दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सड़क
दुर्घटना में दिवंगत हुए ‘नवोदय टाइम्स’ के पत्रकार रमेश
कुमार के परिवार को दस लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी है। दिल्ली सचिवालय में
शुक्रवार को केजरीवाल ने रमेश कुमार के पिता विजय कुमार व पत्नी सीमा देवी को चेक
प्रदान किया। मूलरूप से झारखंड के पलामू जिले के रहने वाले रमेश कुमार (45) दिल्ली के पांडव नगर इलाके में पत्नी सीमा, दो बेटियों व एक बेटे के साथ रह रहे थे। पिछले साल तीन
अक्टूबर को आईटीओ के पास गलत दिशा से आ रही गाड़ी ने उनकी मोटरसाइकिल में टक्कर
मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए रमेश कुमार का काफी दिनों तक इलाज के बाद
निधन हो गया था।
पत्रकार रमेश कुमार के निधन के बाद उनके परिवार के
सामने बच्चों की शिक्षा व रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। परिवार को आर्थिक
सहायता देने के लिए तमाम पत्रकारों ने अरविंद केजरीवाल से संपर्क किया था। इसके
बाद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार की नीतियों में बदलाव कर रमेश कुमार के परिवार को दस
लाख रुपए का चेक सौंपा। ज्ञात हो कि पूर्व में इस तरह के मामलों में दिल्ली सरकार
की नीति के अनुसार पत्रकारों के परिजनों को आर्थिक सहायता के नाम पर बेहद कम राशि
देने का प्रावधान था।
दीपावली आई खुशियों की सौगात बांट अगले वर्ष 14 नवंबर को आने के लिए कह कर चली गई परंतु अपने पीछे समाचार-वाचकों, सूत्रधारों तथा विषय- विशेषज्ञों को चरचियाने (चर्चा) के लिए छोड़ गई। दीपावली व्यापार, धन-धान्य समृद्धि, सौभाग्य के साथ-साथ स्वच्छता का त्यौहार भी है।पूरे वर्ष भर का कचरा हम घर से बाहर निकालते हैं, घर को रंगाई पुताई कर स्वच्छ बनाते हैं, घी- तेल के दीए जला दिवाली मनाते हैं। बाजारों में दीपावली के अवसर पर विशेष सजावट व रौनक होती है। परंतु क्या हम विचार करते हैं कि कितना नया कचरा हमने उत्सर्जित किया? वर्ष भर जो हमने घर दुकान में कचरा इकट्ठा किया उससे कितने टन कचरा हमारे शहर का बढा?उस कचरे के निस्तारण का क्या हम भी कभी विचार करते हैं?
क्या हम इस वर्ष यह संकल्प ले सकते हैं कि अगले वर्ष दीपावली तक हम उस कचरे को जमा करने में कुछ न्यूनता लाएंगे? शायद सच्ची दिवाली यही होगी। लोकतंत्र में सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है परंतु प्रदूषण प्रदूषण चिल्लाने से प्रदूषण कम नहीं होने वाला हमारी आदतों में सुधार से ही इस प्रकृति तथा पृथ्वी का भला होने वाला है। पृथ्वी के अस्तित्व से ही हमारे सहित सभी जीवों का अस्तित्व है।दीपावली पर सभी बाजारों में खूब खरीददारी हुई। छोटी-बड़ी कंपनियों ने अपने अपने ढंग से प्रचार किए वस्तुओं के क्रय- विक्रय में, पैकिंग में कितना पॉलिथीन, कागज़, गत्ते,सिल्वर फॉयल,सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग हुआ इसका भी विचार किया जाना चाहिए।नई कार बाइक की बिक्री के साथ-साथ सायकल की बिक्री कितनी हुई इसके भी आंकड़े आने चाहिए।पर्यावरण के संरक्षण के लिए सभी की जिम्मेदारी तथा भागीदारी की आवश्यकता है।
भिवानी परिवार मैत्री संघ
दिल्ली द्वारा 8वां भिवानी गौरव सम्मान से कई विभूतियों को सम्मानित
किया गया। दिल्ली रोहिणी के क्राउन प्लाजा होटल में रंगारंग कार्यक्रम का शुभारंभ
संत हजुर कंवर महाराज, आईएएस मंगतराम शर्मा, नवल किशोर, सीबीएलयू कुलपति आरके मित्तल ने संयुक्त रूप से दीप
प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम का प्रथम सत्र सूरजभान बगडिय़ा को समर्पित रहा।
कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा गणेश वंदना की गई। इसके पश्चात चौ. बंसीलाल सम्मान
तमिलनाडू कैडर के मंढ़ाणा निवासी आईएएस मंगतराम शर्मा को प्रदान किया गया व
बगडिय़ा परिवार को सम्मानित किया। इसी कार्यक्रम में पदमभूषण ओडिसी नृत्यांगना डा.
