टीवी चैनल्स को प्रसारण के दौरान रखना होगा विशेष ध्यान

सभी सैटेलाइट टीवी चैनल्स के लिए केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में कहा गया है कि टीवी चैनल्स को ऐसे कंटेंट दिखाने से बचना चाहिए, जिससे हिंसा भड़क सकती है या कानून व्यवस्था को लेकर समस्या उत्पन्न हो सकती है। नागरिकता संशोधन बिल पर इन दिनों बवाल चल रहा है। लिहाजा एडवाइजरी को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

11 दिसंबर को सूचना प्रसारण मंत्रालय की तरफ से जारी इस एडवाइजरी में लिखा है, ‘पहले भी कई मौकों पर टीवी चैनल्स को 1995 के केबल टेलिविजन नेटवर्क अधिनियम में वर्णित कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता के अनुरूप कंटेंट प्रसारित करने के लिए कहा जाता रहा है। एक बार फिर से सभी चैनल्स को ऐसे कंटेंट के प्रसारण से बचने की सलाह दी जाती है जो हिंसा को बढ़ावा देता हो या जिससे कानून व्यवस्था को लेकर समस्या उत्पन्न हो सकती हो या अन्यथा जिससे राष्ट्र-विरोधी दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलता हो या राष्ट्र की अखंडता किसी भी तरह से प्रभावित होती हो।’

 सरकार ने सभी प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनल्स को इस एडवाइजरी का पालन करने के लिए कहा है।

पत्रकार के खिलाफ FIR : प्रेस काउंसिल आई हरकत में

अब ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (PCI) उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील के तहत बच्‍चों को नमक-रोटी दिए जाने की खबर को लेकर मुकदमे का सामना कर रहे ‘जनसंदेश टाइम्स’ अखबार के पत्रकार पवन जायसवाल के मामले में हरकत में आ गई है। काउंसिल ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और मिर्जापुर के पुलिस अधीक्षक को तलब किया है। इन अधिकारियों से 18 दिसंबर तक अपना जवाब देने को कहा गया है।  

ज्ञात हो कि ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ पहले ही पवन जायसवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने को पत्रकारों के खिलाफ क्रूर कदम बताते हुए इसकी निंदा कर चुका है।

उल्लेखनीय है कि कुछ माह पूर्व मिर्जापुर में हिनौता स्थित एक प्राइमरी स्कूल के बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर नमक-रोटी खिलाने का मामला सामने आया था। पवन जायसवाल ने इस घटना का विडियो बनाकर सरकारी तंत्र की लापरवाही को उजागर किया था। वहीं, मिर्जापुर के जिला प्रशासन का आरोप था कि पवन जायसवाल ने फर्जी तरीके से और गलत नीयत से यह विडियो बनाया। इसके बाद प्रशासन ने पवन जायसवाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।

पवन जायसवाल के खिलाफ प्रशासन ने आपराधिक षडयंत्र, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा उत्पन्न करने, झूठे साक्ष्य और धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। एफआईआर के मुताबिक, इस विडियो को रिकॉर्ड करने के लिए गांव के एक अधिकारी ने जायसवाल के साथ साजिश रची थी, क्योंकि उन्हें पता था कि स्कूल में काम करने वाले रसोइए के पास सामान नहीं था।

पत्रकार भवन पर चला मध्य प्रदेश सरकार का बुलडोजर

आज मध्य प्रदेश नगर निगम की टीम ने राजधानी भोपाल में मालवीय नगर स्थित पत्रकार भवन को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम ने यह कार्रवाई की। 1969 में पत्रकार भवन का निर्माण हुआ था और इसे लीज पर दिया गया था। अब लीज रिन्यूअल की रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद सरकार ने इस इमारत को गिराने का निर्देश दिया था, जिसके बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इस इमारत को गिरा दिया गया।

इस संदर्भ में मंत्री पीसी शर्मा का कहना है कि कोर्ट द्वारा पत्रकार समितियों की अपील खारिज करने के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि पत्रकार भवन जर्जर हो गया था। अब पत्रकारों के लिए सर्व सुविधा युक्त भवन बनाया जाएगा। इससे पहले शनिवार को जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इमारत में स्थित श्रमजीवी पत्रकार संघ का दफ्तर सील कर दिया था। प्रशासन का कहना था कि श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा हाई कोर्ट में लीज को लेकर दायर की गई रिव्यू पिटीशन खारिज हो गई है। वहीं, पत्रकार संघ का आरोप था हाई कोर्ट के स्टे के बावजूद दफ्तर को सील किया गया है। प्रशासन ने दफ्तर सील करने के बाद इसे जनसंपर्क विभाग को सौंप दिया। श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेशध्यक्ष शलभ भदौरिया ने बताया कि पत्रकार भवन की लीज का केस हाई कोर्ट में चल रहा था, उसे खारिज कर दिया गया है।

चित्रा त्रिपाठी ने अजीत अंजुम के लिए लिखा — बेहद शर्मनाक!

