अजीत कुमार हरिजन ने बीस महीने में बटोर लिए करोड़ों

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गंगा महतो

पटना। आप है अजीत कुमार हरिजन जी। आप बीपीएससी की कठिन परीक्षा पास करके डीपीओ जैसे पद पे प्रतिष्ठित हुए। आपकी नौकरी को अभी मात्र 32 महीने हो रहे है।

आप वर्तमान में छपरा जिले में पदस्थापित है। आपने 32 महीनों में बिहार की सेवा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। जैसा आपने नौकरी ज्वाइन करने के पूर्व तमाम इंटरव्यू और मॉक इंटरव्यू में कहा था उन सभी को आप अक्षरशः पालन किये है।

32 महीनों में आपने राज्य के करदाताओं के बेनामी पैसे जो इधर-इधर बिखरे पड़े थे उसको एक जगह एकत्रित करने में आपने मिसाल पेश किया है। आपके 12 महीने तो प्रोबेशन में ही चला गया होगा, तो आपने मात्र 20 महीनों में जो अतुलनीय कार्य किया है वो बिहार के प्रशासनिक सेवा के क्षेत्र में कई युगों तक प्रेरणा के स्रोत बन कर युवाओं को आत्मबल प्रदान करता रहेगा।

अपने तकरीबन 2.5 साल में छपरा में इधर-उधर बिखरे 2.51 करोड़ रुपये को एक जगह एकत्रित किया और उसको लीगलाइज किया। और इस एकत्रित लीगल धनराशि का प्रयोग आपने अपने परिवार के बेहतरी के लिए खर्च किया। आखिर एक आदमी दिन-रात खून पसीना,मुड़ी का गोदी जला कर पठन-पाठन क्यों करता है भला ? अपनी बेहतरी के लिए ही न ? अपने उज्जवल भविष्य के लिए ही न ? तो अजीत हरिजन जी ने भी यही किया।

32 महीनों में बिहार सरकार ने इनको कुल 27,43,040/- रुपये वेतन के रूप में दिए। वहीं अजीत कुमार हरिजन जी ने अपनी विलक्षण प्रतिभा व विशिष्ट मस्तिष्क का परिचय देते हुए कुल 2,51,06,562/- रुपये कमाए।

लेकिन वो कहते है न कि आपकी तरक्की से कोई जले या न जले आपके जात-भाईयों की सबसे ज्यादा जलती है और जलन उस स्थान विशेष में ज्यादा प्रज्वलित होती है जहाँ सूर्य की किरणें पहुँचती नहीं है। एक व्यक्ति जिनका नाम श्री रवि कुमार राम है उन्होंने इनकी द्रुतगति से दौड़ते रथ में रोड़ा अटकाने का कार्य किया।

श्री रवि कुमार राम जी अजीत कुमार हरिजन जी के पास गए और बोले कि मालिक आप तो अपने जात-भाई है तो तनी कृपा हमारे ऊपर भी बरसा दीजिये न.. तनिक हम भी कुछ पेट पोसने लायक कमा ले।

तो अजीत हरिजन जी ने कहा कि तुमको हम शिक्षा विभाग में वेंडर का कार्य दिला देंगे.. लेकिन कुछ न्यौछावर करना पड़ेगा.. तुम अपने जात-भाई हो तो ज्यादा नहीं 12.50 लाख रुपये दे देना, तुम्हारा वेंडर पक्का।
श्री रवि कुमार राम जी ने तीन किस्तों में 10.70 लाख रुपये नकद और डीपीओ साब के परिवार और रिश्तेदारों के खातों में 1,03,480 रुपये डिजिटल माध्यम से भेजे… शेष 16,520 रुपये का भुगतान नहीं किया गया!!

श्री अजीत कुमार हरिजन जी हिसाब के बड़े पक्के आदमी थे.. यूं ही परीक्षा पास करके थोड़े न डीपीओ बन गए थे ? अभी भी 16,520/- रुपये बाकी थे। पेमेंट नहीं हुआ था। तो वेंडर का काम नहीं दिए रवि कुमार राम जी को।
इस बाबत जब रवि बाबू जवाब मांगे तो अजीत हरिजन बाबू कहने लगे कि ज्यादा जवाब मत मांगो, नहीं तो सारण समेत अन्य जिलों में जो तुम्हारा वेंडरगिरी चल रहा है न वहां से ब्लैकलिस्ट करवा देंगे। समझा ?

अब आ गया रवि राम जी को गुस्सा.. बोले साला अब रवि का ताप दिखाना पड़ेगा अजीत बाबू को….!
रवि राम बाबू लोक शिकायत निवारण कोषांग में शिकायत कर दिए.. कि साहब हमसे वेंडर का कार्य दिलाने के बहाने 12.50 लाख रुपये लिए और अब लौटा नहीं रहे है और न कार्य दे रहे है। इसकी कमाई से ज्यादा इसके पास संपत्ति है.. अभिये अपनी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर एकमा प्रखंड में करीब छह बीघा नौ कट्ठा आठ धुर जमीन लगभग 41.50 लाख रुपये में खरीदी की है। इसकी जांच की जाय और हमारे साथ न्याय भी।

तब डीडीसी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई.. जिसमें जांच पड़ताल के बाद पाया गया कि श्री अजीत कुमार हरिजन जी अपनी प्रशासनिक सेवा के 2.5 साल में 2.51 करोड़ रुपये का अभूतपूर्व कलेक्शन किया है। जिसके बाद गठित समिति ने इनकी भरी-भूरी प्रशंसा की है और कहा कि बिहार को ऐसे ही ऑफिसर्स की जरूरत है। ऐसे ऑफिसर्स को वर्ष 2027 के बिहार रत्न के लिए नामित भी करना चाहिए।

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