विवेक गुप्ता
लखनऊ। बॉलीवुड ने अनगिनत ऐसे गाने दिए हैं जिन्हें सुनकर आप हंसते हुए रो देंगे या रो रहे होंगे तो किसी और दुनिया में खो जाएंगे. उस दुनिया में जहां आप और आपकी महबूबा के अलावा कोई तीसरा होगा ही नहीं.
मोहब्बत में टूटे हुए लोगों के लिए ये गाने किसी सौगात से कम नहीं हैं या यूं कहे ऐसे लोगों के लिए ये गाने उनके जीने का सहारा होते हैं,एकमात्र सहारा. इन गानों को ना सुनो तो बेचैनी होती है और अगर सुनो तो बेचैनी और भी बढ़ जाती है. वो कहते है कि खाए तो मरे ना खाए तो मरे इससे तो खाकर,स्वाद लेकर मरना ही ठीक है.
ये गाने एक तरफ आपको असहनीय पीड़ा से राहत देते हैं और दूसरी तरफ बेहिसाब तड़प भी. किशोर कुमार,मुकेश,मोहम्मद रफी के गाए गानों में बेतहाशा दर्द झलकता है. अभी आप दर्द भरे ऑल टाइम टॉप 5 गानों के बारें में जानिए.
इस लिस्ट में पुराने गानों को जगह दी गई है क्योंकि पुराने गाने और पुरानी शराब एक जैसी होती है,चढ़ने में समय तो लग सकता है लेकिन अगर एक बार चढ़ गई तो नशा आसानी से उतरता नहीं है. अक्सर जो पीते नहीं हैं उन्हें इश्क के दर्द का घूंट पीना पड़ता है. जब आप कोई नशा नहीं करते तब आपको हर पल दर्द,तड़प,तरस से लड़ना पड़ता है.
टॉप 5 की लिस्ट में सबसे कठिन था किसी गाने को पहली रैंक देना. यहां कई गानों में जबरदस्त टक्कर थी. मेरी इस लिस्ट में भी कई गाने थे जो पहली रैंक पर आ सकते थे. जो नहीं आए वो भी किसी नजरिए से पहली रैंक वाले से कम नहीं हैं.
आखिरकार काफी सोचने,महसूस करने के बाद मैंने किशोर और राजेश खन्ना की सुपरहिट जोड़ी के गाने को शीर्ष रैंक दी. ये गाना था “दो रास्ते” फिल्म का ”खिजा के फूल पे आती कभी बहार नहीं,मेरे नसीब में ऐ दोस्त तेरा प्यार नहीं…” इस गाने का संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने दिया था और किशोर कुमार की जादुई आवाज के साथ-साथ राजेश खन्ना और मुमताज के अभिनय ने इस गाने में चार चांद लगा दिए थे. इस गाने को आनंद बख्शी ने लिखा था,1969 में रिलीज हुई “दो रास्ते” उस वक्त काफी हिट रही थी. इस फिल्म के सारे गाने सुपरहिट रहे थे.
इस गाने और इस फिल्म में राजेश खन्ना एक ऐसे प्रेमी की भूमिका में थे जो अपनी प्रेमिका से हैसियत में काफी छोटा होता है. आज के दौर से अलग इस फिल्म की हीरोइन मुमताज अपने गरीब प्रेमी को दिल से प्यार करती है. आज के दौर से इतर उनके लिए रुतबा, रुपया,पद,पैसा,गाड़ी,बंगला,हैसि यत से ज्यादा प्यार मायने रखता है. किशोर कुमार की आवाज में जब ”गरीब कैसे मोहब्बत करें अमीरों से,बिछड़ गए हैं कई रांझे अपनी हीरों से,किसी को अपने मुकद्दर पे इख्तियार नहीं…” सुनाई पड़ता है तो यकीन करिए ऐसा लगता है कि वो गरीब प्रेमी राजेश खन्ना हम ही हैं और मुमताज जो प्यार,जो तड़प राजेश खन्ना के लिए दिखा रही हैं वो हमारे लिए ही है.
