दिल्ली। विशाल माहेश्वरी (@vishalPosts) के स्टिंग में कई स्व-घोषित ‘इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट’ और इन्फ्लुएंसर्स ने समाजवादी पार्टी (SP) के लिए पेड पॉलिटिकल कंटेंट बनाने के ऑफर पर रेट लिस्ट भेजी या बातचीत जारी रखने की सहमति जताई।
फैक्ट-चेकर और द फैक्ट मिथ्स से जुड़े विशाल माहेश्वरी ने एक ईमेल आईडी से 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले SP के लिए Instagram रील्स बनाने का प्रपोजल भेजा। कई ऐसे लोगों ने, जो दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों (विशेष रूप से SIR/मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों) को कवर कर रहे थे, प्रेस कार्ड और माइक के साथ ‘इंडिपेंडेंट’ छवि बना रहे थे और अक्सर पुलिस या अन्य मीडिया से टकराव दिखा रहे थे, जवाब में रेट और वर्क सैंपल्स भेज दिए। कुछ ने मोबाइल नंबर साझा किया। विशाल ने ईमेल स्क्रीनशॉट्स के साथ दो थ्रेड्स (14 और 15 अक्टूबर 2026) में यह खुलासा किया।
इस घटनाक्रम ने इन्फ्लुएंसर (Influencer) बनकर राजनीतिक कन्टेंट के लिए सौदा करने वालों की सच्चाई उजागर की है, यह कुछ नाम है जो माहेश्वरी के प्रयास से सामने आए। यह सूची बहुत लंबी हो सकती है। इसमें चैनलों के मैनेजिंग एडिटर स्तर के कई पत्रकार जो यू ट्यूब पर उतर आए है। उनका monetary management समझने में मदद मिल सकती हे।
इनमें कई लोग ‘गोदी मीडिया’ कहकर मुख्यधारा के पत्रकारों को चिढ़ाते या घेरते दिखे, लेकिन खुद राजनीतिक पार्टी के प्रचार के लिए पैसे मांगने या बातचीत करने से नहीं हिचकिचाए। उनका काम बड़ी हद तक पेड या पार्टी-फ्रेंडली कंटेंट पर निर्भर प्रतीत होता है, जिसे वे ‘इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म’ के नाम से छुपाते हैं।
विशाल के अनुसार, इनमें से कई राहुल गांधी के कार्यक्रमों (जैसे छात्रों की गूंज) में मीडिया पास लेकर जाते और उनकी तारीफ वाले वीडियो बनाते दिखे।
नीचे विशाल के थ्रेड्स और रिपोर्टेड डिटेल्स के आधार पर एक-एक नाम, संक्षिप्त परिचय और डिमांडेड रेट दिए गए हैं। ये विशाल द्वारा साझा ईमेल जवाबों पर आधारित हैं।
- ममता सिंह (News Capsule)
News Capsule से जुड़ी जर्नलिस्ट, Instagram पर 3 लाख से अधिक फॉलोअर्स। दिल्ली विरोधों में सक्रिय। विशाल के ऑफर पर उन्होंने एक रील के लिए ₹40,000 की मांग की और वर्क सैंपल्स भेजे। News Capsule की रिपोर्टिंग अक्सर एक पक्ष की आलोचना करती दिखती है।
- प्रिया सिंह (News Capsule)
ममता के साथ ही News Capsule से जुड़ी। Instagram पर 2.5 लाख से अधिक फॉलोअर्स। प्रति Instagram रील ₹30,000–₹35,000 की रेट बताई। बल्क पैकेज के लिए ₹25,000–₹30,000 का जिक्र भी हुआ। विशाल के अनुसार, उनकी शादी अनुराग सिंह से है, जो रणविजय सिंह (कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े) के करीबी बताए जाते हैं।
- शिवानी गौतम
स्वयं को इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट बताती हैं। Instagram ~95K। विरोधों में पुलिस से बहस करती दिखीं। उन्होंने दावा किया था कि भाजपा आईटी सेल ने उन्हें पेड वीडियो का ऑफर दिया था, जिसे उन्होंने एक्सपोज किया। लेकिन SP के ऑफर पर उन्होंने रुचि जताई और मोबाइल नंबर साझा कर दिया।
- जैश मलिक
