लोकसभा चुनावों में नारी शक्ति वंदन राहुल का एक और बयान या फिर एक और सेल्फ गोल ?

1694299-befunky-collage.webp

लोकसभा चुनाव 2024 की रणभेरी बज चुकी है, सभी राजनैतिक दलों ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना प्रारम्भ कर दिया है । नेता मतदाताओं को रिझाने के लिए गर्मागर्म बयानबाजियां कर रहे हैं। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटियों और “अबकी बार 400 पार” के नारे के साथ एनडीए गठबंधन ने मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व में इंडी गठबंधन भी मैदान में उतर चुका है। इंडी गठबंधन जैसे ही ताकत लगाकर खड़ा होता है वैसे ही उसके नेता राहुल गाँधी ही उसकी टांग खींचने वाला काम कर देते हैं । मुंबई में राहुल गांधी की “भारत जोड़ो न्याय यात्रा” पार्ट -2 का समापन हुआ जिसमें कई महत्वपूर्ण नेता शामिल हुए लेकिन समापन कार्यक्रम में राहुल के अति उत्साह से भरे बयान ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन को एक बार फिर बैकफुट पर धकेल दिया।

राहुल जी ने अपनी न्याय यात्रा के समापन अवसर पर मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित महारैली में एक बयान दिया। इस भाषण में उन्होंने कहा कि वो न बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे हैं और न ही मोदी के खिलाफ। हिंदू धर्म में एक शब्द बोला जाता है और वह है ”शक्ति”, हम उसी शक्ति से लड़ रहे हैं। स्वाभाविक रूप से राहुल गांधी के इस बयान से इंडी गठबंधन असहज हो गया क्योंकि हिंदू धर्म में शक्ति शब्द का प्रयोग मां दुर्गा के लिए हुआ है और यह एक बहुत पवित्र शब्द माना गया है जिसे नारी सम्मान के साथ भी जोड़ा जाता है। हिंदू धर्म को मानने वाला प्रत्येक भारतीय मां की शक्ति के रूप में आराधना करता है। समस्त हिन्दू संत समाज का मानना है कि राहुल गांधी ने विनाशकाले विपरीत बुद्धि की कहावत को चरितार्थ कर दिया है। राहुल गांधी पूर्व में भी सनातन हिंदू धर्म को अपमानित करते रहे हैं किन्तु इस समय चुनाव सिर पर है और भाजपा ने इस मुद्दे को लपक लिया है। राहुल गांधी आज शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा और उनकी शक्ति के विनाश की बात कर रहे हैं। राहुल के इस भाषण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने हर सार्वजानिक कार्यक्रम में इसकी चर्चा कर रहे हैं और तीखा उत्तर दे रहे हैं।

स्वयं को जनेऊ धारी दत्तात्रेय गोत्रीय ब्राह्मण कहने वाले राहुल गांधी को दुर्गा सप्तशती का कम से कम एक श्लोक तो समझना चाहिए था जो कहता है –
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

सनातन को लेकर की गई यह राहुल की पहली गलती नहीं है इससे पूर्व वह अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर की आलोचना कर चुके हैं, उन्होंने प्रभु राम की प्राण प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठाए थे और रैलियों में कहा था कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय केवल बड़े लोग आए और उसमें कोई गरीब नहीं दिखाई दिया। राहुल सहित कांग्रेस ने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का बहिष्कार किया । इसी तरह राहुल गांधी ने एक बार बयान दिया था कि मंदिरों की मूर्तियों में कोई प्राण नही होते वह निर्जीव होती हैं और एक बार तो उन्होंने यहां तक कह दिया था कि लोग मंदिरों में लड़कियां छेड़ने के लिए जाते हैं। इसी तरह वे जीसस को ही एकमात्र गॉड भी बता चुके हैं ।

