ब्लैकमेंलिग के आरोप में पत्रकार गिरफ्तार

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तीन टीवी पत्रकारों चंचल दुबे, कुलदीप दुबे व प्रवीण दुबे के खिलाफ उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के कोतवाली में एसएसपी आकाश तोमर के निर्देश पर IPC की धारा 383, 392, 504 व 506 में मुकदमा पंजीकृत किया गया है. पत्रकारों पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगा है. तीनों पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया गया है. इस मामले में एक महिला पत्रकार को भी आरोपी बताया गया है जो फरार है. कोतवाली में अपराध संख्या 115/2021 में इटावा के तीन पत्रकारों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिए जाने और गिरफ्तारी होने से मीडिया में हलचल है.

सूचना के अनुसार पुलिस ने तीन पत्रकारों को इटावा में सिद्धि नर्सिंग होम के संचालक से ब्लैकमेंलिग करने के आरोप में गिरफ्तार किया है. एक महिला पत्रकार फरार है. तीनों पत्रकारों की गिरफ्तारी इटावा एसएसपी आकाश तोमर के निर्देशन में सदर कोतवाली पुलिस ने की है. गिरफ्तार किए गए पत्रकारों में हिंदी खबर चैनल के मनोज कठेरिया, नेटवर्क 10 के कुलदीप दुबे और एक अन्य पत्रकार प्रवीण दुबे हैं. इन पत्रकारों की गिरफ्तारी की खबर के बाद से न्यूज वन इंडिया की महिला पत्रकार चंचल दुबे फरार हो गयी है. इसकी तलाश में इटावा कोतवाली पुलिस छापेमारी कर रही है.

बताया जाता है कि इन चारों पत्रकारों ने नर्सिंग होम संचालक से नर्सिंग होम से संबंधित एक खबर को रोकने और नर्सिंग होम को सीज होने से बचाने के एवज में एक लाख रुपये की रिश्वत ली थी. बावजूद इसके नर्सिंग होम को सीएमओ ने सीज कर दिया. इस कथित रिश्वत की रकम को वापस करवाने के लिये संचालक के मामा व इटावा के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी सिंह ने इन चारों पत्रकारों से काफी अनुनय विनय की. लेकिन इन पत्रकारों ने ब्लैकमेलिंग की रकम को वापस नहीं किया. इसके बाद नर्सिंग होम संचालक ने इन चारों पत्रकारो के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया. पुलिस ने तीन पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया है. इस प्रकरण की वायरल आडियो से भी साबित हो रहा है कि इन पत्रकारों ने नर्सिंग होम संचालक से ब्लैकमेलिंग की है।

जानिये कैसी रही TV पर विज्ञापनों के मामले में इस साल की शुरुआत

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वर्ष 2017 के बाद से इस साल जनवरी-फरवरी में कुल एडवर्टाइजिंग वॉल्यूम, टीवी चैनल्स की रेटिंग जारी करने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया की एडवर्टाइजिंग रिपोर्ट 2021 के अनुसार सबसे ज्यादा रहा है। खास बात यह है कि इस दौरान एडवर्टाइजर्स और ब्रैंड्स की संख्या कम रहने के बावजूद एडवर्टाइजिंग वॉल्यूम इतना ज्यादा रहा है।  

रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की शुरुआत में जनवरी-फरवरी में ऐड वॉल्यूम 21 प्रतिशत तक बढ़ गया और यह वर्ष 2017 के बाद से सबसे ज्यादा हो गया।

बार्क इंडिया के हेड आदित्य पाठक का कहना है, ‘वर्ष 2020 की दूसरी छमाही में मिली गति को बरकरार रखते हुए टीवी ऐड वॉल्यूम की जनवरी-फरवरी में काफी अच्छी शुरुआत रही और यह पिछले पांच वर्षों के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच गया। इस दौरान तमाम सेक्टर्स/कैटेगरीज और नॉन एफएमसीजी ब्रैंड्स ने भी टीवी पर अपनी मौजूदगी बढ़ाई।’

