विधानसभा का अपना टीवी चैनल लॉन्च करनेवाला दूसरा राज्य बना झारखंड

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विधानसभा की कार्यवाही का प्रसारण करने के लिए झारखंड में एक नया चैनल शुरू किया गया है, जिसे ‘झारखंड विधानसभा टीवी’ (JVSTV) नाम दिया गया है। झारखंड विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण विधानसभा के अपने टीवी चैनल के साथ-साथ यूट्यूब चैनल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी होगा।

मंगलवार को ‘झारखंड विधानसभा टीवी’ और स्टूडियो का शुभारंभ और लोकार्पण विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि चैनल का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में भी जनता के बीच सीधे संचार के माध्यम से विधानसभा की कार्यवाही के बारे में जागरूकता पैदा करना है। हमने देखा है कि ‘संसद टेलीविजन नेटवर्क’ के तहत लोकसभा और राज्यसभा के चैनल कितने सफल हुए हैं। लिहाजा इस चैनल को शुरू करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं आम जनता तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि लोगों को यह जानने का अधिकार है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि विधायिका में क्या कर रहे हैं। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा के अधिकारियों और कर्मचारियों को इसके लिए शुभकामनाएं और बधाई दी। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने अपने प्रदर्शन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो ने कहा कि विधानसभा ने बदलते समय को स्वीकार किया है और सदन की कार्यवाही सीधे लोगों तक ले जाने का फैसला किया है।

इस चैनल के लॉन्च होने के साथ झारखंड अब देश का ऐसा दूसरा राज्य बन गया है, जहां इसकी विधानसभा का अपना टीवी चैनल है। इससे पहले सदन की कार्यवाही का प्रसारण करने के लिए केरल ने पिछले साल अगस्त में ‘सभा टीवी’ लॉन्च किया था।

जानिये, सरकार का प्रिंट मीडिया व निजी चैनल्स के विज्ञापनों पर खर्च

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वित्तीय वर्ष 2021 में 12 मार्च तक सूचना-प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन ने प्रिंट मीडिया और प्राइवेट सैटेलाइट चैनल्स पर 73.18 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, BOC द्वारा अखबारों सहित प्रिंट मीडिया पर 62.01 करोड़ रुपए खर्च किए गए, जबकि प्राइवेट केबल एंड सैटेलाइट चैनल्स पर 11.17 करोड़ रुपए खर्च किए गए। वहीं, इस दौरान सोशल मीडिया पर विज्ञापनों पर कोई खर्चा नहीं किया गया।

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020 में प्रिंट मीडिया, केबल एंड सैटेलाइट चैनल्स और सोशल मीडिया पर कुल मिलाकर 157.64 करोड़ रुपए की राशि खर्च की थी। इस दौरान लगभग 128.96 करोड़ रुपए प्रिंट मीडिया पर खर्च किए गए, जबकि इसके बाद प्राइवेट केबल एंड सैटेलाइट चैनल्स पर 25.68 करोड़ रुपए और सोशल मीडिया 3 करोड़ रुपए पर खर्च किए गए।

वित्तीय वर्ष 2019 में विज्ञापन खर्च की बात की जाए तो, सरकार ने इस दौरान प्रिंट मीडिया पर 301.03 करोड़, टीवी चैनल्स पर 123.01 करोड़ और सोशल मीडिया पर 2.6 करोड़ रुपए खर्च किए। इस तरह से कुल मिलाकर 426.64 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई।  

प्रिंट मीडिया और निजी चैनल्स पर बीओसी ने वित्तीय वर्ष 2016 में 624.23 करोड़ रुपए खर्च किए। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2017 में 621.44 करोड़ रुपए और वित्तीय वर्ष 2018 में 572 करोड़ रुपए खर्च किए।

कोलकाता में हिन्दुस्थान समाचार संवाददाता पर हमला

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मंगलवार को कोलकाता में समाचार एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार के पत्रकार पर हमला किया गया। यह घटना कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान हुई। पत्रकार वार्ता में शामिल हिन्दुस्थान समचार एजेंसी के  ओम प्रकाश सिंह हमले में मामूली रूप से घायल हुए हैं। पीड़ित पत्रकार ओम प्रकाश सिंह ने कोलकाता के मैदान थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

कोलकाता के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार और फोटोग्राफर गैर-सरकारी संस्था आल इंडिया एकता फाउंडेशन द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में   उपस्थित थे। इस दौरान फाउंडेशन की तरफ से विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा की गई। इसकी वजह के तौर पर तृणमूल कांग्रेस का धर्मनिरपेक्ष होना बताया गया। 

घायल पत्रकार ओम प्रकाश सिंह के मुताबिक धर्मनिरपेक्षता को लेकर उन्होंने एक सवाल किया जिसका उत्तर भी मिला लेकिन पत्रकार वार्ता समाप्त होने के बाद जब वे कुछ पत्रकारों के साथ बातचीत कर रहे थे तभी आयोजकों में से एक व्यक्ति उनके पास आया और उनसे पूछा कि वे किस मीडिया संस्थान के लिये काम करते हैं? उत्तर में हिन्दुस्थान समाचार का नाम सुनकर वह व्यक्ति वहां से चला गया लेकिन कुछ ही देर में वह आया और ओम प्रकाश पर घूंसे बरसाने लगा हालांकि वहां मौजूद पत्रकारों और प्रेस क्लब के सुरक्षाकर्मियों ने उसे जल्द काबू में ले लिया। घटना में आस पास खड़े कुछ अन्य पत्रकारों को भी चोटें आई हैं। 

