डेविड वार्नर ने की अंतर्राष्ट्रीय एक दिवसीय क्रिकेट मैच से संन्यास लिया

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डेविड वार्नर ने अंतर्राष्ट्रीय एक दिवसीय क्रिकेट-ओडीआई मैच से संन्यास लेने की घोषणा की है। दो बार के एकदिवसीय क्रिकेट विश्‍व कप विजेता ने पहले सिडनी में होने वाले पाकिस्‍तान के विरुद्ध टेस्‍ट मैच के बाद टेस्‍ट करियर से संन्‍यास लेने की घोषणा की थी। हालांकि इस सलामी बल्लेबाज ने बताया कि वे 2025 की चैंपियंस ट्राफी के लिए उपलब्‍ध हैं।

डेविड वार्नर ओडीआई प्रारूप में ऑस्‍ट्रेलिया के छठवें सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। ऑस्‍ट्रेलिया की ओर से ओडीआई प्रारूप में सर्वाधिक शतक लगाने वाले पूर्व कप्‍तान रिकी पोंटिंग के बाद डेविड वार्नर दूसरे नम्‍बर पर हैं।

वार्नर के नाम पर वनडे विश्व कप के दो खिताब दर्ज हैं जिनमें विश्व कप 2023 में भारत के खिलाफ फाइनल की जीत भी शामिल है। इस टूर्नामेंट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की तरफ से सर्वाधिक रन बनाए थे। बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज वार्नर ने 2009 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होबार्ट में अपने वनडे करियर का आगाज किया था।

इसरो ने अंतरिक्ष में छोड़ा एक्सपोसैट

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन – इसरो ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान- पीएसएलवी-सी58 से एक्स-रे पोलरीमीटर सैटेलाइट-एक्सपोसैट को अंतरिक्ष में छोड़ा। यह प्रक्षेपण आज सुबह 9 बजकर 10 मिनट पर आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा से किया गया। इसके साथ दस अन्य वैज्ञानिक पेलोड का भी प्रक्षेपण किया गया।

यह मिशन खगोलीय स्रोतों से ब्रह्मांडीय एक्सरे के ध्रुवीकरण का अध्ययन करने संबंधी भारत के पहले समर्पित वैज्ञानिक प्रयास को दर्शाता है। इस प्रक्षेपण के बाद भारत ब्लैक होल और न्यूट्रॉन नक्षत्रों के अध्ययन के लिए विशिष्ट खगोल शास्त्रीय वेधशाला भेजने वाला दूसरा देश बन गया है। इसरो के अध्यक्ष एस0 सोमनाथ ने बताया कि एक्सपोसैट को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक्सपोसैट के सफल प्रक्षेपण के लिए इसरो को बधाई दी है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में डॉ. सिंह ने कहा, इसरो ने 2024 की शुरुआत अपने अंदाज़ में की है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में अंतरिक्ष विभाग से जुड़े होने पर उन्हें गर्व है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप और संरक्षण से टीम इसरो एक के बाद एक सफलता हासिल कर रही है।

वर्ष 2023 में भारत में निवेशक हुए मालामाल

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भारतीय शेयर (पूंजी) बाजार द्वारा वर्ष 2023 में 20 प्रतिशत की रिकार्ड वृद्धि दर अर्जित की गई है। वर्ष 2023 में सेन्सेक्स 11,399 अंकों (18.73 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 72,082 अंकों के स्तर पर बंद हुआ है तो वहीं निफ्टी 3,626 अंको (20 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 21,731 अंकों के स्तर पर बंद हुआ है।

भारत के शेयर बाजार में उक्त वर्णित तेजी के चलते वर्ष 2023 में भारत के शेयर बाजार में निवेशकों के शेयरों में निवेश का बाजार मूल्य 81.90 लाख करोड़ रुपए से बढ़ गया है, जबकि वर्ष 2022 में यह 16.38 लाख करोड़ रुपए से बढ़ा था। यह भारत की लगातार उच्च स्तर की आर्थिक प्रगति एवं देश में राजनैतिक वातावरण के स्थिर बने रहने के कारण सम्भव हो सका है। हाल ही में तीन राज्यों में सम्पन्न हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के कारण भी शेयर बाजार में उच्छाल देखा गया था। वर्ष 2023 में बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज पर लिस्टेड कम्पनियों के शेयरों का बाजार पूंजीकरण 81.90 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि के साथ 364.28 लाख करोड़ रुपए के स्तर को पर कर गया है। वर्ष 2023 में भारतीय शेयर बाजार में दर्ज की गई उक्त वृद्धि दर विश्व के समस्त इमर्जिंग बाजारों के बीच सबसे अधिक है। 29 नवम्बर 2023 को तो बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज पर पंजीकृत समस्त कम्पनियों का बाजार पूंजीकरण का स्तर 4 लाख करोड़ रुपए के स्तर को पार कर गया था जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार से भी अधिक है। भारत के संदर्भ में यह भी अपने आप में एक रिकार्ड है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार अभी 3.75 लाख करोड़ रुपए का ही है। 24 मार्च 2021 को बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज पर पंजीकृत समस्त कम्पनियों का बाजार पूंजीकरण 3 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंचा था, इस प्रकार केवल 2 वर्ष 8 माह के खंडकाल में ही उक्त कम्पनियों द्वारा जारी शेयरों का बाजार पूंजीकरण एक लाख करोड़ रुपए की राशि से बढ़ गया है।