पिछले साल की तुलना में जनवरी-फरवरी 2021 में  टॉप जॉनर्स में मूवीज-म्यूजिक और यूथ ने समग्र ऐड वॉल्यूम में क्रमशः 25प्रतिशत और 24प्रतिशत की औसत वृद्धि से अधिक वृद्धि दर्ज की। इसके बाद जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स और न्यूज ने क्रमश: 21 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की।

 जनवरी से फरवरी के दौरान टॉप 10 एडवर्टाइजर्स ने जहां 45 प्रतिशत के योगदान और 35 प्रतिशत ग्रोथ के साथ टीवी ऐड वॉल्यूम को आगे बढ़ाया, वहीं अगले 40 एडवर्टाइजर्स ने 25 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज कराई।

टीवी एडवर्टाइजिंग में वर्ष 2020 में कई नई एंट्रीज हुई थीं और डिजिटल सेगमेंट खासकर ई-कॉमर्स कैटेगरी में एडवर्टाइजर्स की संख्या बढ़ी थी, वर्तमान अवधि के लिए भी यही स्थिति रही। जनवरी-फरवरी 2021 में ई-कॉमर्स में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे टीवी विज्ञापन में लगातार वृद्धि देखी गई।

इस साल अन्य कैटेगरीज जैसे रिटेल और बिल्डिंग, इंडस्ट्री और लैंड मैटीरियल्स में विज्ञापन खर्च वर्ष 2020 की तुलना में बढ़ रहा है। जनवरी-फरवरी 2021 के दौरान लाइजॉल, डेटॉल और हार्पिक जैसे ब्रैंड्स का सबसे ज्यादा विज्ञापन रहा, वहीं तमाम नॉन एफएमसीजी ब्रैंड्स ने भी इस अवधि में टीवी पर अपनी मौजूदगी बढ़ाई।

11 और चैनल्स देखने को मिलेंगे DD के फ्रीडिश पर

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‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम प्लेटफॉर्म ‘फ्रीडिश’ पर खाली पड़े अनारक्षित एमपीईजी-4 स्लॉट्स के 11 विजेताओं की घोषणा नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ ने कर दी है। इसमें 10 न्यूज चैनल्स हैं। 16 मार्च को हुई 53वीं ई-नीलामी में प्रसार भारती को करीब 10 करोड़ रुपये की कमाई हुई है।

News 24 चैनल जिसे 52वीं ई-नीलामी में MPEG-2 स्लॉट जीतने में सफलता नहीं मिली थी, इस ई-नीलामी में स्लॉट जीतने वालों में शामिल है। इसके अलावा इस लिस्ट में Sudarshan TV, Sahara Samay, India News, News State UP/UK, News India 24X7, News 18 UP/UK, India News UP/UK, Chardikla Time TV, और Jantantra News शामिल हैं। इन सभी चैनल्स की बोली 76 लाख से 1.12 करोड़ रुपये रखी गई।

MPEG-4 के लिए आम तौर पर 16 स्लॉट्स की नीलामी की जाती है, लेकिन इस बार यह एक अपवाद था, क्योंकि MPEG-2 की नीलामी में अधिक न्यूज चैनल्स को समायोजित करने के लिए सूची से हटाए गए 4 डीडी चैनल्स को MPEG-4 स्लॉट दिए जाएंगे।

3.1 अरब विज्ञापनों पर Google ने लगाई रोक

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वर्ष 2020 की अपनी वार्षिक विज्ञापन सुरक्षा रिपोर्ट यानी कि ऐड सेफ्टी रिपोर्ट टेक कंपनी गूगल ने जारी की है। यह रिपोर्ट बुरे विज्ञापनों को रोकने के पीछे के प्रयासों पर प्रकाश डालती है और दिखाती है कि गूगल अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म्स को कैसे पारदर्शी बना रहा है। दरअसल, गूगल बुरे विज्ञापनों से परेशान हो चुका है, इसीलिए 2020 में कंपनी ने हर घंटे 5700 से ज्‍यादा विज्ञापनों पर रोक ही नहीं लगाई, बल्कि उन्‍हें हटा दिया है।

