पैसा बोलता है….

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डॉ अजय खेमरिया

भोपाल । भारत में #रिजीम चेंज के लिए केवल प्रशांत भूषण और राहुल गांधी ही काम नही कर रहे हैं।एक बड़ा वैश्विक नेटवर्क इसमें लगा हुआ है।इसे समझने के लिए 2014 के बाद के उस नीतिगत बदलाव को पकड़ना होगा जो भारतीय शासन और राजनीति में एनजीओज के माध्यम से नियंत्रण की भूमिका को खत्म करने वाला रहा है।

एक दौर में केंद्रीय कैबिनेट और प्रधानमंत्री से ऊपर सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद हुआ करती थी जिसमें अरुणा राय,हर्ष मन्दर, जया द्रेज जैसे एनजीओजीवी देश को चलाते थे।सरकार वैश्विक ताकतों के इशारों पर काम करती थी।मोदी सरकार ने इस सिस्टम को खत्म कर दिया।विदेशी चंदे की दुकानें प्राय खात्मे की तरफ है।यह रिजीम चेंज की पुकार इसी प्रभुत्व के ढहने की कहानी है।जॉर्ज सोरोस से लेकर नेवल राय सिंघम असल में वे चेहरे हैं जो लोकतंत्र और सामुदायिक विकास के नाम पर कठपुतली सरकारों के जरिये अपने व्यापारिक हित साधते हैं।ताजा प्रदर्शन भारत में इसी आलोक में देखे जाने चाहिए।

– नेविल रॉय सिंघम कौन हैं?
वे अमेरिका में जन्मे टेक उद्यमी हैं और ThoughtWorks सॉफ्टवेयर कंपनी के संस्थापक रहे हैं। उन्होंने 2017 में कंपनी बेच दी थी और बाद में सामाजिक तथा राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े संगठनों को वित्तीय सहायता देने के कारण चर्चा में आए।
अमेरिकी कांग्रेस की एक समिति ने सिंघम से जुड़े तीन गैर-लाभकारी संगठनों—The People’s Forum, BreakThrough News और Tricontinental से वित्तीय एवं संगठनात्मक रिकॉर्ड माँगे।
भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरुद्ध प्रदर्शनों में जिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सार्वजनिक संलिप्तता नजर आ रही है वे यही सन्गठन हैं।

-यह रिश्ता क्या कहलाता है…!

भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरुद्ध प्रदर्शनों और एसआईआर विरोध के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को समझने की नितांत आवश्यकता है।इसे समझने के लिए एक।सिरा जॉर्ज सोरोस का पकड़ना पड़ेगा।इस अराजकतावादी वामपंथी कारोबारी ने 2024 ,2019 के चुनाव में खुलेआम मोदी सरकार को उखाड़ने के लिए अपना खजाना खोल दिया था।

“हिन्दुज फ़ॉर ह्यूमन राइट्स” नामक एक सन्गठन की सीधी भूमिका दिल्ली के प्रदर्शन में पाई गई है।

यह अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन है जो भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों और नागरिक अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर अभियान चलाता है।ओपन सोसायटी फाउंडेशन जिसका मालिक जार्ज सोरोस है उसकी संस्था ने इस संगठन को60 हजार डॉलर की फ़ंडिंग की है।
रिपोर्ट में एचएफएचआर द्वारा भारत के एस आई आर और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से संबंधित प्रदर्शनों के समर्थन तथा विदेशों में एकजुटता रैलियाँ आयोजित करने का उल्लेख है।

०वीमन फ़ॉर अफगान वीमन

जॉर्ज सोरोस से फंड पाने वाला यह एनजीओ भी दिल्ली में जारी प्रदर्शन के मामले में राडार पर है ।इसकी सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ एचएफएचआर की भी सह-संस्थापक और कार्यकारी निदेशक हैं।

०साउथ एशिया सोलिडेरिटी ग्रुप

यह लंदन स्थित दक्षिण एशिया-केंद्रित एनजीओ है।
लंदन में ध्रुव राठी से जुड़े कार्यक्रम और भारत के प्रदर्शनों के समर्थन में अभियान चलाने में भूमिका निभा रहा है।इसी एनजीओ ने भारतीय प्रवासी समुदाय को एसआईआर विरोध और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से संबंधित मांगों के समर्थन के लिए प्रेरित किया।

०कॉम्पेक्ट

यह जर्मनी में रजिस्टर एक नागरिक अभियान संगठन है।
इसका सीधा संबन्ध जॉर्ज सोरोस से जुड़े वित्तीय नेटवर्क और ग्लोबल प्रोग्रेसिव अलाइंस के साथ है।
इस नेटवर्क के माध्यम से पश्चिमी राजनीतिक समूहों और भारतीय विपक्ष की गतिविधियों के बीच सीधा कनेक्शन स्थापित मिलता है।ताजा विरोध प्रदर्शनों के बीच यह नेटवर्क पूरी ताकत से सक्रिय है।

०ग्लोबल प्रोग्रेसिव अलायंस

विभिन्न देशों के प्रगतिशील,वामपंथी और कथित सामाजिक-लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों का अंतरराष्ट्रीय मंच यह एनजीओ है।इसका वित्तीय रिश्ता सोरोस के साथ है।
एक रिपोर्ट के अनुसार राहुल गांधी की अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक भूमिका और विदेशी प्रदर्शनों के पीछे इस एनजीओ की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।ताजा प्रदर्शन और इसके पक्ष में उठने वाली वैदेशिक लहर के पीछे भी इसी एनजीओ की पीआर टीम काम कर रही है।

०संभावना इंस्टिट्यूट फाउंडेशन
प्रशांत भूषण का संभावना इंस्टीट्यूट फाउंडेशन एनजीओ भी ऐसे ही चंदे का लाभार्थी है।इसने पिछले चुनाव में हजारों पत्रकारों को सोशल मीडिया साक्षरता और जागरुकता के नाम पर फ़ंडिंग की जिसमें लगभग सभी मीडिया घरानों के पत्रकार शामिल थे।

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