किशोर कुमार ने इस गाने में दिखा दिया है कि वो कितने वर्सटाइल हैं और कभी-कभी तो लगता है कि राजेश खन्ना की आवाज किशोर कुमार ही हैं. जैसे मुकेश को राज कपूर की आवाज माना जाता था.
इस गाने के दिलकश बोल ”मैं रोज लब पे नई एक आह तकता हूं,मैं रोज एक नए गम की राह तकता हूं,किसी खुशी का मेरे दिल को इंतजार नहीं…” आपकी आंखों को झरना बनाने के लिए काफी हैं. अगर आप जैसे तैसे अपने आप को संभाल भी लें तो अगली कड़ी ”गरीब कैसे मोहब्बत करें अमीरों से,बिछड़ गए हैं कई रांझें अपनी हीर से,किसी को अपने मुकद्दर पे इख्तियार नहीं ” गारंटी के साथ आपकी आंखों को नम कर देगी. इस लाइन के साथ लगता है कि मर्सिडीज की कार और सच्चा प्यार गरीबों की किस्मत में नहीं होता. इस गाने को सुनकर समझ में आता है प्यार अपनी अंतिम मंजिल के लिए वफादारी,ईमानदारी और सच से ज्यादा नसीब पर निर्भर करता है.
रैंक एक के लिए काफी कशमकश थी लेकिन इन दो कड़ियों के बाद साफ था कि ये गाना मेरी लिस्ट में नंबर एक ही होना था. इस गाने में किशोर कुमार ने अपनी आवाज से हिला कर रख दिया है. इसे कितनी बार भी सुन लो हर बार दुबारा सुनने का मन करता है. राजेश खन्ना का इस गाने में लुक और नेचुरल एक्टिंग इस गाने को यादगार बना देती है.
इस फिल्म में ‘बिंदिया चमकेगी चूड़ी खनकेगी…’और ‘ये रेशमी जुल्फे,ये शरबती आंखें,इन्हें देखकर जी रहे हैं सभी…’ जैसे गाने भी थे. राजेश खन्ना और मुमताज की सुपरहिट जोड़ी की ये फिल्म भी काफी जबरदस्त हिट रही थी. अगर आप की मोहब्बत साजिश,झूठ, गलतफहमी,कम्युनिकेशन गैप की शिकार हुई है तो ये गाना आपकी दिनचर्या का एक अहम,अनिवार्य और अपरिहार्य हिस्सा बन जाता है.
दूसरे नंबर पर आता है एक बार फिर ऐसी जोड़ी का गाना जो लगता है एक-दूसरे के लिए ही बने थे. जी हां आप सही समझे इस बार भी किशोर कुमार और राजेश खन्ना की जोड़ी इस लिस्ट में है. नंबर एक के बाद नंबर दो पर भी इनका ही कब्जा है. फिल्म का नाम है “आप की कसम” और इस गाने में संगीत दिया आर डी बर्मन ने. गाने के बोल हैं, ”जिंदगी के सफर में गुजर जाते है जो मुकाम वो फिर नहीं आते…” आनंद बक्शी का लिखा ये गाना 1974 में आई “आप की कसम” का एक गाना ही नहीं लगता बल्कि ये जिंदगी की असली सच्चाई बताने वाला एक फलसफा लगता है.
ये गाना जीवन का एक बड़ा हिस्सा दिखाई पड़ता है जो या तो आपकी जिंदगी में चल रहा है या कहीं ना कहीं पीछे छूट गया है. ये हिस्सा वो होता है जो आपके लिए अनमोल और कभी ना भूलने वाला होता है.
