पाँच सितारा होटल और बात हिंदी की 

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पटना : आज पटना में हूँ। पटना में जिस होटल में मैं रुका हूँ, उसकी गणना पटना के अच्छे होटलों में होती है। आज सुबह मेरे रूम पर हिंदुस्तान टाइम्स की प्रति दी गई। मैंने पता किया तो बड़े गर्व से जानकारी दी गई कि हम अपने सभी अतिथियों को अंग्रेजी अखबार ही उपलब्ध कराते हैं। अब सोचने वाली बात है कि बिहार या उत्तर भारत के किसी भी राज्य में अधिकतम लोग किस भाषा में अधिक सहज होंगें? किस भाषा में स्वागत-डेस्क (रिसेप्शन) पर बात करते होंगें? मैंने रिसेप्शन पर खड़े होटल के सदस्यों से अनुरोध किया कि क्या आप हिंदी अख़बार उपलब्ध नहीं करा सकते? उन्होंने 3-4 हिंदी अखबार लाकर मेरे सामने रख दिया।

मैंने उनसे कहा कि मैं आपका ग्राहक हूँ। अपनी सुविधाओं के लिए आपको रुपयों का भुगतान करता हूँ। क्या आपको मेरी रुचि, मेरी भाषा, मेरी भूषा, मेरी पहचान व संस्कृति का सम्मान नहीं करना चाहिए? वे चौंकें, फिर मैंने उनसे अनुरोध किया कि जब आप फॉर्म भरवाते हैं, तब क्या आप यह कॉलम भरवाते हैं कि आपको कौन-सा समाचार-पत्र चाहिए, आप किस भाषा में हमारी सेवा चाहेंगें? यह ठीक वैसा ही है, जैसे आप मुझसे पूछते हैं कि आप शाकाहारी हैं या मांसाहारी?

फिर मैंने उनसे औपनिवेशिक मानसिकता, स्वभाषा एवं संस्कृति के महत्त्व, दुनिया के विकसित देशों में भाषा के प्रति वहाँ के नागरिकों का दृष्टिकोण, भाषा के आधार पर बौद्धिकता मापने के दोषपूर्ण चलन, प्रतिदिन एक भाषा के विलुप्त होने आदि पर उनसे लंबी बातचीत की, वे लगभग 10 की संख्या में थे, सभी मेरी बातों से पूर्णतः सहमत थे, पर अंत में नौकरी की विवशता की बात करने लगे। यह स्वाभाविक है, क्योंकि हर कामकाजी व्यक्ति के सामने यह संकट उपस्थित होता है। वे अंततः नौकरी के दबाव में झुक जाते हैं, अन्यथा अपनी भाषा के प्रति हरेक व्यक्ति के भीतर स्वाभाविक प्रेम होता है। विदेशों में यही प्रेम पारस्परिक संपर्क व परिचय का माध्यम बनता है। आपने देखा होगा कि मारवाड़ी, गुजराती समाज के व्यक्ति चाहे कहीं भी रहें, उन्होंने अपनी भाषा और अपनी संस्कृति नहीं छोड़ी, यह उनकी मजबूती है, कमजोरी नहीं। बल्कि हिंदीतर प्रदेशों में अपनी-अपनी मातृभाषा के प्रति लोगों का जुड़ाव अभी भी अधिक देखने को मिलता है।

बहरहाल होटल स्टाफ ने अपने मालिक का ईमेल एड्रेस दिया कि इस पर एक मेल भेज दें। मैं निश्चित मेल भेजूँगा।

