
अभिषेक उपाध्याय ने इस पर ध्यान दिलाया कि विनोद कापड़ी, मिलिंद खांडेकर, आशुतोष गुप्ता, सतीश के सिंह जैसे पूर्व चैनल संपादक रजनीश आहूजा के मित्र हैं और कांग्रेस इकोसिस्टम से जुड़े माने जाते हैं। संदीप चौधरी का नाम भी इसी सर्कल में आता है। अजित अंजुम ने तो नेहा का बयान अपने यूट्यूब पर डालकर व्यूज भी लिए, लेकिन खुद उनके पक्ष में एक शब्द नहीं बोला, जबकि वे पहले उनसे इंटरव्यू करते रहे। ये लोग चुप हैं क्योंकि बात उनके मित्र और चैनल पर आती है।
नेहा ने खुद भाजपा आईटी सेल और ‘गोदी मीडिया’ पर आरोप लगाया है। कांग्रेस के लोग और उनके मीडिया मित्र अब इस घटना को भाजपा का एंगल बताने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ABP पर झूठी खबर चलाने वाले और उसके बाद चुप रहने वाले वही लोग हैं, जिनका कांग्रेस इकोसिस्टम से पुराना रिश्ता है। अगर रजनीश आहूजा ‘सिपाही’ था तो सवाल कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि यह क्यों कराया गया? नेहा की भूमिका साफ नहीं है—उन्होंने अभी FIR नहीं की, बल्कि इस पूरे मामले को अपने लिए प्रचार का अवसर बना लिया है।
सुप्रिया श्रीनेत जैसे लोगों से पूछना चाहिए कि मैडम एबीपी भी आपका है, नेहा भी आपकी है। फिर यह सब क्यों कराया?