सरोजा वैद्यनाथन के दल द्वारा भगवान राम के जीवन से संबंधित प्रस्तुति दी व अन्य
ओडिसी नृत्य के रूप में दिखाए। कार्यक्रम का दूसरा सत्र भग्गनका परिवार को समर्पित
रहा। कार्यक्रम में माधव मिश्र सम्मान भिवानी के साहित्यकार आनन्द आर्टिस्ट, पत्रकारिता के क्षेत्र में बाबू बनारसीदास गुप्ता
सम्मान प्रैस फोटोग्राफर अशोक शर्मा को प्रदान किया गया। इस अवसर पर हरियाणवी
कलाकारों ने अपनी कई प्रस्तुतियां देते हुए हरियाणवी नृत्य तेरी आंख्या का यो काजल
के नृत्य पर उपस्थितजनों की खूब तालियां बटोरी। इस अवसर पर भिवानी के शायर
विजेन्द्र गाफि़ल द्वारा रचित जिन्दगी ए जिन्दगी पुस्तक का विमोचन किया। महिला
सशक्तिकरण को गति देते हुए मैत्री संघ द्वारा नारायणी देवी महावीर प्रसाद भग्गनका
ओजस्वनी पुरस्कार बनारसीदास गुप्ता फाऊंडेशन की दर्शना गुप्ता को प्रदान किया गया।
पुरस्कार में 31 हजार रूपये की राशि के अतिरिक्त स्मृति चिन्ह एवं
श्रीफल भेंट किया। दूसरे सत्र के कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी रोहतक के वरिष्ठ
उदघोषक सम्पूर्ण सिंह बागड़ी ने किया। मुख्यअतिथि के रूप में छोटूराम तकनीकि
विश्वविद्यालय के कुलपति आरके अनायत एवं दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष रामनिवास गोयल
रहे। यह सत्र श्रेष्ठी शिवलाल सर्राफ समर्पित रहा। तीसरे सत्र में मुख्य अतिथि
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डा. जगबीर सिंह रहे। कार्यक्रम में
शिक्षा के क्षेत्र में रामकिशन गुप्ता सम्मान भिवानी के डा. बुद्धदेव आर्य को
प्रदान किया गया। यह सत्र मानहेरू के बालूराम पंसारी डॉलर ग्रुप को समर्पित रहा।
संगीत के क्षेत्र में पंडित गोपाल कृष्ण सम्मान हंसराज रल्हन को तथा पंडित नेकीराम
शर्मा राष्ट्र सेवा का पुरस्कार अग्रवाल पैकर्ज एण्ड मूवर्स के रमेश अग्रवाल को
प्रदान किया गया। इस अवसर पर शिवलाल सर्राफ परिवार को सम्मानित किया गया। इस अवसर
पर कंवर हजुर साहब ने संबोधित करते हुए भिवानी परिवार मैत्री संघ की भूरि-भूरि
प्रशंसा की तथा उनके कार्यक्रमों को दूरगामी व मूलगामी बताया। भिवानी परिवार
मैत्री संघ के अध्यक्ष राजेश चेतन ने संस्था की गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश
डाला व भावी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। विशाल कार्यक्रम को सफलता प्रदान
करने में संघ के महासचिव दिनेश गुप्ता, कोषाध्यक्ष सांवरमल गोयल के विशेष योगदान की सराहना
की। मंगतराम शर्मा ने भी संबोधित किया। हरियाणवी कवि अनिल अग्रवंशी ने अपनी हास्य
कविताएं सुनाकर उपस्थितजनों को लोट-पोट कर दिया। इस सत्र का संचालन सुनीता जैन ने
किया। कार्यक्रम में विधायक घनश्याम सर्राफ, वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवरत्न गुप्ता, वैश्य सीनियर सकैण्डरी स्कूल के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, रामा सेवादल, वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट के सदस्य मौजूद रहे |
प्रो. अरुण कुमार भगत के सम्पादित आपातकाल विषय पर तीन पुस्तकों का हुआलोकार्पण
महात्मा
गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के मीडिया अध्ययन विभाग के डीन एवं विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण
कुमार भगत द्वारा संपादित आपातकाल विषयक तीन पुस्तकों का साहित्य अकादेमी में लोकार्पण
किया गया. ये पुस्तकें हैं, “आपातकाल के काव्यकार”, “आपातकाल के संस्मरण” और “डॉ.
देवेन्द्र दीपक का आपातकालीन साहित्य : दृष्टि और मूल्यांकन”. आर्यावर्त
साहित्य-संस्कृति-संस्थान, नई
दिल्ली द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय
संपर्क प्रमुख प्रो. अनिरुद्ध देशपांडे, गुजरात के पूर्व राज्यपाल प्रो. ओमप्रकाश कोहली, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल के पूर्व
निदेशक डॉ. देवेन्द्र दीपक, महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजीव कुमार
शर्मा ने इन पुस्तकों का लोकार्पण किया.
