इन धूर्तों को मोदी फूटी आंख नहीं सुहाते लेकिन क्या करें? ये बेचारों की मजबूरी है कि—मोदी को बर्दाश्त करना पड़ेगा। क्योंकि जनता बारंबार मोदी को चुनकर भेज रही है। वरना इन कृतघ्नों का वश चलता तो वो मोदी को कब से सत्ता से बेदखल कर आते।
हर चुनाव में ये मोदी को हारते हुए देखना चाहते हैं। लेकिन हर चुनाव में जनता— इन जाहिलों के मुंह पर ऐसा करारा तमाचा मारती है कि — ये कराह तक नहीं पाते। फिर चाहते न चाहते हुए भी मोदी की प्रशंसा करने का दिखावा करना पड़ जाता हैं। मोदी पर न जाने हर समय कितने आरोप लगाते रहते हैं। काश ये जितने आरोप मोदी पर लगाते हैं — वैसा मोदी की सरकार करती तो ये कहीं किसी कूड़ेदान में पड़े होते।
काश! ‘कों-ग्रेस’ जैसे मोदी की डबल इंजन सरकारें — इनका अच्छे से इलाज़ करतीं तो ये जितने धूर्त शेखी बघारते रहते हैं। ये उफ़ तक न करते। इन्हें पता है कि मोदी को गाली दीजिए, बीजेपी के वैचारिक अधिष्ठान को गाली दीजिए। इसके बावजूद भी इन पर कोई आंच नहीं आएगी। इसीलिए ये तथाकथित ज्ञानी— दिन-रात विष-वमन में जुटे रहते हैं। ये वही लोग हैं जिनकी तथाकथित ‘सीधी रीढ़’ – न जाने कितनी चौखटों पर सजदा और मुजरा करते हुए तनी हैं।
ये ख़ारिज लोग — मोदी को हटाने का स्वप्न पाले ऐंठ रहे हैं। इन्हें मालूम नहीं कि रस्सी के जल जाने के बाद ऐंठना नहीं चाहिए। क्योंकि अगर ‘कों-ग्रेस’ जैसे मोदी और उनकी डबल इंजन सरकारें — इंटरफेयर करना शुरू कीं तो फिर ठिकाना ढूंढना मुश्किल हो जाएगा। फिर ये सोरोस के पपेट की महानता के कसीदे गढ़ना भूली बिसरी बातें हो जाएंगी। पैसा मोदी की सरकार का चाहिए। ऊपर से स्वयंसेवक मोदी और उसके वैचारिक अधिष्ठान को गरियाना भी है। गज़ब का दोगलापन है न कि— एक ओर मोदी फासिस्ट है, सेंसरशिप है। दूसरी ओर उसी को दिन रात गालियां दी जा रही हैं। लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा है। आख़िर ऐसा कब तक चलेगा? मोदी और उसकी डबल इंजन सरकारें कुछ कहती नहीं है़ लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि उन्हें कोई ख़बर नहीं है..!



