जयपुर। भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति और राष्ट्रीय चिंतन का प्रमुख मंच ‘लोकमंथन 2026’ की तैयारियां जोरों पर हैं। जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित एक भव्य समारोह में इसकी स्वागत समिति एवं आयोजन समिति की घोषणा की गई। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए लोकमंथन 2026 का औपचारिक शुभारंभ किया और इसकी आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण भी किया।
समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार ने लोकमंथन की अवधारणा और उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारत का निर्माण सार्थक संवाद से हुआ है और भविष्य का भारत भी निरंतर, रचनात्मक, स्वस्थ एवं बहुआयामी संवाद के माध्यम से ही सशक्त बनेगा। यह केवल अधिकार नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य भी है।”

नंदकुमार ने बताया कि प्राचीन भारतीय संवाद परंपरा को आधुनिक संदर्भ में पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से लोकमंथन की शुरुआत हुई थी। इसका पहला संस्करण “उपनिवेशवाद से भारतीय मानस की मुक्ति” विषय पर केंद्रित रहा, जिसमें देशभर से विचारकों, विद्वानों और समाज के विभिन्न वर्गों ने भाग लिया। अब लोकमंथन 2026 का आयोजन 4 से 6 दिसंबर तक जयपुर में “हम भारत के लोग” थीम पर होने जा रहा है।
उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि संवाद को केवल शहरों या प्रबुद्ध वर्ग तक सीमित नहीं रखा जाएगा। गांव, देहात, वनांचल और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को भी राष्ट्रीय विमर्श में पूर्ण भागीदारी दी जाएगी। “भारत का संवाद समग्र समाज का संवाद होना चाहिए, जिसमें अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की भी आवाज समान रूप से सुनी जाए,” उन्होंने कहा।
नंदकुमार ने स्मरण कराया कि भारत का निर्माण केवल महानगरों के तथाकथित शिक्षित वर्ग के विमर्श से नहीं हुआ। जंगलों में रहने वाले वनवासी, गांवों के ग्रामवासी और शहरों के नागरिक-सभी ने मिलकर इस देश की संवाद परंपरा को समृद्ध किया है। लोकमंथन इसी समावेशी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समिति की घोषणा करते हुए कहा कि राजस्थान लोकमंथन 2026 का सफल आयोजन सुनिश्चित करेगा। उन्होंने इस मंच को ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्र-चेतना के आदान-प्रदान का अनूठा अवसर बताया।

लोकमंथन न सिर्फ चर्चाओं और संगोष्ठियों का मंच होगा, बल्कि भारतीय लोक जीवन की विविधता, प्राचीन ज्ञान प्रणालियों, सांस्कृतिक विरासत और समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दों पर गहन मन्थन का आयोजन होगा। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित वक्ता, शोधार्थी, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता भाग लेंगे।
आयोजकों का मानना है कि वर्तमान समय में जब वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां सामने हैं, तब भारतीय मूल्यों और संवाद की प्राचीन परंपरा को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। लोकमंथन 2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।



