सफाचट पत्रकारिता और वसूली का धंधा: एक आलोचनात्मक नजरिया

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संतोष सिंह मंगरूआ
पटना।  पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य की खोज और समाज को जागरूक करना है, लेकिन कुछ लोग इसे व्यक्तिगत लाभ और वसूली के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। बिहार में ‘लरचट पत्रकारिता’ का एक उदाहरण पटना का वह पत्रकार है, जिसे ‘अज्ञानेश्वर’ कहा जाता है। यह व्यक्ति ज्ञान का दिखावा करते हुए अक्सर विवादास्पद और पक्षपातपूर्ण बयान देता है, जबकि उसकी समझ सीमित ही रहती है।
हाल ही में चर्चा में आया कि भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह को राज्यसभा भेजने की संभावना पर यह पत्रकार अत्यधिक व्यथित दिखाई दे रहा है। उसकी असल चिंता यह नहीं कि पवन सिंह राज्यसभा जाएँगे, बल्कि यह डर है कि 32 विधायकों वाला राजपूत समाज हरिवंश नारायण सिंह की जगह किसी अन्य राजपूत उम्मीदवार की मांग न उठा ले। इससे उसकी कथित ‘जातीय संतुलन’ की राजनीति प्रभावित हो सकती है।
यह व्यक्ति धन मिलते ही अकड़ने लगता है और ज्ञान का ढोंग रचता है। पहले भी हाजीपुर के मुखिया शिवधारी सिंह की हत्या के मामले में उसने वीर शिवधारी सिंह को ‘आतंकी’ और ब्रह्मेश्वर मुखिया को ‘संत’ बताकर अपनी पक्षधरता दिखाई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह पत्रकारिता है या मात्र वसूली और प्रचार का धंधा?
सच्ची पत्रकारिता निष्पक्षता, तथ्यों और नैतिकता पर टिकी होती है। जब यह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, जातिवाद या आर्थिक लाभ से ग्रस्त हो जाती है, तो समाज का विश्वास टूटता है। ऐसे ‘लरचट’ तत्वों से सावधान रहना आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र की चौथी स्तंभ मजबूत बनी रहे।

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इजराइल-ईरान युद्ध का वो पहलू जो किसी को नहीं दिखा

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अनुराग पुनेठा
दिल्ली । फरवरी 2026 के मध्य में, अमेरिका और इजराइल ने ईरान के सामने एक सख्त शर्त रखी थी। यह डेडलाइन मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी थी। अमेरिका राष्ट्रपति और इजराइल ने मांग की थी कि ईरान को 24 से 48 घंटों के भीतर एक ऐसा विस्तृत प्रस्ताव देना होगा जिसमें वह Uranium Enrichment को पूरी तरह बंद करने और अपने मुख्य परमाणु केंद्रों (जैसे फोर्डो और नतांज़) को निष्क्रिय करने पर सहमत हो। 22-23 फरवरी के आसपास यह स्पष्ट कर दिया गया था कि यदि ईरान 48 घंटों के भीतर ठोस प्रस्ताव नहीं देता, तो जिनेवा में होने वाली वार्ता का तीसरा दौर रद्द कर दिया जाएगा और Military Option सक्रिय हो जाएगा। यह डेडलाइन 25 फरवरी को समाप्त हो रही थी—ठीक उसी दिन जब प्रधानमंत्री मोदी इजराइल की धरती पर थे।
लेकिन इसमें एक दिलचस्प पेंच है, यह डेडलाइन के बारे में नहीं है। यह जिनेवा वार्ता या समंदर में तैनात विमान वाहक पोतों के बारे में भी नहीं है। जब 25 फरवरी को भारत के प्रधानमंत्री तेल अवीव की धरती पर उतरे। उन्होंने नेतन्याहू से हाथ मिलाया। शाम 4:30 बजे इजराइली संसद को संबोधित किया, ‘याद वाशेम’ में श्रद्धांजलि अर्पित की।
गौर कीजिए—48 घंटे की वह बहुचर्चित समयसीमा ठीक उसी दिन खत्म हुई, जिस दिन मोदी का विमान इजराइल पहुँचा। रणनीति के जानकारों को पता है- आप ईरान पर हमला तब नहीं करते, जब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेता आपकी संसद में खड़ा हो। आप ऐसी स्थिति पैदा नहीं करते जहाँ ईरान की जवाबी बैलिस्टिक मिसाइलें या ड्रोन उस वक्त इजराइल की ओर आएं जब एक हाई-प्रोफाइल राजकीय अतिथि वहाँ मौजूद हो। दोनों देशों की खुफिया एजेंसियां और सीक्रेट सर्विस ऐसा कभी होने नहीं देंती है, यह तकाज़ा है .