चलती हुई ट्रेन में फिल्माया गाया ये गाना आपको रोने और अपने जिंदगी के उस दौर को याद करने पर मजबूर कर देता है जो आप काफी पीछे छोड़ आए हैं. अगर आपने किसी से गलतफहमी,दूसरों के बहकाने पर अपना रिश्ता खराब किया है और बाद में आपको सच पता चलता है या आपके साथ ऐसा हुआ है तो इस गाने को सुनकर आपकी आंख से आंसू जरूर निकल आएंगे,कुछ पत्थर दिल यहां अपवाद हो सकते हैं.
इस गाने के बैकग्राउंड में राजेश खन्ना अपनी पत्नी जिसकी भूमिका मुमताज ने निभाई है,के ऊपर गलतफहमी में शक करने लगते हैं जिससे मुमताज उनसे दूर चली जाती हैं. बाद में जब उन्हें सच्चाई का पता चलता है और अपनी प्रचंड गलती का अहसास होता है तब उनके पास पछताने के लिए भी कुछ नहीं बचता.
ये गाना एक सबक भी देता है कि अगर आपको किसी भी चीज का शक है या किसी ने किसी के बारे में कुछ गलत कहा है तो उसकी तह तक जाना जरूरी है वरना एक समय के बाद आपके पास पछताने के लिए भी कुछ नहीं बचता. दूसरा तो विरह की अग्नि में जलता ही है सच जानने के बाद आप भी आत्मग्लानि की अग्नि में जल जाओगे. इससे अच्छा है विश्वास करो और एक मौका दो,कम से कम गलती तो बताओ साथ ही अपनी बात रखने,सफाई देने के लिए 5 मिनट तो दे दो.
पहली बात तो यहां जलने वाली स्वार्थी दुनिया का काम होगा भड़काने और आग लगाने का लेकिन अगर वाकई कोई गलती की भी है तो उसे सुधारा जा सकता है. क्योंकि जो सच्चा प्यार करते हैं वो कुछ भी पॉजिटिव कर सकते हैं अपने प्यार के लिए,अपने प्यार को पाने के लिए.
जब किसी के लिए दिल दीवाना होता है तो जिसके लिए दीवानगी होती है उसे देखकर सामान्य रहा ही नहीं जा सकता. यही तो प्यार है जहां अपने इश्क के सिवा कुछ दिखाई ही नहीं देता. इसी का फायदा स्वार्थी,जलनखोर दुनिया उठाकर इश्क की असामान्यता,खूबसूरत गलतियों को अक्षम्य अपराध बना देती है. समझना चाहिए इस मतलब की दुनिया में सभी को हाथ सेंकने में मजा आता है,किसी का घर बसाने से ज्यादा उजाड़ने में दुनिया आगे रहती है.
इस गाने के ये बोल पछताने की पूरी कहानी बयां करते हैं, ”आंख धोखा है क्या भरोसा है सुनो,दोस्तों शक दोस्ती का दुश्मन है,अपने दिल में इसे घर बनाने ना दो,कल तड़पना पड़े याद में जिनकी रोक लो रूठकर उनको जाने ना दो,बाद में प्यार के चाहे भेजो हजारों सलाम, वो फिर नहीं आते,वो फिर नहीं आते…” इस लाइन को सुनकर तो सबके आंसू निकलने तय हैं और यकीन करिए यहां कोई अपवाद भी नहीं है.
अगर आप ने किसी गलतफहमी,किसी के बहकावे में आकर किसी को खोया है,नफरत की है,उसे वो जगह नहीं दी जिसका वो हकदार है या आपके साथ ऐसा हुआ है कि आपको किसी के बहकाने की वजह से मासूम,निर्दोष होने के बाद भी बहुत बड़ी सजा मिली है. तो ये पूरा गाना आपको रुलाता ही रहेगा. आपसे विनम्र निवेदन है कि अगर आपके शरीर में पानी की कमी है तो ये गाना पूरा ना सुनिए. क्योंकि आगे के बोल ”सुबह आती है,रात जाती है,सुबह आती है, रात जाती है,यूं ही,वक्त चलता ही रहता है रुकता नहीं,एक पल में ये आगे निकल जाता है,आदमी ठीक से देख पाता नहीं और पर्दे पे मंजर बदल जाता है…”आपको हिलाकर रख देंगे. और आप इतना रोएंगे कि आप डिहाइड्रेशन के शिकार भी हो सकते हैं. आपको पता ही नहीं चलता आपकी दुनिया का मंजर कब बदल गया और आप इस दुनिया की भीड़ में भी अकेले हो गए हैं.
