाले श्रृद्धालुओ की कुल संख्या का है । रामलला के विराजमान होनै की तिथि 22 जनवरी 2024 से 11 जनवरी 2025 तक अयोध्या आने वाले श्रृद्धालुओं की संख्या लगभग 18.6 करोड़ का ऑकड़ा छू रही है । यह संख्या भारत के सभी धार्मिक एवं पर्यटन स्थल पर पहुँचने वाले यात्रियों में सर्वाधिक है । इससे पहले देशी और विदेशी दोनों प्रकार के पर्यटकों की अधिकतम संख्या का कीर्तिमान अक्सर ताजमहल के नाम रहा करता था । लेकिन इस वर्ष अयोध्या ने सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर दिये। तीज त्यौहारों के विशेष दिनों को छोड़कर समान्य दिनों में अयोध्या आने वाले श्रृद्धालुओं की औसतन संख्या दो लाख तक रही है। 2025 नववर्ष के दिन एक जनवरी को दस लाख से अधिक यात्री अयोध्या आये । वर्ष 2024 दीपावली उत्सव के कुल पांच दिनों में सरयू तट पर द्वीप जलाने के तीन रिकॉर्ड बने। दो रिकॉर्ड सरयू आरती के और एक दीपोत्सव का । दीपावली 30 अक्टूबर को थी । 27 अक्टूबर से ही सरयू नदी के 55 घाटों पर दीप सजाने का कार्य आरंभ हो गया था । यह कार्य में 35 हजार वालेंटियरों द्वारा किया गया था । 30 अक्टूबर की शाम सरयू आरती का भी कीर्तिमान बना । अयोध्या के प्रमुख साधु-संतों और 1,100 बटुकों ने आरती की थी। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम अयोध्या पहुँची थी । इस शाम कुल 25 लाख 12 हजार 585 दीप जलाने कीर्तिमान बना । गिनीज बुक ने यह सर्टिफिकेट भी प्रदान किया। दूसरा कीर्तिमान परिक्रमा का बना । कार्तिक पूर्णिमा से आरंभ परिक्रमा में केवल तीन दिन में पैंतीस लाख तीर्थयात्री सम्मिलित हुये । यह भी एक कीर्तिमान था ।

सुरक्षा मानक भी विश्व स्तरीय

अयोध्या आने वाले श्रृद्धालुओं की संख्या, दीपोत्सव, सरयू आरती और परिक्रमा करने वालों की संख्या का कीर्तिमान बनाने के साथ इस वर्ष अयोध्या ने सुरक्षा का भी विशेष मानक स्थापित किया । सुरक्षा का पहला मानक मंदिर निर्माण में किसी भी दुर्घटना का न होना है। मंदिर निर्माण केलिये बड़े बड़े पत्थरों के साथ दिन रात काम चल रहा है । छोटी मोटी घटनाएँ तो हुई लेकिन ऐसी कोई दुर्घटना नहीं हुई जिसमें कोई घायल हुआ हो और उपचार की आवश्यकता पड़ी हो । इसके लिये ब्रिटिश सुरक्षा परिषद ने बिल्डर को ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ प्रदान किया, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने गोल्डन ट्रॉफी प्रदान की। मंदिर निर्माण में बरती जा रही सावधानियों का अध्ययन करने केलिये अनेक विशेषज्ञ अयोध्या आये और उन्होंने मंदिर निर्माण में उत्‍कृष्‍ट सुरक्षा के उपायों की प्रशंसा की बिल्डर को मिले पुरस्कार को वैश्विक सुरक्षा मानकों का अनुपालन और विश्‍व स्‍तर पर अन्य निर्माण परियोजनाओं के लिए एक मॉडल माना ।

अयोध्या में विकास के नये आयाम

रामलला के विराजमान होने के साथ अयोध्या के विकास का नया अध्याय आरंभ हुआ है । अयोध्या के भावी विकास के लिये प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेष रूचि ले रहे हैं। रामलला जिस मंदिर में विराजमान हुये हैं वह मंदिर भी अपनी भव्यता का स्वरूप लेने जा रहा है । मंदिर संरचना में 392 खंभे और 44 दरवाजे पारंपरिक नागर शैली में निर्मित हुये हैं। राम जन्मभूमि मंदिर 380 (पूर्व-पश्चिम) 250 फीट की चौड़ाई में फैला है और 161 फीट ऊंचा है। 32 सीढ़ियों वाला एक भव्य प्रवेश द्वार है। सभी मापदंडों पर पांच सितारा रेटिंग स्तर का निर्माण हुआ है ।

मंदिर के साथ पूरी अयोध्या नया स्वरूप लेने जा रही है ।नगर के विकास योजनाएँ तीन प्रकार की हैं । पहली तात्कालिक, दूसरी मध्य समयावधि की और तीसरी दीर्घकालिक। अनुमान है आगामी दस वर्षों में अयोध्या उस भव्यता और गरिमा को प्राप्त कर लेगी जिसका वर्णन पुराणों में मिलता है । 30.5 हजार करोड़ से अधिक की आठ परियोजनाओं का कार्य पूर्णता की ओर है । जबकि लगभग 85 हजार करोड़ की अन्य परियोजनाएँ आगामी दो वर्षों में पूरी हो जायेंगी। उत्तरप्रदेश में संपन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अयोध्या के लिए 6 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुये । इन पर भी कार्य आरंभ हो रहा है । अयोध्या में जो काम होने जा रहे हैं उनमें सबसे प्रमुख पूरी अयोध्या में

सौर ऊर्जा से प्रकाशमान होने का प्रबंध है । जो आठ कार्य प्राथमिकता से किये जा रहे हैं उनमें सबसे पहला विमानतल को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करना है। चौदह सौ करोड़ के इस प्रोजेक्ट में 11 सौ करोड़ रुपए प्रदेश सरकार की ओर से दिये गये। दूसरा अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन का निर्माण। यह कार्य पूरा हो गया है।

जो कार्य आरंभ हुये हैं उनमें वर्तमान नगर और उसके आसपास कुल 1100 एकड़ में अयोध्या नया उभर रहा है । अन्य कार्यो में अयोध्या नगर के सभी प्रवेश द्वार नागर शैली के बनाए जा रहे हैं। मेन स्पाइन रोड, सुग्रीव किला से श्री राम मंदिर मार्ग, श्रृंगार हाट से राम मंदिर का मार्ग, और पंचकोशी परिक्रमा मार्ग का विकास हैं ।

अयोध्या विकास प्राधिकरण विशाल वाहन पार्किंग और दुकानों का निर्माण कर रही है ।

सड़कों का चौड़ीकरण और नालों को गहरा करने, सूर्यकुंड का सौंदर्यीकरण, पार्क का निर्माण, लाइट एंड साउंड शो, ग्रीन फ़ील्ड टाउनशिप, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। राम मंदिर, हनुमान गढ़ी, कनक महल, नंदीग्राम आदि धार्मिक स्थलों के विकास के साथ अयोध्या के कुछ पर्यटन स्थलों जिनमें जायसी के पैतृक स्थान का विकास, बाबा गोरखनाथ की प्रतिमा स्थापित करना, सरयू तट और घाटों का विकास जैसे कार्य शामिल हैं।

scroll to top