सम्पूर्ण विपक्ष इस बात को अच्छी तरह समझता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस तरह विपक्ष के बड़े से बड़े हमले को अपने पक्ष में राजनैतिक हथियार के रूप में सफलतापूर्वक प्रयोग कर लेते हैं। “नीच चायवाला” और “चौकीदार चोर है’ का हाल वो पिछले चुनावों में देख चुका है । हाल ही में लालू यादव के एक बयान के बाद उन्होंने ”मैं हूं मोदी पारिवार” का नारा दे दिया । अब तो राहुल गाँधी ने सीधे सनातन की “शक्ति” पर हमला बोल दिया है तो विपक्ष का असहज होना स्वाभाविक है। कांग्रेस, प्रियंका, राहुल सहित उनके अपने प्रवक्ता और कुछ यू टूबर सफाई दे रहे हैं किन्तु इस मुद्दे पर राहुल का बचाव कर पाना किसी के बस की बात नहीं रह गई है। निर्जल नवरात्र करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल को उत्तर देते हुए कहा तेलंगाना की जनसभा में कहा क ,” गठबंधन ने अपना घोषणपत्र शक्ति को समाप्त करने के लिए जारी किया है।मैं इस चुनौती को स्वीकार करता हूं और मैं इस शक्ति स्वरूपा माताओं बहनों की रक्षा के लिए जान की बाजी लगा दूंगा, जीवन खपा दूंगा। क्या भारत की धरती पर कोई शक्ति के विनाश की बात कर सकता है क्या?

राहुल गांधी के बयान पर भारत की नारी शक्ति सहित प्रत्येक हिन्दू में आक्रोष है।

दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम – 2023 पारित करवाकर नारी शक्ति को संसद व राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया। इसके बाद भाजपा हर जनसभा में नारी शक्ति को ही केंद्र बिंदु बनाकर जनसभाओं और रैलियों का आयोजन कर रही है । 2014 के बाद हुए चुनावों में नारी शक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी को पूरा समर्थन दिया है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में महिला मतदाताओं ने भाजपा की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार नारी सशक्तीकरण की दिशा में लगातार काम कर रही है। देश भर में गरीबों के घरों में शौचालय बनाना, उज्ज्वला योजना के अंतर्गत मुपत रसोई गैस का सिलेंडर उलब्ध कराना, हर घर नल से जल, पीएम आवास योजना, मातृ वंदन योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी सभी योजनाओं ने महिलाओं का जीवन सरल और सम्मानजनक बनाया है। छह माह का मातृत्व अवकाश बाहर जाकर काम करने वाली स्त्रियों के लिए महत्वपूर्ण रहा। सेना और सशत्र बालों में महिलाओं ने नए कीर्तिमान बनाए। मिसाइल से चंद्रयान तक स्त्रियाँ नेतृत्व करता की भूमिका में हैं । वर्ष 2024 की गणतंत्र दिवस की परेड महिला सशक्तीकरण को ही समर्पित थी। इसी तरह लखपति दीदी, ड्रोन दीदी जैसी योजनाएं क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली हैं । मोदी सरकार की विभिन्न योजनाओं के कारण स्वावलंबी हुआ महिला समाज आज चुनाव में सीधा प्रभाव डाल रहा है।

इसके साथ ही आज प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में चल रही डबल इंजन की सरकारें भी नारी शक्ति का किसी न किसी रूप में वंदन कर रही हैं। महाराष्ट्र की सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया कि अब सभी दस्तावेजों में सर्वप्रथम मां के नाम का उल्लेख किया जाएगा वही उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता बिल पारित करवाया जिससे महिलाओं को लाभ होने जा रहा है।

आज देश के सभी दल जहाँ महिला मतदाता को लुभाने के लिए तरह- तरह की योजनाएं ला रहे हैं वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी ने “शक्ति से लड़ने“ का बयान देकर कांग्रेस व इंडी गठबंधन की बची -खुची संभावनाओं पर तुषारापात कर दिया है।

मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए माफिया का साथ

541e9f514c0184341e437bbae20af40b_original.jpg.webp

वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बनाई गयी त्रिस्तरीय रणनीति का प्रभाव और परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा। प्रदेश में अपराधियों और माफियाओं के आतंक के किले ढह रहे हैं । माफिया किसी भी मत, मजहब, संप्रदाय का हो योगी जी केवल उसका अपराध देखते हैं किन्तु प्रदेश के अन्य राजनैतिक दल अपराधियों को भी अपने वोट बैंक से जोड़ लेते हैं। वर्तमान में एक वर्ग विशेष के माफिया की मौत के बाद एक खास वोट बैंक को लुभाने के लिए राजनैतिक दल जिस प्रकार उसका महिमा मंडन कर रहे हैं वो खतरनाक है यद्यपि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है।

प्रदेश को वह समय भी स्मरण है जब यहाँ माफिया जेलों में शरण लेते थे और जेल में एक तरह से उनकी सरकार चलती थी, वहां उन्हें हर प्रकार का संरक्षण प्राप्त होता था, जेल से ही वह अपना अपराधों का कारोबार चलाया करते थे। 2017 से परिस्थितियां बदल गई हैं क्योकि जेलों में बंद अपराधियों पर अब कड़ी निगरानी रखी जाती है।

प्रदेश में विगत सात वर्षों से संगठित अपराध के सफाये पर विशेष बल दिया जा रहा है। प्रदेश में माफियाराज के सफाये के लिए त्रि़स्तरीय योजना बनाई गयी है। कार्ययोजना के अंतर्गत फरार अपराधियों की धरपकड़, अदालत में प्रभावी पैरवी कर सजा दिलाने और उनकी चल -अचल संपत्ति को जब्त करने और उनके अवैध कब्जों को हटाने का अभियान अब रंग लाने लगा है। दूसरी तरफ जेलों में भी इन लोगो को मिलने वाली सुख सुविधाएं पूरी तरह से बंद कर दी गईं हैं।

2017 से पूर्व किसी भी माफिया ने सपने में नही सोचा था कि यह प्रदेश अब उनके लिए बेगाना हो चुका है और यहां से उनका दाना -पानी उठने वाला है। प्रयागराज में माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ सहित उमेश पाल हत्याकांड के चार शूटरों के ढेर होने के बाद जनमानस में शासन के प्रति आश्वस्ति का भाव उत्पन्न हुआ। विगत दिनों जेल में बंद कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी की हार्ट अटैक से हुई मौत से माफियाओं का दिल दहल गया और पीड़ितों ने चैन की सांस ली ।

इधर जेल में बंद माफिया की मौत के बाद, मुस्लिम वोट बैंक को कब्ज़े में करने के लिये, तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों के बीच माफिया को मसीहा साबित करने की होड़ मच हुई है।असदुद्दीनओवैसी मुख्तार उनके घर खाना खाते दिखे, सपा से अलग हुए स्वामी प्रसाद मौर्य उनके घर पर पहुंचते हैं। सपा, बसपा, कांग्रेस उनकी मौत को साजिश बताकर जाँच की मांग कर रही है। और तो और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जिनके अपने बड़े भाई को मुख़्तार ने मौत के घाट उतारा था वो भी माफिया को माफिया कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं कि कहीं वोट बैंक न टूट जाए। माफिया से सहानुभूति प्रदर्शित करने का खेल जारी है और इन सभी दलों को लग रहा है कि ऐसा करने से प्रदेश की राजनीति में उनकी जमीन मजबूत हो रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा खतरनाक अपराधी माने गए व्यक्ति के बीमारी से मर जाने को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी और उनके समर्थन के लिए उत्साहित रहने वाला पश्चिमी मीडिया मोदी जी के मिशन 400 को रोकने के लिए एक सुनहरे ईश्वरीय अवसर के रूप में देख रहा है और निरंतर अनर्गल प्रलाप कर रहा है। वामपंथी पत्रकार उसे गरीबों का मसीहा बता रहे हैं।