इस गाने की शुरुआत ही बड़ी शानदार होती है. जब किशोर कुमार की जादुई आवाज में सुनने को मिलता है, ”फूल खिलते हैं,लोग मिलते हैं,फूल खिलते हैं,लोग मिलते हैं मगर,पतझड़ में जो फूल मुरझा जाते हैं,वो बहारों के आने से खिलते नहीं,कुछ लोग एक रोज जो बिछड़ जाते हैं वो हजारों के आने से मिलते नहीं…” इस गाने की शुरुआत की ये लाइने आपको एक ऐसा मीठा दर्द देती हैं जिसे मैं भी शब्दों में बयां नहीं कर सकता. इस गाने को सुनने के बाद आपको लगेगा कि अगर आपकी प्लेलिस्ट में ये गाना अकेला भी हो तो बहुत है.
तीसरे नंबर पर भी किशोर कुमार का गाया हुआ गाना ही है. यानी दादा की हैट्रिक हो गई लेकिन राजेश खन्ना की हैट्रिक बॉलीवुड के हीमैन कहे जाने वाले धर्मेंद्र ने तोड़ दी. मेरे फेवरेट हीरो धर्मेंद्र पर फिल्माए गए इस गाने के बोल हैं, ”हम बेवफा हरगिज ना थे पर हम वफा कर ना सके…” 1978 में आई शालीमार फिल्म के इस गाने को शायद ही कोई हो जिसने इसे सुना ना हो. अधूरी प्रेम कहानी इस गाने के बिना कभी पूरी नहीं होती. धर्मेंद्र और जीनत अमान के अभिनय से ये गाना और शानदार बन जाता है. किशोर कुमार ने इस गाने में सारा दर्द निकालकर रख दिया है.
धर्मेंद्र प्यार में अपनी वफादारी,अपनी बेगुनाही का सबूत इस गाने के माध्यम से बखूबी देने की कोशिश करते हैं. रील लाइफ में कामयाब भी हो जाते होंगे लेकिन रियल लाइफ में क्या ये संभव है? साजिश करने झूठ बोलकर भड़काने में एक्सपर्ट ज़माने के सामने तो ये मुश्किल ही लगता है.
पंचम दा का शानदार म्यूजिक इस गाने को अलग बना देता है. इस गाने में जब ”तुमने जो देखा सुना सच था मगर,कितना था सच ये किसको पता,जाने तुम्हें मैंने कोई धोखा दिया,जाने तुम्हें कोई धोखा हुआ,इस प्यार में सच झूठ का तुम फैसला कर ना सके…” लाइन आती है तब बड़े से बड़े पत्थर दिल इंसान की आखों में नमी आ जाती है. अक्सर होता भी ऐसा ही है कि प्रेमी या प्रेमिका किसी के बहकाने और बरगलाने में बड़ी जल्दी आ जाते हैं (वैसे भी जमाना तो प्यार का दुश्मन होता ही है) और जो उनसे बेपनाह प्यार करते हैं उनसे ही नफरत करने लग जाते हैं. गलतफहमी की दीवार इतनी मजबूत हो जाती है कि एक-दूसरे को सफाई देने या सच बताने का मौका भी नहीं देते. “जाने तुम्हें कोई धोखा हुआ..” सुनकर लगता है,हां जरूर यही हुआ होगा.
ये गाना मासूम बेगुनाह लोगों के लिए ही बना है,इसे सुने और अपने बेतहाशा दर्द का एहसास करें वो बात अलग है इस गाने को सुनने के बाद दर्द और बढ़ता ही है. मेरी लिस्ट में ये गाना तीसरे नंबर पर है. इस एवरग्रीन गाने को कई बार सुना जा सकता है. हां इस गाने को सुनकर ये लगता है बदलते ज़माने के साथ बेवफाई के तरीके भी बदल गए हैं.