पीड़ित पत्रकार ओम प्रकाश ने मामले की शिकायत मैदान थाने में दर्ज कराई है। उधर,  कोलकाता प्रेस क्लब ने क्लब के अन्दर हुई इस घटना की कडी निंदा की है। क्लब ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घटना की भर्त्सना की। क्लब प्रबंधन ने मामले की जांच पूरी होने तक आयोजक संस्था एकता फाउंडेशन को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ‘लर्निंग टू लर्न’ पर जोर : अमित खरे

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‘मीडिया शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन’ पर आईआईएमसी में विमर्श का आयोजन

”अगर हमें भारत को वर्ष 2040 में ‘नॉलेज पावर’ बनाना है, तो ज्ञान प्राप्त करने के साथ- साथ नए ज्ञान का सृजन भी करना होगा। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ‘लर्निंग टू लर्न’ पर जोर दिया गया है।” यह विचार शिक्षा तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव और आईआईएमसी के चेयरमैन अमित खरे ने सोमवार को भारतीय जन संचार संस्थान और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित विमर्श के दौरान व्यक्त किये। ‘मीडिया शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन’ पर आयोजित इस विमर्श में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ल, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. बलदेव भाई शर्मा और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयोजक अतुल कोठारी समेत मीडिया शिक्षण से जुड़े देश के प्रमुख विद्धानों ने हिस्सा लिया। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अमित खरे ने कहा कि भारत की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का दृष्टिकोण वैश्विक है, लेकिन उसकी जड़ें भारतीय संस्कृति से जुड़ी हुई हैं। हम विश्व समुदाय के अंग हैं, इसलिए हमारी शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए जिससे भारतीय संस्थान विश्व के सबसे अच्छे शिक्षण संस्थानों में गिने जाएं। उन्होंने कहा कि मीडिया शिक्षा के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। संस्थानों ने कई वर्षों से अपने पाठ्यक्रमों में बदलाव नहीं किया है। इसलिए मीडिया शिक्षण संस्थानों को वर्तमान समय की जरुरतों के अनुसार पाठ्यक्रम निर्माण करना चाहिए।

खरे ने कहा कि मीडिया और एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में पिछले वर्ष 34 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है। इसमें विशेष तौर पर एनिमेशन, गेम्स और वीएफएक्स के क्षेत्र में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है। इसलिए मीडिया शिक्षकों को इन विषयों पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक एजुकेशन हब का निर्माण हमारा लक्ष्य होना चाहिए, जहां विद्यार्थियों को देश के अन्य संस्थानों और उनके पाठ्यक्रमों से जुड़ी जानकारी हासिल हो सके। इसी के द्वारा भारत की ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाया जा सकता है।

आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि मीडिया शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मीडिया एजुकेशन काउंसिल की आवश्यकता है। इसकी मदद से न सिर्फ पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा के पाठ्यक्रम में सुधार होगा, बल्कि मीडिया इंडस्ट्री की जरुरतों के अनुसार पत्रकार भी तैयार किये जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा के पास विदेशी मॉडल की तुलना में बेहतर संचार मॉडल हैं। इसलिए हमें संवाद और संचार के भारतीय मॉडल को मीडिया पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए।

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ल ने कहा कि भारत में अब तक संस्थान केंद्रित शिक्षा प्रणाली पर जोर दिया जाता था, लेकिन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने ‘सब पढ़ें और सब बढ़ें’ का रास्ता हमें दिखाया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षकों को नए प्रयोगों के लिए अवसर मिल रहा है। इसलिए ये हमारा दायित्व है कि हम अपने विद्यार्थियों को इस तरह तैयार करें, कि वे चुनौतियों को अवसर में बदल पाएं।

इस अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयोजक अतुल कोठारी ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय का नाम पूर्व में मानव संसाधन मंत्रालय था, लेकिन मेरा मानना है कि मनुष्य ‘सोर्स’ तो हो सकता है, लेकिन ‘रिसोर्स’ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इस नीति में समाज के सभी वर्गों के उत्थान की बात कही गई है। इसलिए सभी मीडिया संस्थानों को साझा कार्य करने का स्वभाव अपनाना होगा। इसके अलावा कंटेट प्रोडक्शन, कंटेट मैनेजमेंट और कंटेट डिस्ट्रीब्यूशन जैसे नए विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा।

कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाहिद रसूल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2040 के भारत को ध्यान में रखकर बनाई गई है। भारत युवाओं का देश है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से इसे एक नई आर्थिक शक्ति बनाने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर हम विश्व गुरु बनना चाहते हैं, तो भारत के प्रत्येक व्यक्ति को समान शिक्षा के अवसर मिलने चाहिए।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि एक वक्त था जब लोगों का मानना था कि पत्रकार पैदा होते हैं और पत्रकारिता पढ़ा कर सिखाई नहीं जा सकती। लेकिन अब वक्त बदल गया है। जनसंचार का क्षेत्र आज शिक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि मीडिया के शिक्षकों के पास पत्रकारिता की औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ मीडिया में काम करने का प्रत्यक्ष अनुभव भी होना चाहिए, तभी वे बच्चों को प्रभावी ढंग से पढ़ा पाएंगे।

इस सत्र में मीडिया शिक्षण से जुड़े प्रो. मृणाल चटर्जी, डॉ. अनिल कुमार, प्रो. प्रदीप नायर, प्रो. एहतेशाम अहमद खान, प्रो. सपना, प्रो. अनिल अंकित, डॉ. क्षिप्रा माथुर, डॉ. सोनाली नरगुन्दे और डॉ. धनंजय चोपड़ा ने भी अपने विचार व्यक्त किये। 

कार्यक्रम का संचालन प्रो. अनुभूति यादव और प्रो. संगीता प्रणवेंद्र ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन आईआईएमसी के डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह और डीन (छात्र कल्याण) प्रो. प्रमोद कुमार ने किया।

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