राजीव मिश्रा
पटना। पटना में कम्युनिस्ट पार्टियों (CPI/CPM) का एक जुलूस निकला. जुलूस के बाद पार्टी के एक नेताजी हमारे घर आए.. वे चाचाजी के मित्र थे. नेताजी बहुत उत्साहित थे कि रैली बहुत सफल रही.
नेताजी के एक और मित्र थे, उन्होंने कहा – रैली में कम से कम डेढ़ दो लाख लोग तो होंगे.
दूसरे मित्र ने कहा – क्या बात कर रहे हैं, कम से कम तीन लाख होंगे.
नेताजी बोले – कुछ नहीं तो कम से कम पाँच लाख होंगे. जुलूस का एक छोर फ्रेजर रोड होते हुए डाकबंगला चौराहा आ गया था, तो दूसरा गाँधी मैदान पार करके अशोक राजपथ पर पटना मार्केट के पास था.
उनके मित्र बोले – अरे.. आप देखे नहीं, पटना कॉलेज के आगे तक था.
तीसरे मित्र बोले – हमको तो लगता है साइंस कॉलेज तक लोग थे.
चाचा जी हैं मैथ्स के प्रोफेसर! वे बोले, हम अभी ही गिन देते हैं, आपके जुलूस में कितने लोग थे. मान लेते हैं कि जुलूस का पिछला छोर साइंस कॉलेज तक था. तो कितनी लंबा जुलूस हुआ?
एक सज्जन बोले – कम से कम तीन किलोमीटर तो होगा.
दूसरे बोले – चार साढ़े चार किलोमीटर से कम नहीं होगा.
चाचाजी ने कहा – चलिए मान लेते हैं, पाँच किलोमीटर लंबा जुलूस था. अब यह कोई अनपढ़ गंवारों की भीड़ तो थी नहीं. कम्युनिस्ट पार्टी का कैडर है, लाइन बना कर चलता है. तो कितने लाइन थे जुलूस में.
एक सज्जन बोले – तीन तीन लाइन थे. दूसरे ने कहा – नहीं, चार चार लाइन की कतार थी. कहीं कहीं तो पांच लाइन भी बनी हुई थी.
चाचाजी ने कहा – चलिए, मान लेते हैं, हर जगह पाँच लाइन का जुलूस था. जब लोग सड़क पर चल रहे होंगे तो दो लोगों के बीच कितनी दूरी होगी कि एक दूसरे से टकराएं नहीं? एक मीटर तो होगा न! तो पाँच पॉंच लाइन का जुलूस निकलेगा तो एक किलोमीटर में पाँच हज़ार लोग चल रहे होंगे. आपका जुलूस पॉंच किलोमीटर लंबा था तो उसमें अधिक से अधिक पच्चीस हजार लोग थे.
नेताजी और बाकी सारे कॉमरेड उखड़ गए – आप तो प्रोफेसर साहब ग़ज़ब ही बात करते हैं.. आप सीधा पच्चीस हजार पर ला दिए. फिर से जोड़िए.
चाचाजी बोले.. मेरा मैथ्स एकदम सही है. लेकिन शर्मा जी, दिल छोटा मत कीजिए. यह तो मैथमेटिक्स से पच्चीस हजार था…पंद्रह बीस हजार की भीड़ को ही राजनीति की भाषा में पॉंच लाख कहते हैं…
कल राहुल गाँधी की रैली में कितने लोग जुटे यह हिसाब लगाया जा रहा है. राजनीति की भाषा में कहा जा रहा है कि पचास हजार लोग थे. तो सिंपल अंकगणित के हिसाब से पॉंच सात हजार लोग होंगे ही. एक पगले के पीछे इतने लोग अपना समय खराब कर रहे हैं, रैली सफल ही मानी जानी चाहिए.



