बेतिया। पश्चिम चंपारण के भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने जन सूरज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर पर 125 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। बेतिया सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) श्री आनंद कुमार त्रिपाठी ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रशांत किशोर को 15 जुलाई को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने आरोपों को सिद्ध करने का नोटिस जारी किया है।
प्रशांत किशोर ने अपनी सार्वजनिक सभाओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. संजय जायसवाल को “टूटपुंजिया नेता” कहा था। जबकि हकीकत यह है कि डॉ. जायसवाल चार बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं। वे लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक, छह प्रदेशों के प्रभारी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वहीं प्रशांत किशोर ने खुद राघवपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा कर हार के डर से मैदान छोड़ दिया। सवाल उठता है कि चार बार का निर्वाचित सांसद “टूटपुंजिया” हो सकता है या चुनाव से भागने वाला नेता?
दूसरा गंभीर आरोप बेतिया छावनी ओवरब्रिज के अलाइनमेंट बदलवाने का था। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि सांसद ने अपने निजी पेट्रोल पंप के फायदे के लिए अलाइनमेंट बदला। लेकिन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की लिखित जांच रिपोर्ट साफ कहती है कि अलाइनमेंट में कोई बदलाव नहीं हुआ।
तीसरा आरोप नगर निगम के ईंधन बिलों में अनियमितताओं और पेट्रोल चोरी का था। पीके ने सांसद को “पेट्रोल चोर” जैसे अपमानजनक शब्दों से नवाजा। सांसद डॉ. जायसवाल ने स्पष्ट किया कि उक्त पेट्रोल पंप उनका है ही नहीं। बिना किसी ठोस प्रमाण के इस तरह के वल्गर आरोप लगाना मर्यादा के बाहर है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर अदालत में अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या साक्ष्य पेश नहीं कर पाए तो भारतीय दंड संहिता की धारा 499-500 के तहत मानहानि साबित होने पर उन पर भारी जुर्माना, सजा या दोनों हो सकते हैं।
यह मामला केवल व्यक्तिगत मानहानि का नहीं, बल्कि लोकतंत्र में बिना तथ्यों के जिम्मेदार नेताओं पर गंभीर आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करने की प्रवृत्ति का भी प्रतीक है। अब सबकी नजरें 15 जुलाई पर टिकी हैं, जब प्रशांत किशोर को अपने दावों की सच्चाई अदालत में साबित करनी होगी।
इनपुट: सुशील कुमार जायसवाल



