3 अप्रैल 1988 : सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् वाकणकर जी की पुण्यतिथि

images.jpeg

भोपाल के समीप भीमबैठका और वैदिककालीन मानव सभ्यता के प्रमाण इन्हीं ने खोजे थे

–रमेश शर्मा

डाक्टर हरिभाऊ वाकणकर की गणना संसार के प्रमुख पुरातत्वविदों में होती है । उन्होंने भारत के विभिन्न वनक्षेत्र के पुरातन जीवन और भोपाल के आसपास लाखों वर्ष पुराने मानव सभ्यता के प्रमाण खोजे । भीम बैठका उन्ही की खोज है । उनके शोध के बाद विश्व भर के पुरातत्वविद् भारत आये और डाक्टर वाकणकर से मार्गदर्शन लिया ।

उनका पूरा नाम श्रीविष्णु श्रीधर वाकणकर था । लेकिन वे हरिभाऊ वाकणकर के नाम से प्रसिद्ध थे । उनका जन्म 4 मई 1919 को मध्यप्रदेश के नीमच नगर में हुआ । पिता श्रीधरजी वाकणकर वैदिक विद्वान थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे । बड़े भाई लक्ष्मण वाकणकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियर थे। उन्हे सिरेमिक कला में विशेषज्ञता प्राप्त थी । लिपियों के विकास विशेषकर देवनागरी के डिजिटलीकरण में विशेषज्ञ के रूप में उनकी ख्याति थी । हरिभाऊ जी की प्रारंभिक शिक्षा नीमच में ही हुई और उच्च शिक्षा केलिये बनारस गये । पारिवारिक पृष्ठभूमि ने उनके भीतर भारतीय संस्कृति के प्रति अटूट स्वाभिमान जाग्रत किया और राष्ट्रीय स्वयं सेवकसंघ से जुड़ने केलिये प्रेरित किया । वे बालवय में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गये थे । हरिभाऊ जी बहुत अध्ययन एवं कल्पनाशील थे, स्मरण शक्ति और स्वत्व वोध विलक्षण था । छात्र जीवन में अपनी कक्षा के साथियों और अन्य मित्रों से परस्पर चर्चा में तर्क सहित वे उन धारणाओं का खंडन करते थे जो विदेशी लेखकों ने भारतीय वाड्मय की गरिमा कम करने के लिये स्थापित की थीं। शिक्षा पूरी कर उन्होंने इसी दिशा में कदम बढ़ाये। उन्होंने भारतीय पुरातन साहित्य का विस्तृत अध्ययन किया और पुराणों कथाओं से संबंधित विवरणों के सजीव प्रमाण खोजे । और अनेक उन तथ्यों को प्रमाणित किया जिन्हे मिथक कहकर नकारा जाता रहा था । इसमें वेद वर्णित सरस्वती नदी का अस्तित्व भी है ।

वाकणकर जी ने सरस्वती नदी खोज केलिये विश्व इतिहास के इस तथ्य को आधार बनाया कि संस्कृतियों के विकास और इतिहास के प्रमाणीकरण में नदियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है । वाकणकर जी ने वैदिक साहित्य में वर्णित सरस्वती नदी की खोज आरंभ की । उन्होंने उपग्रह छवि से प्रमाणित किया कि सरस्वती नदी का प्रवाह हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से होकर गुजरता है । आगे चलकर इस मार्ग केलिये एक परियोजना का गठन हुआ जिसके सलाहकार मंडल कै संयोजक वाकणकर जी बनाये गये । उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता को भी सरस्वती नदी से जुड़े होने के प्रमाण दिये । पुरातात्विक खोज के लिये उन्होने उन्होंने पूरे देश की यात्रा की । गंगा और नर्मदा के किनारे, विन्धय एवं सतपुड़ा पर्वत क्षणियों के मैदानों में लाखों वर्ष पुराने मानव सभ्यता के चिन्ह खोजे । पर उन्हें मालवा से बहुत लगाव था । इसलिये उन्होने नीमच, रतलाम, उज्जैन, इंदौर, कायथा, शाजापुर के साथ भोपाल, रायसेन, विदिशा आदि क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया और वनक्षेत्र में पदयात्राएँ कीं। उनके जीवनवृत के अध्ययन से लगता है प्रकृति से उन्हें कोई अतिरिक्त ऊर्जा प्राप्त थी । वे पुरातात्विक और खंडित प्रतिमाओं को इतने ध्यान से देखते थे कि लगता था उनसे बातें कर रहे हो। कयी बार तो बैठे बैठे उठकर किसी विशिष्ठ स्थान की ओर चल देते थे अथवा चलती ट्रेन में अपनी यात्रा अधूरी छोड़कर जंगल में उतर जाते थे और उन्हें वहाँ कुछ न कुछ पुरातात्विक खजाना मिल ही जाता था ।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग चालीस किलोमीटर दूर