कार्यक्रम
का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ. इसके बाद अतिथियों का पुस्तक, शाल और स्मृति
चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. दर्शन पाण्डेय ने सभी अतिथियों का स्वागत भाषण दिया
और मंच पर उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों का परिचय कराया. इसके बाद सभी मंचस्थ
अतिथियों ने तीनों पुस्तकों का लोकार्पण किया. मंच संचालन डॉ. अशोक कुमार ज्योति
ने किया.
इस मौके
पर प्रो. अरुण कुमार भगत ने कहा कि अपनों के बीच आपातकाल पर तीन सम्पादित पुस्तकों
का विमोचन हुआ है. इस विषय पर करीब चौबीस वर्षों के कार्य कर रहा हूँ. आपातकाल को
भारतीय लोकतंत्र का काले अध्याय के रूप में देखा जा रहा है. उस दौर में एक लाख
चौबीस हजार लोग गिरफ्तार हुए थे. केवल उनीस महीने के उस कालखंड में भारतीय
साहित्यकारों ने अपनी रचना से साहित्य को समृद्ध किया. वामपंथ और कांग्रेस के
गठबंधन ने आपातकाल विषय पर विश्वविद्यालयों में शोध नहीं होने दिया और इस कारण
अकादमिक कार्य नहीं हुए. अत्याचार पर सत्याचार के विजय के प्रतीक के रूप में हर
वर्ष दशहरा मनाते हैं, उसी तरह
आपातकाल को हर वर्ष याद किया जाना आवश्यक है.
मध्य
प्रदेश साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. देवेन्द्र दीपक
ने कहा कि आज के युग में साहित्य प्रेमी हैं और राष्ट्र के बारे में विचार करते
हैं. आपातकाल पर बहुत लिखा गया लेकिन बहुत कुछ सामने नहीं आया. अभी तक संस्थान
उनके हाथ में था जो आपातकाल के समर्थक थे. उन्होंने आपातकाल के संस्मरण के अलावा
अपनी काव्य और नाटक रचनात्मकता को लेकर अपनी बात रखी और कहा कि प्रो. अरुण कुमार
भगत का शोध कार्य काफी व्यापक है और वे लगातार कार्य कर रहे हैं.
गुजरात
के पूर्व राज्यपाल एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. ओमप्रकाश कोहली ने आपातकाल के
अनुभव को साझा किया. आज अधिकार लोग ऐसे हैं जिन्हें बस पता है कि आपातकाल लगा था, इस कारण उन्हें
आपातकाल के बारे में पढना चाहिए. आपातकाल के दौर में उन्नीस महीने का सन्नाटा था
और सत्ता के लोगों ने शायद ही सोचा था कि इस सन्नाटे का विरोध होगा. आपातकाल का
विरोध लिखने के द्वारा, सड़क पर
उतर कर, सत्यग्रह
के द्वारा और भूमिगत होकर हुआ. जिनका उस समय का अनुभव है, उन्हें आज की पीढ़ियों से साझा करना चाहिए.
प्रो. अरूण कुमार भगत का कार्य सराहनीय है.
राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख प्रो. अनिरुद्ध देशपांडे ने कहा कि
सत्ता के प्रेमी ने आपातकाल का समर्थन किया. अभी तक किसी भी कोर्स में आपातकाल
विषय नहीं लाया गया है. छात्रों को आपातकाल के बारे में पढाना चाहिये. उन्होंने
कहा कि प्रो. अरुंक कुमार भगत को आपातकाल की राजनीति को भी पुस्तकों को सामने लाना
चाहिए. मेरे अनुसार आपातकाल की लड़ाई भारतीय इतिहास के स्वतंत्रता की दूसरी लड़ाई थी, जो स्वतंत्रता के
बाद लड़ी गई. आपातकाल ने भारतीय समाज को जगाने का कार्य किया. सत्तापिपासु लोगों ने
आपातकाल का समर्थन किया और लोगों को सताया गया.
महात्मा
गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि हमारे लिए गौरव की बात
है कि हमारे विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर अरुण कुमार भगत की पुस्तकों का लोकार्पण
हुआ है. आपातकाल ने हमें दृष्टि दी कि भारतीय समाज अपने लोकतंत्र से कितना प्यार
और विश्वास किया है. विश्व में हमारे लोकतंत्र में कैसी छवि बन रही है, इस पर और इसे
आपत्काल के सन्दर्भ में देखना आवश्यक है.
इस अवसर
पर साहित्यकार डॉ. रामशरण गौड़, डॉ. वेद व्यथित, डॉ.
मालती,
विनोद
बब्बर,
हर्षवर्धन, डॉ. सारिका कालरा, डॉ. अशोक कुमार
ज्योति, आशीष
कंधवे,
संजीव
सिन्हा, गुंजन
अग्रवाल, डॉ. लहरी
राम मीना को विभिन्न सम्मानों से सम्मानित भी किया गया. कार्यक्रम का धन्यवाद
ज्ञापन दिया.