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मोहम्मद साकिब

पत्रकार अजीत अंजुम चर्चित पत्रकार चित्रा त्रिपाठी की तरफ से इस हमले के लिए शायद तैयार नहीं थे। उन्होंने आज तक खबरिया चैनलों की हिन्दी पत्रकारिता में गिरोह चलाया है। जहां उन्हें सिर्फ कहने की आदत थी। सोशल मीडिया के इस दौर में उनके लिए यह सब सुनना थोड़ा मुश्किल तो होगा। अब अजीत अंजुम को मान लेना चाहिए कि समय बदल रहा है। अब उनका ‘अपना पत्रकारिता समाज’ भी उनकी थोपी हुई पत्रकारिता को स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

चित्रा त्रिपाठी

चित्रा त्रिपाठी खबरिया चैनलों की दुनिया में एक जाना पहचाना चेहरा है। चित्रा त्रिपाठी का एक ट्ववीट इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। चित्रा ने पत्रकार अजीत अंजूम की बलात्कार आरोपियों की जाति तलाशने की मानसिकता पर अफसोस व्यक्त करते हुए लिखा है— ”आपकी ये लाइनें पढ़कर घिन्न आ रही है.. कोई आदमी बलात्कारियों में भी #ब्राह्मण कैसे ढ़ूढ लेता है. रेपिस्ट की कोई जाति होती है क्या? हद है…बेहद शर्मनाक ट्वीट..”

अजीत अंजुम

अजीत अंजुम ने अपने ट्ववीट में लिखा था— ”उन्नाव के सभी दरिंदे त्रिवेदी और वाजपेयी हैं .ऊंच कुल-गोत्र के ब्राह्मण.तभी बलात्कारियों का धर्म देखकर शोर करने वाले सन्नाटे में हैं या कुछ कहकर खानापूर्ति कर रहे हैं .अगर ये भक्तों के  ‘टारगेट वाले’ होते न तो पूरी ट्रोल आर्मी दिन-रात काम पर लगी होती.”

 अंजुम बिहार की एक ऊंची जाति से स्वयं ताल्लूक रखते हैं और अपने ही कुल गोत्र के बलात्कार आरोपी ब्रजेश पांडेय पर चुप्पी लगाए रहते हैं क्योंकि उन्हें रवीश कुमार के साथ अपने रिश्ते की चिन्ता है। वह आगे भी उन्हें सलामत रखना है।

अभिषेक उपाध्याय

अजीत अंजुम के इस जातिवादी मानसिकता की हर तरफ आलोचना हो रही है। पिछले दिनों टीवी 09 भारतवर्ष से  अंजुम बाहर आए हैं। टीवी 09 में  अंजुम के सहयोगी और वर्तमान में टीवी पत्रकारिता के चर्चित चेहरे अभिषेक उपाध्याय ने पत्रकार रहे अजीत अंजुम की जातिवादी मानसिकता पर टिप्पणी करते हुए लिखा — ”घिन्न आएगी ही। इन महाशय का चरित्र ही ऐसा है। बेहद औसत दर्जे की समझ वाले इन लोगों ने सालों साल पत्रकारिता में ‘गिरोह’ चलाकर कितनी ही प्रतिभाओं की हत्या की है! ये पाप कभी इनका पीछा नही छोड़ेगा। सुकून की बात है कि अब चेहरे से नकाब नोचने का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है ।”

अजीत अंजुम की पत्रकारिता को कई लोग कांग्रेसी चाटुकारिता की पत्रकारिता बताते हैं। अब फिर एक दिन यूपीए की सरकार केन्द्र में आए और अजीत अंजुम के पुराने दिन लौटे। तब तक वे समाज को बांटने की अपनी मानसिकता को यूं ही जाहिर करते रहेंगे। 

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