इस लिस्ट में चौथे नंबर पर किशोर कुमार का गाना नहीं है. अब बारी आती है मोहम्मद रफी साहब की. चौथे नंबर पर उनका गाया गाना ”बर्बादे मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा…” आता है. ये गाना सुपर डुपर हिट फिल्म ‘लैला मजनू’ का है. 1976 में दर्शकों के सामने आई इस फिल्म से ऋषि कपूर ने अलग ही शोहरत हासिल की थी.
इस फिल्म से वो अरब कंट्रीज के चहेते बन गए थे. इंडिया के साथ-साथ इस फिल्म ने अरब कंट्रीज में भी काफी धूम मचाई थी. इस गाने का संगीत मदन मोहन और जयदेव ने दिया,वहीं साहिर लुधियानवी ने इस फिल्म के अमर गीतों को लिखा था.
इस गाने को इसके बोल के साथ मोहम्मद रफी की आवाज ने अमर बना दिया था. आज भी ये गाना बहुत पसंद किया जाता है. जिन लोगों को प्यार में दर्द मिलता है या किसी भी वजह से अपने साथी से दूर हो जाते हैं. जिनको अपने साथी को पाने की कोई उम्मीद नहीं बचती,उनके पास इस गाने को सुनने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता.
”ये जान भी ऐ जाने अदा साथ लिए जा और तपती हुई राहों से तुझे आंच ना पहुंचे,दीवाने के अश्कों की घटा साथ लिए जा…” मोहम्मद रफी की आवाज में ये लाइनें किसी भी पत्थर दिल इंसान को रोने के लिए मजबूर कर देंगी,हां कोई सबके सामने रोने लगेगा तो कोई अकेले में रोएगा लेकिन जो सुनेगा वो रोएगा जरूर ये तय है.
ये गाना रेगिस्तान में फिल्माया गया है. जिसे देखकर याद आता है कि ऐसा एक रेगिस्तान तो हमारे दिल में भी है,सूना-सूना वीरान और सूखा…हां दुख इस बात का ज्यादा है कि कभी यहां एक घना जंगल होता था,जिसे अविश्वास,झूठ और साजिश ने उजाड़कर रेगिस्तान बना दिया.
“बर्बाद मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा…” पहली लाइन ही दिखा देती है कि सच्ची मोहब्बत करने वाला हमेशा,मरते दम तक अपने सच्चे इश्क को दुआ ही देगा. चाहे उसके साथ कितना भी बुरा सुलूक किया जाए,उसकी जान ही क्यों न ले ली जाए. वो दिल से अपने नासमझ,नादान ना होने वाले साथी के लिए हमेशा भर भरकर दुआ ही देगा. यही तो सच्ची मोहब्बत है. मोहब्बत कहीं गलत हाथों में तो नहीं फंस रही इसकी चिंता भी की जाएगी और इसके लिए उसे बार-बार आगाह भी किया जाएगा. वो खुश तो आप खुश चाहे वो आपसे कितनी भी दूर हो.
इस फिल्म के कई गाने हिट रहे जिसमें से ”लिखकर तेरा नाम जमीं पर उसको सजदा करता है…” मुझे काफी पसंद है.
मुझे मुकेश के गाने काफी पसंद है लेकिन अभी तक इस लिस्ट में उनका कोई भी गाना नहीं है और चौंकाने वाली बात है कि पांचवें नंबर पर भी उनका गाना नहीं है. यहां पर एक बार फिर किशोर कुमार आ गए हैं वो भी एक बार फिर राजेश खन्ना के साथ. ”ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा,मेरा गम कब तलक मेरा दिल तोड़ेगा…” मुझे ये कहना ही पड़ेगा कि किशोर कुमार और राजेश खन्ना ही दर्द के असली साथी हैं. प्रेम दीवानों के असली पालनहार हैं.
