सतीश शर्मा
दिल्ली । इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलानी ने सिर्फ़ 24 घंटों में वह कर दिखाया है, जो यूरोपीय संघ के पुरुष पिछले 30 सालों में नहीं कर पाए..!
इटली में दंगों को रोकने के लिए मेलानी द्वारा लाई गई एक नई नीति से पूरा यूरोप हैरान रह गया।
छात्रों के नाम पर होने वाले हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर लगाम लगाने के लिए वह एक ठोस खाका लेकर आईं… जिसका नाम है ‘द एंटी-रायट डॉक्ट्रिन’ (दंगा विरोधी सिद्धांत)।
मेलानी ने साफ़-साफ़ एक बात कही:
“अगर आप सड़कों पर उतरकर अराजकता फैलाएंगे… तो हम आपके माता-पिता के बैंक खाते खाली कर देंगे!”
हिंसक प्रदर्शनों में शामिल होने वाले किसी भी व्यक्ति को 5 साल की जेल और 20,000 यूरो (लगभग ₹18 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया जाएगा।
उन्होंने समझ लिया कि विदेशी फंडिंग वाले नकाबपोश उपद्रवियों को सिर्फ़ आंसू गैस से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने उनके पीछे के लॉजिस्टिक्स और वित्तीय मदद को खत्म करने का फैसला किया।
जब उन्होंने दंगाइयों के माता-पिता पर भारी जुर्माना लगाना शुरू किया और मिलान शहर में 500 सैन्य कर्मियों को तैनात कर दिया… तो अचानक किसी को समझ नहीं आया कि सड़कों पर दिखने वाले वे सभी युवा कार्यकर्ता कहाँ गायब हो गए, या किन गुफाओं में जाकर छिप गए!
स्वतंत्र देशों को अस्थिर करने के लिए एनजीओ को फंडिंग देने और युवाओं को ढाल की तरह इस्तेमाल करने वाली अरबपतियों की ‘न्यू वर्ल्ड ऑर्डर’ साजिशों पर यह एक करारा जवाब है।
जब विरोध के नाम पर मिलने वाली वित्तीय और कानूनी कमियों के रास्ते बंद कर दिए गए, तो क्रांति के नाम पर नाटक करने वालों की असलियत सामने आ गई।
मेरी राय में… ठीक यही मॉडल भारत में भी लागू होना चाहिए!