अगर नेतन्याहू इस समय हमला करते, तो वह उस कूटनीतिक गठबंधन को ही राख कर देते जिसे वह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मोदी की इस यात्रा को ईरान जैसे ‘कट्टरपंथी धुरों’ के खिलाफ एक Hexagon of Alliances बनाने जैसा बताया था। कोई भी अपना किला बनाते समय उसमें खुद विस्फोट नहीं करता। इसका सीधा सा मतलब है: हमले की खिड़की 26 फरवरी की शाम को खुली, मोदी के प्रस्थान के ठीक बाद। और उसी दिन जिनेवा में बातचीत शुरू हुई। यह एक सोची-समझी चाल थी। अगर ईरान बिना किसी ठोस प्रस्ताव के आता है, तो पूरी दुनिया के सामने उसकी ‘कूटनीतिक विफलता’ का दस्तावेजीकरण हो जाता। दुनिया कहती कि इजराइल ने बचने का रास्ता दिया था, जिसे ईरान ने ठुकरा दिया। सैन्य कार्रवाई के लिए ‘नैतिक और कानूनी आधार’ अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने तैयार हो गया। 2 मार्च पुरिम है , यह इजराइली त्योहार है जो फारसी (Persian) साजिश से यहूदियों की रक्षा का जश्न मनाता है। श्रीलंका गार्डियन जैसे विश्लेषकों ने इसे ‘हमले की संभावित तारीख’ बताया है। इस दिन हमला करना सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि एक गहरा प्रतीकात्मक संदेश होगा।
यह सात दिनों का एक घातक क्रम है। मंगलवार को डेडलाइन। बुधवार तक मोदी का कूटनीतिक कवच। बुधवार रात जिनेवा में आधिकारिक विफलता। गुरुवार से रविवार तक युद्ध की अंतिम तैयारी। और सोमवार, 2 मार्च को—पुरिम।
अब उस सुराग पर गौर करें जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। भारत ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने के लिए एक सख्त एडवाइजरी जारी की। उन्होंने “सावधानी” बरतने को नहीं कहा। उन्होंने “यात्रा टालने” की सलाह नहीं दी। उन्होंने कहा—निकल जाओ just Leave।

भारत जानता था कि उसके प्रधानमंत्री का विमान कब इजराइली हवाई क्षेत्र से बाहर निकलेगा, और वह यह भी जानता था कि उसके तुरंत बाद आसमान का रंग कैसा होने वाला है। मोदी संकट के बावजूद इजराइल नहीं गए; मोदी संकट की वजह से इजराइल गए। नेतन्याहू इस ऐतिहासिक दस्तावेज पर कार्रवाई करने से पहले दुनिया के बड़े खिलाड़ियों के हस्ताक्षर जुटा रहे हैं। जब धमाके होंगे, जो हो गये, तो नेतन्याहू दुनिया को दिखा सकेंगे कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता उनके साथ खड़े थे। यह महज एक दौरा नहीं था। यह हमले से पहले की वैधता हासिल करने का एक मास्टरस्ट्रोक है। शानका एंस्लेम परेरा( चर्चित पुस्तक “The Ascent Begins: The World Beyond Empire — Sovereignty in the Age of Collapse के लेखक)

एआई सम्मेलन – भारत की अभूतपूर्व सफलता और व्यथित कांग्रेस

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में आए विश्व के बड़े बड़े नेता इस पहल से अचंभित थे और भारत की प्रगति की प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे। बड़ी बड़ी एआई कंपनियां व निवेशक भारत के साथ समझौते कर रही थीं। जन सामान्य गर्वित हो रहा था क्योंकि यहाँ भारत की युवा प्रतिभाओं की सराहना हो रही थी। सदा से ही राष्ट्र विमुख रही कांग्रेस पार्टी से ये देखा नहीं गया और उनके कुछ चुनिंदा कार्यकर्ता वहां अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने पहुँच गए। वास्तव में अब कांग्रेस पार्टी अब प्रधानमंत्री मोदी व भाजपा का विरोध करते -करते पूरी तरह भारत विरोधी हो गई है।
