जयपुर : फ्रांस में हुए दंगों के वीडियो सोशल मीडिया में ट्रेंड में है। अनेक लूटपाट के वीडियो है, आगजनी आदि के। एक वीडियो दर्शाता है- दंगाई एक बड़े स्टोर में सब कुछ लूट के लेके गए बस बेकन हैम और वाइन को हाथ भी नहीं लगाया। कोई नहीं जानता कि लुटेरे दंगाईओं ने ऐसा क्यों किया , सब कुछ लूट लिया बस सुअर का मांस और शराब छोड़ दी!
खैर- बताने वाले एक्सपर्ट बतायेंगे कि सब कुछ फ़साद स्टूडेंट मूवमेंट के कारण शुरू हुआ, किस तरह से स्टूडेंट्स ने अधिक टीचर रखने आदि की माँग को लम्बे समय से शांति पूर्वक रखा और आज फिर सब्र टूट ही गया। कोई ये नहीं बताएगा कि इस प्रदर्शन के पीछे पचास से अधिक संस्थाओं का हाथ है जिसमें महज़ पाँच से दस स्टूडेंट बॉडीज़ है शेष संस्था है फ़िलिस्तीन समर्थक, मज़हब विशेष समर्थक, प्रवासी समर्थक, और ना जाने क्या क्या। देश में लेफ्ट विंग ने इन ख़ास तबकों के साथ फ़्रांस की बुरी हालत कर दी है।
फ़्रेंच सदर का वक्तव्य और मज़ेदार था- उन्होंने दगाइओं को लानत भेजते हुए कहा- आप फ्रेंच लोग अपने देश फ़्रांस के साथ ऐसे कैसे कर सकते हो! जनाब को या तो अब तक असलियत समझ नहीं आ रही या फिर समझाना ही नहीं चाहते!
कुछ दिन पहले भारत में भी स्टूडेंट प्रदर्शन हुआ, मंत्री जी का अस्तीफा लेके रुका और फिर नए अस्तीफ़ा के साथ पुनः प्रारंभ हो लिया। स्क्रिप्ट वही है जो फ्रांस और शेष यूरोपियन देशों में चल रही है!
इन सब दंगों में, आगजनी में एक भी ऐसा भारतीय चेहरा नहीं मिलेगा जो फ्रांस या इटली में दंगा करता, आग लगाता दिखे- एक भी नहीं। ना वैध भारतीय प्रवासी और ना अवैध भारतीय प्रवासी! कुछ दिन पहले हवाई जहाज़ को उड़ाने के प्रयास से बचाने वाले एक भारतीय पायलट की बहादुरी भी संसार ने देखी किंतु सराही नहीं। खुले दिल से इज़राइल के अतिरिक्त किसी मुल्क ने ये नहीं कहा- भारतीय मानसिकता बचाने में यकीन रखती है, बर्बाद करने में नहीं।
क्या भारतीयों ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया है? क्या हमने किसी भी देश को उपनिवेश बनाया है? किसी नस्ल के लोगों को गुलाम बनाया है? किसी के घर छीन लिए हैं? कोई परिवारों को उजाड़ दिया है? किसी के बच्चों का अपहरण किया है? कोई हवाई जहाज़ उड़ाया? कोई विस्फोट किया? कहीं आग लगाई?
आख़िरकार, भारत के उन करोड़ों आम लोगों ने ऐसा क्या किया है कि आज हम इतने नस्लीय भेदभाव और इतनी नफ़रत के पात्र बन गए हैं?
आज भी इतना कुछ होने के बाद भी कोई भी यूरोपियन देश या विकसित देश ये नहीं कहेगा कि इन सब जाहिल लुटेरे प्रवासियों से बेहतर भारतीय प्रवासी है जो पढ़े लिखे है, केवल काम करके अपने जीवन स्तर को बेहतर करने में लगन से जुटे है! कोई भी नहीं स्वीकारेगा कि हर भारतीय प्रवासी केवल बनाने में विश्वास करता है तोड़ने में नहीं!



