जल सहेलियों ने जारी किया घोषणा पत्र

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– गौरव पांडेय

बुन्देलखण्ड के गाँवों को पानीदार बनाने का जल सहेली कर रही हैं प्रयास

आज छतरपुर में जल सहेली फॉउण्डेशन के द्वारा विधानसभा चुनाव 2023 हेतु बुंदेलखंड के विशेष संदर्भ में जन घोषणा पत्र जारी किया गया।
जल सहेलियों द्वारा विगत एक महीने से इस प्रक्रिया को शामिल किए जाने का काम किया जा रहा है । जल सहेलियों ने इस घोषणा पत्र में ऐसे प्रमुख मुद्दों को शामिल किया है जिन मुद्दों को किसी भी राजनैतिक दल ने अपने घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया था।
इस घोषणा पत्र में मुख्य रूप से जल संकट, सूखा प्रबंधन, पलायन, शिक्षा, पोषण, रोजगार की समस्याओं को शामिल किया गया है।

प्रेस वार्ता को जल सहेली लक्ष्मी ने संबोधित करते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड एक ऐसा क्षेत्र है, जहां की भौगोलिक स्थिति पूरे प्रदेश से भिन्न है। इस क्षेत्र को विशेषकर सूखाग्रस्त क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। पिछले दो दशकों में एक दशक से ज्यादा का समय में इस क्षेत्र में सूखा का रहा हैै। यह इलाका मुख्य रुप से कृषि आधारित है, यही इस इलाके मे लोगो की आजीविका का एक मात्र साधन है, ऐसे में बुंदेलखंड के असल मुद्दों को राजनैतिक दलों के वायदों में प्राथमिकता देने हेतु जन घोषणा पत्र बनाया गया है।

घोषणा पत्र में जल संकट समाधान के सन्दर्भ में मुख्य रूप से पुराने बुदेली-चंदेली तालाबों का पुनर्जीवन, सूखा न्यूनीकरण एवं राहत के योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन, जल साक्षरता को बढाने के लिए शैक्षिक पाठयक्रमों में जल साक्षरता के विशेष विषय को जोडना, पोषण की स्थिति को सुधारने के लिए सामुदायिक पोषण वाटिकाओं के निर्माण सुनिश्चित कराना प्रमुख है।

जल सहेली पार्वती ने कहा कि सूखा, रोज़गार, खेती और खुशहाली के लिए हर पांच साल में वायदे तो किये जाते है लेकिन चुनावी माहौल खत्म होने पर यह वायदे केवल जुमले होकर रह जाते है या फिर जिन योजनाओं का निर्माण किया जाता है वह देश एवं प्रदेश के हिसाब से होती है जिससे योजनाओं का लाभ सही तौर पर बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लोगों को नहीं मिल पाता है। इस बार भी किसी भी राजनैतिक पार्टी के द्वारा बुन्देलखण्ड क्षेत्र की समस्या को समझकर कोई अपना घोषणा पत्र नहीं बनाया है। ऐसे में इस विधानसभा चुनाव को लेकर बुंदेलखंड के असली सवालो और जनता के मुद्दों को राजनैतिक दलों के समक्ष रखने के लिए हम लोगों के द्वारा यह घोषणा पत्र तैयार किया गया है।

ग़ौरतलब है कि जल सहेली बुन्देलखण्ड के गाँवों में एक ऐसा सक्रिय संगठन है जो बिना किसी आर्थिक लाभ के अपने गाँव को पानीदार बनाने में लगी हुई हैं ।

अंत में सभी जल सहेलियों ने इस घोषणापत्र में शामिल मुद्दों को सभी राजनैतिक दलों के घोषणा पत्र में शामिल करने की अपील की।

इस अवसर पर जल सहेली सुधा,सरोज दल, रानी, ममता सहित सभी जल सहेलियों ने भी बुंदेलखंड के मुद्दों को लेकर अपनी बात रखी।

बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध विराम के लिए अमरीका की मांग को खारिज किया

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इजराइल और हमास के बीच लगभग एक महीने से चल रहे युद्ध को रोकने के कोई संकेत नहीं हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध विराम की अमरीका की मांग ठुकरा दी है और कहा है कि जब तक हमास सभी बंधकों को रिहा नहीं कर देता युद्ध विराम नहीं हो सकता। अमरीकी अधिकारी ने एक टेलीविजन चैनल को बताया कि हमास का कहना है कि जब तक इजराइल फिलीस्‍तीनी बस्तियों में एम्‍बुलेंस पहुंचने की गारंटी नहीं देता, वह विदेशी नागरिकों को गाजा छोड़ने नहीं देगा।