कांग्रेस का यह विरोध ऐसा ही था जैसे जब प्राचीन काल में जब ऋषि गण अपने आश्रमो मे किसी अच्छे कार्य के लिए यज्ञादि करते थे तो कुछ राक्षस उस यज्ञ को अपवित्र करने के लिए यज्ञकुंड में हड्डियां डालकर उसे अपवित्र करने का प्रयास करते थे। कांग्रेस ने जो कृत्य विदेशी मेहमानों के समक्ष किया है उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस घोर अराजकतावादी बन चुकी है जिसकी अब सारी उम्मीदें समाप्त होती जा रही हैं।
एआई समिट कांग्रेस द्वारा की गई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से भारत का जेन- जी भी नाराज़ है जिसको भड़काकर कांग्रेस सड़क पर लाना चाहत है। भाजपा कांग्रेस द्वारा दिए गए इस अवसर को गंवाना नहीं चाहती । पार्टी की तरफ से संपूर्ण भारत में कांग्रेस कर्यालयों के बाहर धरना -प्रदर्शन आयोजित हो रहे हैं। मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी भी कांग्रेस पर हमलावर हुए ओैर कहा कि कांग्रेस ने एआई समिट को अपनी नग्न राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि देश तो जानता ही है कि आप पहले से ही नंगे हो फिर कपड़े उतारने की जरूरत क्यों पड़ी? यह दिखाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस अब वैचारिक रूप से कितनी दिवालिया और दरिद्र हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि जब मैं कांग्रेस की आलोचना करता हूं तो ऐसी सुर्खियां न चलाएं कि मोदी ने विपक्ष पर हमला बोला। कांग्रेस को बचाने की ये चालाकियां बंद करें।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस को सपा बसपा सहित कई अन्य छोटे क्षेत्रीय दलो का समर्थन नहीं मिला है जिनको कांग्रेस इंडी ब्लॉक की पार्टियाँ कहती है। कांग्रेस के इस कृत्य का लालू यादव की पार्टी राजद ने भी कड़ा विरोध किया है। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी विरोध किया है। कांग्रेस ने इस तरह का प्रदर्शन करके सहयोगी दलों के बीच भी अपनी फजीहत करवा ली है। आगामी समय में यह दल कांग्रेस से दूरी बनाने पर विचार भी कर सकते हैं यही कारण हे कि इन सभी दलों की प्रधानमंत्री मोदी ने सराहना की है।
कांग्रेस के नेता और प्रवक्ता जिस प्रकार टी वी चैनलों व सोशल मीडिया पर इस हरकत को सही ठहरा रहे हैं उससे स्पष्ट है कि यह कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ही योजना थी। उनका कहना है कि लोकतंत्र मे अपनी बात कहने और सरकार का विरोध करने का अधिकार सबको है, उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग किया है। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की इस हरकत से पुराने परंपरागत कांग्रेसी से भी खुश नहीं हैं और अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे है। पुराने कांग्रेस नेताओं को इस घटना से कोई हैरानी नहीं है अपितु उनका कहना है कि यह बदली हुई कांग्रेस की बदलती हुई संस्कृति की निशानी है। कांग्रेस नेता शशि थरूर भी एआई समिट को अत्यंत सफल आयोजन बता रहे हैं और कांग्रेस के अर्धनग्न प्रदर्शन की निंदा कर रहे हैं। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने के चक्कर में कांग्रेस ने भारत की छवि व भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाया और इस तरह होली के स्वागत में अपने मुंह पर ही कालिख मल ली।
कांग्रेस के नेताओं की दिली इच्छा रही है कि किसी न किसी प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारत की छवि को पूरी दुनिया में खराब किया जाए और भारत में बांग्लादेश व नेपाल जैसी अराजकता का वातावरण पैदा कर अपना स्वार्थ सिद्ध किया जाए किंतु उसका यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा है और यही कारण है कि कांग्रेस हताश होकर नंगी राजनीति पर उतर आई है।

