Online Hindi Workshop on Practical Use of Hindi in Official Work held at IIAS Shimla

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Dr. Akhilesh Pathak

Shimla: The Indian Institute of Advanced Study, Rashtrapati Nivas, Shimla, organized an Online Hindi Workshop today with the objective of strengthening the practical and effective use of Hindi in official work. The workshop was held in the Seminar Room of the Institute and witnessed participation from officers and staff members.

The training session was delivered online by Mr. Ajay Kumar Jha, Deputy Director (Official Language), Ministry of Education, Government of India. In his lecture, Mr. Jha emphasized the importance of using Hindi in original noting, drafting, and official correspondence, stating that effective use of Hindi enhances administrative clarity and efficiency in addition to fulfilling official language policy requirements.

He also highlighted the need for simple and reader-friendly translations, judicious use of technical terminology, and narrowing the gap between official Hindi and commonly used Hindi. Responding to participants’ queries, he provided practical examples to address common challenges faced in day-to-day official Hindi usage.

It was observed during the workshop that such training programmes play a significant role in promoting awareness and strengthening compliance with official language policies within the Institute.

The programme was moderated by Dr. Akhilesh Pathak, Secretary (Official Language) & Public Relations Officer. Participants found the workshop highly useful and practical, and expressed the need for organizing similar capacity-building programmes in the future.

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में सरकारी कार्यों में हिंदी के व्यावहारिक प्रयोग पर ऑनलाइन हिंदी कार्यशाला आयोजित

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डॉ अखिलेश पाठक

शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में आज सरकारी कामकाज में हिंदी के व्यावहारिक एवं प्रभावी प्रयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला संस्थान के संगोष्ठी कक्ष में अपराह्न आयोजित हुई, जिसमें संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की।
कार्यशाला में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के राजभाषा प्रभाग से श्री अजय कुमार झा, उपनिदेशक (राजभाषा) ने ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में श्री झा ने सरकारी कार्यालयों में हिंदी के सहज, सरल एवं व्यावहारिक प्रयोग पर बल देते हुए कहा कि हिंदी में मूल टिप्पणी, प्रारूप लेखन तथा पत्राचार न केवल राजभाषा नीति की अपेक्षा है, बल्कि प्रशासनिक कार्य की स्पष्टता एवं प्रभावशीलता भी बढ़ाता है।

उन्होंने हिंदी में अनुवाद को सरल और बोधगम्य बनाए रखने, तकनीकी शब्दावली के विवेकपूर्ण प्रयोग तथा सरकारी हिंदी और सामाजिक हिंदी के अंतर को कम करने की आवश्यकता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से हिंदी प्रयोग से जुड़ी शंकाओं का समाधान किया।

इस अवसर पर यह भी उल्लेख किया गया कि ऐसी कार्यशालाएं संस्थान में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करने तथा राजभाषा संबंधी दायित्वों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होती हैं।
कार्यक्रम का संचालन राजभाषा सचिव एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अखिलेश पाठक द्वारा किया गया। कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी एवं व्यावहारिक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत ने पॉक्सो के लंबित मामलों का बोझ किया कम: पहली बार दर्ज मामलों से ज्यादा मामलों का हुआ निपटारा

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दिल्ली । पहली बार भारत ने एक वर्ष में दर्ज होने वाले पॉक्सो मामलों से अधिक मामलों का निपटारा किया है। यह न्यायिक प्रणाली में वर्षों से चले आ रहे लंबित मामलों के खिलाफ एक ऐतिहासिक बदलाव है। सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज (सी-लैब) फॉर चिल्ड्रन की रिपोर्ट ‘पेंडेंसी टू प्रोटेक्शन: अचीविंग द टिपिंग पॉइंट टू जस्टिस फॉर चाइल्ड विक्टिम्स ऑफ सेक्सुअल एब्यूज’ के अनुसार वर्ष 2025 में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 80,320 मामले दर्ज हुए, जबकि 87,754 मामलों का अदालती सुनवाई के बाद निपटारा किया गया। इससे निपटाने की दर 109 प्रतिशत तक पहुंच गई। खास बात यह है कि 24 राज्यों में भी पॉक्सो मामलों की निपटान दर 100 प्रतिशत से अधिक रही है। रिपोर्ट में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (पॉक्सो) के तहत सभी लंबित मामलों को चार वर्षों के भीतर खत्म करने के लिए 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतों की स्थापना करने की सिफारिश की गई है।

मुकदमों को लेकर अक्सर “तारीख पर तारीख” की छवि से बदनाम भारत में 2023 तक पॉक्सो के 2,62,089 मामले लंबित थे। लेकिन अब एक अहम बदलाव देखने को मिला है क्योंकि निपटाए गए मामलों की संख्या दर्ज किए गए मामलों से ज्यादा हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार देश एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां न्यायिक व्यवस्था अब सिर्फ लंबित मामलों को संभालने के बजाय उन्हें सक्रिय रूप से कम करना शुरू कर रही है। साथ ही रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि लंबित पॉक्सो मामलों को पूरी तरह खत्म करने के लिए चार साल की अवधि में 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतें स्थापित की जाएं। इसके लिए लगभग 1,977 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना चाहिए, जिसमें निर्भया फंड का भी उपयोग किया जा सकता है।

रिपोर्ट कुछ गंभीर चिंताओं की ओर भी ध्यान दिलाती है। लगभग आधे लंबित मामले दो साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। दोषसिद्धि की दरों में भी लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है और अलग-अलग राज्यों में मामलों की स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई देता है। उदाहरण के तौर पर, पांच साल से ज्यादा समय से लंबित पॉक्सो के सभी मामलों में अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत के चलते सबसे बड़ी भागीदारी है। इसके बाद महाराष्ट्र (24 प्रतिशत) और पश्चिम बंगाल (11 प्रतिशत) का स्थान है। कुल मिलाकर देखा जाए तो पांच साल से अधिक समय से लंबित मामलों में लगभग तीन-चौथाई अकेले सिर्फ इन्हीं तीन राज्यों में है।

