सुधांशु त्रिवेदी
दिल्ली। मैं राजनीतिक और मनुस्मृति, दोनों की बात बताता हूं। राहुल गांधी सरासर झूठ बोलते हैं। हकीकत ये है। ये ‘Dismantling Global Hindutva’ के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
मैं पूछना चाहता हूं राहुल गांधी से ये पितृसत्तात्मक संस्कृति जैसा संस्कृतनिष्ठ शब्द कहाँ से आया ?
पर कभी मर्दुम अजीम रवायत सुनी है?
चार बीवी क्या है ?
तलाक का अधिकार सिर्फ पुरुष को। चुप।
हलाला से महिला पवित्र हो जाती है। चुप।
मेहरम पता है क्या होता है? हमारी सरकार आने से पहले मेहरम वो होता था कि इस्लामी मान्यता के अनुसार घर से बाहर अगर महिला निकले तो किसी पुरुष की छत्रछाया में होना चाहिए। मेहरम हमने खत्म किया। मेहरम चुप।
इस व्यक्ति की हकीकत देखो। जो कहता है हिजाब होना बहुत अच्छा है, मगर हिंदू धर्म में महिलाओं को समानता नहीं है। मैं चैलेंज करके कहता हूं, दुनिया में जितने भी धर्म और मजहब हैं, उनमें भगवान सबको कुछ न कुछ इंट्यूशन देते हैं, भगवान की कृपा होती है। ये पुरुष पर ही क्यों होती है, महिला पर क्यों नहीं?
सिर्फ भारतीय संस्कृति ऐसी है, जहां वेदों में 22 ऋषिकाएं हैं अपाला, लोपामुद्रा, मैत्रेयी, संध्या।
फैक्ट:
मनु स्मृति पर महात्मा गांधी, नेहरू, डा। अंबेडकर ने क्या कहा और इंदिरा गांधी जी के जमाने में क्या छपा।
ये आदमी अपने पिता को, दादी को, नेहरू को, गांधी जी को गलत साबित करने में लगा है।
ये लोग समाज के अंदर भारत के विरुध्द वैश्विक षड्यंत्र ‘Dismantling Global Hindutva’, जो 2021 में अमेरिकन यूनिवर्सिटी में बना था, इसके बाद जब इन्होंने कास्ट पर लड़ाने का विषय शुरू किया, हेनरी लूसी फाउंडेशन, मार्च 2021, फिर उसके बाद 2022!से तमिलनाडु में कॉन्फ्रेंस शुरू हुई ‘Eradication of Sanatan Dharma’।
अब महिलाओं की बात आई है। अगर 4 करोड़ आवास मिले हैं प्रधानमंत्री जी के कार्यकाल में तो 3 करोड़ गरीब महिलाएं उसमें खुद मालिक बनकर बैठी हैं। 55 करोड़ जनधन अकाउंट में 60% महिलाएं हैं। ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, कैबिनेट मंत्रिमंडल में महिलाएं और एयरफोर्स व डिफेंस सर्विसेज में परमानेंट कमीशन मिला है तो हमारे जमाने में मिला है।
आज तक जवाब दे दें। मैं चैलेंज करके कहता हूं राहुल गांधी कहो गांधी गलत थे, नेहरू गलत थे, डा अंबेडकर गलत थे, मेरी दादी गलत थी, सब गलत बोल रहे थे। मेरा आविर्भाव हुआ है अपने पूर्वजों व परिवार की बेइज़्ज़ती करे व भारत में अराजकता उत्पन्न करने के लिए।
(सोशल मीडिया से)



