जंतर मंतर पर कोकरोचों का मेला

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दिल्ली। अरे भाई, जंतर मंतर पर NEET के नाम पर neat वाले इकट्ठे हो गए हैं। बिहार में चुहे पी गए, दिल्ली में कोकरोच पी रहे हैं। परीक्षा की बात? अरे छोड़ो ना! वहाँ तो सस्ता माल फूंक के दीदी लोग नाच रही हैं। वो माल मिलता कहाँ से है, दीदी बताती नहीं। शायद किसी खास दुकान का सीक्रेट फॉर्मूला हो, जो आंदोलन को “ऊर्जा” देता है।

कोकरोचों का पूरा कथित आंदोलन रास्ते से भटक चुका है। एजेंडा? अरे भाई, एजेंडा तो ढूंढो तो मिले! कभी पेपर लीक, कभी आरक्षण, कभी “सिस्टम”। लेकिन असल में टाइम पास चल रहा है। या फिर किसी के इशारे पर कोई खतरनाक प्लान? हल्का-फुल्का माहौल है, लेकिन गंभीर बात यह कि ये लोग क्या कर रहे हैं? सुबह—शाम गाने गा रहे हैं – “नाम रहेगा अल्लाह का”। वाह!

अगर नाम अल्लाह का ही रखना था तो हिंदूओं को पहले बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखा दिया? मंच पर प्रवक्ता विजेता दहिया माँ पार्वती, महादेव और पूरे हिंदू धर्म का मजाक उड़ाता फिर रहा है। फिर वही मंच, वही कोकरोच, और गाना “नाम रहेगा अल्लाह का”। हाइब्रिड आंदोलन है भाई – आधा इस्लामिक, आधा “सेकुलर” मजाक।


देश भर से एक से बढ़कर एक नमूने जमा हो गए हैं। कुछ तो वो भी हैं जो कश्मीर को भारत का हिस्सा मानते ही नहीं। देश बांटने वाले, नफरत फैलाने वाले, सब इकट्ठे। एक तरफ NEET का रोना, दूसरी तरफ ‘भारत माता की जय’ बोलने में भी दिक्कत। यह सब पब्लिक देख रही है।

कोई कहता है छात्र हैं, कोई कहता है राजनीतिक गिरोह। सस्ता माल, गाने, नाच-गाना, मजाक-मजाक में हिंदू देवी-देवताओं पर तंज। और बीच में NEET का नाम भी ले लिया जाता है, ताकि लगे कुछ तो मुद्दा है। असल में ये टाइम पास का महोत्सव है, जिसमें कुछ लोग अपना एजेंडा भी घुसा रहे हैं।

अब सवाल यह है – ये कोकरोच आगे क्या प्लान कर रहे हैं? क्या सच में परीक्षा सुधारना चाहते हैं या बस माहौल गर्म रखना है? हल्के अंदाज में कहें तो, जंतर मंतर आजकल सर्कस का नया अड्डा बन गया है। टिकट फ्री, माल फ्री, बिरयानी फ्री, गाने फ्री। बस दर्शक आते रहो।

देश देख रहा है। और सोच रहा है – ये आंदोलन है या मेला?

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