भीमबेटका के प्राचीन शिलाचित्रों की खोज वाकणकरजी ने की थी । भीमबैठका और भोजपुर के आसपास के कुछ चित्र तो लगभग पौने दो लाख वर्ष पुराने प्रमाणित हुये । इन सभी चित्रों का कार्बन-डेटिंग पद्धति से परीक्षण किया गया । इसका सत्यापन अंतराष्ट्रीय शोध कर्ताओं ने किया । इसी शोध के चलते उन्हें 1975 में पद्मश्री अलंकरण मिला ।

वाकणकर जी उज्जैन के सिंधिया ओरियंटल इंस्टीट्यूट से जुड़े थे और घंटाकार के समीप भारतीय कला मंदिर उनकी साधना स्थली था । वे न केवल पुरातत्वविद् थे अपितु अच्छे चित्रकार भी थे । उन्हे जितनी विशिष्टता पुरातात्विक अनुसंधान में प्राप्त थी वे उतने ही श्रेष्ठ संगठक थे । उनका पूरा जीवन ऋषि परंपपरानुरूप था । उन्होंने अपने शिष्यों की एक विशाल मंडली तैयार की । उनमें श्याम सुंदर सक्सेना, गोमती संकुशल, सचिदा नागदेव , मुजफ्फर कुरेशी, रहीम गुट्टीवाला आदि प्रमुख रहे । अपने शिष्यों की टोली के साथ उन्होंने चंबल और नर्मदा के बीहड़ों की खोज की और इंग्लैड तक यात्रा की । उनका शिष्य मंडल मानों परिवार था, उनके व्यक्तित्व का अंग था । वे सुनते अधिक थे बोलते कम थे । और जो बोलते मानों ब्रह्म वाक्य होता । उन्होंने जीवन में कभी विश्राम नहीं किया । उन्होंने निरंतर यात्राएँ कीं। भारत के सभी महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थानों के साथ विश्व के अनैक स्थानों की । वे कभी भी एक झोला कंधे पर टाँग कर निकल पड़ते थे । जिस प्रकार उनके जीवन का आरंभ भारतीय परंपरा, संस्कृति और श्रेष्ठा को प्रतिष्ठित करने के अभियान के साथ हुआ था । जीवन का समापन भी कर्मपथ पर ही हुआ । उन्होंने 4 मई 1988 को सिंगापुर में जीवन की अंतिम श्वाँस ली ।

यह उनके व्यक्तित्व और कार्य क्षमता और ऊर्जा की विलक्षण विशेषता थी कि पुरातात्विक अन्वेषण में अपने अतुलीय और अथक कार्य के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रकल्पों में भी उनकी सक्रियता निरन्तर रही । वे 1981 में स्थापित संस्कार भारती के संस्थापक महामंत्री रहे । वनक्षेत्र में अपने शोध कार्य के साथ उन्होने संघ की योजनानुसार सामाजिक और शैक्षणिक उत्थान कार्य भी किये ।