योगी के विदेशी दौरों में सनातन धर्म और विकसित भारत का जलवा

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लखनऊ: प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देश के ऐसे प्रथम मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने भगवा वस्त्र धारण कर सिंगापुर और जापान की सफल विदेश यात्रा की और सनातन की धर्म ध्वजा फहराकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने में सफल रहे। मुख्यमंत्री योगी सिंगापुर और जापान से प्रदेश के विकास के लिए अनेक निवेश प्रस्ताव लेकर आए हैं और कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए हैं, स्वाभाविक है इससे प्रदेश के विकास को एक नया बल मिलेगा।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की पहली विदेश यात्रा जापान की थी और मुख्यमंत्री योगी भी अपनी विदेश यात्रा में सिंगापुर होते हुए जापान पहुंचे यानी कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अब प्रदेश के विकास को गति देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के पदचिह्नों का अनुगमन कर रहे हैं। दोनों ही देशों में मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में जय श्रीराम की गूंज रही, अयोध्या में दिव्य व भव्य राम मंदिर से लेकर काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के निर्माण का उल्लास सिंगापुर और जापान में भी दिखाई दिया। साथ ही मुख्यमंत्री सिंगापुर और जापान में जो बोल रहे थे उसका प्रभाव यूपी व देश की राजनीति पर भी दिखाई दे रहा था। योगी जी के वक्तव्यों पर वार पलटवार खूब हुए किंतु इन विदेश यात्राओं से यह तय हो गया कि अब यूपी का विकास थमने वाला नहीं है । पीडीए वाले हों या फिर बहुजन समाजवादी अब कोई भी यूपी में योगी जी को नहीं रोक सकता।
सिंगापुर व जापान के दौरे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 60 से अधिक संवाद कार्यक्रमों में भाग लिया और राज्य में निवेश को लेकर 500 से अधिक निवेशकों के साथ संपर्क करके निवेश का आमंत्रण दिया। योगी जी की यात्रा के दौरान 1.5लाख करोड़ रुपए के निवेश को लेकर विभिन्न कंपनियों के साथ समझौते हुए और 2.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल को मिले हैं। यह निवेश धरातल पर उतरने के बाद राज्य के पांच लाख युवाओं को कौशल विकास रोजगार के अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री की सिंगापुर और जापान यात्रा के दौरान सिंगापुर टोक्यो और यामानाशी में तीन बड़े निवेश रोड शो भी आयोजित किए गए । इनमें करीब 500 निवेशकों और वित्तीय संसाधनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जापान में मुख्यमंत्री योगी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि हम सूर्यपुत्र हैं ओैर हमें सूर्य जैसी रोशनी चाहिए। उन्होंने निवेशकों को बताया कि यूपी में अब कोई दंगा नहीं होता है, सब चंगा है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिनकी प्रवृत्ति डकैती की थी उन्होंने यूपी को अंधेरे में रखा। अंधेरे मे काम करने वालों को उजाला रास नहीं आता। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने प्रदेश को भय और भ्रष्टाचार से मुक्त कर उजाले की ओर अग्रसर किया है। उन्होंने बताया कि पहले जहां प्रदेश को दंगों और कर्फ्यू की खबरों से पहचाना जाता था वहीं अब दीपोत्सव, महाकुंभ और वैश्विक निवेश उसकी नई पहचान बन रहे हैं। अयोध्या में दीपोत्सव, काशी में देव दीपावली और मथुरा -वृन्दावन में रंगोत्सव सकारात्मक परिवर्तन के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 156 करोड़ से अधिक पर्यटक आए।