वर्ष 2023 में भारत के बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज के समाल केप (छोटे आकर की कम्पनियों द्वारा जारी शेयरों का बाजार पूंजीकरण) इंडेक्स में तो 47.52 प्रतिशत की बृद्धि दर आंकी गई है। वहीं, मिड केप (मध्यम आकार की कम्पनियों द्वारा जारी शेयरों का बाजार पूंजीकरण) इंडेक्स द्वारा 45.52 प्रतिशत की वृद्धि दर अर्जित कर की गई है।

30 शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज इंडेक्स ने केवल नवम्बर 2023 माह में ही 4.87 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और दिसम्बर 2023 माह तो 7.83 प्रतिशत की वृद्धि के साथ आगे बढ़ा है। इस प्रकार नवम्बर एवं दिसम्बर 2023 माह भारत में निवेशकों के लिए बहुत फलदायी सिद्ध हुए हैं। यह सब भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वित्तीय वर्ष 2023-24 की दो तिमाहीयों, अप्रेल-जून 2023 में 7.8 प्रतिशत की एवं जुलाई-सितम्बर 2023 में 7.6 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर हासिल करने एवं कम्पनियों की लाभप्रदता में हुई अतुलनीय वृद्धि दर के चलते सम्भव हो पाया है। साथ ही, भारत में वृहद्द (मैक्रो) स्तर पर अर्थव्यवस्था में मजबूत संकेत बने हुए है तथा अब मुद्रा स्फीति पर भी नियंत्रण प्राप्त कर लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भी कुछ नरमी आई है। इससे भारतीय रुपए के मूल्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमत में भी स्थिरता दिखाई दी है।

आज भारत के शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों का बाजार पूंजीकरण 17.48 लाख करोड़ के स्तर को पार कर गया है, जो भारत में प्रथम स्थान पर है। द्वितीय स्थान पर टाटा कन्सल्टैंसी सर्विसेज है, जिसका शेयर बाजार पूंजीकरण 13.88 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, तृतीय स्थान पर 12.98 लाख करोड़ रुपए के शेयर बाजार पूंजीकरण के साथ एचडीएफसी बैंक है। चतुर्थ स्थान पर 6.99 लाख करोड़ रुपए के शेयर बाजार पूंजीकरण के साथ आईसीआईसीआई बैंक है। इनफोसिस कम्पनी का पांचवा स्थान है, जिसका शेयर बाजार पूंजीकरण 6.40 लाख करोड़ रुपए का है।

विदेशी पॉर्ट्फोलीओ निवेशकों ने भी भारत के शेयर बाजार में वर्ष 2023 में 1.70 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि का निवेश किया है। यह विदेशी निवेशकों के भारतीय अर्थव्यवस्था पर लगातार बढ़ रहे विश्वास को दर्शा रहा है। केवल दिसम्बर 2023 माह में ही 66,134 करोड़ रुपए का निवेश विदेशी पॉर्ट्फोलीओ निवेशकों द्वारा भारत के शेयर बाजार में किया गया है।

वर्ष 2024 में अमेरिकी बाजार में अब ब्याज दरों में कमी की सम्भावना व्यक्त की जा रही है इसके चलते वर्ष 2024 में भी भारत के शेयर बाजार में अमेरिकी पॉर्ट्फोलीओ निवेशकों द्वारा और अधिक मात्रा में निवेश किया जा सकता है। वर्ष 2022 में विदेशी पॉर्ट्फोलीओ निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 1.21 लाख करोड़ रुपए निकाले थे क्योंकि विकसित देशों ने मुद्रा स्फीति को नियंत्रण में लाने के उद्देश्य से ब्याज दरों में बेतहाशा वृद्धि की थी। जबकि वर्ष 2021 में 25,752 करोड़ रुपए का, वर्ष 2020 में 1.7 लाख करोड़ रुपए का एवं वर्ष 2019 में 1.01 लाख करोड़ रुपए का निवेश भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पॉर्ट्फोलीओ निवेशकों द्वारा किया गया था।