पुरातात्विक अनुसंधान और सामाजिक कार्यों के साथ वाकणकरजी ने सिक्कों और शिलालेखों का संग्रह भी किया । उन्होंने ईसापूर्व 5 वीं शताब्दी से लेकर अब तक के लगभग 5500 सिक्कों और संस्कृत, प्राकृत, ब्राह्मी आदि भाषाओं के लगभग 250 शिलालेखों का संग्रह किया । उनके योगदान की स्मृति को सजीव रखने केलिये संस्कार भारती ने 4 मई 2019 से 3 मई 2020 के बीच उनकी जन्म शताब्दी वर्ष का आयोजन किया था ।
उनका शरीर भले आज संसार में नहीं है पर उनके अनुसंधान सजीव है । वे पुरातात्विक अनुसंधान के मील के पत्थर थे । उनके द्वारा स्थापित मानदंड आज भी अनुसंधानकर्ताओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

महिला मतदाता निर्णायक भूमिका : मोदी और महिला सशक्तिकरण

nari-shakti-puraskar-modi-4.jpg

2024 लोकसभा चुनाव सिर पर है। इस बार भी चुनाव में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका में रहेंगी। इसलिए भारतीय जनता पार्टी विकास के मुद्दे के साथ- साथ महिला सशक्तिकरण को लेकर चुनाव प्रचार कर रही है।

भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण आशा है कि उसे महिलाओं का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा। इसके अनेक कारण हैं। वास्तव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने दस वर्ष के शासन काल में महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किए, अपितु उनके मान- सम्मान को भी विशेष महत्त्व दिया। वे दावे से कहते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा, सुविधा और सशक्तिकरण – ये मोदी की गारंटी है। उनका कहना है कि मोदी ने बहन- बेटियों को लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण की गारंटी दी थी। वह पूर्ण हो चुकी है। मोदी ने मुस्लिम बहनों को तीन तलाक की कुरीति से मुक्ति दिलाने की गारंटी भी दी थी। ये गारंटी भी मोदी ने पूर्ण की है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के कार्यों में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का नाम प्रमुख है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए सदैव से ही प्रतिबद्ध रही है। मोदी सरकार ने समय- समय पर दोहराया है कि उनकी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी प्रयास का ही परिणाम है। सितम्बर 2023 पारित यह विधेयक लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करता है। इसके पारित होने से महिलाओं की एक लम्बित मांग पूर्ण हुई है। इस विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने केवल टाल- मटोल का व्यवहार ही किया था। उन्होंने इस विधेयक को लेकर केवल महिलाओं के वोट हथियाने का ही प्रपंच रचा। उन्होंने इस संबंध में कभी गंभीरता से कार्य नहीं किया। किन्तु प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस विधेयक के संबंध में पूर्ण निष्ठा एवं गंभीरता से कार्य किया तथा इसे पारित करवाया। इसी प्रकार बिना किसी भेदभाव के मुस्लिम महिलाओं के हित में भी निर्णय लेते हुए उन्हें तीन तलाक की कुरीति से मुक्ति दिलवाई। इस पर भी उन्हें निशाना बनाया गया, परन्तु उन्होंने किसी की नहीं सुनी और मुस्लिम बहनों के हित में निर्णय लिया। इन सब निर्णयों के कारण ही महिलाओं में मोदी सरकार विशेषकर श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति विश्वास बढ़ा है। इसीलिए उन्हें महिलाओं का भरपूर जनसमर्थन प्राप्त होता रहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नारी शक्ति को अधिक से अधिक अवसर देना अत्यंत आवश्यक है। भाजपा सरकार के प्रयास से आज देश के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं के लिए नए रास्ते बन रहे हैं। मोदी सरकार महिलाओं के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा एवं रोजगार आदि से संबंधित अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। महिलाओं को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए युद्धस्तर पर शौचालयों का निर्माण करवाया जा रहा है। इससे एक ओर महिलाओं को मान मिल रहा है, दूसरी ओर उन्हें अपराधों से भी मुक्ति मिल रही है। महिलाएं शौच के लिए अंधेरे में ही निर्जन स्थानों पर जाती हैं। ऐसी परिस्थिति में वे अपराधी तत्वों का शिकार बन जाती हैं। इसके अतिरिक्त समय पर नित्य कर्म से न निपटने के कारण वे अनेक रोगों की भी चपेट में आ जाती हैं। किन्तु शौचालयों के निर्माण से उन्हें इस समस्या से छुटकारा मिल रहा है। आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार देश में विगत नौ वर्षों में 12 करोड़ शौचालय बनाए गए हैं, जिससे देश को खुले में शौच के अभिशाप से मुक्ति मिली है।
वास्तव में मोदी सरकार महिलाओं के हित के अनेक कार्य कर रही है। वह उनकी प्रत्येक छोटी से छोटी बात का भी ध्यान रख रही है। महिलाओं का स्वप्न होता है कि उनका भी अपना निजी मकान हो। इस बात को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार निर्धन लोगों को पक्के आवास उपलब्ध करवा रही है। इनके पंजीकरण में महिलाओं का नाम सम्मिलित किया जा रहा है। इसके कारण अब महिलाएं भी अपने घर की स्वामिनी बन रही हैं। उनका स्वयं के घर का स्वप्न पूर्ण हो रहा है। इतना ही नहीं मोदी सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी तीव्र गति से कार्य कर रही है। महिलाओं को रोजगार के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षित महिलाओं को स्वरोजगार अर्जित करने के लिए ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे वे कुटीर उद्योग चालू कर रही हैं। जो महिलाएं सिलाई का कार्य जानती हैं तथा उनके पास सिलाई मशीन क्रय करने के लिए धन नहीं हैं उन्हें निशुल्क सिलाई मशीनें वितरित की जा रही हैं। ये महिलाएं अब घर पर ही सिलाई का कार्य करके धन अर्जित कर रही हैं। आत्मनिर्भरता के कारण उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे अपनी इच्छा से अपना धन व्यय कर रही हैं। उनके जीवन यापन की शैली में परिवर्तन आया है। यह सब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की महिला हितैषी योजनाओं का ही परिणाम है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि भारत की नारी शक्ति, विकसित भारत की एक सशक्त स्तंभ है। भारत की नारी शक्ति की आर्थिक शक्ति बढ़े, इसके लिए बीते दस वर्षों में बीजेपी सरकार ने निरंतर कार्य किया है। जनधन योजना के अंतर्गत करोड़ों बहनों के बैंक खाते खोले हैं। इन दस वर्षों में देश में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की संख्या दस करोड़ को पार कर गई है। देश में दस वर्षों में बहनों के इन समूहों को स्वरोजगार के लिए आठ लाख करोड़ रुपए की सहायता बैंकों से दिलवाई गई है।

