“किसानो के सम्मान की गारंटी: नरेंद्र मोदी”

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देश की असली उन्नति और आर्थिक विकास के लिए कृषि, किसान और कृषि क्षेत्रों का विकास अत्यावश्यक है। कृषि समाज की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में सशक्त माध्यम है साथ ही बढ़ती आबादी को रोजगार उपलब्ध कराने में भी सर्वाधिक सहायक है। भाजपा ने अपनी भरोसेमंद किसान नीतियों के माध्यम से किसानों के सम्मान को सुनिश्चित और उन में विश्वास को बढ़ाने का कार्य किया है।

जड़ों से कृषि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान और परिश्रमी व अनुभवी किसानों के उत्थान के भी निरंतर प्रयास किए हैं। जबकि कांग्रेस की किसान विरोधी भ्रष्ट नीतियों से कृषि क्षेत्रों की समस्याएं बढ़ती रही और विकराल रूप ले गई हैं। यही कारण है कि आजादी के बाद से लगातार कांग्रेस के शासन में कृषि क्षेत्र की उपेक्षा बनी रहे और प्रदेश सहित पूरे देश में कृषि व्यवस्थाएं चौपट होती रही।

होना यह चाहिए था कि औद्योगिक विकास और कृषि विकास के बीच में संतुलन बनाया जाता और हुआ क्या किसानों की हालत जर्जर होती गई है, गांव उपेक्षा का शिकार बने रहे और अभावग्रस्त होते चले गए, ग्रामीण रोजगार में लगातार गिरावट आई, ग्रामोद्योग का सम्यक विकास ना होने से बहुत बड़ी संख्या में गांव से पलायन हुआ और असंतुलित शहरी शहरीकरण का कारण बना।

गांव से पलायन और कॉल बेरोजगारी के कारण किसानों को एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन करना पड़ा जिसका प्रभाव उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी आया यह कांग्रेस की विकास विरोधी और सामाजिक वाह बुनियादी आवश्यकता पूर्ति करने वाले कृषि क्षेत्र की सही समझ ना हो पाने के कारण और प्रदेश और राज्य स्तर पर गलत नीतियों के दुष्परिणाम भोगने के लिए किसानों को विवश होना पड़ा ।

 

मौजूदा सीजन में पराली जलाने के मामलों को ‘शून्य’ करने का उद्देश्य : तोमर

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पराली की जलाने की घटना हर साल दिल्ली और उसके आस पास के इलाकों मे वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण बन जाती हैं। इस बार कैंद्र सरकार ने पराली जलाने की समस्या को शून्य स्तर पर लाने के दिशा में गंभीरता से काम कर रहा हैं। इस संबंध में शुक्रवार को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली राज्यों की तैयारियों की समीक्षा के लिए कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव की सह-अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित की गई, जिसमें मौजूदा मौसम में धान की पराली जलाने से रोकने के बारे में विचार-विमर्श हुआ।

इस अवसर पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने धान की पराली जलाने के मुद्दे के समाधान में दिखाई गई गंभीरता के लिए सभी हितधारकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों के प्रयासों से धान की पराली जलाने की घटनाओं में लगातार कमी देखी जा रही है।

हालांकि, धान की पराली जलाने का संबंध केवल दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों के प्रदूषण से नहीं है, बल्कि यह मिट्टी के स्वास्थ्य और उसकी उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव डालकर, कृषि भूमि पर भी हानिकारक प्रभाव डाल रहा है।

वही केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से धान की पराली जलाने से रोकने के प्रयासों के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग जैसी एजेंसियों के ठोस प्रयासों के कारण, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में पराली जलने की घटनाओं में कमी आई है।

योगी आदित्यनाथ ने दी एग्रीस्टैक योजना को मंजूरी

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योगी आदित्यनाथ ने किसानों को केंद्र व राज्य की सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने की दिशा एक महत्वपूर्ण कदम उठाया हैं। इसी कड़ी में योगी सरकार ने कृषि क्षेत्र का डिजीटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और फसलों के सटीक आकलन के लिए एग्रीस्टैक योजना को मंजूरी दे दी हैं। दरअसल गत मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई हैं।

इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के सभी किसानों का डिजीटल डेटाबेस तैयार की जायेगी। इसके साथ ही किसानों की फसलों का जीआइएस आधारित रियल टाइम सर्वे भी किया जायेगा।

सरकार की एग्रीस्टैक योजना का उद्देश्य हैं की कृषि क्षेत्र का वास्तिवक डेटा तैयार किया जायें। इसके अलावा यह जानना कि किस किसान का खेत कहा हैं और उसमें कौन-सी फसल कितने भाग में बोई गई हैं। इस योजना द्वारा सिर्फ एक क्लिक पर किसान का उसकी खेती से जुड़ा पूरा डेटा सामने आ जायेगा। इस डेटा के आधार पर ही किसान की मदद की जायेगी। इस योजना के तहत पहले चरण में 21 जिलों में पूर्ण रूप से और 54 जिलों के 10-10 गांव का डिजीटल क्रॉप सर्वे किया जायेगा। राज्य में 15 अगस्त से यह डिजीटल सर्वे प्रक्रिया शुरू की जायेगी।

16 अगस्त तक खरीफ फसलों को बीमा करा सकेंगे किसान

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मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खरीफ वर्ष 2023 की फसलों का बीमा कराने के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई थी लेकिन कृषकों की सुविधा को देखते हुए फसलों का बीमा कराने की तिथि बढ़ाकर 16 अगस्त कर दी गई है। ऋणी तथा अऋणी कृषक संबंधित बेंकों में इस अवधि में अपनी फसल का बीमा कराकर योजना में सम्मिलित हो सकते हैं। अऋणी कृषक अधिसूचित फसलों का बीमा बैंक, कॉमन सर्विस सेन्टर या प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल पर जाकर स्वयं सोयाबीन, मक्का, कपास, बाजरा, अरहर जौ, मूंगफली, मूंग एवं उडद फसलों का बीमा करवा सकते हैं।

योजना का लाभ लेने के लिए कृषकों को आवश्यक दस्तावेज के रूप में फसल बीमा प्रस्ताव फार्म, आधार कार्ड, पहचान पत्र शासन द्वारा मान्य दस्तावेज जैसे मतदाता परिचय-पत्र राशन कार्ड, पेन कार्ड, भू-अधिकार पुस्तिका, खसरा-खतोनी, बोवनी प्रमाण पत्र पटवारी एवं ग्राम पंचायत सचिव द्वारा जारी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।

कृषि विभाग ने समस्त किसान भाइयों से अपील की है कि 16 अगस्त तक अधिक से अधिक संख्या में प्रधानमंत्री फसल बीमा कराकर योजना का लाभ लेने हेतु अधिसूचित फसल सोयाबीन, मक्क, बाजरा, अरहर, मूंगफली, जौ, मूंग एवं उड़द के लिये कृषक द्वारा देय प्रीमियम राशि 2 प्रतिशत तथा कपास फसल के लिये 5 प्रतिशत प्रीमियम देय होगी।

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