एक गलत नेरैटिव गढ़ा जा रहा है कि माफिया मुख्तार अंसारी गरीबों का मसीहा था और गरीब बेटियों की शादियाँ करवाता था। माफिया मुख्तार अंसारी का 46 वर्षों का आपराधिक इतिहास रहा है, उस पर 65 मुकदमे दर्ज हुए थे। 2005 का मऊ दंगा मुख्तार ने कराया था और वह खुलेआम असलहा लेकर घूम रहा था। उसके आतंक का आलम यह था कि जज फैसला देने से डरते थे और पंजाब की कांग्रेस सरकार ने उसको दामाद की तरह पलकों पर बिठा के रखा था। 2017 से पूर्व किसी ने भी सपने में नही सोचा था कि मुख्तार अंसारी जैसे माफिया को कभी सजा सुनायी जाएगी किंतु योगी सरकार अथक प्रयास करके उसको पंजाब से उत्तर प्रदेश लेकर आई और पिछले डेढ़ साल में उसको आठ मामलो में आठ बार सजा सुनाई गई, जिसमें दो मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। मुख्तार अंसारी की पूर्वांचल की सियासत पर मजबूत पकड़ थी और सपा, बसपा , कांग्रेस जैसे सभी दल उसका साथ पाने के लिए उत्साहित रहते थे। वह कई सीटों पर न केवल अपने उम्मीदवार तय करता था अपितु उन्हें जिताने में भी कामयाब होता था।

हत्या, दंगा, गैंगवार सहित हर तरह के आपराधिक रिकॉर्ड कायम करने के बाद 1995 में वह गाजीपुर सदर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा किंतु हार गया, फिर मऊ से चुनाव लड़ा और निर्दलीय विधायक बनने में सफल रहा। अब उसने पूर्वांचल के दूसरे जिलों में भी अपनी पकड़ मजबूत बनाने का प्रयास किया। मुख्तार लगातर पांच बार विधायक बना। मुख्तार ने पूर्वांचल में दलित -मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत बनाने में भी बड़ी भूमिका अदा की थी। वह 2009 में वाराणसी से भाजपा नेता डा. मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ भी चुनाव लड़ा था और डा. जोशी वह चुनाव बहुत कठिनाई से जीते थे।

समय बदला, मुख्तार अंसारी जमानत के लिए गुहार लगाते समय अपने पूर्वजों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार का सदस्य होने की दुहाई देने लगा। मुख्तार की मौत के बाद आतंक का एक अध्याय तो समाप्त हो गया किंतु मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति का खतरनाक दौर और तेज हो गया है। मुस्लिम तुष्टिकरण के सहारे चलने वाले राजनैतिक दल उसके दरवाजे पर अपना समर्थन व्यक्त करने के लिए पहुंच रहे हैं क्योंकि इन दलों की रोजी -रोटी ऐसे ही माफियाओं के बलबूते चलती रही है। जनता के बीच भय पैदा करने, मतदाता को प्रभावित करने के लिए इन तत्वों का सहयोग लिया जाता था। वो लोग भी मुख्तार के लिए आंसू बहा रहे हैं जो जम्मू कश्मीर में आतंकवादी बुरहान वानी के लिए रो रहे थे और कभी याकूब मेमन की फांसी को रुकवाने के लिए देर रात सुप्रीम कोर्ट खुलवा रहे थे।

मुख्तार की मौत का सियासी लाभ लेने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जेल में मौत पर सवाल खडे़ किये। चाचा शिवपाल यादव ने श्री कहकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि व्यक्त की। कांग्रेस महासचिव अनिल यादव ने सांस्थानिक हत्या का आरोप लगा दिया। राजनैतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि मुख्तार की मौत से उसके असर वाले क्षेत्रों में उसके परिवार के प्रति सहानुभूति उमड़ी है और ये लोग उसे गरीबो का मसीहा बताकर सहानुभूति का लाभ उठाना चाहते हैं। ये लोग इतना भी नहीं सोच पा रहे कि उन्हीं क्षेत्रों में वो लोग भी रहते हैं जिनका मुख़्तार ने सब कुछ छीन लिया था।
वोट बैंक के लालच में अपराध और अपराधियों का महिमा मंडन एक खतरनाक रणनीति है जो समाज में नए अपराधियों के जन्म का कारक बन सकती है। राजनैतिक दलों को परिपक्वता का व्यवहार करना चाहिए। जो लोग स्वयं को समाज का नेता मानते हैं समाज उनसे सुलझे हुए व्यवहार की अपेक्षा करता है न कि अपराधियों के साथ खड़े होने की, पता नहीं ये कब चेतेंगे और मूल्यों की राजनीति करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने आचार्य बालकृष्ण और बाबा रामदेव का अस्वीकार किया माफीनामा