इजराइली सेना ने कहा है कि उसके सैनिकों पर गोलाबारी के खतरे के बावजूद वह गाजा के लोगों को दक्षिण की ओर निर्धारित स्‍थानों पर जाने की अनुमति देगा और साथ ही आम नागरिकों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्‍चित करेगा। इस बीच अरब देशों ने गाजा में तुरंत युद्ध विराम की मांग की है लेकिन अमरीका का कहना है कि युद्ध विराम से हमास को दोबारा संगठित होने का मौका मिलेगा।

इस बीच, अमरीकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अम्‍मान में लेबनान, कतर और जॉर्डन के नेताओं के साथ बैठक की। अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश मानवीय उद्देश्‍यों के लिए युद्ध पर समय-समय पर रोक लगाने का समर्थन करता है।

 

भारत ने भूकंप प्रभावित नेपाल को आपात राहत सामग्री भेजी

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भारतीय वायु सेना का एक विशेष विमान राहत सामग्री की पहली खेप लेकर कल भूकंप प्रभावित नेपाल पहुंचा। दस करोड रुपये की इस राहत सामग्री में तंबू, कंबल, तिरपाल के साथ-साथ आवश्‍यक दवाइयां और चिकित्‍सा उपकरण शामिल हैं।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने एक वक्‍तव्‍य में कहा कि आपात राहत सामग्री की पहली खेप नेपाल गंज पहुंचाई गई है। भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री पूर्णबहादुर खडका को राहत सामग्री सौंपी।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भूकंप प्रभावितों की हर संभव मदद की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। आने वाले दिनों में भारत और राहत सामग्री भेजेगा।

नेपाल में शुक्रवार मध्‍यरात्रि के आस-पास 6.4 तीव्रता के भूकंप के कारण 157 लोगों की मृत्यु और 250 से अधिक घायल हो गये।

पृथ्वी थियेटर, रंगमंच,हिंदी, देश, समाज आदि आदि।

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अजित राय

संयोगवश इस बार मुंबई में होने के कारण रंगमंच का तीर्थ माने जाने वाले पृथ्वी थियेटर फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह (3 नवंबर 2023) में जाना हुआ। मैं पिछले 25 सालों से जिस भारतीय रंगमंच से दर्शक और समीक्षक के रूप में जुड़ा हुआ हूं, यहां आकर लगा कि यह एक दूसरी दुनिया है जहां मैं अजनबी हूं हालांकि मैंने दुनिया के प्रायः: सभी थियेटर फेस्टिवल में भागीदारी की है- न्यूयॉर्क के ब्राडवे, स्काटलैंड के एडिनबरा से लेकर फ्रांस के एविगनान तक। यहां मैंने एक ऐसी एलिट दुनिया देखी जो रट्टा मार अंग्रेजी में खुद को गौरवान्वित महसूस करती है। सभागार में भीतर गया तो वहां शुभा मुद्गल का उपशास्त्रीय संगीत चल रहा था। वे हिंदी उर्दू भोजपुरी अवधी ब्रज में लिखी प्रेम कविताएं गा रही थीं। लेकिन अपनी बात अटक अटकाकर अंग्रेजी में रख रहीं थीं। यदि मैं भूल नहीं रहा हूं तो शुभा मुद्गल इलाहाबाद के खांटी हिंदी परिवार से आती है। यदि उन्हें लगता है कि दर्शक हिंदी में उनकी बात नहीं समझ सकते तो फिर लोक भाषाओं में उनका गायन कैसे समझ सकते हैं।शशि कपूर के बेटे और पृथ्वी थियेटर के संचालक कुणाल कपूर ने भी अपनी बात अंग्रेजी में ही रखी। बाद में शानदार रात्रि भोज के समय मैंने नई पुरानी पीढ़ी के डिजाइनर रंगकर्मियों की बातें सुनी। उनकी बात चीत में देश समाज रंगमंच कला संस्कृति की चर्चा तक नहीं थी।हर कोई अपने आप में और अपने फोन में मशगूल था। मुझे लोगों ने बताया था कि पृथ्वी थियेटर की स्थापना हिंदी रंगमंच को जगह देने के लिए की गई थी।

