अक्टूबर में डीप स्टेट की तख्ता पलट की है साजिश

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विमर्श भारत का
@vimarshbharatkaदिल्ली। अक्टूबर में भारत में तख्तापलट करने की “डीप स्टेट” की साजिश; 8 चरणों में सत्ता पलट करने की है योजना।

ओपन सोर्स इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार “डीप स्टेट” भारत में बांग्लादेश और नेपाल की तरह तख्तापलट करने के लिए ऑपरेशन चल रहा है। इसके लिए भारत में 8 चरणों में योजना बनाई गई है।

1) जिसमें से पहला है, “कम्युनिस्ट मोर्चा”- इसमें सभी प्रकार की कम्युनिस्ट राजनीतिक पार्टियां और उनकी युवा संगठन शामिल होंगे।

CPI और उसका युवा संगठन AISF
CPI(M) और उसका युवा संगठन SFI
CPI(ML) और उसका युवा संगठन AISA
AAP और उसका युवा संगठन CJP

इन सभी संगठनों ने 2 अक्टूबर से शुरुआत करने की खुले आम घोषणा कर दी है।

2) दूसरा है, “कांग्रेस मोर्चा”-  इसमें कांग्रेस एवं उनके सभी सहयोगी पार्टियां जैसे समाजवादी पार्टी, NCP, शिवसेना (UBT), RJD आदि पार्टी एवं उनके कार्यकर्ता शामिल होंगे। इन सब ने अलग-अलग मोर्चे पर काम करना शुरू भी कर दिया है। बाद के चरण में यह सब कम्युनिस्ट मोर्चे में शामिल हो जाएंगे।3) तीसरा है, “वामपंथी बुद्धिजीवी मोर्चा”-  इसमें वामपंथी-उदारवादी एक्टिविस्ट, मीडिया, वकील, अभिनेता, नेता, प्रोफेसर एवं इनफ्लुएंसर शामिल होंगे। ये कम्युनिस्ट और कांग्रेस मोर्चे के बीच एक सेतु का कार्य करेंगे। जो दोनों को बौद्धिक सुरक्षा प्रदान करेंगे।

मीडिया झूठी बातों को फैलाने की कोशिश करेगा, वकील कानूनी सुरक्षा प्रदान करेंगे और एक्टिविस्ट भीड़ जुटाएंगे, अभिनेता एवं इन्फ्लुएंस मासूम लोगों को बहकाकर भारत विरोधी माहौल बनाने का कार्य करेंगे।

4) चौथा है, “इस्लामिक मोर्चा”- यह खुले तौर पर सामने नहीं आएंगे। ताकि इसके जबाव में हिंदुओं का ध्रुवीकरण न हो। बल्कि यह चुपके से अन्य सभी मोर्चों को सड़क पर ताकत प्रदान करेंगे। जैसे दिल्ली में तिलचट्टा जनता पार्टी के आंदोलन में किया था।
बांग्लादेशी और रोहिंग्या भी जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं वो भी शामिल होंगे।

5) पांचवा है, “किसान यूनियन और ट्रेड यूनियन”- किसान और ट्रेड यूनियन जो वामपंथी और कांग्रेस से जुड़े समूह के बाद के चरण में शामिल होंगे।

6) छठा है, “ईसाई मिशनरी संगठन”-  यह संगठन आर्थिक एवं तार्किक और ऑपरेशनल सहायता प्रदान करेंगे।

7) सातवां है, “अंबेडकरवादी समूह”- कई वामपंथी झुकाव वाले दलित समूह जैसे- भीम आर्मी, VBA आदि इसमें शामिल होंगे।

8) आठवां है, “संस्थागत विरोध”- ये आंदोलन के सबसे बाद के चरण में खासकर जब विरोध प्रदर्शन अपने चरण पर पहुंच चुका होगा, तो कई सरकारी अधिकारी जिसमें नौकरशाह, पुलिस, यहां तक की सेना के कुछ लोग भी शामिल होंगे। जो अपने कार्यों से इस्तीफा देंगे और प्रदर्शनकारियों को खुलकर समर्थन देंगे।

ताकि लोगों में विश्वास हो जाए कि विरोध प्रदर्शन वाकई सही दिशा में हो रहा है।

यह पूरा ऑपरेशन लंदन वाशिंगटन और रावलपिंडी से कोऑर्डिनेटर कियाजाएगा।

वैश्विक पत्रकार (ग्लोबल मीडिया) ने इसको लेकर पहले ही माहौल बनाना शुरू कर दिया है। कहा तो ऐसा भी जा रहा है कि 2 अक्टूबर एवं उसके बाद भारत में कई वैश्विक पत्रकारों का जमावड़ा होने वाला है। जो भारत में तख्तापलट हो इस अनुकूल वातावरण बनाएगा। ताकि “भारत में लोकतंत्र खतरे में है” इस तरह का माहौल बने और भारत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर से भी दबाव बनाया जाए मोदी सरकार को हटाने का।

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