वर्ष 2024 में विभिन्न देशों में मुद्रा स्फीति के नियंत्रण में रहने की सम्भावनाओं के बीच केंद्रीय बैकों द्वारा ब्याज दरों में कमी किए जाने के संकेत मिलने लगे हैं, अमेरिका में तो बांड यील्ड 5 प्रतिशत से अधिक रहते हुए अब 4 प्रतिशत के भी नीचे आ गई है अतः विदेशी निवेशक अब भारत जैसी तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था में अपना निवेश निश्चित रूप से बढ़ाएंगे। इस प्रकार, भारत के शेयर बाजार में तेजी की सम्भावनाएं वर्ष 2024 में लिए भी बनी हुई हैं।

भारतीय शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की संख्या तो बढ़ी ही है साथ ही इन निवेशकों का शेयर बाजार पर विश्वास भी बढ़ा है और अब खुदरा निवेशक भी निवेश के सम्बंध में सही समय पर सही निर्णय लेकर अपने निवेश का बाजार मूल्य बढ़ाने में सफलता हासिल करने लगे हैं। भारत में 8 करोड़ से अधिक खुदरा निवेशकों के 13 करोड़ से अधिक डीमैट खाते खोले जा चुके हैं। डीमैट खाता उस खाते को कहते हैं जिसके माध्यम से शेयर बाजार में शायर खरीदे एवं बेचे जाते हैं।

वर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी लगभग 10 प्रतिशत कम हुई हैं, इसका भी विशेष रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था पर अच्छा प्रभाव रहा है और अन्य देशों में भी इससे मुद्रा स्फीति की दर में कमी आ सकी है तथा कम्पनियों की लाभप्रदता में वृद्धि दर्ज हुई है। यह भी एक सुखद खबर है कि रूस यूक्रेन युद्ध, हम्मास इजराईल युद्ध एवं पश्चिमी एशियाई देशों के बीच लगातार बढ़ रहे तनाव का असर भारतीय पूंजी बाजार पर नहीं के बराबर पड़ा है।

विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार में किए जा रहे भारी निवेश एवं भारत में लगातार बढ़ रहे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के चलते भारत के विदेशी मुद्रा भंडार भी 62,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर गए हैं। यह भारत के लिए बहुत सुखद स्थिति है।

भारत के लिए वर्ष 2024 भी सुनहरा वर्ष साबित होने जा रहा है

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विश्व के कुछ देश वर्ष 2024 में मंदी की मार झेल सकते हैं, यह कुछ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों का आंकलन है। परंतु, वैश्विक स्तर पर अर्थव्यस्था के गिरने की सम्भावनाओं के बीच एक देश ऐसा भी है, जिस पर समस्त अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं विश्व बैंक, की नजरें टिकी है, वह है भारत। भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति समस्त विदेशी वित्तीय संस्थान आशावान हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को अब भारत ही सहारा देने की क्षमता रखता है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अभी हाल ही में एक प्रतिवेदन जारी किया है। इसमें भारत के प्रति मुख्य रूप से तीन बातें कही गई हैं। प्रथम, भारत आज विश्व में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। दूसरे, भारत का सकल घरेलू उत्पाद 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करेगा। तीसरे, वर्ष 2024 में वैश्विक स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद में भारत का योगदान 16 प्रतिशत का रहने वाला है। भारत आने वाले समय में पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था के विकास में एक इंजिन के रूप में अपना योगदान देने को तैयार है।

भारत ने वर्ष 2023 में विश्व में कम होती विकास दर के बीच भी आकर्षक विकास दर हासिल की है। क्योंकि, भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में, विशेष रूप से आर्थिक क्षेत्र में, लगातार कई बड़े फैसले लिए हैं, जिनका प्रभाव अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। एक तो भारत ने आर्थिक व्यवहारों का डिजिटलीकरण किया है और इस क्षेत्र में पूरे विश्व को ही राह दिखाई है, इससे आर्थिक व्यवहारों की न केवल निपुणता बढ़ी है बल्कि लागत भी बहुत कम हुई है। दूसरे, केंद्र सरकार ने देश में आधारभूत संरचना को विकसित करने के लिए भारी भरकम राशि का पूंजीगत खर्च किया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 7.50 लाख करोड़ रुपए की राशि इस मद पर खर्च की गई थी एवं वित्तीय वर्ष 2023-24 में 10 लाख करोड़ रुपए की राशि इस मद पर खर्च की जा रही है। भारत में सड़क, रेल्वे एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विकास पर 12,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर का पूंजीगत खर्च आगे आने वाले समय में किये जाने की योजना बनाई गई है।