माइक और प्रेस कार्ड के साथ विरोध कवर करते। Instagram ~205K। “इंडिपेंडेंट वॉयस” की छवि। SP ऑफर पर बातचीत करने को तैयार रहे। उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग के सैंपल्स (उर्दू कविता सहित) भी साझा किए।
- प्रिशा यादव
विरोधों में सक्रिय, सुरक्षा कर्मियों को टारगेट करने वाली। एक रील ₹13,000, पांच के लिए ₹50,000 और दस के लिए ₹85,000 तक का पैकेज कोट किया। अंतिम ब्रीफिंग के बाद बदलाव संभव बताया।
- मनीष राजपूत
Aaj Tak के जर्नलिस्ट को घेरकर “गोदी मीडिया” चिल्लाते हुए वीडियो में दिखे। Instagram ~191K। SP रील्स के लिए ₹15,000 प्रति रील (बल्क में डिस्काउंट) की रेट दी। फेसबुक प्रमोशन और लॉन्ग-टर्म पार्टनरशिप की बात की। श्याम मीरा सिंह जैसे राहुल समर्थक के साथ भी फोटो में देखे गए।
- गोविंद गुर्जर
अन्य पत्रकारों को “गोदी मीडिया” कहते हुए विरोध कवर करते। Instagram ~103K। दो बार ईमेल पर उन्होंने प्रपोजल को जर्नलिस्टिक आधार पर रिजेक्ट नहीं किया। व्यस्त होने का कहकर नंबर और वर्क सैंपल्स साझा किए।
- वंदना मीना
कंटेंट क्रिएटर, दिल्ली विरोधों में वीडियो बनाती। कांग्रेस से राहुल गांधी के कार्यक्रमों के मीडिया पास मिलते हैं। पैकेज: ₹15,000 प्रति रील से लेकर ₹1.6 लाख तक (20 रील्स या मंथली पैकेज)। Instagram ~122K।
- मिलन सर (अनिल कुमार)
जर्नलिस्ट के रूप में दिल्ली विरोधों और राहुल गांधी के कार्यक्रमों में नजर आए। Instagram ~517K। Instagram रील्स के लिए ₹20,000–₹50,000, फेसबुक ₹40,000 और YouTube Shorts ₹20,000 की रेट बताई।
- खोटा सिक्का (अकाउंट)
पॉलिटिकल और सोशल मुद्दों पर रैप बनाते। दिल्ली विरोधों में माइक के साथ और राहुल के छत्रों की गूंज में मीडिया पास के साथ दिखे। Instagram रील ₹25,000, फेसबुक ₹30,000 और पॉलिटिकल सॉन्ग ₹50,000। महत्वपूर्ण फॉलोइंग बेस (YouTube, IG, FB)।
- नेहा शर्मा (That’s Her Podcast)
“इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट” की छवि, विरोध कवर करतीं। Instagram ~156K, YouTube ~203K। प्रति रील ₹25,000–₹35,000 (वॉल्यूम के हिसाब से), अनलिमिटेड के लिए मंथली रिटेनर ₹5 लाख से अधिक, ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग ₹50,000 प्रति दिन। NCR बाहर ट्रैवल आदि अलग।
- विशाल काद्यान
प्रेस कार्ड और माइक के साथ विरोध कवर करते, राहुल गांधी इवेंट्स के मीडिया पास मिलते हैं। Instagram ~195K। SP प्रोजेक्ट पर बातचीत करने को तैयार रहे और प्राइस पर कॉल की बात की।
पार्ट 2 के नाम:
- गरिमा सिंह (Human Online)
दिल्ली विरोधों की कवरेज के लिए प्रशंसा मिली। एक रील के लिए ₹12,000 की रेट दी। उन्होंने स्वीकार किया कि पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए वीडियो बना चुकी हैं।
- तनु बलियान
स्व-घोषित इंडिपेंडेंट, विरोधों में सक्रिय। सुरक्षा कर्मियों से बातचीत का वीडियो वायरल। प्रति रील ₹12,000 और मंथली ₹3 लाख की मांग की।
- फिजा जमीरुद्दीन (4PM)
4PM से जुड़ी। द फैक्ट मिथ्स ने पहले उन्हें फेक न्यूज फैलाने पर पकड़ा था। प्रति रील ₹40,000–₹50,000 और मंथली ₹4–5 लाख बताया, नंबर साझा किया। लगभग एक घंटे बाद दूसरा ईमेल भेजकर मना कर दिया। विशाल ने मजाक में “शक हो गया” लिखा।
- अलका मौर्या
कंटेंट क्रिएटर, कई वीडियो भाजपा के खिलाफ। राहुल गांधी के छत्रों की गूंज में जर्नलिस्ट रोल और मीडिया पास। एक रील के लिए ₹50,000 की रेट।
- प्रतीक तन्मय
