दिल्ली। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई की दिल्ली यात्रा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, चेन्नई से दिल्ली की उड़ान पकड़ने से पहले अन्नामलाई ने भाजपा के एक वरिष्ठ संगठनात्मक नेता को फोन कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। उस नेता ने उन्हें पूरा भरोसा दिलाया और प्रधानमंत्री मोदी को सीधा संदेश भेजा। राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह तक भी यह आग्रह पहुंचाया गया। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद अन्नामलाई की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात नहीं हो सकी। यह अनुपस्थिति कई संकेतों से भरी मानी जा रही है।
दिल्ली पहुंचकर अन्नामलाई अमित शाह से मिले। उन्होंने अपनी तैयार की लंबी सूची शाह के सामने रखी। अमित शाह ने सूची को ध्यान से सुना, लेकिन उसे काफी छोटा कर दिया। बैठक में शाह ने अन्नामलाई को तमिलनाडु में भाजपा की रणनीति पर विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि राज्य में पार्टी जो दीर्घकालिक योजना चला रही है, उसके लिए धैर्य रखना बेहद जरूरी है। अन्नामलाई को स्पष्ट संदेश दिया गया कि वे भाजपा के साथ रहकर ही अपना भविष्य बना सकते हैं, बशर्ते पार्टी की लाइन का पालन करें।
बैठक में अन्नामलाई को तीन नेताओं के उदाहरण दिए गए- असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, पश्चिम बंगाल के विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। इन तीनों नेताओं ने भाजपा की मूल विचारधारा से जुड़े बिना भी पार्टी में अपनी स्वीकार्यता बनाई, अनुशासन बनाए रखा और पार्टी लाइन का सख्ती से पालन किया। नतीजतन वे अपने राज्यों में सर्वोच्च पदों तक पहुंचे। शाह ने जोर देकर कहा कि तमिलनाडु भाजपा की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है, लेकिन सफलता के लिए प्रदेश के अन्य नेताओं से बेहतर तालमेल, धैर्य और सामूहिक कार्यशैली अपनानी होगी।
साफ़ शब्दों में यह भी कहा गया कि पार्टी में उनकी भूमिका और जिम्मेदारी क्या होगी, यह शीर्ष नेतृत्व ही तय करेगा। खुद अन्नामलाई इसे तय नहीं कर सकते। यह बैठक भाजपा की संगठनात्मक अनुशासन की याद दिलाती है, जहां व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को सामूहिक लक्ष्य के अधीन रखना पड़ता है।
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात न हो पाने को भी अन्नामलाई के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह दर्शाता है कि पार्टी बड़े फैसले सामूहिक रूप से और अपनी रणनीति के अनुरूप लेती है। दिल्ली से लौटकर अन्नामलाई चेन्नई पहुंच गए। अब उनकी ओर से दिए गए इस्तीफे को भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने स्वीकार कर लिया है।
यह घटनाक्रम तमिलनाडु में भाजपा के भविष्य की दिशा को लेकर पार्टी की स्पष्ट सोच को उजागर करता है। अन्नामलाई जैसे प्रभावशाली और आक्रामक छवि वाले नेता को भी पार्टी ने अनुशासन और धैर्य का पाठ पढ़ाया है। तमिलनाडु में भाजपा की जड़ें मजबूत करने की चुनौती बनी हुई है, जहां क्षेत्रीय दल द्रमुक और एआईएडीएमके की पकड़ अभी भी मजबूत है। पार्टी अब नए सिरे से रणनीति बनाने में जुटी है, जिसमें सामूहिक नेतृत्व और दीर्घकालिक धैर्य को सर्वोपरि माना जा रहा है।



