नई दिल्ली: देश के कृषि परिदृश्य को समृद्ध बनाने और सहकारिता के विचार को घर-घर तक पहुँचाने वाली संस्था भारतीय कृषक उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) अपने 60वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। छह दशकों की इस गौरवशाली यात्रा के अवसर पर इफको ने अपने ‘हीरक जयंती’ (डाइमंड जुबली) समारोह के विशेष लोगो (Logo) का अनावरण किया है।
ग्राउंड से रिपोर्टिंग करते हुए यह साफ नजर आता है कि यह लोगो सिर्फ एक औपचारिक डिजाइन भर नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों किसानों के पसीने, समर्पण और भरोसे की एक अनकही कहानी है।

डिजाइन में छिपा संदेश: उम्मीद, समृद्धि और समर्पण
इफको द्वारा जारी किए गए इस नए प्रतीक चिह्न के प्रत्येक रंग और आकृति के पीछे एक गहरा संदेश निहित है:
उगता सूरज: यह नई उम्मीदों, ऊर्जा और असीमित संभावनाओं की सुबह का प्रतीक है। आधुनिक तकनीक और नए दौर की खेती के साथ किसानों को सशक्त बनाने के इफको के संकल्प को यह प्रमुखता से दर्शाता है।
गेहूं की हरी बाली: मिट्टी से जुड़ाव, किसानों की अटूट मेहनत और देश के लिए अन्न-समृद्धि का प्रतीक है। यह इफको के कृषि और भूमि के प्रति समर्पण को बयां करती है।
चमकता हुआ हीरा: पिछले 60 वर्षों (छह दशकों) के अटूट समर्पण, विश्वास और अनगिनत सहकारी कार्यकर्ताओं तथा किसानों के योगदान की चमक को खूबसूरती से रेखांकित करता है।
सहकारिता से राष्ट्र निर्माण तक की यात्रा
इफको की यह छह दशकों की यात्रा इस बात की गवाह रही है कि कैसे सहकारिता के माध्यम से एक आम किसान को सशक्त बनाया जा सकता है। संस्थान का मानना है कि यह लोगो उन अनगिनत हाथों को समर्पित है जिन्होंने वर्षों से मिट्टी को सोना बनाने में अपना योगदान दिया है।
समारोह की रूपरेखा साझा करते हुए इफको प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि 60 वर्षों का यह पड़ाव सिर्फ अतीत की उपलब्धियों को याद करने का समय नहीं है, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है। आने वाले वर्षों में इफको नवाचार (innovation), आधुनिक कृषि तकनीकों और मजबूत सहकारिता के बल पर भारतीय कृषि के सुनहरे भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।



