नए नाम से जाना जाएगा ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’

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 निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ अब अपना नाम बदलकर ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन’ रखने का फैसला किया है।  

वर्तमान में टेक्नोलॉजी के कारण मीडिया के परिदृश्य में भारी बदलाव आया है। अब दर्शकों के पास कंटेंट तक पहुंचने के लिए तमाम विकल्प उपलब्ध हैं। डिजिटल मीडिया काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में एनबीए बोर्ड का मानना है कि नाम बदलकर ‘NBDA’ करने से परिलक्षित होगा कि डिजिटल मीडिया पब्लिशर्स भी इसके सदस्यों मे शामिल हैं।

हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ व ‘एनबीए’ के प्रेजिडेंट रजत शर्मा का इस बारे में कहना है, ‘एनबीए ने डिजिटल मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को अपने दायरे में लाने का फैसला किया है। अपने नए चरण में, डिजिटल मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को शामिल करने के साथ, एनबीए बोर्ड ने अब इस निकाय का नाम ‘एनबीए’ से ‘एनबीडीए’ में बदलने का निर्णय लिया है।’

रजत शर्मा ने कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास है कि एनबीडीए ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया दोनों के लिए एक मजबूत व सामूहिक आवाज बनेगा। वाणिज्यिक और नियामक मुद्दों के साथ यह एसोसिएशन को भारत के संविधान के तहत मीडिया को मिले वाक एवं अभिव्यक्ति की आजादी के मौलिक अधिकार की रक्षा करने में भी सक्षम बनाएगा।’ 

उल्लेखनीय है कि एनबीए ने करीब 14 साल पहले एक स्वतंत्र स्व-नियामक निकाय न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी का गठन किया था। इसका गठन प्रसारण के खिलाफ आई शिकायतों पर विचार करने और फैसला लेने के लिए किया गया है। अब एसोसिएशन में डिजिटल न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के शामिल होने के बाद एनबीए बोर्ड इसका भी नाम बदलकर न्यूज ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्स अथॉरिटी करेगा।

कोरोना से बचाव में ‘आरोग्य मित्र’ की भूमिका में होंगे संघ के स्वयंसेवक

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ओमप्रकाश सिसोदिया

शुक्रवार को भोपाल प्रवास के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कार्यकर्ताओं से संगठनात्मक बैठक में संवाद किया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है। इसकी तीसरी आवृत्ति आने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में संघ के कार्यकर्ताओं को आवश्यक तैयारी कर लेनी चाहिए। नगर गांव में चयनित कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण हो जाए इस बात की चिंता की जाए। संघकार्य के विस्तार के लिए आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना बनाने के लिए भी उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा है।

सरकार्यवाह होसबाले ने संघकार्य विस्तार की दृष्टि से स्वयंसेवकों से कहा कि संघ कार्य भौगोलिक और सर्वस्पर्शी, दोनों प्रकार से बढ़ना चाहिए। इसके लिए स्वयंसेवकों को आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। विद्यार्थी शाखा के विस्तार पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हमने भोपाल में श्रम साधकों के बीच विशेष प्रयास करके कार्य खड़ा किया है। उसी प्रकार सभी वर्गों एवं क्षेत्रों में कार्य पंहुचाना है । उन्होंने कहा कि हमें अब  कार्यविस्तार के साथ कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास करने चाहिए।

( लेखक मध्यभारत के प्रांत प्रचार प्रमुख हैॅ।)

पत्रकार हामिद ने पाकिस्तान की पोल खोली

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इमरान सरकार की आलोचना पाक सेना के खिलाफ कठोर टिप्पणी करने पर अनिश्चित काल तक हटाए गए पाकिस्तानी के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने की है। उन्होंने कहा है कि इमरान खान एक ‘असहाय’ प्रधानमंत्री हैं और देश के मीडियाकर्मियों में डर का माहौल बनता जा रहा है।

मंगलवार को डॉन अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार, इस्लामाबाद से बीबीसी वर्ल्ड सर्विस को दिए इंटरव्यू में मीर ने पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता के घटते दायरे और पत्रकारों के प्रति बढ़ते ‘डर के माहौल’ की आलोचना की।

बीबीसी के शो ‘हार्ड टॉक’ के होस्ट स्टीफन सैकर से मीर ने कहा, ‘पाकिस्तान में लोकतंत्र होकर भी नहीं है। यहां सिर्फ नाममात्र के लिए ही लोकतंत्र रह गया है। यहां संविधान भी नाममात्र का है और मैं पाकिस्तान में सेंसरशिप का जीता जगता उदाहरण हूं।’

मीर ने कहा कि देश में मीडियाकर्मियों पर जिस तरह से हमले हो रहे हैं, उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। इस्लामाबाद से बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में मीर ने प्रेस की आजादी के लिए सिकुड़ती जगह और पाक में पत्रकारों के लिए भय के बढ़ते माहौल की भी निंदा की।

उन्‍होंने होस्‍ट स्टीफन सैकर के साथ हुई बातचीत में कहा कि पाकिस्‍तान के पत्रकार वहां पर कानून का राज चाहते हैं। यदि कोई पत्रकार इस बाबत किसी सवाल का जवाब चाहता है तो उसकी आवाज को दबाना नहीं चाहिए।

क्‍या पत्रकारों पर हुए हमले में पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी का भी हाथ है? पूछे जाने पर मीर ने कहा कि इसके दस्‍तावेजी सबूत मौजूद हैं। स्‍टेट एजेंसी और पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसियों पर पत्रकारों पर हमले करवाने और उन्‍हें अगवा कराने के आरोप बार बार लगते रहे हैं। उनके खिलाफ भी सरकार और सेना की तरफ से कई मामले दर्ज करवाए गए हैं, जिसके लिए वह पूरी जिंदगी जेल में सड़ने को भी तैयार हैं। ऐसा इसलिए क्‍योंकि यदि वह ऐसा करते हैं और उन्‍हें सजा होती है तो कम से कम इससे पूरी दुनिया को इस बारे में पता तो चल जाएगा कि आखिर पाकिस्‍तान में हो क्‍या रहा है।