श्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में कहा था कि आज देश में कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है, जिसमें देश की नारी- शक्ति पीछे रह गई हो। एक और क्षेत्र, जहां महिलाओं ने अपनी नेतृत्व क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन किया है, वह है- प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और स्वच्छता। केमिकल से हमारी धरती माँ को जो कष्ट हो रहा है, जो पीड़ा हो रही है, जो दर्द हो रहा है – हमारी धरती माँ को बचाने में देश की मातृशक्ति बड़ी भूमिका निभा रही है। देश के कोने- कोने में महिलाएं अब प्राकृतिक खेती को विस्तार दे रही हैं। आज अगर देश में ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत इतना काम हो रहा है तो इसके पीछे पानी समितियों की बहुत बड़ी भूमिका है। इस पानी समिति का नेतृत्व महिलाओं के ही पास है। इसके अलावा भी बहनें-बेटियां, जल संरक्षण के लिए चौतरफा प्रयास कर रही हैं।

मोदी सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा, सुविधा एवं सशक्तिकरण के लिए किए गये कार्यों की सफलता ही है कि आज महिलाएं आत्मविश्वास के साथ निर्भीक होकर घर से बाहर जाकर कार्य कर रही हैं। कहा जाता है कि महिला मतदाता साइलेंट वोटर होती हैं। महिला मतदाता जिस दल को अपना समर्थन देती हैं, उसे ही बहुमत प्राप्त होता है तथा सरकार उसी दल की बनती है। विशेष बात है कि भारतीय जनता पार्टी एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध विरोधियों द्वारा दुष्प्रचार करने के पश्चात भी मुस्लिम महिलाएं इन्हें अपना भरपूर समर्थन दे रही हैं। इस बार यह देखना अत्यंत रोचक होगा कि महिलाएं उन्हें कितना समर्थन देती हैं।

