
यह टिप्पणी किसी दस्तावेज, रिकॉर्ड या नामजद बयान पर नहीं, केवल गुमनाम स्रोत पर टिकी है। जवाब में वही व्यक्ति, जिसे ठाकुरता अपना स्रोत बता रहे हैं, उनका फोन आया। उन्होंने कहा कि ठाकुरता बात करने के लिए पीछे पड़ा है। मेरी कोई रुचि नहीं है। बंगाल चुनाव की जीत के बाद ही कई लोगों के माध्यम से चिरौरी करा चुका है कि मिलने के लिए समय दे दीजिए। लेकिन यह जिस तरह झूठ फैलाता है। वह मुझे पसंद नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरा विवरण झूठ है। न तो आरएसएस के किसी हिस्से ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की ऐसी मांग की है, न सरकार के भीतर इस आधार पर कोई शर्मिंदगी है, और न आडवाणी का नाम छूटने को लेकर बताया गया आरोप सही है। जिस मुख से कथित तौर पर यह ‘ब्रेकिंग’ निकली है, अब उसी मुख से इनकार आ चुका है। क्या अपने एक और झूठ के लिए एक और माफीनाम लिखेंगे ठाकुरता साहब।
गुमनाम स्रोत पत्रकारिता का स्थायी लाइसेंस नहीं होता। जब आरोप किसी संवैधानिक पद, चुनावी प्रक्रिया और सत्तारूढ़ दल की वैचारिक संस्था पर एक साथ लग रहा हो, तो स्रोत की पहचान, उसका पद और उसके शब्दों का सत्यापन पहली शर्त है। ‘नाम न छापने की शर्त’ लिख भर देने से न सुप्रीम कोर्ट में झूठ साबित होता है, न मतदाता सूची का कोई आंकड़ा गलत हो जाता है। आडवाणी जैसे नाम का उल्लेख सनसनी बढ़ाता है, पर सनसनी प्रमाण नहीं है।

ठाकुरता का सार्वजनिक रिकॉर्ड भी इस दावे की विश्वसनीयता नहीं बढ़ाता। सोशल मीडिया पर बार-बार सफाई और माफी का सिलसिला यह दिखाता है कि उनकी ‘सबसे तेज’ पंक्तियां पहले छपती हैं, जांच बाद में होती है। उनकी तुलना इस मामले में राहुल गांधी से की जा सकती है, अदालत में माफी देने और टाइमलाइन पर माफी लिखने में फर्क केवल मंच का है, आदत का नहीं। ऐसी आदत वाले लेखक का गुमनाम सूत्र तब तक खबर नहीं बन सकता, जब तक वह सूत्र खुद सामने आकर उसी शब्द का स्वामित्व न ले।
आगे से अफवाह फैलाने से पहले दस बार सोचने की जरूरत इसीलिए है: स्रोत अगर इनकार कर दे, तो ‘ब्रेकिंग’ केवल बदनामी रह जाती है। नाम, तारीख, दस्तावेज और जवाबदेही के बिना लिखा गया वाक्य खबर नहीं, अभियोग है।
Paranjoy’s RSS source says he wanted to join the RSS and had expressed that wish. When he received no positive response from there, he lost his composure. That is why he now wants to defame his own source. Is this not sheer pettiness, Paranjoyji? His behaviour is that of a desperate lover whose proposal has been turned down by the woman he loves.