परंतु एक अनुरोध आपसे भी करना चाहूँगा।

देखिए, यदि हमारा आचार-व्यवहार बाजार तय कर रहा है तो क्या हमें बाजार को अपनी भाषाई शक्ति की अनुभूति नहीं करानी चाहिए? ट्रेन, एयरपोर्ट, होटल्स, सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े संस्थानों में अपनी पसंद के समाचार-पत्र व पत्रिका माँगें। न दें तो उन्हें बड़ी आत्मीयता से ऐसा करने कहें। दबाव से सरकारें झुकती हैं, तो बाजार क्यों नहीं? बाजार तो माँग के आधार पर ही चलता है। मैंने इस यात्रा में लगभग दस बड़ी जगहों पर ऐसा किया और उन्होंने मेरी पसंद के अखबार मुझे उपलब्ध कराए। ध्यान दें, मेरी पसंद के, यानी ऐसे समाचार पत्र एवं पत्रिकाएँ जो भाषा तो मेरी रख रहे हैं, पर कथ्य अ-राष्ट्रीय और अप-सांस्कृतिक परोस रहे हैं, उन्हें मैंने अस्वीकृत किया और लोगों को भी उसके बारे में बताया।

चाहे वह अंग्रेजी हो या अन्य कोई भी भाषा, किसी से कोई शिकायत नहीं, सब भाषा अच्छी होती है, सीख सकें तो सब सीखें, बल्कि बचपन में अनेक भाषाएँ सीखनी चाहिए। वह भविष्य में काम आएगी, पर अपनी भाषा से प्यार करें, उसे सहेजें, प्रोत्साहित करें, आज के संदर्भ में यह भी देशभक्ति है। कामकाजी दुनिया में भी धीरे-धीरे ऐसा वातावरण बनाएँ, यदि आप शीर्ष पद पर हों तो समय-समय पर अपनी भाषा में अवश्य बात करें। आपकी टीम के सदस्यों में आपका सम्मान बढ़ जाएगा, परिणाम बेहतर आएगा, टीम के सभी सदस्यों के कार्यों में कुशलता आएगी। कोई भी व्यक्ति अपनी ही भाषा में अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकता है। आपने एक साँचा बना लिया और हरेक को उसके अनुसार ढाल रहे हैं। कितनी विचित्र बात है कि विविधता का राग अलापने वाले सभी देशज भाषाओं को समाप्त कर एक विदेशी भाषा का आधिपत्य स्थापित करना चाहते हैं! मुझे केवल इस आधिपत्य से आपत्ति है। यूनेस्को की रिपोर्ट कहती है कि प्रतिदिन दुनिया की एक भाषा विलुप्त हो रही है, अपनी भाषा को विलुप्त होने से बचाएं। भाषा प्रयोग से ही जीवित रहती है।

पाञ्चजन्य द्वारा निर्मित वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ (The Unforgettable Atal) का हुआ भव्य प्रदर्शन

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नई दिल्ली: राष्ट्र भक्ति और वैचारिक पत्रकारिता के संवाहक साप्ताहिक पत्र ‘पाञ्चजन्य’ द्वारा भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के विराट व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित एक विशेष वृत्तचित्र (Documentary) ‘अमिट अटल: द अनफॉरगेटेबल अटल’ का प्रदर्शन झंडेवालान स्थित ‘विचार विनिमय न्यास सभागार’ में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबालेजी और विशिष्ट अतिथि देश के प्रख्यात विचारक एवं वरिष्ठ राजनीतिज्ञ डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी रहे।

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सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि “यह वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) अत्यंत प्रासंगिक और मर्मस्पर्शी है, जिसे देखकर अटल जी से जुड़ी कई ऐतिहासिक घटनाएं और संस्मरण जीवंत हो उठे हैं।“ अटल जी के शुरुआती दिनों का स्मरण करते हुए कहा कि मात्र 27 वर्ष की आयु में श्रद्धेय भाऊरावदेवरस जी की प्रेरणा और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के मार्गदर्शन में अटल जी को पाञ्चजन्य के प्रथम संपादक के रूप में दायित्व सौंपा गया था। उन्होंने लेखन, कविता और प्रभावी भाषणों के माध्यम से देश में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी प्रसिद्ध कविता ‘हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय’ पहली बार पाञ्चजन्य में ही प्रकाशित हुई थी।

जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में अटल जी के संकल्प का स्मरण करते हुए सरकार्यवाह जी ने कहा कि पाञ्चजन्य के प्रथम संपादकीय का शीर्षक था “जम्मू-कश्मीर से समझौता नहीं होने देंगे” और अटल जी इस संकल्प पर जीवन के अंतिम क्षण तक अडिग रहे। अटल जी पत्रकारिता को एक व्रत और तपस्या मानते थे। वे दैनिक समाचार को ‘सूचना’, साप्ताहिक को ‘प्रचार’ और मासिक को ‘विचार’ का माध्यम कहते थे।

उन्होंने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए पाञ्चजन्य के वर्तमान स्वरूप की सराहना की और कहा कि यह प्रयास नई पीढ़ी को भारत के सच्चे सेवक और एक महान राष्ट्रनायक के जीवन से परिचित कराएगा।

 

 

विचारों और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया – डॉ. मुरली मनोहर जोशी

विशिष्ट अतिथि और अटल जी के दीर्घकालिक सहयोगी डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने वर्ष 1948 से अटल जी और पंडित दीनदयाल जी के साथ बिताए पलों को साझा किया। उन्होंने जनता पार्टी सरकार के दौर को याद करते हुए कहा कि तमाम राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एकमात्र अटल जी ही ऐसे नेता थे, जिन्होंने दलीय संकीर्णता से ऊपर उठकर कार्य किया। वे पहले ऐसे भारतीय नेता थे, जिन्होंने चीन की धरती पर जाकर निर्भीकता से उसकी गलत नीतियों का विरोध किया था।

जब कुछ राजनीतिक तत्वों ने संघ से संबंध तोड़ने का दबाव बनाया, तो अटल जी ने दो टूक शब्दों में कहा था कि “हमारी नाल संघ से जुड़ी है, हम संघ से अलग कैसे हो सकते हैं?” उन्होंने संसद में भी स्पष्ट कर दिया था कि वे ऐसी किसी सरकार को चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करेंगे जो विचारों से समझौता करने पर मजबूर करे।

शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जब स्कूलों में ‘सरस्वती वंदना’ को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की गई, तब प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी ने स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाते हुए कहा था कि “सरस्वती वंदना हमारी सरकार में नहीं होगी तो फिर किस सरकार में होगी? यह अवश्य होनी चाहिए।“ इसी प्रकार विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी की पुनर्स्थापना और शोध कार्य के लिए भी सदैव प्रतिबद्ध रहे। आज के समय में सबको साथ लेकर, एक मजबूत संकल्प और विचार के साथ आगे बढ़ने की कार्यशैली की देश को अत्यधिक आवश्यकता है।

पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर सहित अन्य प्रबुद्ध जन, लेखक और पत्रकार भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

वृत्तचित्र के बारे में –

वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के एक स्वयंसेवक, प्रचारक, ओजस्वी कवि, प्रखर पत्रकार, दूरदर्शी संपादक और फिर देश के प्रधानमंत्री बनने तक के सफर के अनछुए पहलुओं को प्रामाणिकता के साथ उजागर करता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी किया गया वक्तव्य :

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नई दिल्ली:  श्री राम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों  रामभक्तों के समर्पण, त्याग एवं बलिदान के कारण संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केन्द्र बना है।