न्यायिक व्यवस्था के व्यापक संदर्भ में इन आंकड़ों के दूरगामी असर पर बात करते हुए इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के निदेशक (शोध) पुरुजीत प्रहराज ने कहा, “भारत आज बाल यौन शोषण के खिलाफ अपने संघर्ष में एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। जब न्यायिक व्यवस्था दर्ज किए जाने वाले मामलों से अधिक पॉक्सो मामलों का निपटारा करने लगती है, तब यह सिर्फ आंकड़ों की उपलब्धि नहीं होती, बल्कि यह उस भरोसे की वापसी होती है, जो बच्चों ने व्यवस्था पर खो दिया था। हमारा शोध बार-बार यह दिखाता है कि न्याय में हर दिन की देरी, बच्चे के मानसिक आघात को और गहरा करती है। इसलिए इस गति को बनाए रखना केवल प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है। ताकि हर बच्चे के लिए समय पर संवेदनशील और बाल-केंद्रित न्याय अपवाद नहीं, बल्कि हक़ीक़त बन सके।” इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन, बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए काम करने वाले नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी है। जेआरसी 250 से अधिक सहयोगी संगठनों के साथ देश के 451 जिलों में बाल अधिकारों के लिए काम कर रहा है।

राज्यों में देखें, तो सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो के मामलों के निपटान की दर 150 प्रतिशत से अधिक रही है। वहीं, अन्य सात राज्यों में यह निपटान दर 121 से 150 प्रतिशत के बीच रही, जबकि 10 राज्यों ने 100 से 120 प्रतिशत तक की निपटान दर हासिल की। इन 24 राज्यों ने न सिर्फ 2025 में दर्ज हुए मामलों का निपटारा किया, बल्कि पिछले वर्षों से लंबित मामलों को भी काफी हद तक समाप्त करने में सफलता पाई। ये आंकड़े उन मामलों को दिखाते हैं जो कई साल पहले न्याय प्रणाली में दर्ज हुए थे, लेकिन अब तक उनमें कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। रिपोर्ट बताती है, “किसी मामले की प्रक्रिया के शुरुआती दौर से ही लंबित रहने की समस्या शुरू हो जाती है और व्यवस्था को तय समय सीमा के भीतर मामलों को आगे बढ़ाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।”

रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि पॉक्सो के लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने के मकसद से प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हर साल मामलों के निपटान की दर 100 प्रतिशत से अधिक बनाए रखें। इसके साथ ही जो राज्य न्यायिक प्रक्रिया में पीछे हैं, उन्हें तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग दिया जाए। साथ ही दोषसिद्धि और बरी होने की दरों की नियमित और बारीकी से निगरानी की जाए। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि मामलों के बेहतर विश्लेषण और दस्तावेजों की त्वरित उपलब्धता के लिए एआई आधारित कानूनी शोध उपकरणों और दस्तावेज प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग किया जाए, ताकि न्याय प्रक्रिया और अदालती कार्यवाही अधिक तेज व प्रभावी हो सके।
यह रिपोर्ट 2 दिसंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है, जिन्हें नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी), नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और लोकसभा में पूछे गए सवालों और उनके जवाबों से लिया गया है।

Gaurav Bhagat Academy: Empowering India’s Business Leaders

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Delhi: Founded in 2018 and headquartered in Noida, Gaurav Bhagat Academy (GBA) is India’s premier institution for sales training, business coaching, and growth acceleration. Led by visionary entrepreneur and Grant Cardone-certified trainer Mr. Gaurav Bhagat, GBA empowers individuals, startups, MSMEs, and corporate teams with practical, outcome-driven strategies to scale businesses, master sales techniques, enhance leadership skills, and achieve sustainable, exponential growth.Rewriting the Rules: Gaurav Bhagat Academy Successfully Hosts the 5th Edition of RULE 2026On a crisp winter morning of December 20, 2025, Gaurav Bhagat Academy triumphantly concluded the 5th edition of RULE 2026 — an exclusive, invite-only leadership summit — at the elegant Crowne Plaza in Okhla, New Delhi. This high-energy gathering united India’s top brand decision-makers, founders, CXOs, strategists, aspiring students, and ambitious professionals for a powerful strategic reset ahead of 2026.

Far more than a standard workshop, RULE 2026 delivered an immersive experience designed to unlock the true engines of business growth, leadership relevance, and career acceleration in the coming year.


The day kicked off with an insightful opener on “Why RULE 2026 Matters Now,” setting the stage for Founder Mr. Gaurav Bhagat’s compelling keynote, “Rewriting the Rules for 2026.” He boldly challenged conventional playbooks, delving into how relevance, authority, trust, and leadership presence are evolving rapidly across industries.

A standout session, “AI Unplugged: Beyond the Obvious,” offered hands-on insights into underrated AI tools, advanced prompting techniques, and intelligent automation to boost productivity, sharpen strategic thinking, and elevate decision-making. Attendees also enjoyed a curated networking lunch to foster meaningful connections.

Embodying GBA’s action-oriented ethos, participants received exclusive resources: a comprehensive workbook, the GB Scale and Goal Planner for 2026, and engaged in a guided Vision Board exercise. The event wrapped up with an inspiring certification ceremony, equipping everyone with crystal-clear vision, actionable tools, and a strong launchpad for dominating 2026.

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