दिल्ली । दिल्ली सरकार और सुरुचि प्रकाशन की शानदार पहल का नाम है शब्दोत्सव कैफे। अभी तो महीना ही लगा है और दिल्ली में राष्ट्रीय विचार रखने वालों के बीच इसकी चर्चा फैल चुकी है। हर शनिवार शाम छह बजे कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर के सामने स्थित कॉफी हाउस में साहित्य, संगीत, कविता और कहानी का एक जीवंत मंच सजता है। यहां लोग अपनी गर्म कॉफी के साथ गीत सुन सकते हैं, कविता का आनंद ले सकते हैं और कहानी में डूब सकते हैं। गीत-संगीत प्रेमियों के लिए प्रवेश निशुल्क है। जिन्हें डोसा, समोसा, चाय या कॉफी टेबल पर चाहिए, उन्हें अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। फिर भी सौदा बुरा नहीं है। यह मंच नए कलाकारों के लिए खुला है। यदि आपमें भी कुछ बात है तो आयोजकों से संपर्क कीजिए। यदि कोई मित्र मंच पर प्रस्तुत कर सकता है तो उसे टैग कर दीजिए। आने की एक ही छोटी शर्त है-दिल में इंडिया धड़कता हो।

शब्दोत्सव कैफे दिल्ली सरकार और सुरुचि प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होता है। इसकी सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहां कवि, कहानीकार, गायक और अन्य कलाकार अपनी कला प्रस्तुत करते हैं। सुरुचि प्रकाशन दिल्ली सरकार की सहायता से यह मंच उपलब्ध कराता है। माहौल खुला, गर्मजोशी भरा और प्रोत्साहक होता है। दर्शक आते-जाते रहते हैं, कोई कॉफी लेकर आता है, किसी को काउंटर से डोसा बुलाया जाता है और युवा तालियां बजाते हुए गीतों से जुड़ जाते हैं।
पिछले सप्ताह का प्रसंग खास यादगार बना। संचालन विकास कौशिक कर रहे थे। राजीव तुली और अंकुर पाठक व्यवस्था पर नजर रखे हुए थे। मंच के पास अनिल पांडेय, पूजा पुनेठा और गौरव ललित व्यस्त थे। प्रस्तुति चल रही थी और माहौल खुशनुमा था। तभी दर्शकों में बैठी अंजलि को लगा कि वह भी गा सकती है। यह ओपन माइक नहीं था, पर शब्दोत्सव कलाकार की कला का सम्मान करना जानता है। अंजलि मंच पर आई और आयोजकों को निराश नहीं किया।
जब उसने गाना शुरू किया तो उसकी जादुई आवाज ने पूरा माहौल थाम लिया। कुछ पल पहले दर्शकों के बीच बैठी बच्ची कुछ देर बाद मंच की जान बन गई। आयोजकों से लेकर श्रोताओं तक आशीर्वाद बरसा। बात यहीं नहीं रुकी। 19 सितंबर 2026 अंजलि के लिए यादगार दिन बन गया। अब वह श्रोताओं में से नहीं उठी, बल्कि शब्दोत्सव कैफे के पोस्टर पर उसका नाम था। मंच से उसका नाम पुकारा गया और प्रस्तुति को खूब सराहना मिली।
अंजलि को शब्दोत्सव कैफे की खोज कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। उसकी कहानी दिल्ली के किसी भी ऐसे युवा की हो सकती है जिसे लगता है कि वह मंच पर कमाल कर सकता है। हर शनिवार शाम छह बजे हनुमान मंदिर के सामने कॉफी हाउस में यही कला की महफिल सजती है। इस शनिवार आप भी आइए।