वर्ष 2017 से 2023 के बीच आधारभूत संरचना के विकास हेतु 70 लाख करोड़ रुपए की राशि का पूंजीगत खर्च किया गया था परंतु वर्ष 2024 से 2030 के बीच 143 लाख करोड़ रुपए की राशि का पूंजीगत खर्च किए जाने की योजना बनाई जा रही है। तीसरे, भारत में केंद्र सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले नागरिकों को कई योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान करने की भरपूर कोशिश की है, जिसका परिणाम इस वर्ग की संख्या में भारी भरकम कमी के रूप में देखने को मिला है। और फिर, अब तो यह वर्ग मध्यम वर्ग की श्रेणी में शामिल होकर भारत में उत्पादों की मांग में वृद्धि करने में सहायक की भूमिका निभा रहा है, जिससे देश में ही विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन में भारी वृद्धि हो रही है।

इसी प्रकार, विश्व के सबसे बड़े ऑफिस काम्प्लेक्स का निर्माण भारत में गुजरात राज्य के सूरत शहर में किया गया है। इस ऑफिस काम्प्लेक्स में 4,500 से अधिक हीरा व्यवसाईयों के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। इस काम्प्लेक्स में कच्चे हीरे के व्यापारियों से लेकर पोलिश हीरे की बिक्री करने वाली कम्पनियों के ऑफिस एक ही जगह पर स्थापित किए जाएंगे। सूरत डायमंड बोर्स बिल्डिंग के नाम से इस काम्प्लेक्स, जो 67 लाख वर्गफुट से अधिक के क्षेत्र में फैला है, का उद्घाटन दिसम्बर 2024 माह में भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा सम्पन्न हुआ है। यह काम्प्लेक्स अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन के मुख्यालय भवन से भी बड़ा है, पेंटागन के मुख्यालय को आज तक विश्व में सबसे बड़ा भवन माना जाता रहा है। इस तरह के कई व्यावसायिक केंद्र भारत में विकसित हो रहे हैं।

विश्व के अन्य देश मुद्रा स्फीति की समस्या से पिछले कुछ वर्षों से लगातार जूझते रहे हैं परंतु भारत ने इस समस्या पर भी नियंत्रण प्राप्त करने में सफलता हासिल की है। जुलाई 2023 में भारत में खुदरा महंगाई की दर 7.44 प्रतिशत थी जो अक्टोबर 2023 में घटकर 4.87 प्रतिशत पर नीचे आ गई है। अब तो शीघ्र ही भारतीय रिजर्व बैंक रेपो दर में कमी की घोषणा कर सकता है जिससे देश में ब्याज की दरें कम होना शुरू होंगी इससे निश्चित रूप से अर्थव्यवस्था में और अधिक तेजी की सम्भावना बनेगी।

आगे आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को यदि किसी परेशानी का सामना करना पड़ता है तो वह आंतरिक समस्या न होकर वैश्विक स्तर की समस्या के कारण होगी। क्योंकि, कुछ देशों, विकसित देशों सहित में मंदी की सम्भावनाएं बन रही हैं। दूसरे, रूस यूक्रेन युद्ध, हम्मास इजराईल युद्ध, चीन का अपने पड़ौसी देशों से टेंशन, यूरोपीयन देशों के आपसी झगड़े, कुछ ऐसे बिंदु हैं जो भारत की विकास दर को विपरीत रूप से प्रभावित कर सकते हैं। यदि इन्हीं समस्त कारणों से कुछ विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं तो भारत से विभिन्न उत्पादों का निर्यात भी कम होगा, आयात होने वाली वस्तुओं की लागत बढ़ेगी, इस प्रकार की समस्याएं खड़ी हो सकती हैं जो भारत को भी आने वाले समय में परेशान करें। दूसरे, कुछ प्राकृतिक कारण भी जैसे मानसून का उचित समय पर नहीं आना अथवा कम बारिश होना, जैसी कुछ समस्याएं भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। अन्यथा पिछले लगभग 10 वर्ष का समय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए स्वर्णिम काल कहा जाना चाहिए और आगे आने वाले कुछ वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था नई ऊचाईयों को छूने के लिए तैयार है। उदाहरण के लिए यह इतिहास में पहली बार होने जा रहा है कि भारतीय शेयर बाजार वर्ष 2016 से लेकर वर्ष 2023 तक लगातार 8 वर्षों तक निवेशकों को लाभ की स्थिति प्रदान करता रहा है। दूसरे, अमेरिकी वित्तीय संस्था लीहमन ब्रदर्स के वर्ष 2008 में टूटने के बाद भारत का निफ्टी एवं चीन का शंघाई शेयर बाजार 3000 के अंकों पर थे, परंतु आज भारत का निफ्टी 21800 अंकों के ऊपर पहुंच गया है और चीन का शंघाई शेयर बाजार अभी भी 3000 अंकों पर ही बरकरार है। लगभग समस्त देशों के निवेशक आज भारतीय शेयर बाजार के प्रति अत्यधिक भरोसा जताए हुए हैं और आज भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 60,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर गया है।

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