1974 में आई “प्रेम नगर” के इस गाने में एक अजीब सा दर्द है जिसे बयां नहीं किया जा सकता. इस दर्द को सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है. “ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा…” इस गाने को सुनकर आपको सुन्न दर्द का अहसास होता है जिसकी झनझनाहट इस गाने के खत्म होने के बाद भी आपके साथ ही रहती है.
इस फिल्म में म्यूजिक दिया है मशहूर संगीतकार सचिन देव वर्मन ने और इस गाने के बोल लिखे हैं आनंद बख्शी ने. इस गाने में आपको ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी भी दिखाई देंगी. गाने की शुरुआत में शराब के आदी हो चुके राजेश खन्ना शराब की बोतल उठाकर फेंक देते हैं. जैसा कि अक्सर होता है नाकाम इश्क में शराब या कोई और नशे की लत लग ही जाती है. जो पूरी जिंदगी शराब,सिगरेट से दूर भागते हैं एक नाकाम इश्क उन्हें इसका आदी बना देता है.
आजकल के युवाओं को इससे बचना चाहिए और जिंदगी से लड़ना चाहिए. अंतिम सांस तक अपने सच्चे इश्क को पाने के लिए संघर्ष करना चाहिए. ध्यान रहे संघर्ष के लिए शरीर और दिमाग जानदार होना चाहिए और इसके लिए नशे से दूरी बहुत ही जरूरी है. वैसे भी अगर किसी को किसी से सच्चा बेपनाह इश्क है तो उसे किसी और नशे की क्या जरूरत. किसी के सच्चे इश्क से बड़ा कोई नशा हो ही नहीं सकता.
इस गाने के बोल “किसी का भी लिया नाम तो आई याद तू ही तू…”
क्या शानदार और सही बोल हैं. जिससे प्यार होता है उसके सिवा कुछ याद ही नहीं रहता.
इस गाने को बड़ी हवेली में फिल्माया गया है. ”पीने की कसम डाल दी पियूंगा किस तरह,ये ना सोचा तूने यार मैं जिऊंगा किस तरह,चला जाऊं कहीं छोड़कर मैं तेरा ये शहर,ना तो यहां अमृत मिले,पीने को ना जहर…” किशोर कुमार की दर्द भरी आवाज में गाया गाना आपको दर्द की सुपर डोज देता है. वैसे अगर आपको ना पीने की कसम देने वाला कोई है तो आपके पास बहुत कुछ है,सदमा तो वहां है जहां आपके पीने,ना पीने,जीने या मरने से किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता. जिसके चक्कर में आपने सिगरेट पीनी शुरू की थीं,वो आपकी तड़प/पीड़ा/तरस को सिगरेट के धुएं की तरह हवा में उड़ा रहा है,अपनी जिंदगी में मस्त है.
इस गाने में राजेश खन्ना ने बड़ी ही नेचुरल एक्टिंग की है. किशोर कुमार की आवाज में जो दर्द दिखता है वैसे ही दर्द में डूबे आशिक का शानदार अभिनय किया है काका ने. किसी ने तब सही कहा था कि ऊपर आका नीचे काका. इस गाने को सुनिए और खो जाइए.
जो लोग पीते हैं और प्यार के गम में है वो राजेश खन्ना के रूप में अपने आप को महसूस कर सकते हैं. जो लोग पीते नहीं हैं और अथाह दर्द/पीड़ा में हैं वो “मेरे पसंदीदा 5 दर्द भरे गाने” की पोस्ट लिखकर सोशल मीडिया पर डाल सकते हैं.
ये गाना काफी पसंद किया जाता है और दर्द भरे गानों में इसे एक्सट्रीम लेवल का माना जाता है. ये गाना अगर आप भीड़ में भी सुनेंगे तो आपको एक अकेलेपन का एहसास होगा.