जर्नलिस्ट। SP ऑफर पर कॉन्टैक्ट डिटेल्स साझा किए और प्रोजेक्ट में शामिल होने की इच्छा जताई।
- गजेंद्र सिंह (News Diggy)
News Diggy के फाउंडर। दिल्ली पुलिस को धमकी देते वीडियो में दिखे। ऑफर पर मना नहीं किया, मोबाइल नंबर मांगकर आगे चर्चा की बात की। सहयोगी रोजी भी CJP विरोधों और राहुल इवेंट में सक्रिय।
- आलोक त्रिपाठी
दिल्ली विरोधों में माइक के साथ घूमते। एक वीडियो में अनुराग मिश्रा को “गोदी मीडिया” कहते दिखे। प्रति रील ₹30,000 की रेट बताई।
- पारस
CJP विरोधों में देखी गईं कंटेंट क्रिएटर। एक रील ₹30,000। उन्होंने बताया कि पहले एक रील के लिए ₹25,000 लिया था, जो राहुल गांधी के छत्रों की गूंज से संबंधित थी।
विशाल ने कहा कि कुछ और ईमेल्स बाकी हैं और जल्द शेयर करेंगे।
विडंबना और व्यापक संदर्भ
इनमें से कई लोग “गोदी मीडिया” का आरोप लगाकर अन्य पत्रकारों को घेरते, पुलिस से टकराव दिखाते या “क्रांतिकारी” जर्नलिज्म का दावा करते हैं। लेकिन जब SP (विपक्षी गठबंधन का हिस्सा) के लिए पेड प्रचार का ऑफर आया तो नैतिक या जर्नलिस्टिक आधार पर रिजेक्शन कम ही दिखा। इसके बजाय रेट लिस्ट, सैंपल्स, नंबर या चर्चा की सहमति मिली। यह दर्शाता है कि उनकी “इंडिपेंडेंस” अक्सर चुनिंदा है-एक पक्ष के खिलाफ आक्रामक और दूसरे के लिए उपलब्ध।
दिल्ली के विरोध-प्रदर्शनों में ये लोग सक्रिय थे, जहां मुख्यधारा मीडिया की आलोचना होती थी। लेकिन विशाल के स्टिंग से पता चलता है कि कई बार उनकी उपस्थिति और कंटेंट राजनीतिक इवेंट्स (राहुल गांधी कार्यक्रम) से जुड़ा होता है, जहां मीडिया पास मिलते हैं और कंटेंट अक्सर प्रशंसात्मक होता है। यह पत्रकारिता और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की सीमा को धुंधला करता है। छोटे क्रिएटर्स और तथाकथित जर्नलिस्टों के लिए ₹12,000 से ₹50,000 प्रति रील और लाखों मासिक रिटेनर सामान्य व्यावसायिक दरें हो सकती हैं, लेकिन “इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट” और प्रेस कार्ड का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक पार्टी के लिए चुपचाप उपलब्ध होना नैतिक सवाल खड़े करता है।
यह केवल SP तक सीमित नहीं। कुछ ने TMC जैसे अन्य दलों के लिए पहले काम करने का जिक्र किया। सोशल मीडिया युग में पेड पॉलिटिकल कंटेंट आम हो गया है-पार्टियां, IT सेल्स और एजेंसियां इन्फ्लुएंसर्स को हायर करती हैं। समस्या तब पैदा होती है जब इसे छुपाकर “जनता की आवाज” या “निष्पक्ष पत्रकारिता” का मुखौटा पहना जाता है। विशाल का स्टिंग इसी मुखौटे को उतारने का प्रयास है।
आलोचक कहते हैं कि सभी मीडिया में पक्षपात हो सकता है और पेड कंटेंट पारदर्शी होना चाहिए। समर्थक तर्क देते हैं कि ऐसे खुलासे सत्ता पक्ष के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन साक्ष्य (ईमेल स्क्रीनशॉट्स) के आधार पर दावे सत्यापित होने चाहिए। विशाल ने थ्रेड में स्पष्ट कहा कि ये जर्नलिस्ट प्रेस कार्ड और माइक वाले हैं, न कि साधारण इन्फ्लुएंसर्स।
यह घटना 2027 यूपी चुनावों से पहले राजनीतिक संचार के माहौल को रेखांकित करती है। मतदाता को पता होना चाहिए कि कौन सा “इंडिपेंडेंट” वॉयस वास्तव में पेड प्रमोशन या चुनिंदा पक्षधरता पर आधारित है। विशाल माहेश्वरी का यह काम पारदर्शिता की मांग करता है और गोदी मीडिया के आरोप लगाने वालों की अपनी गोद की जांच की जरूरत दिखाता है।