मुझे समझ में नहीं आता ( बकौल देवेन्द्र राज अंकुर) कि आप नाटक और फिल्में तो हिंदी में करते हैं, पर उसके बारे में बात अंग्रेजी में क्यों करते हैं। ऐसी कौन सी बात है जो दर्शक हिंदी में नहीं समझ सकते? आपका ब्रोश्योर अंग्रेजी में क्यों छपता है? आप अंग्रेजी में क्यों चाहते हैं अपने नाटक की समीक्षा? दुनिया के किसी देश में ऐसी मानसिक गुलामी नहीं देखने को मिलती। और तो और बंगाल, केरल और दूसरे राज्यों में भी ऐसा नहीं होता। मुंबई की सांस्कृतिक दुनिया पर एक नकली, अधकचरी और गलत सलत अंग्रेजी का वर्चस्व बना दिया गया है। भाषा अपने साथ एक संस्कृति भी लाती है। मुंबई ने भाषा तो रट ली पर संस्कृति को भूल गए। देश को आजाद हुए 75 साल हो गए पर अंग्रेजी भाषा की गुलामी अभी भी जारी है।

पिछले दिनों सेंट एंड्रयूज सभागार में अतुल सत्य कौशिक के नाटक चक्रव्यूह का सौंवां शो देखने गया। महाभारत सीरीयल के नीतीश भारद्वाज श्रीकृष्ण की भूमिका में थे। पूरा नाटक हिंदी में था। नाटक के बाद मैं डर गया। नीतीश भारद्वाज धाराप्रवाह अंग्रेजी में दर्शकों को संबोधित कर रहे थे। जब हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को हिंदी मराठी गुजराती बोलने में कोई शर्म नहीं है तो हे मुंबई के डिजाइनर रंगकर्मियों, आपको क्यों अपनी मातृभाषा बोलने में समस्या है? आपने तो अंग्रेजी में एम ए, पीएचडी भी नहीं की है। दृष्टि संस्थान के विकास दिव्यकीर्ति बताते हैं कि 2011 के सेंसस में देश में पहली भाषा के रूप में अंग्रेजी बोलने वाले लोग केवल दो लाख सत्तर हजार है।

पिछले दिनों मैं ओम कटारे के साथ रविन्द्र नाट्य मंदिर प्रभादेवी में इप्टा मुंबई के एक भव्य समारोह में गया जो इंटर कॉलेज नाट्य प्रतियोगिता का अंतिम राउंड था। यह देखकर खुशी हुई कि वहां सबकुछ हिंदी मराठी में हो रहा था। इतना ही नहीं हर विचारधारा के रंगकर्मियों को आमंत्रित किया गया था। इस उदारता से इप्टा की दूसरी इकाईयों को सीखना चाहिए जिन्होंने इस सांस्कृतिक संस्था को केवल पार्टी पालिटिक्स में उलझा रखा है।

मेरी एक और जिज्ञासा है। पिछले 75 सालों में जबसे देश आजाद हुआ मैं भारतीय भाषाओं के सैकड़ों महान नाटकों और फिल्मों का नाम गिना सकता हूं पर अपवाद छोड़कर आप मुझे अंग्रेजी के केवल दस महत्वपूर्ण नाटक और फिल्मों के नाम बता दीजिए जो घासीराम कोतवाल, अंधा युग, तुगलक या आधे अधूरे के पासंग में भी हो। यहीं हाल फिल्मों का है। मुझे अंग्रेजी से कोई विरोध नहीं है पर उसके नकली और अन्यायपूर्ण वर्चस्व से विरोध है। हमारे मन में पृथ्वी थियेटर के प्रति अगाध सम्मान है, इसलिए यह सब लिख रहा हूं। वरिष्ठ रंगकर्मी ओम कटारे, वामन केंद्रे, मकरंद देशपांडे, नागेश भोसले, जयंत देशमुख, रमेश तलवार आदि भी इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि आखिर हम अपनी मातृभाषा में दर्शकों से संवाद क्यों नहीं कर सकते? बाकी जश्न बहुत शानदार था। बहुत सारे मित्रों से जमाने के बाद मुलाकात हुई।

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