बुधवार को अपनी रिपोर्ट के जरिये गूगल ने यह जानकारी दी कि उसने पिछले साल दुनियाभर में कोरोना वायरस से जुड़े 9.9 करोड़ विज्ञापनों समेत कुल 3.1 अरब बुरे विज्ञापनों को अपने प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया है, जो यूजर्स को गलत जानकारी दे रहे थे। साथ ही टेक कंपनी ने 6.4 अरब अतिरिक्‍त विज्ञापनों पर पाबंदी भी लगाई है। बता दें कि ऐसा पहली बार हुआ है जब गूगल ने उन विज्ञापनों की जानकारी भी साझा की है, जिन पर पाबंदी लगाई गई है।

दुनियाभर में स्‍थानीय कानूनों व नियमों के आधार पर गूगल ने रोक लगाई है। अब इसके प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ वही विज्ञापन दिखेंगे, जिनको कंपनी ने सभी मानकों के आधार पर मंजूरी दी है। कंपनी ने अपनी सालाना ऐड सेफ्टी रिपोर्ट 2020 में बताया है कि नियमों का उल्‍लंघन करने पर हटाए गए विज्ञापनों की संख्‍या में 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी ने 17 लाख से ज्‍यादा विज्ञापनों को पॉलिसी का उल्‍लंघन करने की वजह से हटाया है। वहीं, गूगल ने डिटेक्‍शन सिस्‍टम की चोरी करने की कोशिश करने वाले 86.7 करोड़ विज्ञापनों को या तो ब्‍लॉक कर दिया या पूरी तरह से हटा दिया है। गूगल ने यह भी बताया कि नीतियों को गलत तरीके से पेश (Misrepresentation of Policies) करने की वजह से उसने 10.1 करोड़ विज्ञापनों को हटा दिया है।

2020 में विज्ञापनदाताओं और प्रकाशकों के लिए टेक कंपनी ने 40 से भी ज्यादा नीतियों को या तो जोड़ा या उसमें बदलाव किया था। गूगल ने कहा कि पिछले साल महामारी से संबंधित गलत और भ्रामक विज्ञापन सबसे बड़ी चिंता का कारण थे। इनमें चमत्‍कारिक इलाज, एन-95 फेस मास्‍क की कमी और हाल में वैक्‍सीन को लेकर आने वाले जैसे फर्जी विज्ञापन शामिल थे।

पिछले साल चूंकि दुनियाभर में COVID-19 मामलों की संख्या में बेहताशा बढ़ोतरी देखने को मिली थी, इसलिए इससे जुड़े प्रॉडक्ट्स और इलाज का दावा करने वाले झूठे प्रॉडक्ट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली थी, जिसके चलते ही गूगल ने कोरोना वायरस को लेकर गलत विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए कोविड विज्ञापन नीति जारी की थी। साथ ही कंपनी ने 2020 में विज्ञापनों के साथ ही कोविड या ग्‍लोबल हेल्‍थ इमरजेंसी से ऐसी जुड़ी सामग्री को रोकने के लिए एक नई पॉलिसी भी पेश की थी, जो वैज्ञानिक तथ्‍यों के उलट थीं।

गूगल ने अप्रैल 2020 में विज्ञापनदाता पहचान सत्‍यापन कार्यक्रम भी शुरू किया। इसके तहत अभी 20 देशों के विज्ञापनदाताओं का सत्‍यापन किया जा रहा है। गूगल के विज्ञापन निजता व सुरक्षा विभाग के उपाध्‍यक्ष स्‍कॉट स्‍पेंसर ने कहा कि हजारों कर्मचारियों ने यूजर्स, क्रिएटर्स, पब्लिशर्स और एवर्टाइजर्स की सेफ्टी के लिए 24 घंटे काम किया।

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