उनका कहना है कि उन्हें उन निर्णयों पर गर्व है जिन्होंने महिला सशक्तिकरण को और मजबूत किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि उनका तृतीय कार्यकाल भी विकास एवं महिला सशक्तिकरण को समर्पित रहेगा।

(लेखक – लखनऊ विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर है)

कोलकाता नाइटराइडर्स ने आईपीएल का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर बनाया

kkr-2.jpg

विशाखापट्टनम। 17वें सीजन में कल बुधवार को कोलकाता नाइटराइडर्स ने दूसरा सबसे बड़ा स्कोर 272 रन बनाया, जिसके जबाब में दिल्ली की टीम 166 रन ही बना सकी। इस तरह कोलकाता ने विशाखापट्टनम में IPL के 16वें मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स को 106 रन से हराकर लगातार तीसरे मैच में भी जीत हासिल की।

गौरतलब हो कि यह मौजूदा सीजन में रनों के लिहाज से किसी भी टीम की सबसे बड़ी जीत है। कोलकाता की टीम ने आईपीएल में पहली बार अपने शुरुआती तीन मैचों में जीत हासिल की है।

विशाखापट्टनम में बुधवार को खेले गए मुकाबले में कोलकाता ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 272 रन बनाए। जवाबी पारी में दिल्ली कैपिटल्स की टीम 17.2 ओवर में 166 रन पर ऑलआउट हो गई। सुनील नरेन प्लेयर ऑफ द मैच रहे। उन्होंने 39 बॉल पर शानदार 85 रन की पारी खेली।

कोलकाता ने दिल्ली के खिलाफ खेले गए मैच में IPL इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर बनाया। पिछले हफ्ते सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) ने मुंबई इंडियंस (MI) के खिलाफ IPL के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर 20 ओवर में तीन विकेट खोकर 277 रन बनाए थे।
दिल्ली के खिलाफ 272 रन बनाने के साथ कोलकाता की टीम ने इस लीग में अपना सबसे बड़ा स्कोर बनाया। इससे पहले कोलकाता ने 2018 के सीजन में किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ इंदौर में 245/6 रन का स्कोर बनाया था।

धार की भोजशाला में ASI का सर्वे 13वें दिन भी जारी

3-1.png

भोपाल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के आदेश पर धार की ऐतिहासिक भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) विभाग का सर्वे बुधवार को 13वें दिन भी जारी है। दिल्ली और भोपाल के अधिकारियों की 25 सदस्यीय सर्वे टीम ने सुबह करीब आठ बजे मजदूरों के साथ भोजशाला परिसर में प्रवेश किया और वैज्ञानिक पद्धति से सर्वे का काम शुरू किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रही। सुरक्षा व्यवस्था के चाक चौबंद इंतजाम किए गए हैं।

आज के सर्वे में विशेष रूप से भीतर खुदाई का कार्य शुरू हो सकता है। हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से इसको लेकर कोई भी खुलासा नहीं किया जा रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इस पूरे मामले को गोपनीय रखकर अदालत को ही रिपोर्ट प्रस्तुत करना है। सर्वे टीम सुबह 8 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक सर्वे कार्य करेगी। फिलहाल, सर्वे का काम जारी है और इस काम में आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद , एएसआई ने 22 मार्च को भोजशाला परिसर में पुरातात्विक सर्वेक्षण शुरू किया। हिंदुओं के लिए भोजशाला परिसर देवी वाग्देवी को समर्पित एक मंदिर है, जबकि मुसलमानों के लिए, यह कमल मौला मस्जिद का स्थान है। 2003 में एक व्यवस्था के अनुसार, हिंदू मंगलवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक परिसर में पूजा करते हैं जबकि मुस्लिम शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करते हैं।

scroll to top