1573458444babaramdev380_1710829097.jpeg.png

सुप्रीम कोर्ट ने एलोपैथ को लेकर भ्रामक विज्ञापन मामले में पतंजलि आयुर्वेद के एमडी आचार्य बालकृष्ण और बाबा रामदेव के माफीनामा को अस्वीकार कर दिया है। जस्टिस हीमा कोहली की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि आपकी ओर से आश्वासन दिया गया और उसके बाद उल्लंघन किया गया। यह देश की सबसे बड़ी अदालत की तौहीन है और अब आप माफी मांग रहे हैं। यह हमें स्वीकार नहीं है। आप बेहतर हलफनामा दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।

आचार्य बालकृष्ण ने 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बिना शर्त माफी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में आचार्य बालकृष्ण ने विज्ञापन पर खेद प्रकट करते हुए कहा था कि विज्ञापन में जो अपमानजनक वाक्य हैं, उन पर हमें खेद है। आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि के फॉर्मूलेशन के चमत्कारी क्षमताओं के बारे में दिए गए उन भ्रामक दावों पर बिना शर्त माफी मांगी थी जो आधुनिक चिकित्सा पर संदेह पैदा करते हैं।

पतंजलि आयुर्वेद की ओर से बालकृष्ण ने 21 नवंबर, 2023 को दिए गए आदेश में दर्ज किए गए बयान के उल्लंघन के लिए कोर्ट में माफीनामा दाखिल करते हुए कहा था कि उनकी तरफ से भविष्य में भी ऐसे विज्ञापन नहीं जारी किये जायेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा सांसद संजय सिंह को दी जमानत

sanjay_4-sixteen_nine.png.webp

दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में जमानत दे दी है। जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने साफ किया कि जमानत के दौरान संजय सिंह राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। उनकी जमानत के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के इस दावे की कलई खुल गई कि पीएमएलए एक्ट में गिरफ्तारी के बाद जमानत नहीं होती। गौरतलब है कि संजय सिंह बेगुनाह साबित नहीं हुए हैं, उन्हें जमानत मिली है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईडी की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू से पूछा है कि संजय सिंह 6 महीने से जेल में बंद हैं। जांच एजेंसी बताए कि उनको आगे भी जेल में रखने की क्या जरूरत है? कोर्ट ने राजू से 2 बजे तक इस पर निर्देश लेकर आने को कहा। दो बजे के बाद राजू ने कहा कि उन्हें संजय सिंह को जमानत देने पर कोई आपत्ति नहीं है। उसके बाद कोर्ट ने संजय सिंह को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 फरवरी को संजय सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। संजय सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख क‍िया था।

ED की चार्जशीट में संजय सिंह पर 82 लाख रुपए का चंदा लेने का जिक्र है। इसको लेकर ही 4 अक्टूबर को ED उनके घर पहुंची थी और उनसे 10 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।। दिल्ली शराब नीति केस में ED की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट पिछले साल 02 मई को जारी की गई थी। जिसमें AAP सांसद राघव चड्ढा का भी नाम सामने आया था। आप नेता आतिशी मारलेना ईडी उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। उन्होंने राज्य सभा सांसद राघव चड्ढ़ा, मंत्री सौरभ भारद्वाज और दुर्गेश पाठक का नाम भी भविष्य में गिरफ्तार होने वाले लोगों में शामिल किया। एक तरफ आप के नेता जमानत पर बाहर आ रहे हैं और दूसरी तरफ नए नेताओं के जेल की जाने की बात दिल्ली सरकार की मंत्री कर रहीं हैं।

scroll to top