निवेश और औद्योगिक साझेदारियों के साथ सिंगापुर और जापान का दौरा यूपी की सांस्कृतिक विरासत के प्रसार के लिए भी महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने प्रमुख नेताओं और कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों और बच्चों को यूपी के पारंपरिक शिल्प से तैयार 500 से अधिक विशिष्ट स्मृति चिह्न भेंट कर प्रदेश की कारीगरी को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। यह पहल वोकल फॉर लोकल तथा आत्मनिर्भर भारत की सोच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का अहम हिस्सा रही। निवेश वार्ताओं के समानांतर सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने का भी प्रयास किया कि यूपी केवल निवेश का गंतव्य नहीं अपितु समृद्ध परंपरा और शिल्प कौशल की धरती भी है। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर और जापान के बच्चों के लिए मंडला आर्ट से बनी 300 कलाकृतियां तैयार करवाई थीं।
विदेशियों ने यूपी की बारीक शिल्पकला की खुले मन से प्रशंसा की। उपहारों में फिरोजाबाद के रंगीन कांच से बनी भगवान श्रीराम, शिव ,राधा -कृष्ण और बुद्ध की प्रतिमाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रही। मुरादाबाद से ब्रास की शिव व बुद्ध प्रतिमाएं, वाराणसी की गुलाबी मीनाकरी से सुसज्जित काशी विश्वनाथ मंदिर का मॉडल, बुद्ध और मोर की कलाकृतियां तथा सहारनपुर की लकड़ी से तैयार शिव और राधा कृष्ण की प्रतिमाएं भेट कीं। इन उपहारों को पाकर बच्चों और निवेशकों के चेहरे खिल उठे। बनारस की मीनाकरी ने विदेशी प्रतिनिधियों को प्रभावित किया। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर की धरती से जेवर एयरपोर्ट का जल्द संचालन प्रारंभ होने की घोषणा की और बताया कि अब प्रदेश का विकास रुकने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने विदेशी दौरे में हिंदी भाषा में संवाद स्थापित कर सभी हिंदी प्रेमियों का भी दिल जीत लिया।
सिंगापुर और जापान दोनों ही देशों में मुख्यमंत्री योगी को अपने बीच देखकर भारतीय समुदाय में उत्साह छा गया और लगभग हर कार्यक्रम में “योगी -योगी“ और जयश्रीराम के नारे लगे। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को राज्य की औद्योगिक नीतियों, इन्फ्रास्ट्रक्चर और बड़े उपभेक्ता बाजार को निवेश के अनुकूल बताया। ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टरइलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, डाटा सेंटर, लाजिस्टिक, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग की सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने यामानाशी में ग्रीन हाइड्रोजन के प्लांट का भी भ्रमण किया। उल्लेखनीय है कि गोरखपुर के खानीपुर गांव में प्रदेश का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट आरंभ हो चुका है।
एक ओर जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान में उत्तर प्रदेश का झंडा गाड़ रहे थे वही दूसरी ओर प्रदेश के उपमुख्यंत्री केशव प्रसाद मौर्य जर्मनी में प्रदेश की ध्वजा लहरा रहे थे । उप मुख्यमंत्री भी प्रदेश के विकास के लिए निवेशकों को आकर्षित करने में सफल रहे। इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरते ही प्रदेश में आर्थिक बदलाव का अनुभव होगा।
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