CNFF-2026: भारतीय विरासत, देशभक्ति और सामाजिक सरोकारों पर आधारित फिल्मों का राष्ट्रीय संगम 

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नव ठाकुरीया
गुवाहाटी: पूर्वोत्तर भारत के फिल्म प्रेमियों, समीक्षकों और फिल्म निर्माता-निर्देशकों के लिए 24 और 25 अक्टूबर 2026 को देशभक्ति, भारतीय सभ्यता, संस्कृति और विरासत पर आधारित फिल्मों को देखने का विशेष अवसर मिलेगा। चलचित्रम नेशनल फिल्म फेस्टिवल (CNFF) का 10वां संस्करण गुवाहाटी के कहिलीपाड़ा स्थित ज्योति चित्रबन फिल्म सोसाइटी परिसर में आयोजित होगा, जहां चयनित लघु फिल्में और डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की जाएंगी। विश्व संवाद केंद्र-असम की सहयोगी संस्था चलचित्रम (https://chalachitram.in/) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रतिष्ठित फिल्म हस्तियों और फिल्म प्रेमियों की उपस्थिति में चयनित प्रविष्टियों को ट्रॉफी, प्रमाणपत्र और नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
भारतीय चित्र साधना के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में गुवाहाटी फिल्म फेस्टिवल के रूप में हुई थी। वर्ष 2019 में इसका नाम बदलकर चलचित्रम नेशनल फिल्म फेस्टिवल रखा गया और इसे ‘हमारी विरासत, हमारा गौरव’ (Our Heritage Our Pride) विषय के साथ नया स्वरूप दिया गया। महोत्सव में भारतीय विरासत, स्थानीय समाज, स्वतंत्रता संग्राम के नायक, महाकाव्य एवं पौराणिक कथाएं, राष्ट्रीय एकता, कला एवं कलाकार, योग, ध्यान, आयुर्वेद, पांडुलिपियां, चित्रकला, पारिवारिक मूल्य, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, भूमि और जनजीवन, पर्यटन, हस्तशिल्प, वस्त्र उद्योग, लकड़ी की नक्काशी, संगीत, स्थानीय पर्व-त्योहार, पारंपरिक खेल, स्मारक एवं विरासत स्थल, समाज सुधारक, चाय एवं तेल उद्योग सहित अनेक विषयों पर आधारित फिल्मों को स्थान दिया जाता है।
कलाकारों, समीक्षकों, फिल्मकारों, लेखकों और अन्य विशेषज्ञों की जूरी पुरस्कार विजेता फिल्मों का चयन करती है। नॉर्थ-ईस्ट इंडिया कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फीचर, सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, पटकथा, सिनेमैटोग्राफी तथा संपादन सहित पांच पुरस्कार दिए जाएंगे, जबकि ऑल इंडिया कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फीचर और सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के लिए दो पुरस्कार निर्धारित हैं। सभी श्रेणियां पेशेवर और नए फिल्मकारों के लिए समान रूप से खुली हैं। फिल्मों की अवधि 1 से 25 मिनट के बीच होनी चाहिए तथा उनका निर्माण 1 सितंबर 2025 से 1 सितंबर 2026 के बीच हुआ होना आवश्यक है। प्रविष्टियों के लिए अर्ली बर्ड (10-30 जून) में कोई शुल्क नहीं, रेगुलर डेडलाइन (1-20 जुलाई) के लिए 500 रुपये तथा फाइनल डेडलाइन (20 जुलाई-2 सितंबर) के लिए 1,000 रुपये शुल्क निर्धारित है। प्रविष्टियां सीधे CNFF कार्यालय (ई-मेल: chalachitramne@gmail.com) अथवा FilmFreeway के माध्यम से भेजी जा सकती हैं।
देशभर में आयोजित होने वाले विभिन्न राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों के बीच CNFF ने भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यह अब उन प्रमुख आयोजनों की श्रेणी में शामिल है, जिनमें MAMI मुंबई फिल्म फेस्टिवल, ग्रेट इंडियन फिल्म एंड लिटरेचर फेस्टिवल, एशिया लाइवलीहुड डॉक्यूमेंट्री फेस्टिवल, अल्पविराम साउथ एशियन शॉर्ट एंड डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्ट, बैंगलोर क्वीर फिल्म फेस्ट, ब्रह्मपुत्र वैली फिल्म फेस्ट, सिनेमेला फिल्म फेस्ट, फ्लैशपॉइंट ह्यूमन राइट्स फिल्म फेस्ट, गोल्डन ज्यूरी फिल्म फेस्ट, हैदराबाद बंगाली फिल्म फेस्ट, इंडोग्मा फिल्म फेस्ट, जागरण फिल्म फेस्ट, जीविका फिल्म फेस्ट, कलाकारि फिल्म फेस्ट, मधुबनी फिल्म फेस्ट, नई दिल्ली फिल्म फेस्ट, नेशनल साइंस फिल्म फेस्ट, सिनेफैन फेस्टिवल ऑफ एशियन एंड अरब सिनेमा, पटना फिल्म फेस्ट, राजस्थान फिल्म फेस्ट, टाइगरलैंड इंडिया फिल्म फेस्ट, वेरिटे फिल्म फेस्ट और विबग्योर फिल्म फेस्ट जैसे प्रतिष्ठित आयोजन शामिल हैं।