यह पूछे जाने पर कि क्या प्रधानमंत्री इमरान खान व्यक्तिगत तौर पर उन पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं? इस पर मीर ने जवाब दिया, ‘मेरे ऊपर लगाई गई पाबंदी के लिए इमरान खान सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं हैं। मुझे नहीं लगता कि वह मुझे (टीवी से) हटाना चाहते हैं। लेकिन पिछले प्रधानमंत्रियों की तरह वह बहुत ताकतवर प्रधानमंत्री नहीं हैं। वह असहाय हैं और मेरी मदद नहीं कर सकते।’

उन्‍होंने इंटरव्‍यू में कहा कि पाकिस्‍तान में हमेशा से ही प्रेस की आजादी को लेकर सरकार की आलोचना होती रही हैं। जून में तीन इंटरनेशनल राइट्स ग्रुप ने अपने एक संयुक्‍त बयान में पाकिस्‍तान में प्रेस पर लगी पाबंदी पर गहरी चिंता व्‍यक्‍त की थी। इस बयान में सरकार की भी कड़ी आलोचना की गई थी। ह्यूमन राइट वाच, एमनेस्‍टी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल कमीशन आफ ज्‍यूरिस्‍ट्स ने कहा था कि इसके खिलाफ दोषियों को सजा दी जानी चाहिए।

बता दें कि पाकिस्तान के ताकतवर सैन्य प्रतिष्ठान के विरुद्ध कड़ी टिप्पणी करने पर मीर के कार्यक्रम पर अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था। वह जियो न्यूज चैनल पर प्राइमटाइम राजनीतिक चर्चा के शो ‘कैपिटल टॉक’ के मेजबान थे, जिसे अब बंद कर दिया गया है। इस्लामाबाद में पत्रकार और यू-ट्यूबर असद अली तूर पर तीन अज्ञात व्यक्तियों द्वारा हमले के विरोध में 28 मई को पत्रकारों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें मीर ने आक्रोश से भरा भाषण दिया था। मीर ने हमले की जवाबदेही तय करने की मांग की थी, जिसके बाद 30 मई को उनका शो बंद कर दिया गया था। देश की सेना के विरोध में बोलने वाले पत्रकारों पर इस तरह के हमले होते रहे हैं।

3 स्थानीय रिपोर्टर पत्रकार की हत्या के आरोप में गिरफ्तार

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पुलिस ने बिहार के पूर्वी चंपारण में तीन आरोपियों को टीवी चैनल के रिपोर्टर मनीष कुमार सिंह  की हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे अब पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमरेंद्र कुमार, अशजद आलम और महेंद्र सिंह के तौर पर हुई है और ये सभी स्थानीय रिपोर्टर हैं। एसपी नवीन चंद्रा ने बताया कि आरोपी अमरेंद्र के घर से मृतक पत्रकार मनीष का बैग, आई कार्ड, हेडफोन समेत कई सामान जब्त किया गया है।

घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। वहीं अब तक हत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मालूम हो कि तीन दिनों से लापता रहे टीवी न्यूज चैनल के रिपोर्टर मनीष कुमार सिंह का शव मंगलवार को तालाब में मिला। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मनीष ‘सुदर्शन न्यूज’ चैनल में अरेराज अनुमंडल संवाददाता के पद पर कार्य करते थे।

उल्लेखनीय है कि मनीष शनिवार की शाम से गायब थे, जिसके बाद उनके पिता संजय सिंह ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अमरेंद्र कुमार और असजद आलम समेत 13 लोगों को नामजद किया था। मंगलवार को जिले के हरसिद्धि थाना क्षेत्र स्थित मठलोहियार गद्दी टोला के समीप तालाब से मनीष का शव बरामद हुआ था। उनकी एक आंख भी गायब थी।

बताया जाता है कि मनीष कुमार एक पार्टी में जाने के लिए घर से बाहर निकले थे, उसके बाद वह वापस ही नहीं लौटे। तब जाकर उनकी गुमशुदगी की बात पता चल सकी। गायब होने से पहले मनीष ने अपने परिवार को मठ लोहियार गांव के गद्दी टोला के पास होने की बात कही थी। पत्रकार ने कहा था कि वह पार्टी से जल्द वापस लौटेंगे। मनीष को आखिरी बार अमरेंद्र कुमार, अशजद आलम और महेंद्र सिंह के साथ देखा गया था। घटना वाली जगह से पुलिस को CCTV फुटेज मिला था, जिसमें तीनों गिरफ्तार आरोपी और मनीष साथ जाते दिख रहे थे, लेकिन लौटने के समय पर जर्नलिस्ट उनके साथ नहीं था। इसके बाद पुलिस को तीनों पर शक हुआ और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का कहना है कि हत्या के पीछे का मकसद अभी तक स्पष्ट नहीं है।

मनीष के शव को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया था। शव के सड़ने की वजह से उसे SKMCH रेफर कर दिया गया। इसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए मुजफ्फरपुर पहुंचा।

एक स्थानीय अखबार से जुड़े संजय सिंह का आरोप है कि जमीन के विवाद में उनके बेटे की हत्या की गई है। संजय सिंह का कहना है कि उनके बेटे का गला रेता गया था, जबकि शरीर पर कई जगह चाकू से गोदने के निशान थे। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस पर भी इस मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है।

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