अयोध्या में श्री रामलला मंदिर में रखे हुए दान पात्रों में जमा राशि की चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से समूचे समाज और राम भक्तों की भावना एवं श्रद्धा को आघात पहुँचा है तथा इस घटना से हम सभी आहत हैं।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के आग्रह पूर्वक निवेदन पर उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जाँच दल का गठन कर उसकी अनुशंसा पर क़ानूनी प्रक्रिया प्रारंभ की है। जाँच में जो भी दोषी पाए जाएँगे उन्हें कठोर दंड हो यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित संपूर्ण हिंदू समाज की न्यास से स्वाभाविक ही अपेक्षा है कि इस घोर निंदनीय घटना को असाधारण मान कर गंभीरता से व्यवस्था एवं संचालन की सभी कमियों को दूर करने हेतु परिणामकारक कदम उठाए ताकि अयोध्या मंदिर पर करोड़ों रामभक्तों की  आस्था व श्रद्धा अखंड एवं अटूट बनी रहे। वर्तमान भ्रम और असमंजस की स्थिति समाप्त होनी चाहिए। इस दृष्टि से हमारी अपेक्षा है कि सभी आवश्यक पहल मंदिर प्रबंधन और शासन द्वारा गठित विशेष जाँच दल करेंगे। हमारा यह विश्वास है कि समुचित वित्तीय प्रबंधन, सुचारू संचालन हेतु निर्दोष पारदर्शी व्यवस्थाओं एवं शुद्धता और पवित्रता से परिपूर्ण धार्मिकता से ओतप्रोत वातावरण के द्वारा श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास हिन्दू समाज की आस्था एवं विश्वास को सुदृढ़ बनाये रखेगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संपूर्ण हिन्दू समाज से भी आह्वान करता है कि इस कठिन क्षण में वह आवश्यक धैर्य और संयम का परिचय दें तथा इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का लाभ उठाकर हिन्दू विरोधी, राष्ट्र विरोधी शक्तियों के हिंदू धर्म एवं समाज को बदनाम करने के षड़यंत्रों को विफल करे।

प्रवासी राजस्थानियों की सहभागिता से शिक्षा के क्षेत्र में नया अध्याय लिख रहा है राजस्थान: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर

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नई दिल्ली : राजस्थान फाउंडेशन (दिल्ली चैप्टर) एवं राजस्थानी मित्र मंडल के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास, 210 दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली में शिक्षा मंत्री, राजस्थान सरकार, मदन दिलावर के सम्मान में संवाद एवं स्वागत समारोह आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में मदन दिलावर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मंच पर उनके साथ के.सी. जैन, सेवानिवृत्त आई.आर.एस. अधिकारी एवं संरक्षक, राजस्थानी मित्र मंडल; सी.ए. (डॉ.) रामावतार किला, अध्यक्ष, राजस्थान फाउंडेशन (दिल्ली चैप्टर); जय नारायण मीणा, मंत्री के विशेष सहायक, स्कूल शिक्षा, पंचायती राज एवं संस्कृत शिक्षा विभाग, जयपुर; तथा प्रकाश लखोटिया, सामाजिक नेता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में दिल्ली एवं एनसीआर के सामाजिक, व्यावसायिक, औद्योगिक और पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े प्रवासी राजस्थानियों ने सहभागिता की। राज अग्रवाल, श्याम बागड़ी, चंद्रकांता राजपुरोहित, बाबूलाल पारीख, एल.पी. बोथरा, हिम्मत सिंह, सूरज सोनी और कमल सिखवाल सहित अनेक प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

स्वागत उद्बोधन में सी.ए. (डॉ.) रामावतार किला ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का प्रवासी राजस्थानियों के बीच आने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम राजस्थान सरकार और प्रवासी राजस्थानी समाज के बीच आत्मीय संवाद का प्रतीक है। उन्होंने राजस्थान फाउंडेशन को प्रवासी राजस्थानियों और राज्य सरकार के बीच एक सशक्त सेतु बताते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, निवेश और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर सहयोग की बात रखी।


रामावतार किला ने संजीवनी मेडिकल सेवा का उल्लेख करते हुए बताया कि इस पहल के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयों, व्हीलचेयर सहायता और बड़े अस्पतालों में डॉक्टर परामर्श से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि पहले बीकानेर हाउस में राजस्थान फाउंडेशन का कार्यालय हुआ करता था, जिसे फिर से शुरू किया जाए तो दिल्ली में प्रवासी राजस्थानियों और सरकार के बीच समन्वय और मजबूत होगा।

अपने संबोधन में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने शिक्षा, साक्षरता, स्वच्छता, स्वास्थ्य, मूल्य आधारित शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार का संकल्प है कि कोई भी बालक या बालिका शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने प्रवासी राजस्थानियों से अपने गांवों और क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों के विकास में सहभागी बनने का आह्वान किया।

मदन दिलावर ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि जागरूक, संस्कारित और मजबूत समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित प्रवासी राजस्थानियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक विकास और राजस्थान की प्रगति में सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया।

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