पिछले यानी 9वें CNFF का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के असम क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुनील मोहंती ने भारत माता तथा डॉ. भूपेन हजारिका, जुबीन गर्ग और दीपक शर्मा के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया था। इस संस्करण में प्रतियोगिता और गैर-प्रतियोगिता श्रेणी में 30 से अधिक लघु फीचर फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। इनमें वृद्धावस्था का अकेलापन, जीवन का उद्देश्य, मृत्यु की नई व्याख्या, परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन की तलाश, आधुनिक जीवन के आकर्षण और भ्रम, पर्यावरण, भारत की हजारों वर्षों पुरानी सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत तथा अनेक समकालीन विषयों को संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया गया। कुछ फिल्मों में शहरी क्षेत्रों में अकेले रह रहे बुजुर्ग पेशेवरों की चुनौतियों, लोककथाओं और लोकगीतों के माध्यम से मानसिक संबल, कमजोर होते पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक तनावों को रेखांकित किया गया।
कई फिल्मों ने जाति-आधारित सामाजिक संरचना और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्षरत वंचित समुदायों की चुनौतियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कुछ प्रविष्टियों में धीमी गति से सीखने वाले और दिव्यांग बच्चों की दुनिया से दर्शकों को परिचित कराया गया, जिससे उनके जीवन के भावनात्मक और संवेदनशील पहलुओं को समझने का अवसर मिला। मातृसत्तात्मक समाज में विवाह के बाद पुरुषों द्वारा अपना पैतृक परिवार छोड़ने की परंपरा, जादू-टोने से जुड़ी प्राचीन मान्यताएं, असम की पारंपरिक धागे वाली कठपुतली कला, भारत के प्राचीन वस्त्र उद्योग की विरासत और आधुनिक तकनीक से उत्पन्न चुनौतियां तथा ग्रामीण समाज में प्रचलित बुरी आत्माओं की लोककथाओं जैसे विषय भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे।
कुछ फिल्मों में बदलती मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं के कारण परिवार और रिश्तों से दूर होते युवाओं की समस्याओं को भी सामने रखा गया। साथ ही यह सकारात्मक संदेश भी दिया गया कि परिवार के निस्वार्थ प्रेम और स्नेह से वे पुनः आत्मविश्वास प्राप्त कर समाज के प्रति जिम्मेदारी और अपनत्व की भावना के साथ अपनी शिक्षा तथा भविष्य के करियर की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
समापन समारोह में तत्कालीन असम विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी, अनेक फिल्म हस्तियां, गणमान्य अतिथि और बड़ी संख्या में फिल्म प्रेमी उपस्थित रहे। आयोजन समिति की ओर से विश्व संवाद केंद्र-असम के सचिव किशोर शिवम, CNFF के सचिव भगवत प्रीतम ने आशा व्यक्त किया कि यह महोत्सव उभरते फिल्मकारों को सिनेमा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन, वंचित वर्गों के सशक्तिकरण और देशभक्ति की भावना को पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और चलचित्रम नेशनल फिल्म फेस्टिवल (CNFF) के अध्यक्ष हैं)

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